हिन्दी साहित्य – कथा कहानी ☆ ≈ मॉरिशस से ≈ गद्य क्षणिका# ११४ – वरदानी कलंक… – ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

श्री रामदेव धुरंधर

(ई-अभिव्यक्ति में मॉरीशस के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ साहित्यकार श्री रामदेव धुरंधर जी का हार्दिक स्वागत। आपकी रचनाओं में गिरमिटया बन कर गए भारतीय श्रमिकों की बदलती पीढ़ी और उनकी पीड़ा का जीवंत चित्रण होता हैं। आपकी कुछ चर्चित रचनाएँ – उपन्यास – चेहरों का आदमी, छोटी मछली बड़ी मछली, पूछो इस माटी से, बनते बिगड़ते रिश्ते, पथरीला सोना। कहानी संग्रह – विष-मंथन, जन्म की एक भूल, व्यंग्य संग्रह – कलजुगी धरम, चेहरों के झमेले, पापी स्वर्ग, बंदे आगे भी देख, लघुकथा संग्रह – चेहरे मेरे तुम्हारे, यात्रा साथ-साथ, एक धरती एक आकाश, आते-जाते लोग। आपको हिंदी सेवा के लिए सातवें विश्व हिंदी सम्मेलन सूरीनाम (2003) में सम्मानित किया गया। इसके अलावा आपको विश्व भाषा हिंदी सम्मान (विश्व हिंदी सचिवालय, 2013), साहित्य शिरोमणि सम्मान (मॉरिशस भारत अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 2015), हिंदी विदेश प्रसार सम्मान (उ.प. हिंदी संस्थान लखनऊ, 2015), श्रीलाल शुक्ल इफको साहित्य सम्मान (जनवरी 2017) सहित कई सम्मान व पुरस्कार मिले हैं। हम श्री रामदेव  जी के चुनिन्दा साहित्य को ई अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों से समय समय पर साझा करने का प्रयास करेंगे।

आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय गद्य क्षणिका “– वरदानी कलंक…” ।

~ मॉरिशस से ~

☆ कथा कहानी  ☆ गद्य भँवर # ११४  — वरदानी कलंक — ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

(गद्य – भँवर’: मेरा एक अभिनव गद्यात्मक प्रयोग)

इतिहास साक्षी है राजा एवं ऋषि भगवान की तपस्या करने पर अमरता का वरदान प्राप्त करते थे। पर वरदानी राजा अथवा ऋषि तो नीच अधम निकलते थे। वे भगवान को भस्म करते और स्वयं भगवान हो जाते। इतिहास और भी साक्षी है वैसे तपस्वियों को अमरता का वरदान मिलने पर भी वे मृत्यु की न टूटने वाली नींद में समाये। तभी तो युग बीते, लेकिन आज तक वरदानी अमरता का कोई प्राणी दृष्टिगत होता नहीं है। एक ऋषि हुआ उसने तपस्या से भगवानी वरदान पाया और उलटे भगवान पर टूट पड़ा। पर वह विस्मयकारी ऋषि हुआ। वह भगवान को भस्म नहीं करता। वह भगवान को अपनी परिभाषा से ललकारता। उसने शेर के जबड़ों में हाथ डाल कर भगवान से कहा मेरी अमरता दागदार न हो। पर उसकी अमरता दागदार हुई। शेर ने उसे निगल लिया। भगवान को अच्छा लगा, इस वरदानी झट्टू को भी मरना तो था ही।

 

 © श्री रामदेव धुरंधर

२६ — ०७ — २०२६

संपर्क : रायल रोड, कारोलीन बेल एर, रिविएर सेचे, मोरिशस फोन : +230 5753 7057   ईमेल : rdhoorundhur@gmail.com

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ संजय उवाच # ३४७ – अग्निधर्मा ☆ श्री संजय भारद्वाज ☆

श्री संजय भारद्वाज

(“साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच “ के  लेखक  श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है। साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।श्री संजय जी के ही शब्दों में ” ‘संजय उवाच’ विभिन्न विषयों पर चिंतनात्मक (दार्शनिक शब्द बहुत ऊँचा हो जाएगा) टिप्पणियाँ  हैं। ईश्वर की अनुकम्पा से आपको  पाठकों का  आशातीत  प्रतिसाद मिला है।”

हम  प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाते रहेंगे। आज प्रस्तुत है  इस शृंखला की अगली कड़ी। ऐसे ही साप्ताहिक स्तंभों  के माध्यम से  हम आप तक उत्कृष्ट साहित्य पहुंचाने का प्रयास करते रहेंगे।)

☆  संजय उवाच # ३४७ अग्निधर्मा… ?

प्राय: हम सबके घर की ठाकुरबाड़ी में तड़के और सांझ, दीया प्रज्ज्वलित किया जाता है। सामान्यत:  दीये के मध्य भाग में घी में डूबी बाती रखकर उसका अग्रभाग ठाकुर जी की ओर करके उसे प्रदीप्त करते हैं।

आज देखता हूँ कि बाती का मुँह ठाकुर जी की ओर न होकर साधक की ओर हो चला है। इसके चलते ज्योति भी साधक की ओर आ रही है।

दृश्य से विचार उपजा, विचार का आलोक मस्तिष्क में प्रभासित हुआ। अपने देखे पर विचार किया, ज्योति की दिशा पर चिंतन किया तो फिर विचार पर,  चिंतन पर और स्वयं पर हँसी आने लगी।

लौ का अग्रभाग, उसका मुँह कौनसा है, यह कौन निर्धारित करेगा? अग्नि तो अग्नि है। उसका हर अंश दहकता है। हर दिशा में अग्रभाग है। पत्थरों की रगड़ से उद्भूत स्फुलिंग से लेकर अरण्य को चट कर जाने वाले दावानल तक और आकाश में लावा बिखेरती दामिनी से लेकर सागर के पेट में सुलगते बड़वानल तक, हर प्रकार की अग्नि का गुणधर्म है दाहकता।

भारतीय परंपरा का एक गुणधर्म, मानवीकरण भी है। अग्नि का मानवीकरण करते समय एक दूसरे की विपरीत दिशा में  दो चेहरे दिखाए जाते हैं। अग्नि के प्रवाह की कोडिंग हैं ये दो चेहरे। एक ओर ऊर्जा का, जीवन का प्रतीक है अग्नि। दूसरी ओर ऊर्जा के गमन के बाद देह का लपटों को समर्पण का प्रतीक है अग्नि।

वतायो फ़क़ीर सिंध के गहन दार्शनिक एवं विद्वान संत थे। उनके अनेक आख्यान प्रसिद्ध हैं। कहा जाता है कि कंपकंपाने वाली शीत लहर की एक रात में वतायो और उनकी माँ, दोनों ठिठुर रहे थे। माँ ने बेटे से कहा, “वतायो, सुनते हैं, तू ईश्वर के निकट है। मैं भी यही महसूस करती हूँ। आज जाड़ा बहुत है। अपने ईश्वर से कह कि नर्क की थोड़ी-सी आग हम ग़रीबों के लिए दे दे।”

वतायो हँस पड़े। फिर बोले, “माँ, नर्क में कोई आग नहीं होती। सब अपनी-अपनी आग साथ लेकर आते हैं।”

अपनी अग्नि के साथ किस पथ पर और किस दिशा में यात्रा करनी है, इसका निर्णय निजी स्तर पर ही करना होता है। हाँ, अपनी अग्नि के आलोक में अग्निधर्मा हो सकने का स्वर्णिम अवसर प्रकृति हरेक को देती है। इति।

© संजय भारद्वाज 

संध्या 5:25 बजे, 01 अगस्त 2026

अध्यक्ष– हिंदी आंदोलन परिवार ☆ सदस्य– हिंदी अध्ययन मंडल, पुणे विश्वविद्यालय, एस.एन.डी.टी. महिला विश्वविद्यालय, न्यू आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस कॉलेज (स्वायत्त) अहमदनगर ☆ संपादक– हम लोग ☆ पूर्व सदस्य– महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ☆ ट्रस्टी- जाणीव, ए होम फॉर सीनियर सिटिजन्स ☆ 

मोबाइल– 9890122603

संजयउवाच@डाटामेल.भारत

writersanjay@gmail.com

☆ आपदां अपहर्तारं ☆

🕉️  श्रावण साधना गुरुवार दि. 30 जुलाई से आरंभ होकर शनिवार 28 अगस्त (रक्षाबंधन) तक चलेगी 🕉️

  💥 

इस साधना में-

ॐ नमः शिवाय का मालाजप होगा।

गोस्वामी तुलसीदास रचित रुद्राष्टकम् का पाठ करेंगे।

इस बार हम आदि शंकराचार्य के निर्वाण षटकम् / वैराग्य षटकम् का भी प्रतिदिन कम से कम एक पाठ अवश्य करेंगे।

मालाजप, रुद्राष्टकम्, निर्वाण षटकम् के साथ आत्मपरिष्कार व ध्यानसाधना भी नियमित रूप से चलेंगे।

हमारा प्रयास है कि महत्वपूर्ण स्तोत्रों का अधिकाधिक प्रसार हो।

संस्थापक संपादक – हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – कथा-कहानी ☆ लघु उपन्यास – बीच का आदमी… # ५ ☆ श्री मदन शर्मा ☆

श्री मदन शर्मा 

(देहरादून के वरिष्ठ साहित्यकार श्री मदन शर्मा जी को सादर चरण स्पर्श । आप उस पीढ़ी के प्रतीक हैं जो सदैव हमारी उंगलियां थामकर अपने अनुभव की विरासत हमसे समय-समय पर साझा करती रही है । श्री मदन शर्मा जी ने 05 जुलाई 2026 को अपनी आयु के नब्बे वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। उनका जन्म 05 जुलाई 1936 को पूर्वी पंजाब की छोटी सी रियासत मालेर कोटला में हुआ था। इस पीढ़ी ने अपना सारा जीवन साहित्य सेवा में समर्पित कर दिया। उन्हीं के शब्दों में, “मैंने अब तक जितना लिखा है, वह सब प्रकाशित नहीं हो सका। उसमें से केवल आठ उपन्यास छपे हैं और लगभग पांच सौ छोटी-बड़ी रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं जिनमें कहानियां, व्यंग्य, लेख, लघुकथाएं, संस्मरण, एकांकी और रेडियो-नाटक शामिल हैं। चालीस रचनाओं का आकाशवाणी से प्रसारण भी हो चुका है।” वे निश्चित ही हमारे आदर्श हैं और प्रेरणास्रोत हैं। आज से आपके चर्चित लघु उपन्यास –  बीच का आदमी को ई-अभिव्यक्ति में श्रृंखलाबद्ध रूप से प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहे हैं।)

☆ लघु उपन्यास –  बीच का आदमी… # ५ ☆ श्री मदन शर्मा  ✍

(चित्र साभारश्री जगत सिंह बिष्ट, इंदौर)

≡ पांच ≡

आशी अभी अभी उठ कर किचिन में गई है। चाय की तलब लगी होगी। एक कप चाय, उसके पेट में पहुंचेगी, तभी वह कुछ कहने या सुनने के योग्य हो पायेगी। चाय के बिना वह रह ही नहीं सकती और खूबी यह, कि कप पर कप चढ़ाती जायेगी और पूरी चाय, मेरे नाम लिखती जायेगी!

कल, जब लोग एक एक करके, अर्चना को शगुन के लिफ़ाफे और गिफ़्ट-पैकेट पकड़ाते जा रहे थे, मैंने दो तीन बार आशी की ओर देखा। मगर वह बिल्कुल निश्ंिचंत और तटस्थ सी बैठी थी। मैने उसे अलग बुला कर पूछा, ”हमें भी तो कुछ देना चाहिये था।”

वह निश्ंिचंत-सी बोली, ”आप को ऐसी क्या जल्दी हो रही है!”

“जल्दी? शादी तो आज ही है न!”

वह मुस्कराई और उठ कर अपने एक ओर रखे सामान के पास चली गई। अटैची खोल, एक डिबिया निकाली। फिर चेक बुक निकाल कर एक चेक भरा।

आशी ने टोपस की जोड़ी मुझे दिखा दी। मगर चेक मुझे नहीं दिखाया। दोनों चीज़ें, उसने अर्चना को थमा दीं। अर्चना ने चेक देखा, तो चैंक कर बोली, ”भाभी यह क्या! न न… मैं इतने नहीं लूंगी।”

“बोलने की ज़रूरत नहीं, चुपचाप रख लो।”

”मगर…“ अर्चना ने मेरी ओर देखा। मैंने हंस कर कहा, ”एक तो तुम्हारी भाभी, रिश्ते में बड़ी और फिर टीचर भी! तुम्हारा कोई तर्क नहीं चल पायेगा।”

बाद में मैंने आशी से पूछा, ”चेक में कितना लिखा था?”

वह हंस कर बोली, ”चेक में, आज की तारीख डाल दी, अर्चना का नाम लिख दिया और अपने हस्ताक्षर भी कर दिये। एकाऊंट नम्बर पहले ही लिखा हुआ था।

“मतलब, रूपये कितने लिखे, यह नहीं बताओगी?”

”आप को क्या लेना इन बातों से! यह मेरा काम था, मैंने कर दिया।”

“अर्चना इतने क्यों कह रही थी?”

”रिश्ते निभाने में, स्त्री और पुरूष का नज़रिया अलग अलग होता है, हम स्त्रियों को, बातें बनाने के अतिरिक्त भी बहुत कुछ देखना पड़ता है। आप की समझ में ये बातें नहीं आने की!”

वह दो गिलासों में चाय लिये आ पहुंची है। एक गिलास मेरे हाथ में थमा, वह स्वयं कुर्सी पर बैठ कर सिप करने लगती है,

“अर्चना को भी जगा देना था?” मैं कहता हूं।

”मैं उसे चाय देकर आई हूं।”

तीन-चार घंटे की गहरी नींद लेकर, अर्चना सामान्य नज़र आने लगी है और खूब बातें कर रही है। फैक्टरी में इस दौरान क्या क्या परिवर्तन हुए हैं। कितनी प्रमोशनें हुई हैं। कौन कौन-सी नई इमारतों का निर्माण हुआ है। कितनी भीड़ होती है अब सुबह शाम फैक्टरी के गेट पर… बहुत से पुराने लोग, रिटायर हो चुके हैं। कितने ही नये भरती हो गये हैं। अनुशासन अब पहले जैसा नहीं रहा। काफी बिगड़ गया है। कोई किसी की सुनता ही नहीं…”

”यूनियन-बाज़ी कैसी चल रही है?”

“आडम्बरबाज़ी कहिये। जो नेता, दिन में, ऊंची आवाज़ में नारे लगाते हैं, अफ़सरों को गालियां देते हैं, वही शाम को बेंगलो एरिया में जाकर अफ़सरों को मस्का लगाने का काम करते हैं। नेताओं की, आपस में ही होड़ लगी रहती है। वे हर वक़्त एक दूसरे की टांग खींचने मंें ही लगे रहते हैं।”

”अफ़सरों का व्यवहार कैसा है अब?”

“पहले जैसा तो नहीं। मगर आजकल के अफ़सर बहरूपियों जैसे नज़र आते हैं।”

”वह कैसे?”

“एक मिनट में कुछ और दूसरे मिनट कुछ और।”

”यह बात तो पहले भी थी।” मैं कहता हूं।

“पहले कुछ दूसरे ढंग से होता था। अब एक ओर तो वे यह ज़ाहिर करते हैं, कि वे समाजवादी हैं, सभी को बराबर मानते और समझते हैं और भीतर ही भीतर, अपने को कुशल प्रशासक समझ कर, पुराने हथकंडे प्रयोग में लाते रहते हैं।”

”अब तो फैैक्टरी में और भी लड़कियां काम करने लगी होंगी?”

“भीड़ लग गई ह ैअब तो लड़कियांे की! दिनभर धमाचैकड़ी मचाये रखती हैं। काम कम और बातें अधिक!”

”लड़के, छेड़ख़ानी तो नहीं करते उनसे?”

“छेड़ख़ानी? कुछ दिन पहले की बात है, एक क्लर्क ने रिपोर्ट कर दी, कि जब वह नल पर पानी पीने जाता है, उसे लड़कियां छेड़ती है।”

मैं हंसने लगा। फिर जैसे अचानक ही कुछ याद आ गया हो।

पूछा, ”मीता कहां है आजकल?”

“यहीं है।”

”उसे निमंत्रण नहीं दिया था?”

“बिल्कुल दिया था।”

”फिर आई क्यों नहीं? कहीं बीमार न हो?”

“उसे बीमार ही समझिये!”

”मतलब?”

“वह आजकल, कहीं इधर उधर नहीं जाती।”

”क्यांे? कोठी में ही बंद रहती है?”

“कोठी में कहां! वे लोग आजकल शहर में रहते हैं। दरअसल, मीता के अंकल को लकवा हो गया था। बहुत इलाज कराया, मगर कुछ भी लाभ न हुआ। सर्विस पूरी होने से दो साल पहले ही रिटायरमेंट लेना पड़ गया। आजकल शहर में, वे किराये के मकान में रहते हैं। मीता और उसके अंकल।”

 

मीता अभी तक उसके साथ है, मैं इसी बात के बारे में सोच कर आश्चर्य किये जा रहा हूं। मीता और ‘वह’ उसका अंकल एन0 मोहन। वही मैनेजर, जिसके बारे में अर्चना ने बताया, कि उसका शरीर बेकार हो चुका है।

मीता की अंाटी, जिन के ट्रंक अलमारियां, रंग बिरंगे रेशमी और क़ीमती वस्त्रों से भरे रहते थे और वे स्वयं, सफे़द साड़ी ब्लाउज़ में, पति के होते हुए भी, सूनी मांग लिये, घंटों चुपचाप, छोटे से कमरे में अलग थलग बैठीं, छत और दीवारों को ताकती रहती थीं।

 

उस दिन भी, वे सफ़ेद परिधान में, फ़र्श पर लेटी, छत को ही जैसे ताके जा रही थी। नहीं मालूम, क्या सोचते हुए, उनकी चेतना सदा के लिये लुप्त हुई होगी!

सभी कुछ समाप्त हो गया था। किंतु वे आंखें, जो उनके द्धारा पहने गये वस्त्रों की तरह ही सफ़ेद हो चली थीं, ऊपर छत से, जैसे किसी प्रश्न का उत्तर मांग रही थीं।

एन0 मोहन स्वयं ‘केबल’ द्धारा, दोनों बेटों को सूचित करने कहीं गया था। उसका अपना फ़ोन न जाने कब ख़राब हो गया था।

यह भी पता चला, कि वह डाक्टर को साथ लेकर, पुलिस स्टेशन गया था। वहां से लौट कर वह बैंक पहुंचा और एक भारी रकम निकलवा कर, किसी बड़े पुलिस अफ़सर की कोेठी पर भी गया था।

बड़े बेटे से, उस की बात ही नहीं हो पाई। छोटा, बड़ी ही बेरूख़ी से पेश आया। कहने लगा, ”मां चली गई, हमारे लिये सभी कुछ समाप्त हो गया। अब हमारे आने या जाने का मक़सद ही क्या रह जाता है!”

एन0 मोहन ने कुछ और कहना चाहा, तो उत्तर और भी कड़वा मिला, ”आप के लिये तो यह अच्छा ही हो गया। अब आप के सभी रास्ते साफ़ हैं, जो जी में आये, करते जायें। कोई भी रोकने-टोकने वाला नहीं।”

किंतु एन0 मोहन, इतना जल्द हारने वाला व्यक्ति नहीं था। अपने पद, धन और चातुर्य के बल पर, उसने सभी कुछ ठीक ठाक कर लिया था और वह कुछ ही दिन बाद, उसी तरह अकड़ के साथ और तन कर फैक्टरी की सड़कों पर और सेक्शनों में गश्त लगा रह था, जैसे इस बीच कुछ भी न हुआ हो!

तब भी, उसके पूरे अभिनय के बावजूद, देखने वाले को यह पता चल ही जाता था, कि वह भीतर से लगातार टूटता चला जा रहा है। यह दूसरी बात है, कि वह अपनी हार स्वीकार करने को, किसी भी हालत में तैयार न था।

मैं मीता से अब भी मिलता रहता था। हमारे मिलने पर एन0 मोहन ने किसी तरह का प्रतिबंध नहीं लगाया था। मगर कभी कभी महसूस होता, कि उसे हमारा मिलना जुलना विशेष अच्छा नहीं लगता।

स्थिति विकट थी। चाहते हुए भी, मैं वहंा जाना नहीं छोड़ पाया। एक बार कारणवश मैं दो तीन दिन तक उधर नहीं जा सका, तो एन0 मोहन ने मुझे स्वयं बुला भेजा।

वह बड़ी गम्भीरता से बातें कर रहा था। मालूम पड़ा, वह मीता के बारे में बेहद चिंतित है। कहने लगा, ”यह लड़की कहीं पागल न हो जाये। समझाने पर भी कुछ नहीं समझती। ठीक से खा-पी नहीं रही। रात को उठकर बैठ जाती है और न जाने, क्या बड़बड़ाती रहती है।”

“उसके कम्पीटीशन का क्या रहा?” मैंने पूछा तो वह व्यंग्यात्मक हंसी हंस कर बोला, ”कौन से कम्पीटीशन! मेर घर में तो बेवकूफ़ियों के कम्पीटीशन चल रहे हैं! और उसमें… वह सबसे आगे निकल गई!”

मैं केवल सुन रहा था।

वह मिन्नत सी करते बोला, ”तुम ही इसे समझाओ न।”

 

मैं मीता को सामान्य स्थिति में लाने के लिये लगातार प्रयास किये जा रहा था, वह किसी तरह खुल जाये, मन हल्का हो और यहां से वह कहीं और चली जाये, जहां उसका कोई अपना हो।

किंतु उसका अपना, कौन हो सकता था?

कितने ही दिन के लगातार प्रयास के बाद, वह कुछ खुल पाई थी… डैडी का इतना बड़ा बिज़नेस, एक ही झटके में तबाह हो जायेगा, कौन जानता था। कुछ ही दिन में ज़मीन और कोठी के साथ साथ, घर के जेवरात तक चले गये… डैडी बहुत ही सेेंटीमेंटल थे। पहले हार्ट अटैक में ही हमें छोड़, चलते बने… बड़ा ब्रदर, एक नम्बर का शराबी और गेम्बलर। हर वक्त नशे में धुत ही दिखाई पड़ता था। बस, वही एक था कहने के लिये अपना। मां तो उससे भी पहले चल बसी थी।

उन्हीं दिनों, उसका अंकल, अर्थात मीता का फूफ़ा, अपने साले का शोक व्यक्त करने, वहां पहुंचा हुआ था। उसने मीता को, अपने साथ ले जाने के लिये सहमत कर लिया। अन्य सभी रिश्तेदारों ने भी इस योजना की सराहना की। अच्छे माहौल में रहकर, लड़की योग्य बन जायेगी और अपने फूफा की कोशिश से, किसी अच्छे से घर की शोभा भी बन जायेगी।

वह उसे कार में बिठा कर अपने साथ ले आया। कुछ ही दिनों में, उसने अपने हंसी-मज़ाक और चुटकलेबाज़ी से, उसका सभी दुख-दर्द भुला दिया। वह उसे उत्साह बढ़ाते हुए कहता, ”तुम ग्रेज्युएट हो। समझदार भी काफी हो। कुछ दिन की मेहनत करके, आई. ए0 एस0 बन सकती हो। अरे, फिर तो तुम अपने इस अंकल से भी बड़ी अफ़सर बन जाओगी!”

बहुत प्रयास करने के बाद, वह थोड़ा सा और खुल पाने में समर्थ हुई… अंकल को आंटी, पहले बहुत ही चाहती थीं। शादी से पहले, अंकल के कई लड़कियों के साथ रिलेशनस रहे थे। आंटी ने कभी इस बात को तूल नहीं दी थी। मैरेज हो जाने के बाद भी अंकल ने कई जगह इधर उधर हाथ मारने की कोशिश की थी, जिन की भनक, आंटी के कानों में पड़ती रहती थी। मगर आंटी ने तब भी, अंकल को कुछ नहीं कहा। मगर कोई सहन करे, तो कहां तक?… आंटी शुरू शुरू में, मीता से सभी तरह की बात कर लिया करती थीं। एक दिन कहने लगी-दो शादीशुदा लड़कों का पिता, इधर उधर आंख मिचैनी खेलता फिरे, तो कितनी शरम की बात है! इतनी बड़ी पोस्ट का आदमी, सरकारी जिम्मेदार अफ़सर, रात को उठ कर, बंगले में मौजूद साफ़ सुथरे बिस्तर और पत्नी को छोड़कर सर्वेंट क्वार्टर की गन्दगी संूघता फिरे, यह मर जाने की बात नहीं?… एक दिन, आंटी रोकर बोलीं, मैं ऐसे आदमी के साथ और नहीं रह सकती, जो ज़रा सी बात के लिये, किसी मासूम लड़के को गुंडों से इस तरह पिटवा दे, कि उसके प्राण ही निकल जायें… मुझे इस आदमी से घिन आने लगी है। अब मैं इसे और अधिक सहन नहीं कर सकती…

मीता ने यह सब एक ही बार में नहीं बताया था। केवल टुकड़ों में ही, मैं इन बातों को जान पाया था। मैंने उसे सांत्वना देने के विचार से कहा, ”कितने ही पुरूष हैं, जो यह सब करते हैं। सभी की स्त्रियां तो इस तरह आत्महत्या नहीं कर लेतीं।”

”आंटी तो अंकल की हर एक्टीविटी वाच करने लगी थीं। एक दिन…“

“रूक क्यों गईं?”

मीता चुप थी।

”न बताना चाहो, तो रहने दो।” मैंने उसे चुप देखकर कहा।

“नहीं, अब कुछ भी नहीं छिपाऊंगी… एक दिन, नहीं एक रात, अंकल मुझे नाइट शो दिखाने शहर ले गये। किसी इंगलिश फ़िल्म का लास्ट शो था। पौने एक का वक़्त होगा, जब हम घर लौटे। डिनर हमने बाहर ही ले लिया था… मैंने ड्रेस बदला। बिस्तर में लेटते ही आंखें मुंद गईं। कह नहीें सकती, तब कितने बजे थे, जब किसी को अपने ऊपर झुके पाकर, मैं चीखने ही वाली थी, कि एक भारी हाथ ने मेरा मुंह बंद कर दिया। मैंने ज़ोर लगा कर उठने की कोशिश की, तो वह पीछे मेज़ से टकरा गया और मेज़ पर पड़ा पानी का जग, फ़र्श पर गिर कर चिकनाचूर हो गया… उधर आंटी चीखीं… कौन है, कौन है?… वह फुर्ती से निकल भागा था। अंधेरे में मैं उसकी शक्ल नहीं देख सकी थी। मगर आंटी का यही कहना था, कि वह और कोई नहीं, तुम्हारे अंकल हीे होंगे… उसके बाद, घर में कई दिन तक झगड़े का माहौल बना रहा। अंकल अपने ऊपर ऐसा लगा लांछन, स्वीकार करने को तैयार न थे और आंटी भी अपनी ज़िद पर अड़ी थीं।

“तुम्हें बिल्कुल शक नहीं हुआ, कौन था?”

”शक कैसे किया जाये? किस पर किया जाये, जब मैंने उसकी शक्ल देखी ही नहीं। मगर आंटी मानी ही नहीं। वे अपनी बात पर अड़ी ही रहीं और…“

 

मीता अब थोड़ा सामान्य हो चली थी। एक दिन उसने बहुत पहले अपनी कही बात पुनः दोहराई। कहने लगी,

“मेरी मानें, तो आप अर्चना से शादी कर ही लें। इतनी अच्छी लड़की आप को और कहीं नहीं मिलेगी। सो लवली एंड सो सिम्पल! व्हाट एल्स यु वांट?”

”देखो मीता…”

“फिर वही देखो मीता! आखि़र क्या कमी है उस लड़की में?”

”मेरी बात तो सुन लो।”

“ठीक है, सुनाइये?”

”मैं अर्चना को, छोटी बहन की तरह मानता हूं।”

“वाह! वहीं घिसी पिटी बातें! दुनिया कहां से कहां पहुंच गई और आप… क्या कहने!”

”उसका भाई नहीं रहा। वह भी इसी लिये मेरा आदर करती है।”

“उससे भी कभी आपने पूछा? क्या वह भी आप को एक बहन की तरह ही चाहती है?”

”ये बातें भी क्या पूछने या बताने की होती है!”

“तो आप… बिल्कुल शादी नहीं करना चाहते?”

”बिल्कुल का क्या मतलब?”

“मतलब, उससे नहीं, या किसी से भी नहीं?”

”किसी से?”

“मेरे साथ भी मैरेज नहीं कर सकते?”

”क्या…?”

इतनी महत्वपूर्ण बात, अकस्मात और सीधे सीधे सुनकर मैं हड़बड़ा गया था।

“क्या ऐसा हो सकता है?” मुझे विश्वास नहीं हो पा रहा था।

”क्यों नहीं हो सकता!” वह निर्भय थी।

“तुम्हारे अंकल?” मैं अभी तक आशंकित था।

”मैं अब, हर हालत में, अंकल से छुटकारा पा लेना चाहती हूं।”

मैं सोच में पड़ गया।

“सिर्फ़ सोचेंगे? मेरी बात का जवाब नहीं देंगे?”

”जवाब भी दूंगा।”

“कब?”

”अभी, इसी वक़्त… मैं शादी के लिये तैयार हूं!”

“थैंक्स!”

”अंकल के साथ तुम साफ़ तौर पर बात कर सकोगी?”

“हां, बात तो मुझे ही करनी होगी!”

दो दिन बाद ही, मीता मिली। खूब सजधज कर आई थी वह। आते ही चहक कर बोली, ”अंकल मान गये!”

“सच?” मुझे विश्वास ही नहीं हो पा रहा था।

”बिल्कुल सच। उन्होंने तो ज़रा भी आब्जेक्शन नहीं किया। बल्कि सुन कर, बहुत खुश हुए और मेरी पीठ भी थपथपाई।”

 

तीन चार दिन ही गुज़रे थे, मुझे जेनरल मैनेजर के कार्यालय में उपस्थित होने का निदेश प्राप्त हुआ। मैं बड़े उत्साह में था। मैंने इस दौरान, अपने सेक्शन में कार्य बड़े ही परिश्रम से किया था और दूसरों से भी खूब काम लिया था। हो सकता है, उसी उपलक्ष में मेरा प्रमोशन कर दिया गया हो, या नक़द पुरस्कार, मेरे लिये स्वीकृत हो जाने की सूचना देने के लिये, बड़े साहब ने मुझे बुलाया हो।

“प्लीज़, टेक मोर सीट।”

मैं थैंक्स कह कर बैठ गया।

”आप आजकल इंस्पेक्शन में हैं?”

“जी।”

”कब से हैं?”

मैंने अवधि बता दी।

वे मेरी ओर ग़ौर से देखने लगे। फिर एक काग़ज मेरी ओर बढ़ा कर बोले, ”इसे देखिये, यह साइन आप के हैं?”

”जी।”

“यह काम, आपने खुद चेक किया था?”

”सर, बात यह है…“

किंतु उन्होंने मुझे बीच में ही टोक कर कहा,

“नो नो, बात वात कुछ नहीं। सिर्फ़ उस बात का जवाब दीजिये, जो पूछी गई है।”

”जी।”

“चेक किया था?”

”नहीं।”

“मतलब, आप ने बिना चेक किये ही, सामान को पास कर दियाः कितना पैसा खाया?”

”सर!”

“देखो, जो भी हुआ है, मुझे साफ़ साफ़ बता दो। यू नो वेरी वेल, आई डोंट टाॅलरेट एनी कोरप्शन इन माई डिपार्टमेंट!”

मैं चुप था। बोलता भी क्या! यह आक्रमण तो अचानक ही मेरे ऊपर कर दिया गया था।

”मिस्टर, नौकरी तो इस केस में जायेगी ही… पुलिस को भी हैंड ओवर करना पड़ सकता है।”

“सर, कुछ मेरी भी सुनेंगे?”

”ज़रूर सुनेंगे… मगर मिस्टर, यह सब करने के बाद भी, एक बार आप अगर यहां आकर मुझे बता देते, तो मैं इस केस को, किसी तरह सम्भाल ही लेता। मगर यह केस तो काफी ऊपर तक जा पहुंचा है। किसी ने सीधे ऊपर रिपोर्ट कर दी है… आप की वजह से, मुझे भी नीचा देखना पड़ गया… हाऊ सैड!”

“सर…”

”हां हां, कहिये?”

“मुझे सहगल सर ने कहा था, कि इस काम की बहुत ही जल्दी है। कोई गड़बड़ होगी तो वह देख लेगा।”

”उसके साइन हैं किसी काग़ज़ पर? कोई चिट या नोटिंग? चिट या नोटिंग? मुझे कमरे की दीवारें ही नहीं, सभी कुछ घूमता नज़र आने लगा।”

“दो दिन का टाइम देता हूं, अपना कोई बचाव करना हो, तो कर लो।”

कुछ समझ में नहीं आ रहा था, यह सब कैसे हो गया। कोई अन्य चारा न देख, मैं उसी मैनेजर एन0 मोहन की शरण में जा उपस्थित हुआ।

उसने मेरी पूरी बात सुनी। सुनकर उसने गम्भीरता प्रदर्शित की,

”इतनी लापरवाही नहीं करनी चाहिये थी!”

“सर, मुझे एसिस्टेंट मैनेजर सहगल ने धोखा दिया।”

”वह तो साला शुरू से ही बदमाश है! मैं उसे अच्छी तरह जानता हूं। मगर मिस्टर, एक बात कहूं, वो… कोई किसी को धोखा नहीं देता। धोखा, आदमी अपने से ही खाता है।”

मैं चुप रहा।

“तो, क्या चाहते हो?”

”सर, मैं इस समय सख़्त मुसीबत में हूं। कुछ सूझ नहीं रहा, क्या करूं! आप मुझे किसी तरह बचा लें सर!”

“किसी तरह?… सुनो।”

”जी।” मुझे आशा की किरण नज़र आई।

“तुम एक अच्छे लड़के हो एंड आई लाइक यु वेरी मच… बट…”

”सर?”

“जेल जाने से तो मैं तुम्हें बचा ही लूंगा। मगर… तुम एक काम करो।”

”जी?”

“अपना रिज़ाइन लिख कर मुझे दे दो। बाकी मैं सब कुछ ठीक करा दूंगा।”

”सर!”

“नौकरियों की कमी नहीें, बहुत मिल जाती हैं।”

”कहां मिलती है नौकरी इन दिनों सर!”

“अरे, कोशिश करने पर सभी कुछ मिल जाता है। मगर दिल छोटा करने से कुछ भी नहीं मिलता।”

”सर, और कोई रास्ता नहीं?”

“घबराने की बिल्कुल ज़रूरत नहीं। नौकरी मिल जायेगी। बल्कि इससे भी बढ़िया मिल सकती है। चाहो, तो रिज़ाइन करने से पहले, एप्वायेंटमेंट लेटर लेकर, जेब में रख लो। मगर एक शर्त होगी।”

मैं अब तक, नज़र झुका कर और गिड़गिड़ा कर बात कर रहा था। उसकी यह बात सुनते ही, मैं बुरी तरह चैंक गया।

ग़ौर किया, उसका लम्बा चैड़ा शरीर, उसी तरह तवाना है। चेहरे पर वही पहले जैसी सुर्खी मौजूद है और बड़ी-बड़ी आंखों में चिर प्रतिचित शरारत तैर रही है!

मगर एक शर्त होगी!

एक क्षण के लिये, मैं उसकी ओर देखता रहा। फिर कहा,

”मैं शर्त समझ गया!”

“देट्स व्हाई, आई लाइक यु सो मच!”

”मगर एक बात ज़रूर जानना चाहंूगा।”

“बोलो।”

”यह शर्त क्यों?”

“यह नहीं बताया जा सकता!”

”नुक़सान क्या है बताने में?”

“फ़ायदा भी क्या होगा जानकर? सोच लो। अच्छी तरह से सोच लो। फ़िल्मी हीरो की तरह, यहां से निकल कर जेल जाना चाहते हो, तो शौक़ से जाओ। कोई रोकने या टोकने वाला नहीं और अच्छे ढंग से कमा कर और इज़्जत के साथ दो वक़्त की रोटी खाना चाहते हो, तो उसके लिये भी रास्ता खुला है। अच्छी तरह सोच लो और फ़ैसला कर लो, कि तुम्हारे लिये क्या बेहतर है। दिल माने, तो मुझ से फिर मिल लेना। वरना…”

 

मैं फ़िल्मी हीरो नहीं था, जो हँसते, गाते या नारे लगाता हुआ, जेलयात्रा के लिये वहां से रवाना हो जाता। मैं सिर्फ़ एक मामूली आदमी था। इसलिये वही किया, जो एक मामूली आदमी से अपेक्षित था।

मैंने, दूसरे शहर जाकर नई नौकरी तलाश कर ली और धीरे-धीरे, नई जिं़दगी में रमने की कोशिश करने लगा और फिर एक दिन, आशी का साथ भी मिल गया।

क्रमशः…६ 

© श्री मदन शर्मा 

देहरादून, उत्तराखंड  

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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English Literature – Book Review ☆ The Evolution of Intelligence ☆ Captain Pravin Raghuvanshi, NM ☆

Captain Pravin Raghuvanshi, NM

(Captain Pravin Raghuvanshi —an ex Naval Officer, possesses a multifaceted personality. He served as a Senior Advisor in prestigious Supercomputer organisation C-DAC, Pune. He was involved in various Artificial Intelligence and High-Performance Computing projects of national and international repute. He has got a long experience in the field of ‘Natural Language Processing’, especially, in the domain of Machine Translation. He has taken the mantle of translating the timeless beauties of Indian literature upon himself so that it reaches across the globe. He has also undertaken translation work for Shri Narendra Modi, the Hon’ble Prime Minister of India, which was highly appreciated by him. He is also a member of ‘Bombay Film Writer Association’.

Book Name – The Evolution Of Intelligence

Amazon –https://link.amazon/B09huT2dr

Google Play – https://play.google.com/store/books/details?id=UxD7EQAAQBAJ

Flipkart – https://www.flipkart.com/product/p/itme?pid=9789374063200

?The Evolution of Intelligence – By Capt Pravin Raghuvanshi, NM ? 

(“” which is all about AI and AGI… This book also includes the vision – India 2045… My long stint with C-DAC (Centre for Development of Advanced Computing) in the HPC & Applied AI fields has helped me pen down this book… I was contemplating writing this book for over a decade… finally, it’s ready…)

Dear Friends,

It gives me immense pleasure to share that my latest book, The Evolution of Intelligence, has been launched and is now available on Amazon and Flipkart.

The Evolution of Intelligence explores one of the most profound transformations in human history—the emergence of intelligence beyond the human mind.
Going far beyond technology, it examines how Artificial General Intelligence (AGI) is poised to redefine civilization, governance, economics, creativity, and even our understanding of what it means to be human.

Blending scientific insight, strategic foresight, and philosophical depth, the book argues that humanity’s greatest challenge is not merely creating intelligent machines, but learning to coexist with multiple forms of intelligence.

Timely, thought-provoking and deeply insightful, The Evolution of Intelligence offers a compelling roadmap for navigating the next chapter in the evolution of civilization.

It is an essential read for policymakers, business leaders, technologists, educators, students, and every thoughtful citizen, because the future of AI and AGI will shape not just technology, but the destiny of humanity itself.

I would be deeply honoured if you would read the book, bless this endeavour with your good wishes, and share your valuable feedback. Your encouragement and insights will mean a great deal to me.

~Pravin Raghuvanshi

 © Captain Pravin Raghuvanshi, NM

Pune

≈ Founder Editor – Shri Hemant Bawankar/Editor (English) – Captain Pravin Raghuvanshi, NM ≈

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हिन्दी साहित्य – आलेख ☆ अभी अभी # १०६१ ⇒ प्रेम पर्वत ☆ श्री प्रदीप शर्मा ☆

श्री प्रदीप शर्मा

(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “प्रेम पर्वत।)

?अभी अभी # १०६१ ⇒ आलेख – प्रेम पर्वत ? श्री प्रदीप शर्मा  ?

जो शब्द हिंदी में ढाई आखर का है, वह अंग्रेजी का four letter word LOVE है। अक्सर प्रेम, प्यार अथवा इश्क में ऊंचाइयों की बात होती है, गहराइयों की बात होती है, प्यार के सागर में या तो हम डूब जाते हैं, या फिर इतने ऊंचे उठ जाते हैं, कि हमारा प्रेम ईश्वरीय प्रेम हो जाता है।

किसी के प्यार में डूबना तो बहुत आसान है लेकिन प्रेम की ऊंचाई को नापना इतना आसान भी नहीं। प्रेम परीक्षा लेता भी है और परीक्षा देता भी है। प्रेम में सफल होने पर प्रेमी प्रसन्न होता है, उसके पाँव जमीन पर नहीं पड़ते। लेकिन प्रेम में असफल होते ही उसका मन खिन्न हो जाता है। ये दुनिया और यह महफिल उसके काम की नहीं रह जाती।।

कहीं कहीं प्रेम शर्तिया होता है, प्रेम में कुछ शर्तें रख दी जाती हैं। प्यार नहीं हुआ, मानो सौदा हो गया हो। पहली नजर में प्यार अंधा प्रतीत होता है, लेकिन आंख खुलते ही सच सामने आ जाता है। प्रेम में अपेक्षा तो होती है, लेकिन प्रेम उपेक्षा बर्दाश्त नहीं कर पाता।

प्रेम का ही दूसरा नाम आसक्ति है। हमें जो प्रिय है, उससे हमें प्रेम हो ही जाता है। आप उसे लगाव, अथवा आकर्षण भी कह सकते हैं। हमारे प्रेम का दायरा कितना विस्तृत है, यह हम नहीं जानते। बच्चे से लेकर बूढ़े तक, मां से लेकर दादी मां तक, और बेटी से लेकर पोती तक इसकी जड़ें फैली होती हैं। हमारे प्रेमपाश में जर्रा जर्रा समाया है, लेकिन यह जीव कभी इसे समझ नहीं पाया है।।

ये वादियां ये फिजाएँ, बुला रही हैं तुम्हें, खामोशियों की अदाएं, बुला रही हैं तुम्हें।

हमें कभी फूलों से प्यार होता है तो कभी सावन की घटाओं से। कभी दिन सुहाना नजर आता है, तो कभी रात। खुशियों में मन झूमने लगता है, जब किसी का जन्म होता है, तो कहीं निकलने लगती है किसी अपने की बारात।

पसंद प्रेम का ही दूसरा स्वरूप है। जो तुमको हो पसंद, वही बात कहेंगे। तुम दिन को अगर रात कहो, रात कहेंगे ! क्या यह प्रेम नहीं। अच्छा संगीत, अच्छी फिल्में, अच्छा साहित्य, अच्छे लोग, अच्छा खाना, एक अच्छी पत्नी और अच्छी अच्छी बातें, हमें बहुत पसंद है। इन सबसे हमें कितना प्रेम है। सोचिए क्या हम इनके बिना रह सकते हैं।।

अगर फिर भी हम दुखी हैं, तो इसका मतलब अभी भी हममें प्रेम की कमी है। हम मीठा मीठा तो गप कर जाते हैं, लेकिन कड़वा हजम नहीं कर पाते। जब प्रेम हमारी परीक्षा लेता है, तो हम वहां से भाग खड़े होते हैं।

प्रेम के पर्वत पर चढ़ना इतना आसान भी नहीं। कई कंकर, पत्थर, कांटे, विषैले और हिंसक जीव प्रेम की राह में हमारा रास्ता रोकने की कोशिश करते हैं। कुछ लोग प्रेम का रास्ता छोड़ खुदगर्जी और स्वार्थ की पगडंडी पकड़ लेते हैं। ऐसे लोग कभी प्रेम पर्वत पर चढ़ नहीं पाते। बस रास्ता भटक जाते हैं, और कह उठते हैं ; कह दो, कोई ना करे यहां प्यार। इसमें खुशियां हैं कम, और आंसू हजार।।

प्रेम त्याग, समर्पण और निष्ठा मांगता है, प्रेम सहूलियत नहीं, जीवन की असलियत है। अक्सर लोगों का प्यार स्वामित्व वाला प्यार (posessive love) होता है, वे बस लेना ही लेना जानते हैं। प्यार संग्रहालय में रखने की वस्तु नहीं, बांटने की चीज है।

प्यार बांटते चलो। मेरी मोहब्बत पाक मोहब्बत, और जहां की ख़ाक मोहब्बत। आइए, झमाझम बारिश में, प्रेम रस में भीगें, प्रेम का ही छाता, प्रेम की ही बरसाती, प्रेम की ही छड़ी, प्रेम पर्वत पर कदम बढ़ाएं।।

♥ ♥ ♥ ♥ ♥

© श्री प्रदीप शर्मा

संपर्क – १०१, साहिल रिजेंसी, रोबोट स्क्वायर, MR 9, इंदौर

मो 8319180002

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – कविता ☆ कोई गणितज्ञ नहीं…! ☆ डॉ. रामेश्वरम तिवारी ☆

डॉ. रामेश्वरम तिवारी

संक्षिप्त परिचय

  • हिंदी-प्राध्यापक(सेवानिवृत्त) महारानी लक्ष्मीबाई शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भोपाल  (म.प्र).
  • नई दुनिया, दैनिक भास्कर, वीणा, हंस, धर्मयुग, कादम्बिनी आदि पत्र-पत्रिकाओं में कविता और लघुकथाएँ प्रकाशित। पुस्तकः कविता के ज़रिए,  मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के सौजन्य से प्रकाशित।

आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता – कोई गणितज्ञ नहीं…!

☆ ॥ कविता॥ कोई गणितज्ञ नहीं…!  ☆ डॉ. रामेश्वरम तिवारी

किसी बौद्धिक, वणिक्

या राजनीतिज्ञ के घर में

पैदा होने मात्र से

कोई परम विज्ञ,

सफल सौदागर या

लोकप्रिय नेता नहीं हो जाता है।

 

जब होने को होता है

तब किसी वनवासी के घर में

कविवर बाल्मिकी

बेनामी घर में धीरूभाई अंबानी

बेदखली के घर में

सम्राट चंद्रगुप्त पैदा हो जाता है।

 

कुदरत की इस

शाश्वत उलझी हुई गुत्थी को

आज तक कोई

गणितज्ञ नहीं सुलझा पाया है।

© डॉ. रामेश्वरम तिवारी

सम्पर्क – सागर रॉयल होम्स, होशंगाबाद रोड, भोपाल-462026

मोबाईल – 8085014478

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ सलिल प्रवाह # २८८ – ग़ज़लिका – लोकतंत्र ने जिनको पोसा ☆ आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ ☆

आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

(आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी संस्कारधानी जबलपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। आपको आपकी बुआ श्री महीयसी महादेवी वर्मा जी से साहित्यिक विधा विरासत में प्राप्त हुई है । आपके द्वारा रचित साहित्य में प्रमुख हैं पुस्तकें- कलम के देव, लोकतंत्र का मकबरा, मीत मेरे, भूकंप के साथ जीना सीखें, समय्जयी साहित्यकार भगवत प्रसाद मिश्रा ‘नियाज़’, काल है संक्रांति का, सड़क पर आदि।  संपादन -८ पुस्तकें ६ पत्रिकाएँ अनेक संकलन। आप प्रत्येक सप्ताह रविवार को  “साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह” के अंतर्गत आपकी रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे। आज प्रस्तुत है  – ग़ज़लिका – लोकतंत्र ने जिनको पोसा)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह # २८८ ☆

☆ ग़ज़लिका – लोकतंत्र ने जिनको पोसा ☆ आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ ☆

इसने ताका, उसने ताका

कौन न जिसने जी भर ताका

.

मौका देख न चूका कोई

दोस्त यार फूफा या काका

.

चीख न अबला की सुनता जग

सबला की झट सुनता आका

.

जिन पर जिम्मा संरक्षण का

वे ही डाल रहे हैं डाका

.

मन की बातें हैं मनमानी

कमीशनों का निश्चित खाका

.

हुए पड़ोसी सभी विरोधी

आँख दिखा गुर्राए ढाका

.

फेंक रहे हैं लाखों हँसकर

पोस्टिंग हो पा जाएँ नाका

.

खाते जाते जो डकार ले

उनके कारण होता फाका

.

लोकतंत्र ने जिनको पोसा

उनके कारण करता साका

©  आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

१६.७.२०२६

संपर्क: विश्ववाणी हिंदी संस्थान, ४०१ विजय अपार्टमेंट, नेपियर टाउन, जबलपुर ४८२००१,

चलभाष: ९४२५१८३२४४  ईमेल: salil.sanjiv@gmail.com

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – व्यंग्य ☆ चुभते तीर # १२० – महानगरों का ट्रैफिक और धैर्य – ☆ डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ ☆

डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’

(‘उरतृप्त’ उपनाम से व्यंग्य जगत में प्रसिद्ध डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा अपनी भावनाओं और विचारों को अत्यंत ईमानदारी और गहराई से अभिव्यक्त करते हैं। उनकी बहुमुखी प्रतिभा का प्रमाण उनके लेखन के विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान से मिलता है। वे न केवल एक प्रसिद्ध व्यंग्यकार हैं, बल्कि एक कवि और बाल साहित्य लेखक भी हैं। उनके व्यंग्य लेखन ने उन्हें एक विशेष पहचान दिलाई है। उनका व्यंग्य ‘शिक्षक की मौत’ साहित्य आजतक चैनल पर अत्यधिक वायरल हुआ, जिसे लगभग दस लाख से अधिक बार पढ़ा और देखा गया, जो हिंदी व्यंग्य के इतिहास में एक अभूतपूर्व कीर्तिमान है। उनका व्यंग्य-संग्रह ‘एक तिनका इक्यावन आँखें’ भी काफी प्रसिद्ध है, जिसमें उनकी कालजयी रचना ‘किताबों की अंतिम यात्रा’ शामिल है। इसके अतिरिक्त ‘म्यान एक, तलवार अनेक’, ‘गपोड़ी अड्डा’, ‘सब रंग में मेरे रंग’ भी उनके प्रसिद्ध व्यंग्य संग्रह हैं। ‘इधर-उधर के बीच में’ तीसरी दुनिया को लेकर लिखा गया अपनी तरह का पहला और अनोखा व्यंग्य उपन्यास है। साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान को तेलंगाना हिंदी अकादमी, तेलंगाना सरकार द्वारा श्रेष्ठ नवयुवा रचनाकार सम्मान, 2021 (मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के हाथों) से सम्मानित किया गया है। राजस्थान बाल साहित्य अकादमी के द्वारा उनकी बाल साहित्य पुस्तक ‘नन्हों का सृजन आसमान’ के लिए उन्हें सम्मानित किया गया है। इनके अलावा, उन्हें व्यंग्य यात्रा रवींद्रनाथ त्यागी सोपान सम्मान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों साहित्य सृजन सम्मान भी प्राप्त हो चुका है। डॉ. उरतृप्त ने तेलंगाना सरकार के लिए प्राथमिक स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर कुल 55 पुस्तकों को लिखने, संपादन करने और समन्वय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बिहार, छत्तीसगढ़, तेलंगाना की विश्वविद्यालयी पाठ्य पुस्तकों में उनके योगदान को रेखांकित किया गया है। कई पाठ्यक्रमों में उनकी व्यंग्य रचनाओं को स्थान दिया गया है। उनका यह सम्मान दर्शाता है कि युवा पाठक गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी लेखन की पहचान कर सकते हैं।)

जीवन के कुछ अनमोल क्षण 

  1. तेलंगाना सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री श्री के. चंद्रशेखर राव के करकमलों से  ‘श्रेष्ठ नवयुवा रचनाकार सम्मान’ से सम्मानित। 
  2. मुंबई में संपन्न साहित्य सुमन सम्मान के दौरान ऑस्कर, ग्रैमी, ज्ञानपीठ, साहित्य अकादमी, दादा साहब फाल्के, पद्म भूषण जैसे अनेकों सम्मानों से विभूषित, साहित्य और सिनेमा की दुनिया के प्रकाशस्तंभ, परम पूज्यनीय गुलज़ार साहब (संपूरण सिंह कालरा) के करकमलों से सम्मानित।
  3. ज्ञानपीठ सम्मान से अलंकृत प्रसिद्ध साहित्यकार श्री विनोद कुमार शुक्ल जी  से भेंट करते हुए। 
  4. बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट, अभिनेता आमिर खान से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
  5. विश्व कथा रंगमंच द्वारा सम्मानित होने के अवसर पर दमदार अभिनेता विक्की कौशल से भेंट करते हुए। 

आप  डॉ सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ जी के स्तम्भ – चुभते तीर में उनकी अप्रतिम व्यंग्य रचनाओं को आत्मसात कर सकेंगे। इस कड़ी में आज प्रस्तुत है आपका विचारणीय व्यंग्य – महानगरों का ट्रैफिक और धैर्य।)  

☆  चुभते तीर # १२० – व्यंग्य  – महानगरों का ट्रैफिक और धैर्य ☆ डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ 

(तेलंगाना साहित्य अकादमी से सम्मानित नवयुवा व्यंग्यकार

महानगरों का ट्रैफिक इंसान को अध्यात्म की ओर ले जाता है। जब आप तीन घंटे तक एक ही जगह पर खड़े होकर सामने वाली गाड़ी की नंबर प्लेट पढ़ रहे होते हैं, तो आपको जीवन की नश्वरता का अहसास होता है। हॉर्न बजाना यहाँ का राष्ट्रीय शगल है; लोगों को लगता है कि जितना तेज़ हॉर्न बजाएंगे, सामने वाली गाड़ी उतनी ही जल्दी गायब हो जाएगी। रेड लाइट पर हरा रंग होते ही पीछे से ऐसे हॉर्न बजते हैं मानो कोई एम्बुलेंस सीधे सीधे यमराज के घर जा रही हो। सड़कें इतनी गड्ढों से भरी हैं कि समझ नहीं आता कि गड्ढे में सड़क है या सड़क में गड्ढा। सरकार हर साल टैक्स बढ़ाती है ताकि आपको और बेहतर तरीके से जाम में फंसने का अवसर मिल सके। इस ट्रैफिक में सिर्फ गाड़ियां ही नहीं रुकतीं, बल्कि इंसान का विकास भी रुक जाता है।

(टीप: यह आवश्यक नहीं है कि संपादक मंडल व्यंग्य /आलेख में व्यक्त विचारों/राय से सहमत हो।)

© डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’

संपर्क : चरवाणीः +91 73 8657 8657, ई-मेल : drskm786@gmail.com

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  ≈

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ज्योतिष साहित्य ☆ साप्ताहिक राशिफल (3 अगस्त से 9 अगस्त 2026) ☆ ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय ☆

ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय

विज्ञान की अन्य विधाओं में भारतीय ज्योतिष शास्त्र का अपना विशेष स्थान है। हम अक्सर शुभ कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त, शुभ विवाह के लिए सर्वोत्तम कुंडली मिलान आदि करते हैं। साथ ही हम इसकी स्वीकार्यता सुहृदय पाठकों के विवेक पर छोड़ते हैं। हमें प्रसन्नता है कि ज्योतिषाचार्य पं अनिल पाण्डेय जी ने ई-अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों के विशेष अनुरोध पर साप्ताहिक राशिफल प्रत्येक शनिवार को साझा करना स्वीकार किया है। इसके लिए हम सभी आपके हृदयतल से आभारी हैं। साथ ही हम अपने पाठकों से भी जानना चाहेंगे कि इस स्तम्भ के बारे में उनकी क्या राय है ? 

☆ ज्योतिष साहित्य ☆ साप्ताहिक राशिफल (3 अगस्त से 9 अगस्त 2026) ☆ ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय ☆

जय श्री राम और जय श्री हनुमान। आप सभी को आश्चर्य हो रहा होगा कि मैं जय श्री राम के साथ में जय हनुमान भी क्यों कह रहा हूं मेरा अपना व्यक्तिगत विचार है कि हमें अपने कार्यों को करने के लिए श्री राम भक्त श्री हनुमान जी का ही सहारा लेना चाहिए। हम सभी जानते हैं कि माता जानकी ने श्री हनुमान जी को अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का वरदान दिया हुआ है। इस वरदान के कारण वे किसी को भी अष्ट सिद्धियां और नौ निधियां प्रदान कर सकते हैं इसके अलावा वे किसी भी कार्य को अपनी इन सिद्धियों के कारण बड़े आसानी से कर सकते हैं। श्री हनुमान चालीसा में गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा है कि –

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता |

अस बर दीन जानकी माता ||

 इस चौपाई के संपुट पाठ करने से दुष्टों का नाश होता है, जातक की रक्षा होती है और जातक की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं।

जब हमारे सभी इच्छाएं श्री हनुमान की पूर्ति कर सकते हैं तो हम फिर उनके स्थान को छोड़कर के किसी और के पास क्यों जाएं।

“नासे  रोग हरे सब पीरा” नाम की पुस्तक में श्रीहनुमान चालीसा की चौपाइयों से संबंधित सभी उपायों का विस्तृत विवरण दिया हुआ है। इस पुस्तक को आप हमारे यहां से प्राप्त कर सकते हैं।

मैं पंडित अनिल पाण्डेय आज आपको 3 अगस्त से 9 अगस्त 2026 तक के सप्ताह के साप्ताहिक राशिफल के बारे में बताऊंगा। परंतु राशिफल से पहले मैं आपको इस सप्ताह के ग्रहों के विचरण की जानकारी दूंगा।

इस सप्ताह सूर्य और गुरु कर्क राशि में, मंगल मिथुन राशि में, शुक्र कन्या राशि में, शनि मीन राशि में और राहु कुंभ राशि में गोचर करेंगे। बुध प्रारंभ में मिथुन राशि में रहेगा तथा 5 तारीख के 7:06 रात से कर्क राशि में प्रवेश करेगा।

आई अब राशिवार राशिफल की चर्चा करते हैं।

मेष राशि

इस सप्ताह आपके प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। थोड़े प्रयास से ही आपकी प्रतिष्ठा में अच्छी वृद्धि होगी। भाई बहनों के साथ संबंधों में थोड़ा सा तनाव आ सकता है। आपको अपने संतान से थोड़ा सहयोग प्राप्त हो सकता है। भाग्य से इस सप्ताह थोड़ी मदद मिल सकती है। शत्रुहन्ता योग भी बन रहा है, जिसके कारण आप अपने शत्रुओं को आसानी से पराजित कर सकते हैं। थोड़ा ही प्रयास करना पड़ेगा। इस सप्ताह आपके लिए 5 और 6 तारीख सफलता दायक है। 3 और 4 तारीख को आपको बहुत सावधानी से अपने कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन चावल का दान करें और शुक्रवार को मंदिर में जाकर पुजारी जी को सफेद वस्त्रो का दान दें। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है।

वृष राशि

इस सप्ताह आपके भाई बहनों को लाभ हो सकता है। उनका अच्छा सहयोग भी आपको मिलेगा। भाग्य से आपको मदद मिलेगी परंतु उसकी मात्रा बहुत कम होगी। अतः आपको मुख्य रूप से अपने कर्म पर विश्वास करना पड़ेगा। आपका, आपके जीवनसाथी का और आपके माताजी का स्वास्थ्य सामान्य रहेगा अर्थात पहले जैसा ही रहेगा। कर्मचारी एवं अधिकारियों को अपने वाणी पर नियंत्रण रखना चाहिए। इस सप्ताह आपके लिए सात और आठ अगस्त विभिन्न प्रकार के कार्यों में सफलता प्राप्त करने हेतु अनुकूल हैं। 5 और 6 अगस्त को आपको सचेत रहकर अपने कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन लाल मसूर की दाल का दान करें और मंगलवार को हनुमान जी के मंदिर में जाकर कम से कम तीन बार हनुमान चालीसा का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है।

मिथुन राशि

इस सप्ताह आपके पास धन आने का उत्तम योग है। आपको प्रयास कर इस सप्ताह का भरपूर उपयोग करना चाहिए। आप जितना प्रयास करेंगे उससे ज्यादा धन की प्राप्ति होगी। आपको इस सप्ताह अपने प्रसिद्धि के प्रति सतर्क रहना चाहिए। आपको अपने माता जी के स्वास्थ्य के प्रति थोड़ा सावधान रहना चाहिए। भाग्य से इस सप्ताह आपको मदद नहीं मिल पाएगा। आपको अपने कर्म पर विश्वास करना पड़ेगा। इस सप्ताह आपके लिए तीन, चार तथा 9 अगस्त उपयोगी है। 7 और 8 अगस्त को कचहरी के कार्यों के मामले में आपको सतर्क होकर कार्य करना चाहिए। सफलता प्राप्त हो सकती है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गाय को हरा चारा खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।

कर्क राशि

यह सप्ताह आपके लिए कई मामलों में उपयोगी रहेगी। आपको अपने भाइयों से अच्छा सहयोग प्राप्त हो सकता है। कचहरी के कार्यों में आपको सावधान रहने की आवश्यकता है। भाग्य से सामान्य मदद ही प्राप्त होगी। अधिकारी कर्मचारियों के लिए सप्ताह ठीक-ठाक है। इस सप्ताह आपके लिए 5 और 6 अगस्त विभिन्न प्रकार से मददगार है। सात और आठ अगस्त को थोड़े से धन की प्राप्ति हो सकती है। 9 अगस्त को आपको होशियारी से अपने कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन काले उड़द की दाल का दान करें और शनिवार को शनि मंदिर में जाकर शनि देव का पूजन करें। सप्ताह का शुभ दिन सोमवार है।

सिंह राशि

कचहरी के कार्यों में इस सप्ताह शुभ संदेश मिल सकता है। भाग्य से आपको सामान्य मदद मिलेगी। भाई बहनों के साथ संबंधों में टकराव हो सकता है। धन के प्रति इस सप्ताह आपको सतर्क रहना चाहिए, नहीं तो आपका धन व्यर्थ के कार्यों में बर्बाद हो सकता है। संतान से इस सप्ताह आपको थोड़ा सा सहयोग मिलेगा। आपका या आपके जीवनसाथी का स्वास्थ्य थोड़ा खराब हो सकता है। इस सप्ताह आपके लिए सात और आठ अगस्त लाभदायक है। 7 और 8 अगस्त को किए गए कार्यों में आप सफल रहेंगे। तीन और चार अगस्त को आपको बहुत सावधानी से कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन काले कुत्ते को तंदूर की रोटी खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है।

कन्या राशि

इस सप्ताह आपके पास धन आने की पूर्ण उम्मीद है। धन अच्छी मात्रा में आ सकता है, परंतु आपको इसके लिए विशेष परिश्रम करना पड़ेगा। अविवाहित जातकों के लिए यह सप्ताह ठीक रहेगा। उनके विवाह के प्रस्ताव प्राप्त होंगे। प्रेम संबंधों में भी वृद्धि संभव है। अधिकारी और कर्मचारियों को अपने कार्यालय में सतर्कता पूर्वक कार्य करना चाहिए। आपको अपने स्वास्थ्य के प्रति भी थोड़ा सतर्क रहना चाहिए। इस सप्ताह आपके लिए तीन-चार और 9 अगस्त फलदायक है। 5 और 6 अगस्त को आपको सतर्क रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें तथा शनिवार को दक्षिण मुखी हनुमान जी के मंदिर में जाकर हनुमान चालीसा का वाचन करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।

तुला राशि

यह सप्ताह अधिकारी और कर्मचारियों के लिए उत्तम है। उनको अपने कार्यालय में प्रतिष्ठा प्राप्त होगी। अपने वरिष्ठ अधिकारियों से उनको सम्मान भी प्राप्त हो सकता है। भाग्य से इस सप्ताह आपको विशेष मदद नहीं मिलेगी। आपको अपने परिश्रम पर यकीन करना पड़ेगा। कचहरी के कार्यों में सफलता प्राप्त हो सकती है परंतु इसके लिए आपको विशेष ध्यान देकर प्रयास करना होगा। आपके प्रतिष्ठा में वृद्धि हो सकती है। आपके शत्रु इस सप्ताह शांत रहेंगे परंतु समाप्त नहीं होंगे। इस सप्ताह आपके लिए 5 और 6 अगस्त विभिन्न प्रकार से अनुकूल हैं। सप्ताह के बाकी दिनों में आपको सतर्क रहकर कार्यों को करने की आवश्यकता है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन रुद्राष्टक का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।

वृश्चिक राशि

इस सप्ताह भाग्य आपका अच्छा साथ देगा। आपके कई कार्य भाग्य के सहारे हो जाएंगे। लंबी यात्रा का योग भी बन सकता है। आपको प्रतिष्ठा की हानि हो सकती है। भाई बहनों के साथ संबंध सामान्य रहेंगे। कर्मचारी एवं अधिकारियों को अपने कार्यालय में कार्य करते समय थोड़ा सतर्क रहना चाहिए। इस सप्ताह आपके लिए 7 और 8 अगस्त विशेष रूप से परिणाम दायक हैं। 5, 6 और 9 अगस्त को आपको सावधानी के साथ कार्यों को अंजाम देना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन शिव पंचाक्षर मंत्र का जाप करें। सप्ताह का शुभ दिन मंगलवार है।

धनु राशि

इस सप्ताह आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। धन आने का योगहै। दुर्घटनाओं से आप बच जाएंगे। लंबी यात्रा का योग बन सकता है। कर्मचारी एवं अधिकारियों को कार्यालय में बहुत सतर्क रहना चाहिए। अगर वे सतर्क नहीं रहेंगे तो उनका नुकसान संभव है। भाई बहनों के साथ संबंध ठीक नहीं रहेंगे। संतान के साथ सामान्य संबंध रहेगा। इस सप्ताह आपके लिए तीन-चार और 9 अगस्त कार्यों के लिए शुभ और लाभप्रद हैं। सात और 8 अगस्त को आपको अपने कार्यों को थोड़ा सावधानी से करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन भगवान शिव का दूध और जल से अभिषेक करें। सप्ताह का शुभ दिन मंगलवार है।

मकर राशि

अविवाहित जातकों के लिए यह सप्ताह ठीक है। उनको विवाह के प्रस्ताव प्राप्त होंगे। भाग्य से आपको थोड़ी बहुत मदद मिल सकती है। आप अपने शत्रुओं को आसानी से पराजित कर सकते हैं। आपका स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। कचहरी के कार्यों में सावधानी पूर्वक कार्य करने पर सफलता प्राप्त हो सकती है। भाई बहनों के साथ सामान्य संबंध रहेगा अर्थात जैसे पहले था वैसा ही रहेगा। इस सप्ताह आपके लिए 5 और 6 तारीख कार्यों को करने के लिए उचित और लाभदायक है। 9 अगस्त को आपको सजग रहकर अपने कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन शिव पंचाक्षर स्त्रोत का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन शनिवार है।

कुंभ राशि

इस सप्ताह कचहरी के कार्यों में आपको सफलता मिल सकती है। परंतु कार्यों में सावधानी बरतना आवश्यक है। धन आने का मामूली योग है। आपका या आपके जीवन साथी दोनों में से किसी एक का स्वास्थ्य थोड़ा खराब हो सकता है। शत्रुओं को आप आसानी से पराजित कर सकते हैं। धन आने की मात्रा कम रहेगी। इस सप्ताह आपके लिए सात और आठ तारीख उत्तम है। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक-ठाक है। सात या 8 तारीख को आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि भी हो सकती है। आपको चाहिए कि आप इस सप्ताह प्रतिदिन गायत्री मंत्र का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन शनिवार है।

मीन राशि

यह सप्ताह आपके संतान के लिए अत्यंत उत्तम है। आपको अपनी संतान का बहुत अच्छा सहयोग भी प्राप्त होगा। छात्रों की पढ़ाई के लिए भी यह सप्ताह बहुत अच्छा रहेगा। उनको परीक्षाओं में सफलता भी प्राप्त होगी। आपको इस सप्ताह अपने प्रतिष्ठा पर ध्यान देना होगा। इस सप्ताह आपको अपने माता जी के स्वास्थ्य के प्रति भी सतर्क रहना चाहिए। कर्मचारी और अधिकारियों के लिए यह सप्ताह ठीक रहेगा। धन आने का भी योग है। इस सप्ताह आपके लिए तीन चार और नौ अगस्त विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए उत्तम है। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक-ठाक हैं। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।

ध्यान दें कि यह सामान्य भविष्यवाणी है। अगर आप व्यक्तिगत और सटीक भविष्वाणी जानना चाहते हैं तो आपको मुझसे दूरभाष पर या व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाना चाहिए। मां शारदा से प्रार्थना है या आप सदैव स्वस्थ सुखी और संपन्न रहें। जय मां शारदा।

 राशि चिन्ह साभार – List Of Zodiac Signs In Marathi | बारा राशी नावे व चिन्हे (lovequotesking.com)

निवेदक:-

ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय

(प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ और वास्तु शास्त्री)

सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता, मध्यप्रदेश विद्युत् मंडल 

संपर्क – साकेत धाम कॉलोनी, मकरोनिया, सागर- 470004 मध्यप्रदेश 

मो – 8959594400

ईमेल – 

यूट्यूब चैनल >> आसरा ज्योतिष 

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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मराठी साहित्य – कवितेचा उत्सव ☆ विवश ☆ मुग्धा कानिटकर ☆

मुग्धा कानिटकर

? कवितेचा उत्सव ?

☆ विवश ☆ मुग्धा कानिटकर ☆

इंधन अन्न पाण्याची टंचाई

वाढत राहते रोज महागाई

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संसार चालवावा कसा तरी

सुख राही मग स्वप्नच उरी

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इंटरनेटवरचे आहे जग आभासी

सुखदुःख सांगावे तरी कोणासी

*

असाकसा ‌नियतीच मांडते छळ

कुठवर सोसवेल युद्धाची झळ

*

निर्लज्ज संधीसाधूंची मजाच मजा

सामान्य मात्र भोगती भलतीच सजा

*

नाडली जाते गरजवंत जनतेला

कसा मार्ग सुचेना विचारवंताला

*

स्वार्थ बसला सर्वत्र ठाण मांडून

चालणार कसं पण निराश होऊन

 *

माणुसकीची न सोडता कास

 जाऊ सामोरे जीवन संघर्षास

*

राहू एकमेकां सोबत न खचता

काढू मार्ग दैवाला दोष न देता..

© मुग्धा कानिटकर

विश्रामबाग, सांगली – मो. 9403726078

≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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