२०१० पासून, किशोरवयीन मुलांनी साध्या फोनऐवजी सोशल मीडिया ॲप्सने भरलेल्या स्मार्टफोनकडे वळायला सुरुवात केली. प्रत्यक्षात जगाचं निरीक्षण करण्याऐवजी, अनुभव घेण्याऐवजी ते ऑनलाइन राहून आभासी जगात आपला जास्तीतजास्त वेळ घालवू लागले. त्यामुळे कुटुंब आणि मित्रांसोबतचा प्रत्यक्ष संवाद आणि मानसिक आरोग्य दोन्ही झपाट्याने घसरले..
हे पुस्तक आधुनिक संशोधनाच्या आधारे दाखवून देतं की, मुक्त खेळापासून स्मार्टफोनकडे झालेल्या या संक्रमणामुळे विकास प्रक्रियेत व्यत्यय येतात. अगदी झोपेच्या कमतरतेपासून ते व्यसनाधीनतेपर्यंत अनेक समस्या यामुळे निर्माण झाल्या आहेत. प्राचीन ज्ञानावर आधारित आणि अत्याधुनिक विज्ञान व उपयुक्त सल्ल्यांनी सजलेले हे आश्चर्यचकित करणारे पुस्तक वेगाने घडत असणाऱ्या बदलांना समजून घेऊ इच्छिणाऱ्या प्रत्येकासाठी नक्कीच मार्गदर्शक ठरेल.
या पुस्तकात –––
== डिजिटल युगात सुदृढ बालपण जपण्यासाठी पायऱ्या
== किशोरवयीन मुलांमध्ये आढळणाऱ्या शारीरिक व मानसिक समस्या व त्यावरील उपाय
== इंटरनेटच्या मायाजालाचा मुलांवर काय परिणाम होतो व मुलींवर काय परिणाम होतो
== चार मूलभूत हानी
== पालक, समाज, शाळा आणि शासन यांनी बजावण्याची भूमिका
मुलांना आभासी जगातून खऱ्या जगात आणण्यासाठी… हे पुस्तक फक्त एक वाचन नाही, तर आजच्या पिढीच्या मानसिक आरोग्याचा आरसा आहे. जर तुम्हाला तुमच्या मुलांच्या किंवा स्वतःच्या डिजिटल जीवनशैलीचा परिणाम समजून घ्यायचा असेल, तर हे पुस्तक नक्की वाचावे.
इंटरनेटच्या मायाजालात हरवलेली मुलं – आभासी जगातील अस्वस्थ पिढी – समस्या आणि समाधान
परिचय : श्री हर्षल सुरेश भानुशाली
पालघर
मो.9619800030
≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈
(वरिष्ठतम साहित्यकार आदरणीय डॉ कुन्दन सिंह परिहार जी का साहित्य विशेषकर व्यंग्य एवं लघुकथाएं ई-अभिव्यक्ति के माध्यम से काफी पढ़ी एवं सराही जाती रही हैं। हम प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – “परिहार जी का साहित्यिक संसार” शीर्षक के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाते रहते हैं। डॉ कुंदन सिंह परिहार जी की रचनाओं के पात्र हमें हमारे आसपास ही दिख जाते हैं। कुछ पात्र तो अक्सर हमारे आसपास या गली मोहल्ले में ही नज़र आ जाते हैं। उन पात्रों की वाक्पटुता और उनके हावभाव को डॉ परिहार जी उन्हीं की बोलचाल की भाषा का प्रयोग करते हुए अपना साहित्यिक संसार रच डालते हैं।आज प्रस्तुत है आपका एक अप्रतिम व्यंग्य – ‘बिल्ली और छींका’। इस अतिसुन्दर रचना के लिए डॉ परिहार जी की लेखनी को सादर नमन।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – परिहार जी का साहित्यिक संसार # ३२९ ☆
☆ व्यंग्य ☆ बिल्ली और छींका ☆
रौनक भाई को खुशी के मारे रात भर नींद नहीं आयी। रात भर भगवान को धन्यवाद देते रहे। रात को ग्यारह बजे तक बधाई के फोन आते रहे। बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा है।
सवेरे छः बजे से ही फोन फिर बजने लगा। बधाइयों का तांता लग गया। फिर आठ बजे से पार्टी के लोग बधाई देने के लिए आने लगे। देखते देखते रौनक भाई का लॉन लोगों से भर गया। कुछ लोग मिठाई का डिब्बा लेकर आये थे।
दरअसल पिछली शाम रौनक भाई के विरोधी दल की एक चुनाव सभा हुई थी, जिसमें एक छुटभइये ने अपनी पार्टी के प्रति ख़ैरख्वाही दिखाने के चक्कर में रौनक भाई का नाम लेकर उन्हें ‘सुअर’ कह दिया था। तभी से राजनीतिक वातावरण गर्म हो गया था और रौनक भाई की पार्टी के लोग विरोधियों को नाना प्रकार के विशेषणों से नवाज़ने में लग गये थे।
रौनक भाई आपदा को अवसर में बदलने के पुराने खिलाड़ी थे। उन्होंने मौके को लपक लिया। तत्काल गालीबाज़ के सैकड़ों वीडियो वायरल हो गये। रौनक भाई का वीडियो भी वायरल हुआ जिसमें वे सन्त की मुद्रा में कह रहे थे कि यह अपमान उनका नहीं, देश के एक सौ चालीस करोड़ लोगों का है। जनता विरोधियों की इस बदज़बानी को कभी माफ नहीं करेगी और उसका जवाब वोट के मार्फत देगी।
पिछली शाम से रौनक भाई गद्गद थे। विरोधियों ने अचानक ही ‘सेल्फ गोल’ कर लिया था। रौनक भाई को पक्का भरोसा हो गया था कि इस गाली की बदौलत अगले चुनाव में उनके वोटों में कम से कम लाख डेढ़-लाख का इज़ाफा हो जाएगा। यह गाली विरोधियों को बहुत मंहगी पड़ेगी। उन्हें पता चला था कि विरोधियों में से कई अब पछता रहे थे, लेकिन अब पछताए होत का? तीर कमान से निकल चुका था।
रौनक भाई ने कई बार लॉन में इकट्ठी भीड़ को संबोधित किया। उन्होंने कहा, ‘कल भगवान ने हमें वरदान दिया है। यह गाली हमारे लिए वरदान ही साबित होने वाली है। गाली का हम कोई जवाब नहीं देंगे। जवाब जनता देगी। हम तो ‘जो तोकू कांटा बुवै, ताहि बोउ तू फूल’ वाले सिद्धांत पर चलेंगे। गाली का जवाब गाली में देने से सब गड़बड़ हो सकता है। सावधानी हटी, दुर्घटना घटी। हम तो कल से आन्दोलन करेंगे और जनता के दिमाग में ठोक ठोक कर भरेंगे कि हमें गाली दी गयी है, जिसे क्षमा नहीं किया जा सकता।
‘दूसरी बात यह कि भगवान का एक अवतार वराह अवतार है। इस तरह विरोधियों ने सुअर कह कर मुझे भगवान का अवतार बना दिया है। इसलिए मैं तो अपमानित से ज़्यादा सम्मानित महसूस कर रहा हूं। लेकिन मौके की नज़ाकत को देखते हुए आप लोग कल से सड़कों पर उतरें और जनता को बताएं कि हमारे विरोधी कितनी घटिया मानसिकता के लोग हैं। राजनीति में मौके का फायदा उठाने से चूकना बेवकूफी होती है। तो उठिए और काम पर लग जाइए। अब एक मिनट भी ज़ाया करना गुनाह होगा।’
पार्टी के एक सयाने बोले, ‘गाली दी है तो मानहानि का दावा होना चाहिए।’
रौनक भाई ने जवाब दिया, ‘ज़रूर होगा, लेकिन पहले अच्छी तरह से ‘विक्टिम कार्ड’ खेलना ज़रूरी है। जनता के मन में हमारी ‘इंसल्ट’ की बात पैठनी चाहिए।’
(ई-अभिव्यक्ति में मॉरीशस के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ साहित्यकार श्री रामदेव धुरंधर जी का हार्दिक स्वागत। आपकी रचनाओं में गिरमिटया बन कर गए भारतीय श्रमिकों की बदलती पीढ़ी और उनकी पीड़ा का जीवंत चित्रण होता हैं। आपकी कुछ चर्चित रचनाएँ – उपन्यास – चेहरों का आदमी, छोटी मछली बड़ी मछली, पूछो इस माटी से, बनते बिगड़ते रिश्ते, पथरीला सोना। कहानी संग्रह – विष-मंथन, जन्म की एक भूल, व्यंग्य संग्रह – कलजुगी धरम, चेहरों के झमेले, पापी स्वर्ग, बंदे आगे भी देख, लघुकथा संग्रह – चेहरे मेरे तुम्हारे, यात्रा साथ-साथ, एक धरती एक आकाश, आते-जाते लोग। आपको हिंदी सेवा के लिए सातवें विश्व हिंदी सम्मेलन सूरीनाम (2003) में सम्मानित किया गया। इसके अलावा आपको विश्व भाषा हिंदी सम्मान (विश्व हिंदी सचिवालय, 2013), साहित्य शिरोमणि सम्मान (मॉरिशस भारत अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 2015), हिंदी विदेश प्रसार सम्मान (उ.प. हिंदी संस्थान लखनऊ, 2015), श्रीलाल शुक्ल इफको साहित्य सम्मान (जनवरी 2017) सहित कई सम्मान व पुरस्कार मिले हैं। हम श्री रामदेव जी के चुनिन्दा साहित्य को ई अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों से समय समय पर साझा करने का प्रयास करेंगे।
आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय लघुकथा “– खून का रिश्ता…” ।)
~ मॉरिशस से ~
☆ कथा कहानी ☆ लघुकथा # १०० — खून का रिश्ता —☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆
(विशेष — कुछ शब्दों में एक महत्वपूर्ण कहानी)
विश्व प्रसिद्ध भूगोल वेत्ता अपने काम से अमरीका गया। एक अमरीकी ने उससे कहा, आपके हस्ताक्षर से एक जिज्ञासा हो रही है। आपके देश में इसी हस्ताक्षर के एक लेखक हैं। क्या वे आप के रिश्तेदार हैं? यह सुनने पर वह चौंक गया। वह लेखक तो उसका पिता था। पर उसने कहा, उन्हें जानता तो हूँ, लेकिन वे मेरे रिश्तेदार नहीं हैं। इस पलायन का उसका अपना कारण था। उससे उसके पिता की कृतियों के बारे में पूछ लिया जाता तो उसकी कोई कृति न पढ़ने के कारण वह उत्तर न कर पाता। पर उसका यह पलायन अंतिम नहीं था। वह घर लौटने पर अपने पिता के गले लग कर कहता, “मेरे पिता, मैंने विदेश में तुम्हारी चर्चा तो खूब सुनी।”
(“साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच “ के लेखक श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही गंभीर लेखन। शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है। साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।श्री संजय जी के ही शब्दों में ” ‘संजय उवाच’ विभिन्न विषयों पर चिंतनात्मक (दार्शनिक शब्द बहुत ऊँचा हो जाएगा) टिप्पणियाँ हैं। ईश्वर की अनुकम्पा से आपको पाठकों का आशातीत प्रतिसाद मिला है।”
हम प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाते रहेंगे। आज प्रस्तुत है इस शृंखला की अगली कड़ी। ऐसे ही साप्ताहिक स्तंभों के माध्यम से हम आप तक उत्कृष्ट साहित्य पहुंचाने का प्रयास करते रहेंगे।)
☆ संजय उवाच # ३२९ ☆ युद्ध के विरुद्ध…
मनुष्य कंदराओं में रहता था। सभ्यता के विकास के साथ उसने सामुदायिक उन्नति को आधार बनाया। परिणामस्वरूप नगर बसे, मनुष्य में अनेकानेक कलाओं का विकास हुआ। सारी विकास-यात्रा में तथापि भीतर का आदिम न्यूनाधिक बना रहा।
इसी आदिम का एक पर्यायवाची है युद्ध। वस्तुत: युद्ध मनुष्य को ज्ञात और मनुष्य द्वारा विकसित एक ऐसी विद्रूप कला है जो मनुष्यता को ही विनाश के मुहाने पर ले आई। केवल विगत सौ वर्ष का इतिहास उठाकर देखें तो पाएँगे कि प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध में तीन दशक से भी कम का अंतराल रहा। उसके बाद भी दुनिया निरंतर छोटे-बड़े युद्धों से जूझती रही है।
युद्ध की विभीषिका का दुष्परिणाम मनुष्य और मनुष्यता पर किस तरह से और कितना हुआ, इसका आँखें खोलने वाला एक प्रमाण 31 मार्च 2015 को एक फोटो के रूप में सामने आया था।
यह फोटो युद्धग्रस्त सीरिया के शरणार्थी शिविर में रहने वाली 4 वर्षीय बच्ची हुडिया का था। फोटो जर्नलिस्ट ने जब फोटो खींचने के लिए अपना कैमरा इस बच्ची की ओर घुमाया तो युद्धग्रस्त क्षेत्र की बिटिया ने कैमरे को बंदूक समझा और क्षण भर भी समय लगाए बिना भय से आत्मसमर्पण की मुद्रा में अपने दोनों हाथ ऊपर उठा दिए। ‘सरेंडर्ड’ शीर्षक का यह मर्मस्पर्शी चित्र शेष बची मनुष्यता के हृदय पटल पर गहराई से अंकित हो गया।
साथ ही यह चित्र अनेक प्रश्नों को विस्तृत कैनवास पर खड़ा कर गया। मनुष्य शनै:-शनै: युद्ध का आदी होता जा रहा है। युद्ध का आदी होने का अर्थ है कि मृत्यु और विनाश, बर्बरता और विद्रूपता अब हमारी संवेदना पर तुलनात्मक रूप से काफ़ी कम प्रभाव डालते हैं। यह प्रक्रिया आगे चलकर मनुष्य को पूरी तरह से संवेदनहीन कर देती है।
इससे भी अधिक घातक और दुखदाई है कि मानुष से अमानुष होने की इस यात्रा पर कोई चिंतित नहीं दिखाई देता। पिछले कुछ वर्षों से विश्व अनेक बड़े युद्ध देख रहा है। प्रकृति का निरंतर विनाश हो रहा है। मनुष्य के उन्माद ने अंतरिक्ष को प्रक्षेपास्रों का अड्डा बना दिया है तो सागर की गहराइयों में संहारक क्षमता वाली पनडुब्बियाँ उतार दी हैं। धरती, सागर, आकाश सब बारूद के ढेर पर बैठे हैं। शांति के लिए युद्ध को अनिवार्य बता कर नोबल प्राप्त कर सकने का हास्यास्पद अभियान भी देखने को मिला। सचमुच यह मनुष्य के मानसिक स्वास्थ्य पर विचार करने का समय है।
विचार करने पर खुली आँखों से दिखता तथ्य है कि महा शक्तियों के लिए युद्ध व्यापार हो चला है। हर कोई अपने तरीके से युद्ध बेच रहा है। जो युद्ध की परिधि में हैं, वे तिल-तिल कर जी रहे हैं, उनका मरना भी तिल- तिल कर ही है। जो प्रत्यक्ष युद्ध की परिधि से बाहर हैं उनके लिए युद्ध मनोरंजन भर है। बमों के धमाकों की, मिसाइल की, युद्ध के अंतरराष्ट्रीय समीकरणों की चर्चा करते समय प्राय: मारे जा रहे लोग, पीड़ित स्त्रियाँ, आतंकित बच्चे मनुष्य की आंखों में नहीं तैरते। कुछ देर युद्ध की ख़बरें देखना लोगों के लिए असंख्य चैनलों में एक और विकल्प भर रह गया है।
अपनी कविता ‘युद्ध के विरुद्ध’ स्मरण हो आई है-
कल्पना कीजिए,
आपकी निवासी इमारत
के सामने वाले मैदान में,
आसमान से एकाएक
टूटा और फिर फूटा हो
बम का कोई गोला,
भीषण आवाज़ से
फटने की हद तक
दहल गये हों
कान के परदे,
मैदान में खड़ा
बरगद का
विशाल पेड़
अकस्मात
लुप्त हो गया हो
डालियों पर बसे
घरौंदों के साथ,
नथुनों में हवा की जगह
घुस रही हो बारूदी गंध,
काली पड़ चुकी
मटियाली धरती
भय से समा रही हो
अपनी ही कोख में,
एकाध काले ठूँठ
दिख रहे हों अब भी
किसी योद्धा की
ख़ाक हो चुकी लाश की तरह,
अफरा-तफरी का माहौल हो,
घर, संपत्ति, ज़मीन के
सारे झगड़े भूलकर
बेतहाशा भाग रहा हो आदमी
अपने परिवार के साथ
किसी सुरक्षित
शरणस्थली की तलाश में,
आदमी की
फैल चुकी आँखों में
उतर आई हो
अपनी जान और
अपने घर की औरतों की
देह बचाने की चिंता,
बच्चे-बूढ़े, स्त्री-पुरुष
सबके नाम की
एक-एक गोली लिए
अट्टहास करता विनाश
सामने खड़ा हो,
भविष्य मर चुका हो,
वर्तमान बचाने का
संघर्ष चल रहा हो,
ऐसे समय में
चैनलों पर युद्ध के
विद्रूप दृश्य
देखना बंद कीजिए,
खुद को झिंझोड़िए,
संघर्ष के रक्तहीन
विकल्पों पर
अनुसंधान कीजिए,
स्वयं को पात्र बनाकर
युद्ध की विभीषिका को
समझने-समझाने का यह
मनोवैज्ञानिक अभ्यास है,
मनुष्यता को बचाए
रखने का यह यथासंभव प्रयास है!
अलबत्ता यह भी सच है की कभी-कभी युद्ध अपरिहार्य होता है। ‘शठे शाठ्यं समाचरेत्’ के सूत्र से सहमत होते हुए भी यथासंभव युद्ध रोकने के सारे प्रयास किए जाने चाहिएँ। अठारह अक्षौहिणी सेना को निगल जाने वाले महाभारत युद्ध को रुकवाने के लिए योगेश्वर भी दुर्योधन के पास गए थे। युद्ध तब भी अंतिम विकल्प था, अब भी अंतिम विकल्प ही होना चाहिए।
नौनिहालों का आत्मसमर्पण, मनुष्यता के आत्मसमर्पण की घंटी है। यदि हम सच्चे मनुष्य हैं तो बचपन के चेहरे से आत्मसमर्पण के भाव को हटवा कर फोटो खिंचवाने की प्रसन्नता में बदलने की मुहिम में जुटना होगा। मानवता कराह रही है, मानवता बुला रही है। क्या हम सुन पा रहे हैं इस स्वर को?
अध्यक्ष– हिंदी आंदोलन परिवार ☆ सदस्य– हिंदी अध्ययन मंडल, पुणे विश्वविद्यालय, एस.एन.डी.टी. महिला विश्वविद्यालय, न्यू आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस कॉलेज (स्वायत्त) अहमदनगर ☆ संपादक– हम लोग ☆ पूर्व सदस्य– महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ☆ ट्रस्टी- जाणीव, ए होम फॉर सीनियर सिटिजन्स ☆
मोबाइल– 9890122603
संजयउवाच@डाटामेल.भारत
writersanjay@gmail.com
☆ आपदां अपहर्तारं ☆
आपदां अपहर्तारं साधना संपन्न हुई। अगली साधना की जानकारी आपको शीघ्र ही दी जावेगी।
अनुरोध है कि आप स्वयं तो यह प्रयास करें ही साथ ही, इच्छुक मित्रों /परिवार के सदस्यों को भी प्रेरित करने का प्रयास कर सकते हैं। समय समय पर निर्देशित मंत्र की इच्छानुसार आप जितनी भी माला जप करना चाहें अपनी सुविधानुसार कर सकते हैं ।यह जप /साधना अपने अपने घरों में अपनी सुविधानुसार की जा सकती है।ऐसा कर हम निश्चित ही सम्पूर्ण मानवता के साथ भूमंडल में सकारात्मक ऊर्जा के संचरण में सहभागी होंगे। इस सन्दर्भ में विस्तृत जानकारी के लिए आप श्री संजय भारद्वाज जी से संपर्क कर सकते हैं।
≈ संपादक – हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈
(Captain Pravin Raghuvanshi—an ex Naval Officer, possesses a multifaceted personality. He served as a Senior Advisor in prestigious Supercomputer organisation C-DAC, Pune. He was involved in various Artificial Intelligence and High-Performance Computing projects of national and international repute. He has got a long experience in the field of ‘Natural Language Processing’, especially, in the domain of Machine Translation. He has taken the mantle of translating the timeless beauties of Indian literature upon himself so that it reaches across the globe. He has also undertaken translation work for Shri Narendra Modi, the Hon’ble Prime Minister of India, which was highly appreciated by him. He is also a member of ‘Bombay Film Writer Association’.
We present Capt. Pravin Raghuvanshi ji’s amazing poem “~ Bird of Destiny…~”. We extend our heartiest thanks to the learned author Captain Pravin Raghuvanshi Ji (who is very well conversant with Hindi, Sanskrit, English and Urdu languages) and his artwork.)
हिंदी-प्राध्यापक(सेवानिवृत्त) महारानी लक्ष्मीबाई शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भोपाल (म.प्र).
नई दुनिया, दैनिक भास्कर, वीणा, हंस, धर्मयुग, कादम्बिनी आदि पत्र-पत्रिकाओं में कविता और लघुकथाएँ प्रकाशित। पुस्तकः कविता के ज़रिए, मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के सौजन्य से प्रकाशित।
आज प्रस्तुत है आपका एक भावप्रवण कविता – झुके, ना हारे हैं हम…!
☆ ॥ कविता॥ झुके, ना हारे हैं हम…!☆ डॉ. रामेश्वरम तिवारी ☆
(आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी संस्कारधानी जबलपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। आपको आपकी बुआ श्री महीयसी महादेवी वर्मा जी से साहित्यिक विधा विरासत में प्राप्त हुई है । आपके द्वारा रचित साहित्य में प्रमुख हैं पुस्तकें- कलम के देव, लोकतंत्र का मकबरा, मीत मेरे, भूकंप के साथ जीना सीखें, समय्जयी साहित्यकार भगवत प्रसाद मिश्रा ‘नियाज़’, काल है संक्रांति का, सड़क पर आदि। संपादन -८ पुस्तकें ६ पत्रिकाएँ अनेक संकलन। आप प्रत्येक सप्ताह रविवार को “साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह” के अंतर्गत आपकी रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे। आज प्रस्तुत है – सॉनेट – जल दिवस।)
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “देश की मिट्टी…“।)
अभी अभी # ९५६ ⇒ आलेख – देश की मिट्टी श्री प्रदीप शर्मा
हम जिसे देश, वतन, राष्ट्र, भारत माता अथवा धरती माता कहते हैं, वह वास्तव में हमारे देश की मिट्टी ही तो होती है, कहीं काली, कहीं रेतीली, तो कहीं पथरीली।
मिट्टी से ही बना यह शरीर, पंच तत्वों में विलीन हो, इसी मिट्टी में तो समा जाता है।
हम छोटे थे, तो मिट्टी में बहुत खेलते थे। मां हमें दूध पिलाती थी, खिलाती पिलाती थी, फिर भी हम मिट्टी खाते थे। कई बार मां ने मुंह में उंगली डाल मिट्टी बाहर निकाली होगी, हमें मारा भी होगा, लेकिन अपने देश की मिट्टी का स्वाद किस मां के लाल ने नहीं चखा।।
हमें क्यों अपना ननिहाल बार बार याद आता है, क्योंकि वहां मिट्टी में खेलने से कोई नहीं रोकता था। मिट्टी के मकान होते थे मिट्टी के ही आंगन और ओटले होते थे, जिन्हें गोबर से लीपा जाता था। रोज नया चूल्हा जलता था, बढ़िया लिपा पुता हुआ। वहां दूध डेयरी से नहीं आता था, गाय खुद दूध देती थी। तब दूध के दो ही तो नाम होते थे, मां का दूध और गाय का दूध। हां, लेकिन मक्खन तो नानी ही निकालती थी।
हमारा देश और कहीं नहीं है, आज भी हमारे आसपास ही है। एक किसान अगर खेती कर रहा है, अपने खेत की रखवाली कर रहा है, अनाज पैदा कर रहा है, तो वह देश की सेवा ही तो कर रहा है। यही उसकी राष्ट्रीयता है, उसकी देशभक्ति है। अपने देश की मिट्टी से जुड़े रहना ही सच्ची राष्ट्रीयता है।।
देश की इसी मिट्टी के लिए कई रणबांकुरों ने अपने जीवन का बलिदान दिया है। ये माटी सभी की कहानी कहेगी। आप कभी हल्दी घाटी जाइए। महाराणा प्रताप का प्रताप देखिए, हम तो अपने घाव पर हल्दी लगाते हैं, योद्धाओं के लिए प्रकृति हल्दी घाटी बिछा देती है।
हम आज महानगरों के कांक्रीट जंगलों में आकर बस गए, मिट्टी के खिलौने भूल गए। जमीन बीघा एकड़ से सिमटकर स्क्वेयर फीट और इंच में आ गई। सर पर छत नहीं, पांवों के नीचे जमीं नहीं, 1, 2 और 3bhk में हमारी जिंदगी सिमटकर रह गई। इंसान कहां पहचाने मिट्टी और कहां खुला आसमान।।
ऐसे में, अचानक ही, मेरे अपने ही फ्लैट में हमारी बिटिया नर्सरी से दो नन्हे पौधे ले आई, मिट्टी में सने, पॉलीथीन से लिपटे। मुझे उनके लिए गमलों में मिट्टी तैयार करनी थी, और उन्हें सिर्फ गमलों में उतारना था।
जिन्हें बागवानी का और घर के पौधों की देखरेख का शौक है, वे वाकई देश की मिट्टी से ही जुड़े हैं। पौधों की सेवा भी किसी समाज सेवा अथवा ईश्वरीय सेवा से कम नहीं। नन्हीं खिलती कलियां और रंग बिरंगे फूलों की क्यारियां बच्चों की मुस्कान और किलकारियों से कम नहीं होती।।
गमले की मिट्टी में भी मुझे अपने देश की ही मिट्टी नजर आती है। इसी बहाने मैं रोज अपने देश की मिट्टी से तो जुड़ा हुआ हूं। देश की मिट्टी की गंध मुझे अपने गमलों में आती है, वही मेरा तिरंगा है, वही मेरा वंदे मातरम् है। देश की मिट्टी की गंध के आगे सभी सौगंध फीकी है, क्योंकि हमने अपने देश की मिट्टी का स्वाद चखा है …!!
विज्ञान की अन्य विधाओं में भारतीय ज्योतिष शास्त्र का अपना विशेष स्थान है। हम अक्सर शुभ कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त, शुभ विवाह के लिए सर्वोत्तम कुंडली मिलान आदि करते हैं। साथ ही हम इसकी स्वीकार्यता सुहृदय पाठकों के विवेक पर छोड़ते हैं। हमें प्रसन्नता है कि ज्योतिषाचार्य पं अनिल पाण्डेय जी ने ई-अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों के विशेष अनुरोध पर साप्ताहिक राशिफल प्रत्येक शनिवार को साझा करना स्वीकार किया है। इसके लिए हम सभी आपके हृदयतल से आभारी हैं। साथ ही हम अपने पाठकों से भी जानना चाहेंगे कि इस स्तम्भ के बारे में उनकी क्या राय है ?
☆ ज्योतिष साहित्य ☆ साप्ताहिक राशिफल (30 मार्च से 5 अप्रैल 2026) ☆ ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय ☆
परम पावन पर्व नवरात्रि समाप्त हो गया है। परंतु श्री हनुमान जी की हमारी और आपकी आराधना लगातार चलेंगी। इस बार के चौपाई इस प्रकार हैं।
जम कुबेर दिगपाल जहां ते,
कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।
हनुमान चालीसा की इस चौपाई के संपुट पाठ करने से यश कीर्ति की वृद्धि होती है, मान सम्मान बढ़ता है। “नाशे रोग हरे सब पीरा” नाम की पुस्तक में हनुमान चालीसा की चौपाइयों के संबंधित सभी उपायों का विस्तृत विवरण दिया हुआ है। इस पुस्तक को आप हमारे यहां से प्राप्त कर सकते हैं।
इसके उपरांत में अब आपको इस सप्ताह के ग्रहों के गोचर के बारे में बताऊंगा। सप्ताह इस सप्ताह सूर्य और शनि मीन राशि में, मंगल और बुध कुंभ राशि में, गुरु मिथुन राशि में, शुक्र मेष राशि में और राहु कुंभ राशि में मंगल और बुध के साथ में गोचर करेंगे।
आईये अब राशिवार राशिफल की चर्चा करते हैं।
मेष राशि
अविवाहित जातकों के लिए यह सप्ताह अच्छा रहेगा। उनके विवाह के प्रस्ताव आएंगे। प्रेम संबंधों में वृद्धि होगी। साथ ही प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता बढ़ेगी। अगर आप सावधानी से कार्य करेंगे तो कचहरी के कार्यों में विजय प्राप्त हो सकती है। गलत रास्ते से धन आने का योग है। व्यापारियों के लिए यह सप्ताह उत्तम है। जनप्रतिनिधियों के लिए यह सप्ताह ठीक रहेगा। अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए यह सप्ताह सामान्य है। विद्यार्थियों के लिए भी यह सप्ताह सामान्य ही रहेगा। इस सप्ताह आपको अपने कर्म पर ज्यादा विश्वास करना चाहिए। भाग्य से भी थोड़ी बहुत मदद मिल सकती है। आपको अपने संतान का सहयोग प्राप्त हो सकता है। इस सप्ताह आपके लिए तीन चार और पांच अप्रैल कार्यों को करने हेतु उपयुक्त हैं। एक और दो अप्रैल को आपको कोई भी कार्य बड़े सावधानी के साथ करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन राम रक्षा स्त्रोत का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।
वृष राशि
इस सप्ताह आपके पास धन आने का अच्छा योग है। अच्छे और बुरे दोनों रास्तों से धन आ सकता है। इस सप्ताह आपको अपने संतान से कोई विशेष मदद प्राप्त नहीं हो पाएगी। कचहरी के कार्यों में रिक्स ना लें। आपका स्वास्थ्य थोड़ा खराब हो सकता है। डायबिटीज और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। व्यापारियों के लिए यह सप्ताह सामान्य रहेगा। अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने वाणी पर इस सप्ताह कंट्रोल करना चाहिए। किसी से फालतू लड़ाई नहीं करना चाहिए। जनप्रतिनिधियों के लिए यह सप्ताह ठीक है। उनके प्रतिष्ठा में वृद्धि हो सकती है। विद्यार्थियों के लिए यह सप्ताह कम ठीक है। उनको सावधान रहना चाहिए। इस सप्ताह 30 और 31 मार्च आपके लिए परिणाम दायक हैं। तीन चार और पांच तारीख को आपको सतर्क होकर कार्यों को अंजाम देना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।
मिथुन राशि
कर्मचारी और अधिकारियों के लिए सप्ताह अत्यंत अच्छा रहेगा। जनप्रतिनिधियों के लिए यह सप्ताह सामान्य है। विद्यार्थियों के लिए सप्ताह ठीक रहेगा। व्यापारियों का व्यापार इस सप्ताह सामान्य गति से चलेगा। भाग्य से इस सप्ताह आप सभी को कम मदद प्राप्त होगी। आपको अपने परिश्रम पर ज्यादा विश्वास करना पड़ेगा। भाई बहनों के साथ संबंध ठीक नहीं रह पाएंगे। कर्मचारियों को अपने कार्यालय में अच्छा सम्मान प्राप्त होगा। इस सप्ताह आपके लिए एक और दो अप्रैल कार्यों को करने हेतु फलदायक है। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक-ठाक है। इस सप्ताह आपको चाहिए की आप प्रतिदिन गरीबों के बीच में चावल का दान दें तथा शुक्रवार को मंदिर पर जाकर पुजारी जी को सफेद वस्त्रो का दान करें। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।
कर्क राशि
इस सप्ताह आपको भाग्य का अच्छा साथ मिलेगा। भाग्य के सहारे आपके कार्य हो सकते हैं। कर्मचारी और अधिकारियों को इस सप्ताह थोड़ा सावधान रहना चाहिए। आप सभी को इस सप्ताह दुर्घटनाओं के प्रति सचेत रहना चाहिए। व्यय की मात्रा में बढ़ोतरी होगी। भाई बहनों के साथ संबंधों में तनाव आ सकता है। पेट में थोड़ा कष्ट भी हो सकता है। इस सप्ताह आपके लिए तीन चार और पांच तारीख सफलता दायक है। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक-ठाक है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन काली उड़द का दान करें तथा शनिवार को शनि मंदिर में जाकर शनि देव की आराधना करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।
सिंह राशि
व्यापारियों का व्यापार इस सप्ताह ठीक-ठाक चलेगा। कर्मचारियों अधिकारियों का भी यह सप्ताह सामान्य रहेगा। जनप्रतिनिधियों के लिए भी यह सप्ताह सामान्य होगा। आपके माताजी और पिताजी का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। भाग्य के स्थान पर आपको अपने पुरुषार्थ पर यकीन करना चाहिए। भाई बहनों के साथ संबंधों में तनाव आ सकता है। इस सप्ताह आपके लिए 30 और 31 मार्च सफलता प्राप्त करने के लिए उचित है। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक-ठाक है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन लाल मसूर की दाल का दान करें और मंगलवार को हनुमान जी के मंदिर में जाकर हनुमान चालीसा का वाचन करें। सप्ताह का शुभ दिन मंगलवार है।
कन्या राशि
यह सप्ताह आपके जीवनसाथी के लिए अत्यंत उत्तम है। उनका स्वास्थ्य ठीक-ठाक रहेगा। आपके माताजी और आपका स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। पिताजी के स्वास्थ्य में थोड़ी परेशानी हो सकती है। शत्रुओं से सप्ताह आपको सतर्क रहना चाहिए। दुर्घटनाओं से भी आपको सतर्क रहने की आवश्यकता है। इस सप्ताह आपके लिए एक और 2 अप्रैल विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए मददगार हैं। 30 और 31 मार्च को आपको सावधानीपूर्वक कार्यों को पूर्ण करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन भगवान शिव का दूध और जल से अभिषेक करें। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।
तुला राशि
इस सप्ताह अविवाहित जातकों के विवाह के उत्तम प्रस्ताव आएंगे। प्रेम संबंधों में वृद्धि होगी। नए प्रेम संबंध भी बन सकते हैं। भाग्य के प्रति आपको थोड़ा सतर्क रहना चाहिए। छात्रों की पढ़ाई में बाधा पड़ सकती है। आपको अपने संतान से सहयोग कम मिलेगा। इस सप्ताह आप आसानी से अपने शत्रुओं को पराजित कर सकते हैं, परंतु इसके लिए भी थोड़ा परिश्रम करना पड़ेगा। इस सप्ताह आपके लिए तीन चार और पांच अप्रैल लाभदायक है। एक और दो अप्रैल को अगर आप सावधानी बस कार्य नहीं करेंगे तो कार्यों में आपको नुकसान हो सकता है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन रुद्राष्टक का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है।
वृश्चिक राशि
यह सप्ताह आपके संतान के लिए काफी अच्छा रहेगा। संतान को उन्नति मिल सकती है। आपको भी संतान से अच्छा सहयोग भी प्राप्त होगा। छात्रों की पढ़ाई अच्छी चलेगी परीक्षा में उनको सफलता प्राप्त होगी। भाई बहनों के साथ संबंधों में थोड़ा तनाव हो सकता है। आपके पेट में कष्ट हो सकता है। दुर्घटनाओं के प्रति आपको सचेत रहना चाहिए। आपको अपने शत्रुओं से भी सतर्क रहना चाहिए। इस सप्ताह आपके लिए 30 और 31 मार्च अनुकूल है। तीन चार और पांच अप्रैल को आपको कार्यों को पूर्ण सतर्कता के साथ करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन मंगलवार है।
धनु राशि
जनप्रतिनिधियों के लिए यह सप्ताह काफी अच्छा रहेगा। उनको प्रतिष्ठा प्राप्त होगी। कर्मचारियों अधिकारियों के लिए यह सप्ताह सामान्य है। व्यापारियों के लिए सप्ताह ठीक है। भाई बहनों के साथ संबंध कम ठीक रहेंगे। भाग्य से मदद मिलेगी। यात्रा का योग बन सकता है। इस सप्ताह आपको अपने संतान से सहयोग नहीं मिल पाएगा। इस सप्ताह आपके लिए एक और दो अप्रैल कार्यों के लिए परिणाम दायक हैं। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक-ठाक हैं। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गरीब बच्चों के बीच में पुस्तकों का दान दें। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है।
मकर राशि
इस सप्ताह आपके पास सामान्य रूप से धन आ सकता है। भाई बहनों के साथ संबंध उत्तम रहेगा। जनप्रतिनिधियों के लिए यह सप्ताह थोड़ा कम ठीक है। भाग्य आपका साथ दे सकता है। छात्रों को इस सप्ताह पढ़ाई में परेशानी आ सकती है। गलत रास्ते से भी धन आने का योग है। इस सप्ताह आपके लिए तीन चार और पांच तारीख शुभ है। 30 और 31 मार्च के दिन कार्यों को करने के पहले पूरी प्लानिंग कर लेना चाहिए तथा सतर्कता पूर्वक कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गायत्री मंत्र का जाप करें। सप्ताह का शुभ दिन शनिवार है।
कुंभ राशि
इस सप्ताह आपके पास धन आने का अच्छा योग है। धन अच्छे और बुरे दोनों रास्तों से आ सकता है। भाई बहनों के साथ संबंधों में थोड़ा बहुत तनाव हो सकता है। माता जी का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। आपके अंदर क्रोध की मात्रा बढ़ सकती है। आपको खून संबंधी रोग जैसे डायबिटीज ब्लड प्रेशर से सावधान रहना चाहिए। जीवनसाथी का स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। पिताजी का स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। छात्रों की पढ़ाई में बाधा आ सकती है। इस सप्ताह आपके लिए 30 और 31 मार्च कार्यों को करने के लिए आनंददायक हैं। एक और दो अप्रैल को आपको कोई भी कार्य पूरी सजगता के साथ करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन काले कुत्ते को तंदूर की रोटी खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन शनिवार है।
मीन राशि
इस सप्ताह आपका आत्मविश्वास अत्यंत उच्च कोटि का रहेगा। स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। कचहरी के कार्यों में इस सप्ताह आपको सावधानी बरतना चाहिए। जनप्रतिनिधियों को अपने प्रतिष्ठा के प्रति सतर्क रहना चाहिए। भाई बहनों के साथ संबंधों में तनाव आ सकता है। दुश्मनों को आप आसानी से इस सप्ताह पराजित कर सकते हैं। आपके जीवन साथी को शारीरिक कष्ट हो सकता है। इस सप्ताह आपके लिए एक और दो अप्रैल कार्यों को करने के लिए उचित हैं। सप्ताह के बाकी दिनों में आपको सतर्क रहकर कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें तथा शनिवार को दक्षिण मुखी हनुमान जी के मंदिर में जाकर कम से कम तीन बार हनुमान चालीसा का वाचन करें। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है।
ध्यान दें कि यह सामान्य भविष्यवाणी है। अगर आप व्यक्तिगत और सटीक भविष्वाणी जानना चाहते हैं तो आपको मुझसे दूरभाष पर या व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाना चाहिए। मां शारदा से प्रार्थना है या आप सदैव स्वस्थ सुखी और संपन्न रहें। जय मां शारदा।