(संस्कारधानी जबलपुर के हमारी वरिष्ठतम पीढ़ी के साहित्यकार गुरुवर डॉ. राजकुमार “सुमित्र” जी को सादर चरण स्पर्श । वे सदैव हमारी उंगलियां थामकर अपने अनुभव की विरासत हमसे समय-समय पर साझा करते रहते थे। इस पीढ़ी ने अपना सारा जीवन साहित्य सेवा में अर्पित कर दिया। वे निश्चित ही हमारे आदर्श हैं और प्रेरणास्रोत हैं। आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता – प्रायमरी का मास्टर…३।)
साप्ताहिक स्तम्भ – लेखनी सुमित्र की # २९८ ☆
☆ – प्रायमरी का मास्टर…३ ☆ स्व. डॉ. राजकुमार तिवारी “सुमित्र”
शायद आप कहें-
‘क्या मास्टरों ने तुझे
वकील किया है ?’
जी माई बाप
न तो मैं वकालत पढ़ा हूँ और
न किसी ने मुझे वकील किया है
मैं मास्टर हूँ, मैंने खुद ‘फील‘
किया है
लेकिन क्या कहें अपने राज को ?
क्या कुछ भी नहीं सूझता
इस बीसवीं सदी के सभ्य समाज को?
यह ठीक है कि हम दोषी ठहरा सकते हैं
ब्रिटिश राज को।
अब तो अपना ही राज है
जनता ही राजा है
तो ये वक्त का तकाजा है
कि समय रहते चेतना चाहिये
अपने शासन को,
कि ‘राष्ट्र का निर्माता‘ तरसता न रहे
दवा वस्त्र या राशन को।
कि अपनी सरकार करेगी कुछ विचार
मगर इसी संदर्भ में
एक कड़ी बात याद आती है-
कि भरोसे की भैंस
वैसे तो मुझे है भरोसा
अक्सर
पड़ा ही ब्याती है। इसलिये
समाज से भी कुछ कहना।
मेरा फर्ज है।
क्रमशः…
स्व डॉ. राजकुमार “सुमित्र”
साभार : डॉ भावना शुक्ल
112 सर्राफा वार्ड, सिटी कोतवाली के पीछे चुन्नीलाल का बाड़ा, जबलपुर, मध्य प्रदेश
≈ संस्थापकसंपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈
(प्रतिष्ठित कवि, रेखाचित्रकार, लेखक, सम्पादक श्रद्धेय श्री राघवेंद्र तिवारी जी हिन्दी, दूर शिक्षा, पत्रकारिता व जनसंचार, मानवाधिकार तथा बौद्धिक सम्पदा अधिकार एवं शोध जैसे विषयों में शिक्षित एवं दीक्षित। 1970 से सतत लेखन। आपके द्वारा सृजित ‘शिक्षा का नया विकल्प : दूर शिक्षा’ (1997), ‘भारत में जनसंचार और सम्प्रेषण के मूल सिद्धांत’ (2009), ‘स्थापित होता है शब्द हर बार’ (कविता संग्रह, 2011), ‘जहाँ दरक कर गिरा समय भी’ ( 2014) कृतियाँ प्रकाशित एवं चर्चित हो चुकी हैं। आपके द्वारा स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के लिए ‘कविता की अनुभूतिपरक जटिलता’ शीर्षक से एक श्रव्य कैसेट भी तैयार कराया जा चुका है। आज प्रस्तुत है आपका एक अभिनव गीत “उनकी छत पर कडी धूप...”।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ # २९५ ☆।। अभिनव गीत ।। ☆
☆ “उनकी छत पर कडी धूप...” ☆ श्री राघवेंद्र तिवारी ☆
(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “झूमके आया सावन…”।)
(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी जबलपुर से श्री राजेंद्र तिवारी जी का स्वागत। इंडियन एयरफोर्स में अपनी सेवाएं देने के पश्चात मध्य प्रदेश पुलिस में विभिन्न स्थानों पर थाना प्रभारी के पद पर रहते हुए समाज कल्याण तथा देशभक्ति जनसेवा के कार्य को चरितार्थ किया। कादम्बरी साहित्य सम्मान सहित कई विशेष सम्मान एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित, आकाशवाणी और दूरदर्शन द्वारा वार्ताएं प्रसारित। हॉकी में स्पेन के विरुद्ध भारत का प्रतिनिधित्व तथा कई सम्मानित टूर्नामेंट में भाग लिया। सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय रहा। हम आपकी रचनाएँ समय समय पर अपने पाठकों के साथ साझा करते रहेंगे। आज प्रस्तुत है आपका एक भावप्रवण कविता ‘भारत की आजादी …‘।)
(वरिष्ठतम साहित्यकार आदरणीय डॉ कुन्दन सिंह परिहार जी का साहित्य विशेषकर व्यंग्य एवं लघुकथाएं ई-अभिव्यक्ति के माध्यम से काफी पढ़ी एवं सराही जाती रही हैं। हम प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – “परिहार जी का साहित्यिक संसार” शीर्षक के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाते रहते हैं। डॉ कुंदन सिंह परिहार जी की रचनाओं के पात्र हमें हमारे आसपास ही दिख जाते हैं। कुछ पात्र तो अक्सर हमारे आसपास या गली मोहल्ले में ही नज़र आ जाते हैं। उन पात्रों की वाक्पटुता और उनके हावभाव को डॉ परिहार जी उन्हीं की बोलचाल की भाषा का प्रयोग करते हुए अपना साहित्यिक संसार रच डालते हैं।आज प्रस्तुत है आपकी एक अप्रतिम एवं विचारणीय व्यंग्य – ‘पेपर लीकेज का जिन्न‘। इस अतिसुन्दर रचना के लिए डॉ परिहार जी की लेखनी को सादर नमन।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – परिहार जी का साहित्यिक संसार # ३४५ ☆
☆ व्यंग्य ☆ पेपर लीकेज का जिन्न ☆ डॉ कुंदन सिंह परिहार ☆
पेपर लीकेज के मसले ने सरकारों की नींद आराम कर दी है। पूरे देश में हंगामा बरपा है। सरकारों को लगता है ये आंदोलनकारी जेन-ज़ी नहीं, बोतल से निकले जिन्न जी हैं। अभी तक ये कहां छिपे बैठे थे? समझ में नहीं आता कि इन्हें वापस बोतल में कैसे बन्द किया जाए। ये चुपचाप पुलिस की लाठियां खाकर भागने वाले, किताबों में डूबे रहने वाले संस्कारी छात्र अचानक जिम्मेदार लोगों से आंख में आंख डालकर सवाल कैसे करने लगे? घोर कलियुग! उस पर तुर्रा यह कि इनके साथ जेन-अल्फ़ा भी कुसंस्कार सीख रहा है, यानी बड़े मियां तो बड़े मियां, छोटे मियां सुबहान अल्लाह।
देश के बहुत से सयाने लोग लड़कों के नारों और उनके द्वारा प्रदर्शित प्लेकार्डों से दुखी हैं। ‘हाय,हाय, ये नेताओं के लिए कितनी गन्दी भाषा लिख और बोल रहे हैं। इनके संस्कार कहां गये?क्या इनके मां-बाप ने इन्हें यही सिखाया था? न किसी की शर्म, न लिहाज। राम, राम।’
कुछ दूसरे सयाने जवाब देते हैं— ‘हमारी पीढ़ी ने नयी पीढ़ी को कौन से संस्कार सिखाये हैं? संसद में सांसद दूसरे दलों के सांसदों के लिए कैसी भाषा का उपयोग करते हैं? सभी बड़े मंदिरों में रोज़ चोरी की खबरें आती हैं, परीक्षाओं के पेपर लीकेज से छात्रों का भविष्य चौपट हो रहा है, पार्टियों को खुले आम तोड़कर सरकारें बनायी जाती हैं, बड़े-बड़े सन्त जेल की हवा खा रहे हैं, सिद्ध भ्रष्ट बड़ी कुर्सियों पर बैठे हैं, चतुर लोग बैंकों का हज़ारों करोड़ हज़म करके विदेश में मौज कर रहे हैं, हजारों करोड़ से बने पुल उद्घाटन से पहले गिर रहे हैं, नयी बनी एक्सप्रेस-वे चटक रही हैं, नये बने एयरपोर्ट पहली बरसात में चौधार आंसू टपका रहे हैं, महापुरुषों और ऋषि-मुनियों की नयी बनी मूर्तियां हवा के झोंके से गिर रही हैं। यह सब नयी पीढ़ी देख रही है और समझ रही है, इसलिए उस पर हमारे नैतिकता के भाषणों से कोई असर नहीं होने वाला। ये कोई दूध-पीते बच्चे नहीं हैं। इस पीढ़ी के पास हमसे ज़्यादा समझ है। वह हमारी पीढ़ी के पाखंड को खूब समझ रही है।’
सुन कर संस्कारों की दुहाई देने वाले सयाने मौन साध लेते हैं।
सरकारों में भगदड़ मची है। इस लीकेज को कैसे बन्द किया जाए। कमेटियां बन रही हैं। कुछ पकड़-धकड़ भी हुई है। कमेटियों से सुझाव आता है कि लीकेज के दोषियों के लिए सख़्त सज़ा का प्रावधान हो। दस साल की सज़ा और दस करोड़ जुर्माने पर सहमति बनती है।
एक मसखरा सवाल करता है, ‘अपराधी के पास दस करोड़ की संपत्ति नहीं हुई तो वसूली कैसे होगी?’
छात्र इन सुझावों पर आपत्ति करते हैं, कहते हैं, ‘ये सब लीकेज के बाद के उपाय हैं। इनसे छात्रों का नुकसान कैसे पूरा होगा? अंग्रेज़ी की कहावत के अनुसार घोड़े के भाग जाने के बाद अस्तबल का दरवाज़ा बन्द किया जाएगा। सरकार यह बताये कि लीकेज रोकने के लिए क्या किया गया है।’
सरकारें फिर परेशान हैं। फिर कमेटियां बैठती हैं। फिर मगजमारी होती है। लीकेज रोकने के सुझाव मांगे जाते हैं। छात्रों की तरफ से सुझाव आता है कि परीक्षाओं का पूरा काम सौ प्रतिशत ईमानदार और कठोर निर्णय लेने वाले अधिकारियों को सौंपा जाए। अब सौ प्रतिशत ईमानदार अधिकारियों की खोज में दौड़भाग शुरू होती है। तुरन्त ‘ऑनेस्टी टेस्टिंग मीटर’ तैयार करवाए जाते हैं और सौ से ज़्यादा अधिकारी इन मीटरों से लैस होकर देश के कोने-कोने में निकल पड़ते हैं। उच्च अधिकारी सारे वक्त उनसे रिपोर्ट लेते हैं।
ज़्यादातर मामलों मैं रिपोर्ट मिलती है कि ईमानदार तो बहुत मिल रहे हैं लेकिन अब तक सौ प्रतिशत वाला बन्दा नहीं मिला है। उच्च अधिकारी माथे का पसीना पोंछते हैं, कहते हैं, ‘कोई बात नहीं। लगे रहो। कामयाबी ज़रूर मिलेगी।’
तो भाइयो, सौ प्रतिशत ईमानदार खोजने की कोशिश अभी ज़ारी है। हम भी दुआ करते हैं कि अधिकारियों को इस काम में जल्दी सफलता मिले। वैसे यह गांधी और बुद्ध का देश है। यहां सौ प्रतिशत ईमानदार आदमी नहीं मिला तो बड़ी नककटई हो जाएगी।
(ई-अभिव्यक्ति में मॉरीशस के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ साहित्यकार श्री रामदेव धुरंधर जी का हार्दिक स्वागत। आपकी रचनाओं में गिरमिटया बन कर गए भारतीय श्रमिकों की बदलती पीढ़ी और उनकी पीड़ा का जीवंत चित्रण होता हैं। आपकी कुछ चर्चित रचनाएँ – उपन्यास – चेहरों का आदमी, छोटी मछली बड़ी मछली, पूछो इस माटी से, बनते बिगड़ते रिश्ते, पथरीला सोना। कहानी संग्रह – विष-मंथन, जन्म की एक भूल, व्यंग्य संग्रह – कलजुगी धरम, चेहरों के झमेले, पापी स्वर्ग, बंदे आगे भी देख, लघुकथा संग्रह – चेहरे मेरे तुम्हारे, यात्रा साथ-साथ, एक धरती एक आकाश, आते-जाते लोग। आपको हिंदी सेवा के लिए सातवें विश्व हिंदी सम्मेलन सूरीनाम (2003) में सम्मानित किया गया। इसके अलावा आपको विश्व भाषा हिंदी सम्मान (विश्व हिंदी सचिवालय, 2013), साहित्य शिरोमणि सम्मान (मॉरिशस भारत अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 2015), हिंदी विदेश प्रसार सम्मान (उ.प. हिंदी संस्थान लखनऊ, 2015), श्रीलाल शुक्ल इफको साहित्य सम्मान (जनवरी 2017) सहित कई सम्मान व पुरस्कार मिले हैं। हम श्री रामदेव जी के चुनिन्दा साहित्य को ई अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों से समय समय पर साझा करने का प्रयास करेंगे।
आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय गद्य भँवर “– नामालूम कारागाह…” ।)
~ मॉरिशस से ~
☆ कथा कहानी ☆ गद्य भँवर # ११६ — नामालूम कारागाह —☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆
(गद्य – भँवर : मेरा एक अभिनव गद्यात्मक प्रयोग)
(150 शब्द – सीमा’ के आधार पर ‘गद्य भँवर’ का लेखन मेरा एक श्रमसाध्य प्रयोग है। अभी जो रचना मैं लिख रहा हूँ यह उसी की अगली कड़ी है। हो सकता है इसे उलझा सा मान कर सन्देहास्पद कहा जाना शुरु हो जाए। पर मैं तो यह मानने में तटस्थ रहूँगा लिखा तो मैंने अर्थ के लिए ही है।)
विद्वान सिल्वानो को सूर्योदय के वक्त अनुभूति हुई संसार का सब से बड़ा ज्ञान कहीं कारागाह में बंद है। अपनी इस अनुभूति ने तो उसे बहुत उद्वेलित किया। न हुआ तो भी हुआ सा हुआ, उसे लोगों को चिट्ठियाँ लिख कर पूछना पड़ा क्या किसी को उस कारागाह का पता मालूम है? उसी दिन सूर्यास्त के वक्त सिल्वानो की अनुभूति हुई उसके पास दुनिया भर से चिट्ठियाँ आई हैं जिनमें लिखा हुआ है संसार का सब से बड़ा ज्ञान कहीं कारागाह में बंद है। क्या तुम्हें वह कारागाह मालूम है?
(“साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच “ के लेखक श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही गंभीर लेखन। शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है। साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।श्री संजय जी के ही शब्दों में ” ‘संजय उवाच’ विभिन्न विषयों पर चिंतनात्मक (दार्शनिक शब्द बहुत ऊँचा हो जाएगा) टिप्पणियाँ हैं। ईश्वर की अनुकम्पा से आपको पाठकों का आशातीत प्रतिसाद मिला है।”
हम प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाते रहेंगे। आज प्रस्तुत है इस शृंखला की अगली कड़ी। ऐसे ही साप्ताहिक स्तंभों के माध्यम से हम आप तक उत्कृष्ट साहित्य पहुंचाने का प्रयास करते रहेंगे।)
☆ संजय उवाच # ३४९ ☆ कलयुग केवल नाम अधारा…
राम नाम अवलंब बिनु परमारथ की आस।
बरसत वारिद बूँद गहि चाहत चढ़न अकास।।
श्री राम का नाम परमार्थ अर्थात धर्म, अर्थ, काम मोक्ष प्रदान करता है। उनके नाम के बिना भवसागर से पार होने की कल्पना कुछ ऐसी ही है, जैसे कोई बारिश की बूँदों के सहारे आकाश में जाना चाहता हो। अर्थ स्पष्ट है, श्री राम का नाम तारणहार है।
श्री राम के नाम को, उनकी अतुल्य जीवनयात्रा को घर-घर और जन-जन तक जनभाषा में पहुँचानेवाले ग्रंथ का नाम है, रामचरितमानस। कौशल्या हितकारी राम से रणकर्कश श्री राम की कथा है रामचरितमानस, राजा राम से लोकनायक श्री राम होने की गाथा है रामचरितमानस। रामचरितमानस श्रीराम के व्यक्तित्व और कृतित्व की अशेष यात्रा है। रामचरितमानस में को अवधी भाषा में लिखा गया है।
गोस्वामी तुलसीदास जी ने इस अमर कृति का लेखन विक्रम संवत 1631 तदनुसार ईस्वी सन 1574 को मंगलवार श्री रामनवमी के दिन आरंभ किया था। यह लेखन 2 वर्ष 7 महीने और 26 दिन चला। विक्रम संवत 1633 अर्थात ईस्वी सन 1576 को श्री राम विवाह के दिन यह संपन्न हुआ।
रामचरितमानस में कुल सात खंड / अध्याय हैं, बालकांड, अयोध्याकांड, अरण्यकांड, किष्किन्धाकांड, सुन्दरकांड, लंकाकांड और उत्तरकांड।
मानस में संस्कृत और प्राकृत के कुल मिलाकर 18 छंदों में सृजन हुआ है। रामचरितमानस में कुल 10902 पद हैं। इनमें 9388 चौपाई हैं। मानस में 1172 दोहा हैं। इसमें 87 सोरठा हैं। इस महाकाव्य में 208 छंद हैं जिनमें हरिगीतिका, त्रिभंगी, तोमर, चौपैया सम्मिलित हैं। इस कालजयी ग्रंथ में 47 श्लोक हैं। इन श्लोकों में शार्दूलविक्रीडित, अनुष्टुप, प्रमाणिका, वंशस्थ, उपजाति, मालिनी, वसंततिलका, रथोद्धता, भुजंगप्रयात, तोटक, स्रग्धरा हैं।
यद्यपि स्थूल रूप से देखें तो रामचरितमानस, रामकथा है, तथापि सूक्ष्म अवलोकन-अध्ययन करें तो पाएँगे कि इसके अक्षर-अक्षर में जीवनमूल्य और नीतिमत्ता साक्षात दृष्टिगोचर होते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि श्री राम का जीवनवृत्त ही ऐसा है। संभवत: यही कारण था, जिसने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त से लिखवाया,
राम, तुम्हारा चरित स्वयं ही काव्य है।
कोई कवि बन जाय, सहज संभाव्य है।।
रामचरितमानस ने श्री राम को एक अनन्य व्यक्तित्व के रूप में स्थापित किया। राम मर्यादापुरुषोत्तम हैं, लोकहितकारी हैं।राम एकमेवाद्वितीय हैं।
रामचरितमानस पढ़ना अर्थात सदाचार, नीतिमत्ता और जीवन के आदर्श पढ़ना। विशेषकर उत्तरभारत में तो मानस के दोहे और चौपाइयाँ, लोकोक्तियों के समान चलन में हैं।
अवधी में होने के कारण रामचरितमानस सार्वजनीन हुआ, जन-जन की जिह्वा का गान बना। जिस तरह बालक को दादी, नानी कहानी सुनाती हैं, कुछ उसी तरह हर आयुसमूह के लिए दादी, नानी की लोककथा बना रामचरितमानस। यही कारण है कि गोस्वामी तुलसीदास रचित मानस का पारायण आगे चलकर परम्परा बना।
वस्तुत: संसार रूपी सागर में हर मनुष्य एक घड़ा है, एक घट है। इस घट में रावण का निवास है पर श्रीराम का भी वास है। मनुष्य से अपेक्षित है कि वह भीतर के श्रीराम का जागरण और अंतर्भूत रावण का मर्दन करे।अपने अवगुणों का दहन, और रामत्व का जागरण ही रामचरितमानस का सच्चा पारायण है।
‘रामत्व’ की अनुकम्पा गोस्वामी तुलसीदास को प्राप्त हुई थी। तभी श्रीरामचरितमानस में आपने लिखा,
जड़ चेतन जग जीव जत सकल राममय जानि।
बंदउँ सब के पद कमल सदा जोरि जुग पानि॥
अर्थात जगत में जितने जड़ और चेतन जीव हैं, सबको राममय जानकर मैं उन सबके चरणकमलों की सदा दोनों हाथ जोड़कर वन्दना करता हूँ।
गोस्वामी जी के कविरूप का ध्रुवतारा है रामचरितमानस। कहा गया है,
कलयुग केवल नाम अधारा।
सुमिर सुमिर नर उतरहिं पारा।
कलयुग में केवल श्री राम का नाम एक आधार है। उनके सुमिरन मात्र से, केवल उनके स्मरण से मनुष्य भवसागर पार हो जाता है।
श्री राम के चरित के माध्यम से जीवन की ज्ञात, अज्ञात स्थितियों को जानने, समझने और हल की दिशा पर प्रकाश डालने का माध्यम है रामचरितमानस। कालजयी साहित्य का सार्वकालिक उदाहरण है रामचरितमानस।
श्रावण शुक्ल सप्तमी को गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती थी। विश्व को रामचरितमानस जैसा अनन्य महाकाव्य देनेवाले गोस्वामी जी को नमन।
अध्यक्ष– हिंदी आंदोलन परिवार ☆ सदस्य– हिंदी अध्ययन मंडल, पुणे विश्वविद्यालय, एस.एन.डी.टी. महिला विश्वविद्यालय, न्यू आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस कॉलेज (स्वायत्त) अहमदनगर ☆ संपादक– हम लोग ☆ पूर्व सदस्य– महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ☆ ट्रस्टी- जाणीव, ए होम फॉर सीनियर सिटिजन्स ☆
मोबाइल– 9890122603
संजयउवाच@डाटामेल.भारत
writersanjay@gmail.com
☆ आपदां अपहर्तारं ☆
श्रावण साधना गुरुवार दि. 30 जुलाई से आरंभ होकर शनिवार 28 अगस्त (रक्षाबंधन) तक चलेगी
इस साधना में-
ॐ नमः शिवाय का मालाजप होगा।
गोस्वामी तुलसीदास रचित रुद्राष्टकम् का पाठ करेंगे।
इस बार हम आदि शंकराचार्य के निर्वाण षटकम् / वैराग्य षटकम् का भी प्रतिदिन कम से कम एक पाठ अवश्य करेंगे।
मालाजप, रुद्राष्टकम्, निर्वाण षटकम् के साथ आत्मपरिष्कार व ध्यानसाधना भी नियमित रूप से चलेंगे।
हमारा प्रयास है कि महत्वपूर्ण स्तोत्रों का अधिकाधिक प्रसार हो।
≈≈
≈ संस्थापक संपादक – हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈
(आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी संस्कारधानी जबलपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। आपको आपकी बुआ श्री महीयसी महादेवी वर्मा जी से साहित्यिक विधा विरासत में प्राप्त हुई है । आपके द्वारा रचित साहित्य में प्रमुख हैं पुस्तकें- कलम के देव, लोकतंत्र का मकबरा, मीत मेरे, भूकंप के साथ जीना सीखें, समय्जयी साहित्यकार भगवत प्रसाद मिश्रा ‘नियाज़’, काल है संक्रांति का, सड़क पर आदि। संपादन -८ पुस्तकें ६ पत्रिकाएँ अनेक संकलन। आप प्रत्येक सप्ताह रविवार को “साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह” के अंतर्गत आपकी रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता – एक साथ देश की कुशल सदा मनाइए।।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह # २९० \ ☆
☆ एक साथ देश की कुशल सदा मनाइए।।☆ आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ ☆
विज्ञान की अन्य विधाओं में भारतीय ज्योतिष शास्त्र का अपना विशेष स्थान है। हम अक्सर शुभ कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त, शुभ विवाह के लिए सर्वोत्तम कुंडली मिलान आदि करते हैं। साथ ही हम इसकी स्वीकार्यता सुहृदय पाठकों के विवेक पर छोड़ते हैं। हमें प्रसन्नता है कि ज्योतिषाचार्य पं अनिल पाण्डेय जी ने ई-अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों के विशेष अनुरोध पर साप्ताहिक राशिफल प्रत्येक शनिवार को साझा करना स्वीकार किया है। इसके लिए हम सभी आपके हृदयतल से आभारी हैं। साथ ही हम अपने पाठकों से भी जानना चाहेंगे कि इस स्तम्भ के बारे में उनकी क्या राय है ?
☆ ज्योतिष साहित्य ☆ साप्ताहिक राशिफल (24 अगस्त से 30 अगस्त 2026) ☆ ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय ☆
जय श्री राम। कविवर श्रेष्ठ श्री कुमार विश्वास जी के द्वारा रचित भजन की एक लाइन है “राम राजा भी हैं और तपस्वी भी हैं”। यह पंक्ति श्री रामचंद्र जी के पूरे व्यक्तित्व को चित्रित करती हैं। भजन शब्द का अर्थ होता है किसी को बार-बार याद करना और अगर आप नियमानुसार भजन करेंगे तो मृत्यु के उपरांत रघुवर पुर अर्थात बैकुंठ या अयोध्या पहुंचेंगे और वहां पर आपको हरि भक्त कहा जाएगा। श्री राम जी के व्यक्तित्व में ही श्री हनुमान जी पूरी तरह से समाहित है। श्री हनुमान जी को पाने का एक अच्छा तरीका है श्री हनुमान चालीसा का भजन और श्री हनुमान चालीसा की आज की चौपाई है
अन्त काल रघुबर पुर जाई |
जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई ||
इस चौपाई के संपुट पाठ करने से हनुमत कृपा प्राप्त होती है। यह सभी दुखों का नाश करती है और आपका बुढ़ापा और परलोक दोनो सुधारती है।
नाशे रोग हरे सब पीरा” नाम की पुस्तक में श्रीहनुमान चालीसा की चौपाइयों से संबंधित सभी उपायों का विस्तृत विवरण दिया हुआ है। इस पुस्तक को आप हमारे यहां से प्राप्त कर सकते हैं।
अब मैं पंडित अनिल पाण्डेय आपको इस सप्ताह अर्थात 24 अगस्त से 30 अगस्त 2026 तक के सप्ताह के साप्ताहिक राशिफल के बारे में बताऊंगा। परंतु राशिफल के पहले मैं आपको इस सप्ताह में ग्रहों के गोचर के बारे में पूरी जानकारी दूंगा। इस सप्ताह शुक्र कन्या राशि में, सूर्य और बुध सिंह राशि में, मंगल मिथुन राशि में, गुरु कर्क राशि में, शनि वक्री होकर मीन राशि में तथा राहु कुंभ राशि में गोचर करेंगे। आईये अब राशिवार राशिफल की चर्चा करते हैं।
मेष राशि
इस सप्ताह आपके प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। माता जी का स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। भाग्य से मदद मिलेगी। छात्रों की पढ़ाई अच्छी चलेगी। आपको अपने संतान से सहयोग प्राप्त होगा। आपके संतान को विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त होगी। अगर आप बीमार चल रहे हैं तो आपके स्वास्थ्य में निरंतर सुधार होगा। अधिकारी और कर्मचारियों को इस सप्ताह सावधान रहकर अपने कार्यों को करना चाहिए। व्यापारियों के लिए सप्ताह ठीक रहेगा। इस सप्ताह आपके लिए 25, 26 और 27 तारीख सफलता दायक है। 30 तारीख को आपको सावधान रहकर अपने कार्यों को निपटाना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन काले उड़द की दाल का दान करें और शनिवार को शनि मंदिर में जाकर शनि देव की आराधना करें। सप्ताह का शुभ दिन मंगलवार है।
वृष राशि
भाई बहनों के साथ आपके संबंध ठीक-ठाक रहेंगे। आपके प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। आपके संतान के लिए यह सप्ताह अच्छा रहेगा। भाग्य से मदद मिलने की संभावना थोड़ा कम है। आपको अपने संतान से अच्छा सहयोग प्राप्त होगा। विद्यार्थियों की पढ़ाई ठीक चलेगी। माता जी का स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। आपका और आपके जीवन साथी का स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। इस सप्ताह आपके लिए 27, 28 और 29 तारीख सफलता प्राप्त करने के लिए उचित है। 24 तारीख को आपको सचेत रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन राम रक्षा स्त्रोत का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है।
मिथुन राशि
इस सप्ताह आपके धन लाभ में वृद्धि होगी। कर्मचारी एवं अधिकारियों के लिए यह सप्ताह ठीक रहेगा। दुर्घटनाओं से आप इस सप्ताह बचेंगे। भाई बहनों के साथ आपका संबंध ठीक रहेगा। आपको अपने प्रतिष्ठा के प्रति सचेत रहना चाहिए। कई लोग आपकी प्रतिष्ठा के हनन के लिए सक्रिय रहेंगे। भाई बहनों के साथ संबंध ठीक रहेगा। इस सप्ताह आपके लिए 24 और 30 तारीख कार्यों को करने के लिए उपयोगी है। 25, 26 और 27 तारीख को आपको सावधान रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन काले कुत्ते को तंदूर की बनी रोटी खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।
कर्क राशि
इस सप्ताह आपके पास धन होने का अच्छा योग है। थोड़े से प्रयास में अधिक धन की प्राप्ति होगी। कचहरी के कार्यों के प्रति सतर्क रहें। अगर आप सावधान नहीं रहेंगे तो आपको नुकसान होगा। भाग्य से थोड़ी बहुत मदद मिल सकती है। भाई बहनों के साथ संबंधों में तनाव हो सकता है। आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। माताजी और पिताजी का स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। प्रेम संबंध में वृद्धि संभव है। इस सप्ताह आपके लिए 25, 26 और 27 की दोपहर तक का समय कार्यों को करने के लिए मददगार है। सप्ताह के बाकी दिनों में आपको सचेत रहकर कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें और शनिवार को दक्षिण मुखी हनुमान जी के सामने बैठकर कम से कम तीन बार हनुमान चालीसा का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।
सिंह राशि
इस सप्ताह आपका आत्मविश्वास अच्छा रहेगा। व्यापार में वृद्धि होगी। कार्यों को करने में आपकी दिलचस्पी बढ़ेगी। भाई बहनों के साथ संबंधों में थोड़ा तनाव हो सकता है। धन आने का योग है। खर्चों में वृद्धि संभव है। इस वर्ष आपके यहां शादी ब्याह या जमीन की खरीदी या ऐसा कोई अन्य कार्य हो सकता है जिसमें काफी मात्रा में धन व्यय हो। इस सप्ताह आपके लिए 27 की दोपहर के बाद से लेकर 28 और 29 तारीख कार्यों को करने में के लिए लाभप्रद है। 25, 26 और 27 की दोपहर तक तथा 30 अगस्त का समय कार्यों को करने के लिए कम उचित है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन सोमवार है।
कन्या राशि
अविवाहित जातकों के लिए यह सप्ताह अच्छा रह सकता है। विवाह के प्रस्ताव आएंगे। पुराने संबंधों में वृद्धि होगी। नए संबंध भी बन सकते हैं। धन आने का सुंदर योग है। भाई बहनों के साथ संबंध ठीक रहेगा। कचहरी के कार्यों में सावधानी बरतें। सफलता मिल सकती है। कर्मचारी और अधिकारियों को इस सप्ताह सावधान रहकर अपने कार्यों को करना चाहिए इस सप्ताह आपके लिए 24 और 30 अगस्त विभिन्न प्रकार से फल दायक हैं 27 28 और 29 तारीख को आपको होशियार रहकर अपने कार्यों को करना चाहिए इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन लाल मसूर की दाल का दान करें और मंगलवार को हनुमान जी के मंदिर में जाकर कम से कम तीन बार हनुमान चालीसा का वचन करें सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।
तुला राशि
इस सप्ताह आपके पास धन आएगा। धन आने की मात्रा आपके द्वारा किए जा रहे कर्म पर निर्भर होगी। अगर आप योजनाबद्ध ढंग से अधिक मेहनत करेंगे तो अधिक धन आएगा। परंतु अगर आप मेहनत नहीं करेंगे तो अल्प मात्रा में धन की प्राप्ति हुई होगी। व्यापारियों का व्यापार अच्छा चलेगा। कर्मचारी एवं अधिकारियों के लिए भी यह सप्ताह काफी अच्छा रहेगा। आपको अपने संतान से इस सप्ताह सहयोग नहीं मिल पाएगा। भाग्य से भी आपको कम मदद मिलेगी अर्थात आप जितना मेहनत करेंगे उतना ही आपको प्राप्ति होगी। इस सप्ताह आपके लिए 25, 26 और 27 तारीख परिणाम दायक है। 30 अगस्त को आपको सजग रहकर अपने कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गाय को हरा चारा खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।
वृश्चिक राशि
कर्मचारी और अधिकारियों के लिए सप्ताह काफी अच्छा रहेगा। व्यापारियों के व्यापार में वृद्धि हो सकती है। अगर आप सरकारी ठेके लेते हैं तो आपको इस सप्ताह उसमें काफी लाभ हो सकता है। धन लाभ होने की पूर्ण संभावना है। भाग्य से भी आपको मदद मिलेगी। भाई बहनों के साथ तनाव हो सकता है। आपको अपने संतान से सहयोग प्राप्त होगा। इस सप्ताह आपको दुर्घटनाओं से सतर्क रहने की आवश्यकता है। इस सप्ताह आपके लिए 27, 28 और 29 तारीख शुभ है। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक-ठाक हैं। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन शिव पंचाक्षर मंत्र का जाप करें। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है।
धनु राशि
इस सप्ताह आपको भाग्य से मदद मिलेगी। थोड़े से प्रयासों से भी आपको अधिक मात्रा में सफलता मिलेगी। अर्थात सफलता की मात्रा प्रयास से अधिक रहेगी। कर्मचारी एवं अधिकारियों को इस सप्ताह सतर्क रहना चाहिए। आपका स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। पिताजी और जीवनसाथी के स्वास्थ्य के प्रति आपको थोड़ा सतर्क रहना चाहिए। भाई बहनों के साथ इस सप्ताह आपके संबंध थोड़ा दूरी के हो सकते हैं। इस सप्ताह आपके लिए 24 और 30 अगस्त लाभप्रद हैं। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक-ठाक हैं। इस सप्ताह आपको चाहिए कि प्रतिदिन रुद्राष्टक का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।
मकर राशि
आपके जीवनसाथी के लिए यह सप्ताह अच्छा रहेगा। उनको जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त हो सकती है। आपके माता-पिता जी का स्वास्थ्य सामान्य रहेगा अर्थात जैसे पहले था वैसा ही रहेगा। कचहरी के कार्यों में सफलता मिल सकती है, परंतु उसके लिए आपको अत्यंत सावधानी पूर्वक कार्य करना होगा। इस सप्ताह आपको अपने भाग्य से मदद नहीं मिल पाएगी। आपको अपने कर्म पर ही विश्वास करना होगा। भाई बहनों के साथ संबंध थोड़ा सामान्य नहीं रह पाएंगे। इस सप्ताह आपके लिए 25, 26 और 27 तारीख विभिन्न कार्यों को करने के लिए उचित है। 24 तारीख को आपको होशियार रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन भगवान शिव का दूध और जल से अभिषेक करें। सप्ताह का शुभ दिन शनिवार है।
कुंभ राशि
यह सप्ताह आपके जीवनसाथी के लिए उत्तम है। व्यापारियों के व्यापार में वृद्धि होगी। आपके जीवनसाथी को कार्य के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। अगर आपके पेट में कोई पुराना रोग है तो वह भी इस सप्ताह दूर हो सकता है। इस सप्ताह आपको अपने संतान से सहयोग प्राप्त नहीं होगा। छात्रों की पढ़ाई में रुकावट आ सकती है। परीक्षाओं में उनका असफलता प्राप्त हो सकती है। भाई बहनों के साथ संबंध सामान्य रहेंगे। मामूली धन प्राप्त होने का योग है। इस सप्ताह आपके लिए 27 के दोपहर से लेकर 28 और 29 तारीख कार्यों को करने के लिए परिणाम मूलक है। 25, 26 और 27 की दोपहर तक आपको सावधान रहकर अपने कार्यों का निष्पादन करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन शिव पंचाक्षर स्त्रोत का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन शनिवार है।
मीन राशि
कर्मचारी एवं अधिकारियों के लिए यह सप्ताह अच्छा रहेगा। उनको अपने कार्य क्षेत्र में सफलता प्राप्त हो सकती है। आपको अपने प्रयासों से अपने शत्रुओं पर सफलता प्राप्त हो जायेगी। मानसिक तनाव थोड़ा बढ़ सकता है, परंतु आप उस पर कंट्रोल कर लेंगे। यह सप्ताह आपके संतान के लिए भी ठीक रहेगा। आपको अपने संतान से अच्छा सहयोग भी प्राप्त होगा। आपको इस सप्ताह अपने प्रतिष्ठा के प्रति सतर्क रहना चाहिए। आपके दुश्मन इस बात का पूरा प्रयास कर सकते हैं कि वे आपकी प्रतिष्ठा को गिरायें। थोड़े मात्रा में धन आने की संभावना है। इस सप्ताह आपके लिए 24 और 30 तारीख प्रभावशाली हैं। 27, 28 और 29 तारीख को आपको सावधान रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।
ध्यान दें कि यह सामान्य भविष्यवाणी है। अगर आप व्यक्तिगत और सटीक भविष्वाणी जानना चाहते हैं तो आपको मुझसे दूरभाष पर या व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाना चाहिए। मां शारदा से प्रार्थना है या आप सदैव स्वस्थ सुखी और संपन्न रहें। जय मां शारदा।