श्री यशोवर्धन पाठक
☆ पुस्तक चर्चा ☆ पानी राखिए – श्री अभिमन्यु जैन ☆ समीक्षा – श्री यशोवर्धन पाठक ☆
(ई-अभिव्यक्ति परिवार की ओर से श्री अभिमन्यु जैन जी को जन्मदिवस पर अशेष शुभकामनाएं)
☆ जन्म दिवस पर मंगल भाव सहित – प्रतिष्ठित व्यंग्यकार श्री अभिमन्यु जैन और उनकी कृति “पानी राखिए” – श्री यशोवर्धन पाठक ☆
व्यंग्य कर्मियों की लम्बी होती जा रही कतार में शामिल होने के लिए अब यह आवश्यक होता जा रहा है कि नयी कलम में विसंगतियों के नव्य संप्रेषण का साहस हो। यह भी जरुरी है कि व्यंग्यकार में अपनी विशिष्ट पहचान को रेखांकित करने योग्य कुछ नया और अलग हो। अभिमन्यु जैन ने व्यंग्य के इलाके में जानबूझकर चहलकदमी की है और अपने व्यंग्यों के लिए कथ्य और शिल्प की नव्यता तलाशी है। नये आलम्बनों से जूझते हुए उनके व्यंग्य अपने छोटे आकार में भी अनुभव के विस्तार का संकेत देते हैं। परिवेश की विद्रूपताओं को बेधने में व्यस्त अभिमन्यु जैन ने नये सिरे से चक्रव्यूह को तोड़ने का यत्न किया है, यही कम नहीं।
ये विश्लेषण है सुप्रसिद्ध साहित्यकार स्व. डा. बालेन्दु शेखर तिवारी का जिसने प्रतिष्ठित व्यंग्यकार श्री अभिमन्यु जैन की व्यंग्य कृति पानी राखिए की व्यंग्य रचनाओं की सटीकता और पठनीयता को प्रमाणित किया है।
श्री अभिमन्यु जैन
श्री अभिमन्यु जैन के व्यंग्य संग्रह पानी राखिए में प्रकाशित श्री बालेन्दु शेखर तिवारी के इस सटीक विश्लेषण पर जब हम गंभीरता से विचार करते हैं तो तो हमें अभिमन्यु जी की व्यंग्य रचनाओं पर उनकी ये सोच वर्तमान परिस्थितियों के संदर्भ में सामयिक और आवश्यक लगती है। आज की अव्यवस्थाओं और विषमताओं पर उनका व्यंग्य ऐसी चोट करता नजर आता है कि पाठक भी ऐसी व्यंग्य रचनाओं पर नये सिरे से सोचने के लिए बाध्य हो जाता है। व्यंग्य लेखन के क्षेत्र में अभिमन्यु जी के इस व्यंग्य संग्रह की पठनीयता को विभिन्न प्रबुद्ध जनों ने भी सहर्ष स्वीकार किया है। इस संबंध में जानकीरमण कालेज के प्राचार्य डा. अभिजात कृष्ण त्रिपाठी जी का मानना है कि हिन्दी साहित्यिक संसार में उनकी यह पुस्तक पानी राखिए अपना विशिष्ट स्थान बनाकर रहेगी, ऐसा ध्रुव विश्वास है। पुस्तक में त्रिपाठी जी ने भी व्यंग्य रचनाओं की रोचकता और उसके प्रभावी पन से सहमति जताते हुए लिखा है कि, इस संग्रह में जन्म दिन की बहुत बहुत बधाई, फूफाजी जैसे यथार्थवादी चित्रण उनकी रोचक लेखन शैली के उदाहरण हैं जो पाठकों को आद्योपांत बांधे रखते हैं और बार बार पढ़ने को प्रेरित करते हैं यही नहीं यत्र तत्र चर्चा का विषय बनाने के लिए उत्साहित भी करते हैं। एक सफल लेखन की यह सबसे प्रबल विशेषता कहीं जायेगी। देखा जाए तो एक व्यंग्यकार अपने आसपास जो देखता है और महसूस करता है वह कलम के माध्यम से कागज पर उतार देता है और चूंकि व्यंग्यकार की नजर अत्यंत पैनी होती है इसलिए उसके तीखे कटाक्ष के साथ उसका सृजन पाठकों को पठनीय भी लगता है। चूंकि अभिमन्यु जी एक प्रशासनिक अधिकारी भी रहे हैं इसलिए कार्यालयीन अव्यवस्थाओं को उन्होंने काफी नजदीक से देखा समझा है इसलिए उन्होंने सफलता पूर्वक इस कड़वे सच को भी अपनी व्यंग्य रचनाओं में व्यक्त किया है। इस व्यंग्य संग्रह की रचनाओं में हमें अभिमन्यु जी की गहरी और व्यापक सोच के दर्शन होते हैं। अभिमन्यु जी की इस पुस्तक में राजनीतिक, आध्यात्मिक, सामाजिक और पारिवारिक स्थितियों से संबंधित विभिन्न व्यंग्य रचनाएं संग्रहीत हैं इसलिए पाठक वर्ग को इन सभी रचनाओं से गहरे अपनेपन का अहसास होता है। इस कृति में कुछ ऐसी रचनाएं हैं जो कि अपनी रोचकता के कारण पाठकों को बेहद प्रभावित करती हैं जैसे चुनाव और मुफ्तखोरी, फिसलन, फुटपाथ, हड़ताल, अभिनंदन, बेईमान भर्ती केन्द्र, निधन से नेतागिरी, दीपावली: राष्ट्रीयकरण हो, दादाजी की याद में, महिला राजनीति, मुफ्त का चंदन, पानी राखिए, अच्छे पड़ोसी, फागुनी प्रेम, सरकारी जीप, पुतला तंत्र इत्यादि ऐसी ही व्यंग्य रचनाओं हैं जो प्रत्येक वर्ग को अपने अपने आसपास की रचऩायें प्रतीत होती हैं। संदर्भ प्रकाशन से प्रकाशित पानी राखिए व्यंग्य संग्रह में अभिमन्यु जी की 46 पठनीय और संग्रहणीय रचनायें शामिल हैं। आज़ जन्म दिवस के शुभ अवसर पर मंगल भाव सहित हम तो बस इतना ही कहेंगे कि आदरणीय श्री अभिमन्यु जैन जी की व्यंग्य रचनाएं जितनी प्रेरक और प्रभावी हैं उतना ही प्रभावी और प्रणम्य उनका व्यक्तित्व भी है।
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© श्री यशोवर्धन पाठक
पूर्व प्राचार्य, राज्य सहकारी प्रशिक्षण संस्थान, जबलपुर
संपर्क – डा. मिली गुहा अस्पताल के पीछे, गुप्तेश्वर, जबलपुर, मोबाइल 9407059752
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





























