(सुश्री नीलम सक्सेना चंद्रा जीसुप्रसिद्ध हिन्दी एवं अङ्ग्रेज़ी की साहित्यकार हैं। आप अंतरराष्ट्रीय / राष्ट्रीय /प्रादेशिक स्तर के कई पुरस्कारों /अलंकरणों से पुरस्कृत /अलंकृत हैं । हम आपकी रचनाओं को अपने पाठकों से साझा करते हुए अत्यंत गौरवान्वित अनुभव कर रहे हैं। सुश्री नीलम सक्सेना चंद्रा जी का काव्य संसार शीर्षक से प्रत्येक मंगलवार को हम उनकी एक कविता आपसे साझा करने का प्रयास करेंगे। आप वर्तमान में एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर (सिस्टम्स) महामेट्रो, पुणे हैं। आपकी प्रिय विधा कवितायें हैं। आज प्रस्तुत है आपकी कविता “दो लफ़्ज़ों की कहानी”। )
साप्ताहिक स्तम्भ ☆ सुश्री नीलम सक्सेना चंद्रा जी का काव्य संसार # 6
(हम प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ जी के आभारी हैं जिन्होने साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक की पुस्तक चर्चा” शीर्षक से यह स्तम्भ लिखने का आग्रह स्वीकारा। इस स्तम्भ के अंतर्गत हम उनके द्वारा की गई पुस्तक समीक्षाएं/पुस्तक चर्चा आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे। अब आप प्रत्येक मंगलवार को श्री विवेक जी के द्वारा लिखी गई पुस्तक समीक्षाएं पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है श्री विवेक जी की पुस्तक चर्चा “रोचक विज्ञान बाल कहानियां”।)
यह एक संयोग ही है क़ि पुस्तक के लेखक श्री ओम प्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश” जी को 2 सितम्बर 2019 को ही शब्द निष्ठा सम्मान से सम्मानित किया गया.
(शब्द निष्ठा सम्मान समारोह 2019 अजमेर में 2 सितम्बर 2019 को बालसाहित्यकार श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ जी को सम्मानित करते हुए बाएँ से डॉ अजय अनुरागीजी, विमला भंडारीजी, आशा शर्माजी, (स्वयं) ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’,अनुविभगीय अधिकारी साहित्यकार सूरजसिंह नेगी जी संयोजक डॉ अखिलेश पालरिया जी। ई-अभिव्यक्ति की ओर से श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं.)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा – # 2 ☆
☆ बाल साहित्य – रोचक विज्ञान बाल कहानियां ☆
पुस्तक चर्चा
बाल साहित्य .. रोचक विज्ञान बाल कहानियां
लेखक.. ओम प्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश”
पृष्ठ ६०, मूल्य १०० रु,
संस्करण पेपर बैक
प्रकाशक.. रवीना प्रकाशन गंगा नगर दिल्ली ९४
☆ बाल साहित्य – रोचक विज्ञान बाल कहानियां – चर्चाकार…विवेक रंजन श्रीवास्तव ☆
मस्तिष्क की ग्रह्यता का सरल सिद्धांत है कि कहकर बताई गई या पढ़ाकर समझाई गई बात की अपेक्षा यदि उसे करके दिखाया जावे या चित्र से समझाया जावे तो वह अधिक सरलता से बेहतर रूप में समझ भी आती है और स्मरण में भी अधिक रहती है. इसी तरह खेल खेल में समझे गये सिद्धांत या कहानियो के द्वारा बताई गई बातें बच्चो पर गहरा प्रभाव छोड़ती हैं, क्योकि कहानियो मे कथ्य के साथ साथ बच्चे मन में एक छबि निर्मित करते जाते हैं
जो उन्हें किसी तथ्य को याद करने व समझने में सहायक होती है.
विज्ञान कथा कहानी की वह विधा है जिसमें वैज्ञानिक सिद्धांतो या परिकल्पनाओ को कहानी के माध्यम से अभिव्यक्त किया जाता है. विज्ञान कथा के द्वारा लेखक अपनी वैज्ञानिक कल्पना को उड़ान दे पाता है. मैने अपनी १९८८ में लिखी विज्ञान कथा में कल्पना की थी कि सड़को में स्ट्रीट लाइट की जगह एक कम ऊंचाई पर छोटा सा भू स्थिर उपग्रह हर शहर के लिये छोड़ा जावे, मेरी यह कहानी विज्ञान प्रगति में छपी है. हाल ही चीन ने इस तरह की परियोजना को लगभग मूर्त रूप दे दिया है, जिसमें वे आर्टीफीशियल मून लांच कर रहे हैं. इसी तरह मेरी एक विज्ञान कथा में मैने सेटेलाईट में लगे कैमरे से अपराध नियंत्रण की कल्पना की थी जो अब लगभग साकार है. देखें बिना तार के रेडियेशन से एक जगह से दूसरी जगह बिजली पहुंचाने की मेरी विज्ञान कथा में छपी हुई परिकल्पना कब साकार होती है.
ओम प्रकाश क्षत्रिय प्रकाश एक शिक्षक हैं. वे बच्चो को विज्ञान पढ़ाने के लिये रोचक कथा में पिरोकर उन्हें विज्ञान के गूढ़ सिद्धांत समझाते हैं. कहानी बुनने के लिये वे कभी बच्चे की नींद में देखे स्वप्न का सहारा लेते हैं तो कभी पशु पक्षियो, जानवरो को मानवीय स्वरूप देकर उनसे बातें करते हैं. संग्रह में कुल १७ छोटी छोटी कहानियां हैं, हर कहानी में एक कथ्य है. पहली कहानी ही गुरुत्वाकर्षण का नियम समझाती है. इंद्रढ़नुष के सात रंग श्वेत रंग के ही अवयव हैं यह वैज्ञानिक तथ्य बताने के साथ ही परस्पर मिलकर रहने की शिक्षा भी देते हुये इंद्रढ़नुष बिखर गया कहानी बुनी गई है. इसी तरह प्रत्येढ़क कहानी बच्चो पर अलग शैक्षिक प्रभाव छोड़ती है.
किताब बहुत बढ़िया है व शालाओ में बड़ी उपयोगी है.
टिप्पणी… विवेक रंजन श्रीवास्तव, ए १, शिला कुंज नयागांव जबलपुर
(संस्कारधानी जबलपुर की श्रीमति सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’ जी की लघुकथाओं का अपना संसार है। साप्ताहिक स्तम्भ – श्रीमति सिद्धेश्वरी जी की लघुकथाएं शृंखला में आज प्रस्तुत हैं उनकी एक बेहतरीन लघुकथा “सुघड़ बहू ”। श्रीमति सिद्धेश्वरी सराफ़ जी की कलम को इस बेहतरीन लघुकथा के माध्यम से समाज को अभूतपूर्व संदेश देने के लिए बधाई ।)
☆ श्रीमति सिद्धेश्वरी जी की लघुकथाएं # 14 ☆
☆ सुघड़ बहू ☆
माधवी बहुत सुशील संस्कार वान लड़की शादी से दुल्हन बन कर ससुराल आई। कुछ दिनों के बाद सभी मेहमानों के जाने के बाद घर के सदस्य बच गये। वहां एक बहुत ही खराब आदत थी, खाना खाने के बाद उसी थाली में कुल्ली कर हाथ धोने की। जो माधवी को कहीं से भी अच्छा नहीं लग रहा था। उसने अपने पतिदेव से कही, उन्होंने भी कह दिया हमारे यहां सभी ऐसा ही करते है। तुम नया कुछ नहीं कर सकती।
माधवी ने भी सब को अच्छी आदत डालने का बीडा उठाया।
खाना परोसने के बाद वह वहीं खड़ी रहती। एक हाथ में पानी और दूसरे हाथ पर हाथ धोने वाला बर्तन। सबको हाथ धुलाती थी। और फिर बर्तन बाहर रख कर आ जाती थी। सबको बहुत बुरा लगता था। कई बातें भी बनती थी। परन्तु जो गलत था उसे वह सुधार रहीं थीं। धीरे-धीरे सभी को समझ आने लगा। वास्तव मे जो जूठे बर्तन उठाये जिसमें सुबह शाम हाथ धोकर कुल्ला किया जाये, तो उसको कितना खराब लगता होगा।
अब तो सब बाहर एक निश्चित जगह पर जाकर हाथ धोने लगे। पतिदेव भी खुश थे कि जो अच्छा काम है। उसे अपना लेना चाहिए। अब तो देखा-देखी सभी इस का ख्याल करने लगे।
माधवी सब के लिये अब “सुघड़ बहु ‘बन गई। उसे भी एक नयी पहल पर अच्छा लगा। अपनी जीत पर मुस्कुराने लगी।
(वरिष्ठ मराठी साहित्यकार श्री अशोक श्रीपाद भांबुरे जी का अपना एक काव्य संसार है । आप मराठी एवं हिन्दी दोनों भाषाओं की विभिन्न साहित्यिक विधाओं के सशक्त हस्ताक्षर हैं। आज साप्ताहिक स्तम्भ –अशोक भांबुरे जी यांची कविता अभिव्यक्ती शृंखला की अगली कड़ी में प्रस्तुत है एक सामयिक एवं सार्थक कविता “शुद्र मागण्या*”।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – अशोक भांबुरे जी यांची कविता अभिव्यक्ती # 14 ☆
भावार्थ : बाहर के विषयों में आसक्तिरहित अन्तःकरण वाला साधक आत्मा में स्थित जो ध्यानजनित सात्विक आनंद है, उसको प्राप्त होता है, तदनन्तर वह सच्चिदानन्दघन परब्रह्म परमात्मा के ध्यानरूप योग में अभिन्न भाव से स्थित पुरुष अक्षय आनन्द का अनुभव करता है॥21॥
With the self unattached to the external contacts he discovers happiness in the Self; with the self engaged in the meditation of Brahman he attains to the endless happiness. ।।21।।
(हम प्रतिदिन इस ग्रंथ से एक मूल श्लोक के साथ श्लोक का हिन्दी अनुवाद जो कृति का मूल है के साथ ही गद्य में अर्थ व अंग्रेजी भाष्य भी प्रस्तुत करने का प्रयास करेंगे।)
(आज प्रस्तुत है सुश्री प्रभा सोनवणे जी द्वारा श्री गणेश चतुर्थी पर्व पर रचित एक प्रार्थना . भाद्रपद एक पवित्र माह है और इस माह प्रत्येक घरों में श्री गणेश जी का आगमन होता है . श्री गणेश जी बुद्धि के देवता तो हैं ही साथ ही वे अपने भक्तों की चिंता भी करते हैं और संकटमोचन तो हैं ही.
उनके ही शब्दों में –
भाद्रपद हा खुप पुनित पावन महिना आहे, घरो घरी श्रीगणेशा चे आगमन होते!
गणपती ही बुद्धीची देवता तर आहेच पण संकट निवारण करणारा हा देव भक्तांचा विशेष आवडता देव आहे!