आधुनिक आयुष्यामुळे आपल्याला सतत गोंधळलेलं आणि दबावाखाली असल्यासारखं वाटतं. स्वप्नं आणि उद्दिष्टांच्या दिशेने पुढे कसं जायचं आणि त्याचवेळी रोजची कामं कशी सांभाळायची, हेच समजेनासं होतं. कारण यादीत कितीतरी गोष्टी बाकी असतात आणि कामांची यादी सतत वाढतच जात असते.
यावर उपाय म्हणून सॅम बेनेट एक अत्यंत सोपी पण प्रभावी कल्पना मांडतात : फक्त १५ मिनिटांची छोटी कृतीदेखील तुमच्या आनंदात, समाधानात आणि अखेरीस संपूर्ण आयुष्यात मोठा बदल घडवू शकते.
या पुस्तकात – – –
… परफेक्शनिझम, स्वतःवर शंका घेणं, इम्पोस्टर सिंड्रोम आणि स्वतःलाच मागे खेचणाऱ्या सवयींपासून मुक्त कसं व्हायचं
… आरोग्य किंवा इतर समस्यांमुळे आयुष्य विस्कळीत वाटत असताना स्वतःला कसं सांभाळायचं
… अवघड आणि मोठी वाटणारी कामं छोट्या, सहज हाताळता येतील अशा टप्प्यांत कशी विभागायची
… गरजेच्या वेळी ठामपणे आणि नम्रपणे “नाही” कसं म्हणायचं
… दिवसातील फक्त पंधरा मिनिटं स्वतःसाठी काढून संतुलित आयुष्यासाठी नवीन सवयी कशा तयार करायच्या
सॅम बेनेट या लेखिका, वक्त्या आणि सर्जनशीलता-उत्पादकता विषयातील तज्ज्ञ आहेत. व्यावसायिक अभिनेत्री आणि इम्प्रोव्हायझर म्हणून काम करताना त्यांनी आपल्या कामात विनोदबुद्धी, उत्साह आणि हजरजबाबीपणा यांची खास छाप निर्माण केली. सहज, व्यवहार्य आणि प्रेरणादायी शिकवणीमुळे त्या आज लिंक्डइन लर्निंगवरील जागतिक स्तरावरील लोकप्रिय प्रशिक्षकांपैकी एक असून, त्यांच्या मार्गदर्शनाचा लाभ दहा लाखांहून अधिक विद्यार्थ्यांनी घेतला आहे.
परिचय : श्री हर्षल सुरेश भानुशाली
पालघर
मो.9619800030
≈संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈
(वरिष्ठतम साहित्यकार आदरणीय डॉ कुन्दन सिंह परिहार जी का साहित्य विशेषकर व्यंग्य एवं लघुकथाएं ई-अभिव्यक्ति के माध्यम से काफी पढ़ी एवं सराही जाती रही हैं। हम प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – “परिहार जी का साहित्यिक संसार” शीर्षक के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाते रहते हैं। डॉ कुंदन सिंह परिहार जी की रचनाओं के पात्र हमें हमारे आसपास ही दिख जाते हैं। कुछ पात्र तो अक्सर हमारे आसपास या गली मोहल्ले में ही नज़र आ जाते हैं। उन पात्रों की वाक्पटुता और उनके हावभाव को डॉ परिहार जी उन्हीं की बोलचाल की भाषा का प्रयोग करते हुए अपना साहित्यिक संसार रच डालते हैं।आज प्रस्तुत है आपकी एक अप्रतिम एवं विचारणीय कथा – ‘शीतल भाई और शान्ति की खोज’। इस अतिसुन्दर रचना के लिए डॉ परिहार जी की लेखनी को सादर नमन।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – परिहार जी का साहित्यिक संसार # ३४४ ☆
☆ व्यंग्य ☆ शीतल भाई और शान्ति की खोज ☆ डॉ कुंदन सिंह परिहार ☆
शीतल भाई रिटायर हुए तो पानी से निकली मछली हो गये। लगा जैसे पांव के नीचे से ज़मीन खिसक गयी। समझना मुश्किल हो गया कि क्या करें और कहां जाएं। पहले सवेरे आठ बजे उठकर दफ्तर की तैयारी में लग जाते थे। टहलने- घूमने, पूजा-पाठ में कभी रुचि नहीं रही। ‘जेही विधि राखे राम, तेही विधि रहिए’ की नीति पर चलते रहे। शरीर को ज़्यादा कष्ट देने के कभी पक्षधर नहीं रहे।
अब रिटायर हुए तो नौ बजे तक पलंग पर ही लुढ़कते-पुढ़कते रहते। जब पत्नी उलाहना देती, ‘क्या अहदी बने पड़े हो, दिन कितना चढ़ गया, उठो’, तब उठते।
आदत के मारे कभी-कभी अपने पुराने दफ्तर में पहुंच जाते। कुर्सी लेकर किसी कर्मचारी के बगल में गपियाने को बैठ जाते। लेकिन कुछ दिन बाद वे प्रबंधकों की नज़र में खटकने लगे। आदेश निकल गया कि कर्मचारी किसी भी बाहरी आदमी को बगल में बैठने न दें।
दफ्तर में कार्यरत साथी भी अब उनसे कटने लगे थे। रिटायर्ड आदमी से क्या बात की जाए? शीतल भाई किसी कर्मचारी को फोन लगाते तो वह थोड़ी देर बाद ही बात बन्द करने के बहाने ढूंढ़ने लगता।
अब शीतल भाई को गांव की याद आने लगी। सोच लिया कुछ दिन गांव में रहेंगे तो मन बहलेगा। ताज़ा हवा मिलेगी, शान्ति मिलेगी। वहां अभी रिश्तेदार थे, पुराना पैतृक मकान था। पिता-माता के जीवन काल में साल दो साल में चक्कर लगाते थे, लेकिन वहां मन नहीं लगता था। शहर और दफ्तर बुलाता रहता था। एक-दो दिन में ही ऊब कर भाग खड़े होते। लेकिन अब दफ्तर का दबाव नहीं है। जाएंगे और जब तक मन लगेगा, रहेंगे।
पत्नी से पूछा तो उन्होंने अपनी गठिया का हवाला देकर जाने से मना कर दिया। शीतल भाई अकेले ही निकल पड़े। गांव पहुंचे तो भाइयों, भतीजों ने स्वागत किया। हाल-चाल का लेनदेन हुआ। पुरानी पोथियों के पन्ने पलटे गये।
रात को शीतल भाई आंगन में लेटे तो तारों से भरा आकाश दिखा। शीतल भाई चौंके। ऐसा आकाश अभी तक कहां था? शहर में तो यह कभी दिखा नहीं।
सवेरे गांव में निकले तो पाया कि गांव बदल गया है। अब उन्हें पहचानने वाला कोई नज़र नहीं आता। ढूंढ़ते हुए दो-तीन परिचितों के घर पहुंचे तो लोग उन्हें परिचय देने के बाद ही पहचान पाये। जो ठीक से पहचान पाये वे काफी बूढ़े हो चुके थे।
शीतल भाई को लगा कि यहां आकर ज़िन्दगी जैसे ठहर गयी है। सब कुछ मंथर गति से चलता है, कहीं कोई जल्दबाज़ी नहीं।
शाम को डेढ़ दो किलोमीटर टहलने निकल गये। सड़क के दोनों तरफ खेत दिखते थे। दूर जाकर नदी के पुल पर बैठ गये। बगल में पुराना मन्दिर था। सब तरफ सन्नाटा था। दो चार लोग मन्दिर में आते जाते दिखते थे। थोड़ी देर बैठकर शीतल भाई ऊब कर उठ आये।
शीतल भाई के घर से थोड़ी दूर एक सेठ की किराने की दुकान और मकान था। दूसरी रात को वहां से किसी के गुस्से से बकने- झकने की आवाज़ें आने लगीं। पूछने पर पता चला कि गांव के एक बिगड़े रईस अक्सर शराब पीकर सेठ को गालियां सुनाते हैं और सेठ जी शांत चित्त से सुनते हैं। कारण यह बताया गया कि सवेरे यही सज्जन सेठ के पास हाथ जोड़ते हुए आते थे और घर की चीज़ें उनके पास गिरवी रख जाते थे। इस क्रम में सेठ जी उनकी खेती की ज़मीन और घर की बहुत सी चीजों के मालिक हो गये थे। इसीलिए वह गालियां सुनकर भी स्थितप्रज्ञ बने रहते थे।
तीन-चार दिन में ही शीतल भाई गांव से उकताने लगे। यहां का सन्नाटा और जीवन की सुस्त रफ़्तार उन पर भारी पड़ रही थी। शहर में थे तो दिन भर गाड़ियों का आना-जाना, ट्रेनों का हूटर, पास-पड़ोस की खटर-पटर कानों में आती रहती थी। चौराहे पर खड़े आदमी को भी शहर अपनी रफ़्तार में लपेट लेता था। ज़िन्दगी उसी रफ़्तार की आदी हो गयी थी, इसलिए सुस्त गति वाली ज़िन्दगी में ‘एडजस्ट’ होना मुश्किल लग रहा था।
शीतल भाई को याद आया कई साल पहले वे मुंबई गये थे। वहां स्टेशन पर एक आदमी ने उनसे उनके शहर का नाम पूछा और फिर बताया कि एक बार वह तीन-चार घंटे के लिए उनके शहर में गया था और वहां की ज़िन्दगी उसे इतनी सुस्त लगी कि उसका जी घबराने लगा। उसकी बात याद करके शीतल भाई को लगा कि हर जगह की ज़िन्दगी की अपनी रफ़्तार होती है और एक रफ़्तार वाली जगह के आदी आदमी को दूसरी जगह समायोजित होना आसान नहीं होता।
एक हफ्ते बाद ही शीतल भाई वापस शहर पहुंच गये। पत्नी बोलीं, ‘बड़ी जल्दी वापस आ गये ? कुछ दिन और शान्ति से रह लेते।’
शीतल भाई ने जवाब दिया, ‘वहां शान्ति कुछ ज़्यादा ही है। हम शहर वालों को ज़्यादा शान्ति की आदत नहीं रही। ज़्यादा शान्ति हो तो मन घबराने लगता है। जैसा भी है हमारे लिए शहर ही ठीक है।’
(ई-अभिव्यक्ति में मॉरीशस के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ साहित्यकार श्री रामदेव धुरंधर जी का हार्दिक स्वागत। आपकी रचनाओं में गिरमिटया बन कर गए भारतीय श्रमिकों की बदलती पीढ़ी और उनकी पीड़ा का जीवंत चित्रण होता हैं। आपकी कुछ चर्चित रचनाएँ – उपन्यास – चेहरों का आदमी, छोटी मछली बड़ी मछली, पूछो इस माटी से, बनते बिगड़ते रिश्ते, पथरीला सोना। कहानी संग्रह – विष-मंथन, जन्म की एक भूल, व्यंग्य संग्रह – कलजुगी धरम, चेहरों के झमेले, पापी स्वर्ग, बंदे आगे भी देख, लघुकथा संग्रह – चेहरे मेरे तुम्हारे, यात्रा साथ-साथ, एक धरती एक आकाश, आते-जाते लोग। आपको हिंदी सेवा के लिए सातवें विश्व हिंदी सम्मेलन सूरीनाम (2003) में सम्मानित किया गया। इसके अलावा आपको विश्व भाषा हिंदी सम्मान (विश्व हिंदी सचिवालय, 2013), साहित्य शिरोमणि सम्मान (मॉरिशस भारत अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 2015), हिंदी विदेश प्रसार सम्मान (उ.प. हिंदी संस्थान लखनऊ, 2015), श्रीलाल शुक्ल इफको साहित्य सम्मान (जनवरी 2017) सहित कई सम्मान व पुरस्कार मिले हैं। हम श्री रामदेव जी के चुनिन्दा साहित्य को ई अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों से समय समय पर साझा करने का प्रयास करेंगे।
आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय गद्य क्षणिका “– लेन – देन …” ।)
~ मॉरिशस से ~
☆ कथा कहानी ☆ गद्य क्षणिका # ११५ — लेन – देन —☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆
(गद्य – भँवर’: मेरा एक अभिनव गद्यात्मक प्रयोग)
एक ध्यातव्य ग्रामीण प्रसंग है। पड़ोसी देता था और लेने वाला पड़ोसी तो लौटाता ही नहीं था। देनदार पड़ोसी कशमकश अनुभव करता था किस चितवन से वापस मांगने का साहस कर पाए। उसकी पत्नी बड़ी गंभीरता से यह सब आँकती थी। इस मामले में अपने पति की अपेक्षा वह होशियार ही थी। उसने अपने पति से बात निकाल ली अपने घर से कुछ जाने का उसे दुख तो बहुत होता है। दुख की बात हुई तो उसने पति को सुख का नुस्खा सुझाया। तुम मांगने वाला फकीर बन जाओ। बाबा दो, लेकिन वापस पाने की आशा मत करना। पत्नी से सलाह पाने पर मांगने जैसे भाव से वह चेतन हो गया। पहली बार ही मांगे जाने पर उससे कहा गया, “मिंतर, तुमसे ली हुई कुल्हाड़ी मैं वापस कर दूँगा।” वह अंदर ही अंदर खुश हुआ। उसे तो याद ही न था अपनी कुल्हाड़ी कभी वहाँ गई थी।
(श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही गंभीर लेखन। शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं। हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ सकते हैं।)
श्रावण मास निमित्त पुनर्पाठ में पढ़िए ‘निर्वाणषटकम्‘ पर छह अंकों की यह शृंखला-
संजय दृष्टि – शिवोऽहम्… (६)
आत्मषटकम् के छठे और अंतिम श्लोक में आदिगुरु शंकराचार्य महाराज आत्मपरिचय को पराकाष्ठा पर ले जाते हैं।
अहं निर्विकल्पो निराकाररूपो
विभुत्वाच्च सर्वत्र सर्वेन्द्रियाणाम् ।
न चासङ्गतं नैव मुक्तिर्न मेयः
चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥
मैं किसी भिन्नता के बिना, किसी रूप अथवा आकार के बिना, हर वस्तु के अंतर्निहित आधार के रूप में हर स्थान पर उपस्थित हूँ। सभी इंद्रियों की पृष्ठभूमि में मैं ही हूँ। न मैं किसी वस्तु से जुड़ा हूँ, न किसी से मुक्त हूँ। मैं चैतन्य रूप हूँ, आनंद हूँ, शिव हूँ, शिव हूँ।
विचार करें, विवेचन करें तो इन चार पंक्तियों में अनेक विलक्षण आयाम दृष्टिगोचर होते हैं। आत्मरूप स्वयं को समस्त संदेहों से परे घोषित करता है। आत्मरूप एक जैसा और एक समान है। वह निश्चल है, हर स्थिति में अविचल है।
आत्मरूप निराकार है अर्थात जिसका कोई आकार नहीं है। सिक्के का दूसरा पहलू है कि आत्मरूप किसी भी आकार में ढल सकता है। आत्मरूप सभी इन्द्रियों को व्याप्त करके स्थित है, सर्वव्यापी है। आत्मरूप में न मुक्ति है, न ही बंधन। वह सदा समता में स्थित है। आत्मरूप किसी वस्तु से जुड़ा नहीं है, साथ ही किसी वस्तु से परे भी नहीं है। वह कहीं नहीं है पर वह है तभी सबकुछ यहीं है।
वस्तुतः मनुष्य स्वयं के आत्मरूप को नहीं जानता और परमात्म को ढूँढ़ने का प्रयास करता है। जगत की इकाई है आत्म। इकाई के बिना दहाई का अस्तित्व नहीं हो सकता। अतः जगत के नियंता से परिचय करने से पूर्व स्वयं से परिचय करना आवश्यक और अनिवार्य है।
मार्ग पर जाते एक साधु ने अपनी परछाई से खेलता बालक देखा। बालक हिलता तो उसकी परछाई हिलती। बालक दौड़ता तो परछाई दौड़ती। बालक उठता-बैठता, जैसा करता स्वाभाविक था कि परछाई की प्रतिक्रिया भी वैसी होती। बालक को आनंद तो आया पर अब वह परछाई को प्राप्त करना का प्रयास करने लगा। वह बार-बार परछाई को पकड़ने का प्रयास करता पर परछाई पकड़ में नहीं आती। हताश बालक रोने लगा। फिर एकाएक जाने क्या हुआ कि बालक ने अपना हाथ अपने सिर पर रख दिया। परछाई का सिर पकड़ में आ गया। बालक तो हँसने लगा पर साधु महाराज रोने लगे।
जाकर बालक के चरणों में अपना माथा टेक दिया। कहा, “गुरुवर, आज तक मैं परमात्म को बाहर खोजता रहा पर आज आत्मरूप का दर्शन करा अपने मुझे मार्ग दिखा दिया।”
आत्मषटकम् मनुष्य को संभ्रम के पार ले जाता है, भीतर के अपरंपार से मिलाता है। अपने प्रकाश का, अपनी ज्योति की साक्षी में दर्शन कराता है।
इसी दर्शन द्वारा आत्मषटकम् से निर्वाणषटकम् की यात्रा पूरी होती है। निर्वाण का अर्थ है, शून्य, निश्चल, शांत, समापन। हरेक स्थान पर स्वयं को पाना पर स्वयं कहीं न होना। मृत्यु तो हरेक की होती है, निर्वाण बिरले ही पाते हैं।
षटकम् के शब्दों को पढ़ना सरल है। इसके शाब्दिक अर्थ को जानना तुलनात्मक रूप से कठिन। भावार्थ को जानना इससे आगे की यात्रा है, मीमांसा कर पाने का साहस उससे आगे की कठिन सीढ़ी है पर इन सब से बहुत आगे है आत्मषट्कम् को निर्वाणषटकम् के रूप में अपना लेना। अपना निर्वाण प्राप्त कर लेना। यदि निर्वाण तक पहुँच गए तो शेष जीवन में अशेष क्या रह जाएगा? ब्रह्मांड के अशेष तक पहुँचने का एक ही माध्यम है, दृष्टि में शिव को उतारना, सृष्टि में शिव को निहारना और कह उठना, शिवोऽहम्…!
अध्यक्ष– हिंदी आंदोलन परिवार ☆ सदस्य– हिंदी अध्ययन मंडल, पुणे विश्वविद्यालय, एस.एन.डी.टी. महिला विश्वविद्यालय, न्यू आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस कॉलेज (स्वायत्त) अहमदनगर ☆ संपादक– हम लोग ☆ पूर्व सदस्य– महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ☆ ट्रस्टी- जाणीव, ए होम फॉर सीनियर सिटिजन्स ☆
मोबाइल– 9890122603
संजयउवाच@डाटामेल.भारत
writersanjay@gmail.com
☆ आपदां अपहर्तारं ☆
श्रावण साधना गुरुवार दि. 30 जुलाई से आरंभ होकर शनिवार 28 अगस्त (रक्षाबंधन) तक चलेगी
इस साधना में-
ॐ नमः शिवाय का मालाजप होगा।
गोस्वामी तुलसीदास रचित रुद्राष्टकम् का पाठ करेंगे।
इस बार हम आदि शंकराचार्य के निर्वाण षटकम् / वैराग्य षटकम् का भी प्रतिदिन कम से कम एक पाठ अवश्य करेंगे।
मालाजप, रुद्राष्टकम्, निर्वाण षटकम् के साथ आत्मपरिष्कार व ध्यानसाधना भी नियमित रूप से चलेंगे।
हमारा प्रयास है कि महत्वपूर्ण स्तोत्रों का अधिकाधिक प्रसार हो।
≈≈
≈ संस्थापक संपादक – हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈
(Captain Pravin Raghuvanshi—an ex Naval Officer, possesses a multifaceted personality. He served as a Senior Advisor in prestigious Supercomputer organisation C-DAC, Pune. He was involved in various Artificial Intelligence and High-Performance Computing projects of national and international repute. He has got a long experience in the field of ‘Natural Language Processing’, especially, in the domain of Machine Translation. He has taken the mantle of translating the timeless beauties of Indian literature upon himself so that it reaches across the globe. He has also undertaken translation work for Shri Narendra Modi, the Hon’ble Prime Minister of India, which was highly appreciated by him. He is also a member of ‘Bombay Film Writer Association’.
We present Capt. Pravin Raghuvanshi ji’s amazing poem “~ Beyond the Measure…~”. We extend our heartiest thanks to the learned author Captain Pravin Raghuvanshi Ji (who is very well conversant with Hindi, Sanskrit, English and Urdu languages) and his artwork.)
(आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी संस्कारधानी जबलपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। आपको आपकी बुआ श्री महीयसी महादेवी वर्मा जी से साहित्यिक विधा विरासत में प्राप्त हुई है । आपके द्वारा रचित साहित्य में प्रमुख हैं पुस्तकें- कलम के देव, लोकतंत्र का मकबरा, मीत मेरे, भूकंप के साथ जीना सीखें, समय्जयी साहित्यकार भगवत प्रसाद मिश्रा ‘नियाज़’, काल है संक्रांति का, सड़क पर आदि। संपादन -८ पुस्तकें ६ पत्रिकाएँ अनेक संकलन। आप प्रत्येक सप्ताह रविवार को “साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह” के अंतर्गत आपकी रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे। आज प्रस्तुत है – सामयिक गीत – जिंदगी गिरवी रखी।)
(‘उरतृप्त’ उपनाम से व्यंग्य जगत में प्रसिद्ध डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा अपनी भावनाओं और विचारों को अत्यंत ईमानदारी और गहराई से अभिव्यक्त करते हैं। उनकी बहुमुखी प्रतिभा का प्रमाण उनके लेखन के विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान से मिलता है। वे न केवल एक प्रसिद्ध व्यंग्यकार हैं, बल्कि एक कवि और बाल साहित्य लेखक भी हैं। उनके व्यंग्य लेखन ने उन्हें एक विशेष पहचान दिलाई है। उनका व्यंग्य ‘शिक्षक की मौत’ साहित्य आजतक चैनल पर अत्यधिक वायरल हुआ, जिसे लगभग दस लाख से अधिक बार पढ़ा और देखा गया, जो हिंदी व्यंग्य के इतिहास में एक अभूतपूर्व कीर्तिमान है। उनका व्यंग्य-संग्रह ‘एक तिनका इक्यावन आँखें’ भी काफी प्रसिद्ध है, जिसमें उनकी कालजयी रचना ‘किताबों की अंतिम यात्रा’ शामिल है। इसके अतिरिक्त ‘म्यान एक, तलवार अनेक’, ‘गपोड़ी अड्डा’, ‘सब रंग में मेरे रंग’ भी उनके प्रसिद्ध व्यंग्य संग्रह हैं। ‘इधर-उधर के बीच में’ तीसरी दुनिया को लेकर लिखा गया अपनी तरह का पहला और अनोखा व्यंग्य उपन्यास है। साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान को तेलंगाना हिंदी अकादमी, तेलंगाना सरकार द्वारा श्रेष्ठ नवयुवा रचनाकार सम्मान, 2021 (मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के हाथों) से सम्मानित किया गया है। राजस्थान बाल साहित्य अकादमी के द्वारा उनकी बाल साहित्य पुस्तक ‘नन्हों का सृजन आसमान’ के लिए उन्हें सम्मानित किया गया है। इनके अलावा, उन्हें व्यंग्य यात्रा रवींद्रनाथ त्यागी सोपान सम्मान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों साहित्य सृजन सम्मान भी प्राप्त हो चुका है। डॉ. उरतृप्त ने तेलंगाना सरकार के लिए प्राथमिक स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर कुल 55 पुस्तकों को लिखने, संपादन करने और समन्वय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बिहार, छत्तीसगढ़, तेलंगाना की विश्वविद्यालयी पाठ्य पुस्तकों में उनके योगदान को रेखांकित किया गया है। कई पाठ्यक्रमों में उनकी व्यंग्य रचनाओं को स्थान दिया गया है। उनका यह सम्मान दर्शाता है कि युवा पाठक गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी लेखन की पहचान कर सकते हैं।)
जीवन के कुछ अनमोल क्षण
तेलंगाना सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री श्री के. चंद्रशेखर राव के करकमलों से ‘श्रेष्ठ नवयुवा रचनाकार सम्मान’ से सम्मानित।
मुंबई में संपन्न साहित्य सुमन सम्मान के दौरान ऑस्कर, ग्रैमी, ज्ञानपीठ, साहित्य अकादमी, दादा साहब फाल्के, पद्म भूषण जैसे अनेकों सम्मानों से विभूषित, साहित्य और सिनेमा की दुनिया के प्रकाशस्तंभ, परम पूज्यनीय गुलज़ार साहब (संपूरण सिंह कालरा) के करकमलों से सम्मानित।
ज्ञानपीठ सम्मान से अलंकृत प्रसिद्ध साहित्यकार श्री विनोद कुमार शुक्ल जी से भेंट करते हुए।
बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट, अभिनेता आमिर खान से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
विश्व कथा रंगमंच द्वारा सम्मानित होने के अवसर पर दमदार अभिनेता विक्की कौशल से भेंट करते हुए।
आप डॉ सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ जी के स्तम्भ – चुभते तीर में उनकी अप्रतिम व्यंग्य रचनाओं को आत्मसात कर सकेंगे। इस कड़ी में आज प्रस्तुत है आपका विचारणीय व्यंग्य – वीआईपी संस्कृति और आम आदमी।)
☆ चुभते तीर # १२३ – व्यंग्य – वीआईपी संस्कृति और आम आदमी☆ डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’☆
(तेलंगाना साहित्य अकादमी से सम्मानित नवयुवा व्यंग्यकार
हमारे देश में वीआईपी होना एक दैवीय अधिकार है। जब किसी मंत्री का काफिला निकलता है, तो एम्बुलेंस को भी किनारे लगा दिया जाता है क्योंकि मंत्री जी का समय देश के किसी भी बीमार नागरिक की जान से ज़्यादा कीमती है। हूटर की आवाज़ सुनते ही आम आदमी इस तरह सहम जाता है मानो कोई आदमखोर शेर आ रहा हो। इन वीआईपी लोगों को लाइन में लगना अपनी तौहीन लगता है। सुरक्षा के नाम पर इनके आगे-पीछे कमांडो इस तरह चलते हैं जैसे वे किसी जंग के मैदान में हों। आम आदमी टैक्स भरता है ताकि इन वीआईपी लोगों की गाड़ियों का पेट्रोल मुफ्त मिल सके। सबसे बड़ा व्यंग्य यह है कि ये सभी खुद को ‘जनता का सेवक’ कहते हैं, और सेवक की सेवा में पूरी जनता दिन-रात लगी रहती है।
(टीप: यह आवश्यक नहीं है कि संपादक मंडल व्यंग्य /आलेख में व्यक्त विचारों/राय से सहमत हो।)
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “मौसा जी और फूफा जी…“।)
अभी अभी # १०६६ ⇒ आलेख – मौसा जी और फूफा जी श्री प्रदीप शर्मा
रिश्ते में हम आपके फूफा लगते हैं ! मैं नहीं जानता ये बेचारे मौसा जी और फूफा जी इतने बदनाम क्यों है। हर बारात में ये प्राणी किसी असंतुष्ट व्यक्ति की तरह व्यवहार क्यूं करते हैं। कहा गया है न, बद अच्छा, बदनाम बुरा। मैने अच्छे मौसा और उनसे भी अच्छे फूफा देखे हैं, लेकिन कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना। छोड़ो बेकार की बातें, तुम रूठ ना जाओ बहना।
मैं आज तक यह समझ नहीं पाया, रिश्ते बन जाते हैं, अथवा बनाए जाते हैं।
बात आपके पैदा होने से शुरू होती है। आप पैदा होते हैं, अथवा पैदा किए जाते हैं। मुझे संस्कृत नहीं आती, इसलिए मैं किसी के चरित्र अथवा भाग्य पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकता, लेकिन मुझे लगता है, यह पुरुषार्थ और भाग्य का मिला जुला खेल है।।
आप अगर एक बार पैदा हो गए, तो पैकेज में माता पिता के साथ कुछ रिश्ते तो ईश्वर छप्पर फाड़कर दे ही देता है और कुछ रिश्ते आप अपने पुरुषार्थ और भाग्य के बल पर बना ही लेते हैं। भाई बहन, नाना नानी, दादा दादी, ताऊ ताई जी और चाचा चाची तो इनबिल्ट होते ही हैं, मौसा मौसी और फूफा फूफी का भी स्पेशल पैकेज होता है। फूफी को आप सुविधा के लिए बुआ कह सकते हैं, लेकिन फूफा जी टस से मस नहीं हो सकते।
मासी तो हम सभी जानते हैं, मां सी ही होती है लेकिन मौसा जी की कोई गारंटी
नहीं होती। लोग तो बिल्ली को भी शेर की मौसी कहते हैं, लेकिन मौसा जी कहीं नजर नहीं आते। रंगा बिल्ला जितनी भी इज्जत नहीं बिल्ली मौसी के पति महोदय की।।
अंग्रेजी में एक कहावत है, मैं चाहूं तो इस बहाने अंग्रेजी झाड़ सकता हूं, लेकिन उसे हिंदी में बयां कर मैं अपना बड़प्पन भी तो प्रदर्शित कर सकता हूं।
कुछ लोग महान होते हैं, और कुछ लोगों पर महानता थौंपी जाती है। मैं मौसा जी तो बहुत पहले से ही था, अभी कुछ दिन पहले किसी रिश्तेदार बच्ची ने मुझे फूफा जी का खिताब भी दे ही दिया। अब मैं भी सोफा कम बेड की तरह मौसा कम फूफा बन गया हूं।
अपने इस रिश्ते के अनुरूप मैं भी बहुत कोशिश करता हूं विवाह के अवसरों पर असंतुष्ट रहने की, सदैव मुंह फुलाने की, रूठ जाने की और भोजन नहीं खाने की। लेकिन अनुभव की कमी और पत्नी के असहयोग के कारण न तो कहीं मेरी दाल गली और न ही कहीं मैं ढंग से रायता ही फैला पाया।।
जब दुनिया के मौसाओं और फूफाओं को देखता हूं तो मुझे बड़ी ग्लानि होती है और हीनता का अहसास होता है। गजब का स्टैमिना होता है इन लोगों का। कभी लिफाफे में नेग के पचास रूपये देखकर बिखर जाना। क्या भिखारी समझ रखा है हमें। और अगर किसी मनचले ने छेड़ दिया, तो क्या हजार रुपए की औकात है आपकी ! बस, फिर तो बात हजार पर जाकर ही बन पाती है। सुंदरकांड के बीच यह एक और नया कांड ! बेचारी बुआ जी कैसे झेल लेती हैं ऐसे इंसान को।
मुझे डर है कहीं बढ़ती शिक्षा, समझदारी और परिपक्वता के चलते मौसाओं और फूफाओं की यह रूठने मनाने की विरासत समय के साथ लुप्त ना हो जाए। महिला संगीत की तरह ये भी मंगल प्रसंग के अभिन्न अंग हैं। भावी मौसाओं और फूफाओं को अब यह उत्तरदायित्व उसी जिम्मेदारी के साथ वहन करना होगा।
भले ही मुंह पर नहीं बोलते होंगे, लेकिन पीठ पीछे तो हमारे भी गुणगान होते ही होंगे। वैसे हम इतने खूसट हैं नहीं, जितने दिखाई देते हैं। आग्रह के कच्चे और मनुहार के पक्के होने के कारण हमारे मौसापने और फूफापने का कुछ पता ही नहीं चलता। समय के साथ अच्छी सेवाओं का आश्वासन तो फिर भी दिया ही जा सकता है। समझदार को इशारा काफी है।।
विज्ञान की अन्य विधाओं में भारतीय ज्योतिष शास्त्र का अपना विशेष स्थान है। हम अक्सर शुभ कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त, शुभ विवाह के लिए सर्वोत्तम कुंडली मिलान आदि करते हैं। साथ ही हम इसकी स्वीकार्यता सुहृदय पाठकों के विवेक पर छोड़ते हैं। हमें प्रसन्नता है कि ज्योतिषाचार्य पं अनिल पाण्डेय जी ने ई-अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों के विशेष अनुरोध पर साप्ताहिक राशिफल प्रत्येक शनिवार को साझा करना स्वीकार किया है। इसके लिए हम सभी आपके हृदयतल से आभारी हैं। साथ ही हम अपने पाठकों से भी जानना चाहेंगे कि इस स्तम्भ के बारे में उनकी क्या राय है ?
☆ ज्योतिष साहित्य ☆ साप्ताहिक राशिफल (10 अगस्त से 16 अगस्त 2026) ☆ ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय ☆
जय श्री राम। गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं कि हनुमान जी के पास राम नाम का रसायन है। इसका अर्थ हुआ हनुमान जी के पास राम नाम रूपी दवा है। श्री हनुमान जी श्री रामचंद्र जी के सेवक हैं इसलिए उनके पास राम नामरूपी दवा है। इस दवा का उपयोग हर प्रकार के रोग में किया जा सकता है। दुनिया में सिर्फ श्रीराम नाम ही एक ऐसी दवा है जिसे सभी रोग ठीक हो जाते हैं। श्री हनुमान जी को याद करने के अद्भुत ग्रंथ श्री हनुमान चालीसा में लिखा है कि :-
राम रसायन तुम्हरे पासा, सदा रहो रघुपति के दासा॥
इस चौपाई के संपुट पाठ करने से सभी रहस्यों की प्राप्ति होती है।
नाशे रोग हरे सब पीरा” नाम की पुस्तक में श्रीहनुमान चालीसा की चौपाइयों से संबंधित सभी उपायों का विस्तृत विवरण दिया हुआ है। इस पुस्तक को आप हमारे यहां से प्राप्त कर सकते हैं।
मैं पंडित अनिल पाण्डेय आज आपको 10 से 16 अगस्त तक के सप्ताह के साप्ताहिक राशिफल के बारे में बताऊंगा परंतु सबसे पहले इस सप्ताह के ग्रहों के विचलन के बारे में बता रहा हूं।
इस सप्ताह सूर्य, बुध और गुरु कर्क राशि में, मंगल मिथुन राशि में, शुक्र कन्या राशि में शनि मीन राशि और राहु कुंभ राशि में गोचर करेंगे।
आईये अब राशि वार राशिफल की चर्चा करते हैं।
मेष राशि
इस सप्ताह आपको अपनी प्रतिष्ठा में वृद्धि प्राप्त होगी। अगर आप ध्यान देंगे तो प्रतिष्ठा में अधिक वृद्धि हो सकती है। आपका और आपके जीवन साथी को स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। आपको अपने संतान से थोड़ा सहयोग प्राप्त होगा। कचहरी के कार्यों में आपको सावधान रहना चाहिए। आपके शत्रु शांत रहेंगे। छात्रों की पढ़ाई ठीक-ठाक चलेगी। भाई बहनों के साथ संबंधों में मामूली तनाव रहेगा। इस सप्ताह आपके लिए 10, 11 और 12 तारीख कार्यों करने के लिए सफलता दायक है। 15 तारीख के दोपहर के बाद से और 16 अगस्त को आपको सचेत रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गाय को हरा चारा खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन मंगलवार है।
वृष राशि
यह सप्ताह आपके भाई बहनों के लिए उत्तम है। उनको प्रतिष्ठा प्राप्त होगी। उनके धन में वृद्धि होगी। आपके साथ उनका संबंध अच्छा रहेगा और आपको उनका अच्छा सहयोग भी प्राप्त हो सकता है। आपका और आपके जीवन साथी का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। कर्मचारियों अधिकारियों के लिए यह सप्ताह सामान्य रहेगा। जैसे पहले चल रहा था वैसे ही चलेगा। आपके संतान को थोड़ा कष्ट हो सकता है। छात्रों की पढ़ाई में बाधा पड़ सकती है। इस सप्ताह आपके लिए 13, 14 और 15 तारीख सफलता प्राप्त करने में मददगार है। सप्ताह के बाकी दिन पहले जैसे ही रहेंगे। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन काले उड़द की दाल का दान करें और शनिवार को शनि मंदिर में जाकर शनि देव का पूजन करें। सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है।
मिथुन राशि
इस सप्ताह आपके पास धन आने का सुंदर योग है। थोड़े से परिश्रम से ज्यादा धन की प्राप्ति होगी। भाग्य से इस सप्ताह आपको मदद नहीं मिल पाएगी। भाग्य के भरोसे बिल्कुल ही ना बैठे। अपने परिश्रम पर विश्वास करें। आपको अपने प्रतिष्ठा के प्रति इस सप्ताह सतर्क रहना चाहिए। इसके अलावा माता जी के स्वास्थ्य के प्रति भी आपको सतर्क रहना चाहिए। भाई बहनों के साथ संबंध पहले जैसे ही रहेंगे। इस सप्ताह आपके लिए 15 और 16 तारीख विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए मददगार है। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक-ठाक है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन काले कुत्ते को तंदूर की रोटी खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।
कर्क राशि
यह सप्ताह आपके लिए अत्यंत अच्छा हो सकता है। आपको बस परिश्रम और सही सोच के साथ कार्य करने की आवश्यकता है। आपका स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। भाई बहनों के स्वास्थ्य में थोड़ी कमजोरी हो सकती है। भाई बहनों से आपके प्रयासों के कारण संबंध सुधार सकते हैं। भाग्य से मामूली सहयोग प्राप्त होगा। कचहरी के कार्यों में सावधान रहें। आपका और आपके जीवनसाथी का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। आप अपने दुश्मनों को साधारण से प्रयास से पराजित कर सकते हैं। इस सप्ताह आपके लिए 10, 11 और 12 तारीख विभिन्न प्रकार से लाभदायक है। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें और शनिवार के दिन दक्षिण मुखी हनुमान जी के मंदिर में जाकर कम से कम तीन बार हनुमान चालीसा का वाचन करें सप्ताह का शुभ दिन सोमवार है।
सिंह राशि
सही ढंग से कार्य करने पर कचहरी के कार्यों में सफलता की उम्मीद है। आपके माताजी और पिताजी का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। भाग्य से मामूली मदद मिलेगी। आपके संतान को सुख प्राप्त होगा। संतान का आपको सहयोग मिलेगा। शत्रुओं को आप आसानी से हरा सकते हैं। छात्रों की पढ़ाई ठीक चलेगी। परीक्षाओं में उनको सफलता प्राप्त होगी। भाग्य के स्थान पर अपने परिश्रम पर आपको यकीन करना चाहिए। भाग्य से आपको मामूली मदद ही मिल पाएगी। इस सप्ताह आपके लिए 13, 14 और 15 तारीख फलदायक है। 10, 11 और 12 तारीख को आपको सावधानी के साथ सचेत रहकर अपने कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन लाल मसूर की दाल का दान करें और मंगलवार को हनुमान जी के मंदिर में जाकर कम से कम तीन बार हनुमान चालीसा का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है।
कन्या राशि
अविवाहित जातकों के लिए यह सप्ताह ठीक है। विवाह के उत्तम प्रस्ताव आएंगे। प्रेम संबंधों में वृद्धि भी संभव है। नए प्रेम संबंध भी बन सकते हैं। धन आने का अच्छा योग है। व्यापार में आपको लाभ होगा। व्यापारियों के लिए सप्ताह ठीक रहेगा। कर्मचारी एवं अधिकारियों को इस सप्ताह बहुत ध्यानपूर्वक कार्य करना चाहिए। इस सप्ताह आपके शत्रु शांत रहेंगे परंतु समाप्त नहीं होंगे। आपके माता जी का और आपके जीवनसाथी का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। इस सप्ताह आपके लिए 15 तारीख के दोपहर के बाद का समय तथा 16 तारीख अनुकूल है। 13, 14 और 15 के दोपहर तक का समय सचेत रहने का है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन रुद्राष्टक का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।
तुला राशि
अधिकारी एवं कर्मचारियों के लिए यह सप्ताह अच्छा रहेगा। उनको अपने अधिकारियों की प्रशंसा प्राप्त होगी। कार्यालय में उनकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी। उनको अच्छे प्रोजेक्ट मिल सकते हैं। कचहरी के कार्यों में सावधान रहें। सफलता मिल सकती है। इस सप्ताह आपके शत्रु शांत रहेंगे परंतु परास्त नहीं होंगे। भाग्य से आपको इस सप्ताह मदद मिलने की उम्मीद नहीं है। आपको अपने कर्म पर विश्वास करना पड़ेगा। भाई बहनों के साथ संबंध ठीक-ठाक रहेंगे। इस सप्ताह आपके लिए 10, 11 और 12 तारीख परिणाम दायक है। 15 और 16 तारीख को आपको सजग रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन शिव पंचाक्षर मंत्र का जाप करें। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।
वृश्चिक राशि
इस सप्ताह आपको अपने भाग्य से अच्छी मदद प्राप्त होगी। भाग्य से आपके कई कार्य हो सकते हैं। इस सप्ताह आपको अपने भाग्य पर अपने परिश्रम के साथ भरोसा करना चाहिए। दुर्घटनाओं से आपको सावधान रहना चाहिए। आपको अपने प्रतिष्ठा के प्रति भी इस सप्ताह थोड़ा सावधान रहना चाहिए। धन प्राप्ति हेतु बहुत ज्यादा प्रयास करना इस सप्ताह आपके लिए हानिप्रद हो सकता है। इस सप्ताह आपके लिए 13, 14 और 15 तारीख शुभ है। सप्ताह के बाकी दिन ठीक है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन शिव पंचाक्षर स्त्रोत का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है।
धनु राशि
इस सप्ताह आपको दुर्घटनाओं से डरने की विशेष आवश्यकता नहीं है। दुर्घटनाओं में आपको कोई नुकसान नहीं होगा। लंबी यात्रा का योग बन सकता है। कर्मचारी एवं अधिकारियों को इस सप्ताह सतर्क रहकर कार्य करना चाहिए। आपका स्वास्थ्य इस सप्ताह उत्तम रहेगा। इस सप्ताह आपके लिए 15 और 16 तारीख कार्यों को करने के लिए लाभप्रद है। 10, 11 और 12 तारीख को आपको सतर्क रहकर अपने कार्यों को मुस्तैदी से करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।
मकर राशि
यह सप्ताह आपके जीवन साथी के लिए अत्यंत सुंदर रहेगा। उनके प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। उनको ऐश्वर्य और वैभव प्राप्त होगा। उनकी मानसिक स्थिति भी अत्यंत अच्छी रहेगी। इस सप्ताह आप अपने शत्रुओं को आसानी से परास्त कर सकते हैं। भाग्य आपको कुछ विशेष ढंग से मदद करेगा। भाग्य की मदद आपको सीधे-सीधे प्राप्त नहीं होगी। परंतु आपके कई कार्य अच्छे भाग्य के कारण हो जाएंगे। व्यापारियों का व्यापार ठीक चलेगा। आपका और आपके जीवन साथी का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। माता और पिताजी का स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। इस सप्ताह आपके लिए 10, 11 और 12 तारीख विशेष रूप से परिणाम मूलक है। 13, 14 और 15 तारीख को आपको सजगता के साथ अपने कार्यों को अंजाम देना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गायत्री मंत्र का जाप करें। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।
कुंभ राशि
इस सप्ताह आप अपने शत्रुओं को आसानी से पराजित कर सकते हैं। उनको समाप्त करने के लिए आपको प्रयास करने चाहिए। आपके प्रयासों को सफलता प्राप्त होगी। कचहरी के कार्यों में आपको थोड़ी बहुत सफलता प्राप्त हो सकती है। परंतु सावधानी आवश्यक है। धन आने का योग है। दुर्घटनाओं से आप इस सप्ताह बाल बाल बचेंगे। इस सप्ताह आपके लिए 13, 14 और 15 तारीख के दोपहर तक का समय उत्तम है। सप्ताह के बाकी दोनों में आपको सावधान रहकर कार्य करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन भगवान शिव का दूध और जल से अभिषेक करें। सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है।
मीन राशि
यह सप्ताह आपके संतान के लिए उत्तम रहेगा। उनको प्रतिष्ठा प्राप्त होगी। अगर वह नौकरी में है तो वहां उनको अच्छा प्रोजेक्ट या अच्छी सीट मिल सकती है। विवाह के प्रस्ताव के बारे में इस सप्ताह आपको सतर्क रहना चाहिए। कर्मचारी एवं अधिकारियों के लिए यह सप्ताह अच्छा रहेगा। धन आने की उम्मीद की जा सकती है। इस सप्ताह आपके लिए 15 की दोपहर के बाद से लेकर और 16 तारीख प्रभावशाली है। 13, 14 और 15 की दोपहर तक आपको सतर्क रहकर कार्य करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।
ध्यान दें कि यह सामान्य भविष्यवाणी है। अगर आप व्यक्तिगत और सटीक भविष्वाणी जानना चाहते हैं तो आपको मुझसे दूरभाष पर या व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाना चाहिए। मां शारदा से प्रार्थना है या आप सदैव स्वस्थ सुखी और संपन्न रहें। जय मां शारदा।