(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “रंग तो रंग है…”।)
(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी जबलपुर से श्री राजेंद्र तिवारी जी का स्वागत। इंडियन एयरफोर्स में अपनी सेवाएं देने के पश्चात मध्य प्रदेश पुलिस में विभिन्न स्थानों पर थाना प्रभारी के पद पर रहते हुए समाज कल्याण तथा देशभक्ति जनसेवा के कार्य को चरितार्थ किया। कादम्बरी साहित्य सम्मान सहित कई विशेष सम्मान एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित, आकाशवाणी और दूरदर्शन द्वारा वार्ताएं प्रसारित। हॉकी में स्पेन के विरुद्ध भारत का प्रतिनिधित्व तथा कई सम्मानित टूर्नामेंट में भाग लिया। सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय रहा। हम आपकी रचनाएँ समय समय पर अपने पाठकों के साथ साझा करते रहेंगे। आज प्रस्तुत है आपका एक भावप्रवण कविता ‘कृष्ण खेलें होली, राधा के संग…‘।)
☆ अभिव्यक्ति # ९८ ☆ कृष्ण खेलें होली, राधा के संग… ☆ श्री राजेन्द्र तिवारी ☆
(वरिष्ठतम साहित्यकार आदरणीय डॉ कुन्दन सिंह परिहार जी का साहित्य विशेषकर व्यंग्य एवं लघुकथाएं ई-अभिव्यक्ति के माध्यम से काफी पढ़ी एवं सराही जाती रही हैं। हम प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – “परिहार जी का साहित्यिक संसार” शीर्षक के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाते रहते हैं। डॉ कुंदन सिंह परिहार जी की रचनाओं के पात्र हमें हमारे आसपास ही दिख जाते हैं। कुछ पात्र तो अक्सर हमारे आसपास या गली मोहल्ले में ही नज़र आ जाते हैं। उन पात्रों की वाक्पटुता और उनके हावभाव को डॉ परिहार जी उन्हीं की बोलचाल की भाषा का प्रयोग करते हुए अपना साहित्यिक संसार रच डालते हैं।आज प्रस्तुत है आपका एक अप्रतिम विचारणीय व्यंग्य – ‘मिलावट-प्रधान देश‘। इस अतिसुन्दर रचना के लिए डॉ परिहार जी की लेखनी को सादर नमन।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – परिहार जी का साहित्यिक संसार # ३२६ ☆
☆ व्यंग्य ☆ मिलावट-प्रधान देश ☆ डॉ कुंदन सिंह परिहार ☆
हमारा देश धर्म-प्रधान होने के साथ-साथ मिलावट-प्रधान भी है। यह कहना मुश्किल है कि वह धर्म-प्रधान ज़्यादा है या मिलावट-प्रधान, क्योंकि यहां करीब-करीब हर चीज़ में मिलावट होती है। मिलावट का हाल यह है कि अब शुद्ध आदमी मिलना मुश्किल हो गया है। मिलावट करने वाले पूरी निष्ठा और समर्पण-भाव से अपने काम में लगे हैं। उनके काम की निपुणता और सफाई देखकर आश्चर्य होता है। मजाल है आदमी असली नकली में भेद कर पाये। मिलावट के मामले में उनके नये-नये प्रयोग देखकर बड़े-बड़े वैज्ञानिक भी हैरान हैं।
यहां मिलावट का आलम यह है कि शुद्ध चीज़ मिलना सौभाग्य की बात मानी जाती है। बाहरी उपयोग की चीज़ें छोड़ दीजिए, जो चीज़ें शरीर के भीतर जाती हैं उन्हें भी बख्शा नहीं जाता। दाल, चावल, मसाला, घी, खोया, मिठाइयां, दवाएं, फल, सब्ज़ियां, ईनो, आटा, बेसन, दूध, मक्खन, पनीर, सरसों, शराब, जीरा, हल्दी, सब में पूरे सेवा- भाव से मिलावट की जा रही है। नकली दवाओं का मतलब समाज के लिए क्या होता है यह समझा जा सकता है। कहीं पढ़ा कि अंडे भी मिलावटी हो रहे हैं, यद्यपि मेरे लिए समझ पाना मुश्किल है कि नकली अंडे कैसे होते होंगे।
चावल में कंकड़, मसाले में बुरादा, हल्दी में पीली मिट्टी मिलना आम है। नकली दवाओं का बाज़ार अरबों का है। अभी नकली कफ़ सीरप पीकर इंदौर में कई बच्चे काल-कवलित हुए। निम्न वर्ग के शराबी हर साल मिलावटी शराब पीकर मरते हैं।
फलों और सब्ज़ियों को कार्बाइड की मदद से जल्दी पकाया और तैयार किया जाता है, लेकिन कार्बाइड मनुष्य-शरीर के लिए बहुत हानिकारक है। चने भी नकली होने की ख़बर पढ़ी। मिट्टी से बनने वाले सीमेंट के बारे में भी पढ़ा।
हाल ही में राज्यसभा में एक सदस्य ने वक्तव्य दिया कि जांच में दूध के 71% नमूनों में यूरिया और 64% में न्यूट्रलाइज़र पाये गये, जबकि कुल खाद्य नमूनों में 25% मिलावटी निकले। यह भी बताया गया कि गर्म मसाले में ईंट और लकड़ी का बुरादा, चाय में सिंथेटिक रंग, शहद में शुगर सीरप और मिठाइयों में देसी घी की जगह वनस्पति की मिलावट पायी गयी।
हमारे देश में नकली डिग्री, नकली आधार कार्ड, नकली प्रमाण-पत्र उपलब्ध होना मुश्किल नहीं है, बशर्ते कि आप जोखिम लेने को तैयार हों। कई नेताओं की झूठी डिग्री पर प्रश्न उठते रहे हैं। नकली नोट छापने वालों की सक्रियता के प्रमाण जब-तब मिलते रहते हैं। ‘डिजिटल अरेस्ट’ नकल के धंधे का एक नया रूप है, जिसमें कई लोगों को करोड़ों रुपयों का चूना लग चुका है।
सबसे ताज़ा ख़बर यह पढ़ी कि जूते भी नकली बन रहे हैं। यह समझना मुश्किल है कि नकली जूतों में क्या नकली होगा। शायद ये पहनने के अलावा दूसरे काम के लिए बन रहे होंगे। शायद नकली जूतों के प्रहार से आदमी की इज़्ज़त कम ख़राब होगी।
बाबा रामदेव के गाय के घी के बारे में पढ़ा कि वह दो प्रयोगशालाओं में जांच में खाने योग्य नहीं पाया गया। उनके मिर्च पाउडर की गुणवत्ता का मामला भी संसद में उठाया गया था।
आदमी भी अब खरा नहीं रहा। मुंह पर कुछ बोलता है, मन में कुछ और रचता है।टेक्नोलॉजी के विकास के साथ स्वार्थपरता और संकीर्णता बढ़ रही है, रिश्ते कमज़ोर हो रहे हैं, सुविधाओं का मोह बढ़ रहा है। नतीजतन आदमी अपने आप में सिमटता जा रहा है, टापू होता जा रहा है। इसीलिए शायर निदा फ़ाज़ली ने लिखा— ‘हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी, जिसको भी देखना हो कई बार देखना।’
मैं यह सोच सोच कर परेशान हूं कि कई नेता और धर्मगुरु धार्मिक एकता की बातें करते हैं, दूसरे धर्म वालों को अपने से कमतर समझते हैं, लेकिन धार्मिक एकता में ये मिलावट के लिए समर्पित हुनरमंद लोग कहां ‘फिट’ होंगे? क्या धार्मिक एकता के लिए ये मिलावटखोर मिलावट करना छोड़ देंगे? क्या इनका हृदय-परिवर्तन हो जाएगा? क्या ये आसानी से मिल रहे बड़े मुनाफे का लालच छोड़ देंगे? फिलहाल तो ये अपने धर्म वालों का ही मुंडन कर रहे हैं।
हम गज़ा में सत्तर हज़ार निर्दोष लोगों की मौत पर सिहरते हैं, दुखी होते हैं, लेकिन हमारे देश में सीधे हत्या के बजाय धीमे ज़हर के द्वारा करोड़ों की ‘स्लो डेथ’ का इंतज़ाम है। हम बाकी मामलों में भले ही विश्वगुरु न बन पायें, मिलावट के मामले में हमारे विश्वगुरु होने में कोई संदेह नहीं हो सकता। अन्य देश आयें और हमसे उपयोगी शिक्षा ग्रहण करें।
(ई-अभिव्यक्ति में मॉरीशस के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ साहित्यकार श्री रामदेव धुरंधर जी का हार्दिक स्वागत। आपकी रचनाओं में गिरमिटया बन कर गए भारतीय श्रमिकों की बदलती पीढ़ी और उनकी पीड़ा का जीवंत चित्रण होता हैं। आपकी कुछ चर्चित रचनाएँ – उपन्यास – चेहरों का आदमी, छोटी मछली बड़ी मछली, पूछो इस माटी से, बनते बिगड़ते रिश्ते, पथरीला सोना। कहानी संग्रह – विष-मंथन, जन्म की एक भूल, व्यंग्य संग्रह – कलजुगी धरम, चेहरों के झमेले, पापी स्वर्ग, बंदे आगे भी देख, लघुकथा संग्रह – चेहरे मेरे तुम्हारे, यात्रा साथ-साथ, एक धरती एक आकाश, आते-जाते लोग। आपको हिंदी सेवा के लिए सातवें विश्व हिंदी सम्मेलन सूरीनाम (2003) में सम्मानित किया गया। इसके अलावा आपको विश्व भाषा हिंदी सम्मान (विश्व हिंदी सचिवालय, 2013), साहित्य शिरोमणि सम्मान (मॉरिशस भारत अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 2015), हिंदी विदेश प्रसार सम्मान (उ.प. हिंदी संस्थान लखनऊ, 2015), श्रीलाल शुक्ल इफको साहित्य सम्मान (जनवरी 2017) सहित कई सम्मान व पुरस्कार मिले हैं। हम श्री रामदेव जी के चुनिन्दा साहित्य को ई अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों से समय समय पर साझा करने का प्रयास करेंगे।
आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय गद्य क्षणिका “– रोग ग्रसित राजा…” ।)
~ मॉरिशस से ~
☆ कथा कहानी ☆ गद्य क्षणिका # ९७ — रोग ग्रसित राजा —☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆
राजा के तीन रोग थे। उसने अपने रोग स्वयं में छिपाये रखा क्योंकि रोग प्रकट होने से उसका मस्तक झुकता। आश्चर्य, उसके देश के कवि ने उसके तीन रोगों से मिलती जुलती कविता लिख दी। राजा क्रोधित हुआ। उसने कवि की हत्या करवा दी। जहाँ लाश फेंकी गई वहाँ सुन्दर फूल खिले। राजा को ये फूल बहुत पसंद आए। पर उसे जब पता चला ये फूल उसके शत्रु के वक्ष पर उगे हुए हैं बिलखने पर चौथे रोग ने उसे ग्रस लिया।
(“साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच “ के लेखक श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही गंभीर लेखन। शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है। साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।श्री संजय जी के ही शब्दों में ” ‘संजय उवाच’ विभिन्न विषयों पर चिंतनात्मक (दार्शनिक शब्द बहुत ऊँचा हो जाएगा) टिप्पणियाँ हैं। ईश्वर की अनुकम्पा से आपको पाठकों का आशातीत प्रतिसाद मिला है।”
हम प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाते रहेंगे। आज प्रस्तुत है इस शृंखला की अगली कड़ी। ऐसे ही साप्ताहिक स्तंभों के माध्यम से हम आप तक उत्कृष्ट साहित्य पहुंचाने का प्रयास करते रहेंगे।)
☆ संजय उवाच # ३२७ ☆ अंतिम नींद…
दूसरे के जागने-सोने, खाने-पीने, उठने-बैठने, हँसने-बोलने, यहाँ तक की चुप रहने में भी मीन-मेख निकालना, आदमी को एक तरह का विकृत सुख देता है।तुलनात्मक रूप से एक भयंकर प्रयोग बता रहा हूँ, विचार करना।
रात को बिस्तर पर हो, आँखों में नींद गहराने लगे तो कल्पना करना कि इस लोक की यह अंतिम नींद है। सुबह नींद नहीं खुलने वाली।…यह विचार मत करना कि तुम्हारे कंधे क्या-क्या काम हैं। तुम नहीं उठोगे तो जगत का क्रियाकलाप कैसे बाधित होगा। जगत के दृश्य-अदृश्य असंख्य सजीवों में से एक हो तुम। तुम्हारा होना, तुम्हारे लिए महत्वपूर्ण हो सकता है पर जगत में तुम्हारी हैसियत दही में न दिखाई देनेवाले बैक्टीरिया से अधिक नहीं है। तुम नहीं उठोगे तो तुम्हारे सिवा किसी पर कोई दीर्घकालिक असर नहीं पड़ेगा।
तुम तो यह विचार करना कि क्या तुम्हारे होने से तुम्हारे सगे-सम्बंधी, तुम्हारे परिजन-कुटुंबीय, मित्र-परिचित, लेनदार-देनदार आनंदी और संतुष्ट हैं या नहीं। बिस्तर पर आने तक के समय का मन-ही-मन हिसाब करना। अपने शब्दों से किसी का मन दुखाया क्या, आचरण में सम्यकता का पालन हुआ क्या, लोभवश दूसरे के अधिकार का अतिक्रमण हुआ क्या, अहंकारवश ऊँच-नीच का भाव पनपा क्या..?… आदि-आदि..। हाँ आत्मा के आगे मन और आचरण को अनावृत्त कर अपने प्रश्नों की सूची तुम स्वयं तैयार कर सकते हो।
प्रश्नों की सूची टास्क नहीं है। प्रश्न तुम्हारे, उत्तर भी तुम्हारे। असली टास्क तो निष्कर्ष है। अपने उत्तर अपने ढंग व अपनी सुविधा से प्राप्त कर क्या तुम मुदित भाव से शांत और गहरी नींद लेने के लिए प्रस्तुत हो?
यदि हाँ तो यकीन मानना कि तुम इहलोक को पार कर गए हो।
सच बताना उठकर बैठ गए हो या निद्रा माई के आँचल में बेखटके सो रहे हो?
अध्यक्ष– हिंदी आंदोलन परिवार ☆ सदस्य– हिंदी अध्ययन मंडल, पुणे विश्वविद्यालय, एस.एन.डी.टी. महिला विश्वविद्यालय, न्यू आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस कॉलेज (स्वायत्त) अहमदनगर ☆ संपादक– हम लोग ☆ पूर्व सदस्य– महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ☆ ट्रस्टी- जाणीव, ए होम फॉर सीनियर सिटिजन्स ☆
मोबाइल– 9890122603
संजयउवाच@डाटामेल.भारत
writersanjay@gmail.com
☆ आपदां अपहर्तारं ☆
आशुतोष साधना संपन्न हुई। अगली साधना की जानकारी शीघ्र ही दी जावेगी।
अनुरोध है कि आप स्वयं तो यह प्रयास करें ही साथ ही, इच्छुक मित्रों /परिवार के सदस्यों को भी प्रेरित करने का प्रयास कर सकते हैं। समय समय पर निर्देशित मंत्र की इच्छानुसार आप जितनी भी माला जप करना चाहें अपनी सुविधानुसार कर सकते हैं ।यह जप /साधना अपने अपने घरों में अपनी सुविधानुसार की जा सकती है।ऐसा कर हम निश्चित ही सम्पूर्ण मानवता के साथ भूमंडल में सकारात्मक ऊर्जा के संचरण में सहभागी होंगे। इस सन्दर्भ में विस्तृत जानकारी के लिए आप श्री संजय भारद्वाज जी से संपर्क कर सकते हैं।
≈ संपादक – हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈
(आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी संस्कारधानी जबलपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। आपको आपकी बुआ श्री महीयसी महादेवी वर्मा जी से साहित्यिक विधा विरासत में प्राप्त हुई है । आपके द्वारा रचित साहित्य में प्रमुख हैं पुस्तकें- कलम के देव, लोकतंत्र का मकबरा, मीत मेरे, भूकंप के साथ जीना सीखें, समय्जयी साहित्यकार भगवत प्रसाद मिश्रा ‘नियाज़’, काल है संक्रांति का, सड़क पर आदि। संपादन -८ पुस्तकें ६ पत्रिकाएँ अनेक संकलन। आप प्रत्येक सप्ताह रविवार को “साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह” के अंतर्गत आपकी रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपकी – ग़ज़लिका।)
विज्ञान की अन्य विधाओं में भारतीय ज्योतिष शास्त्र का अपना विशेष स्थान है। हम अक्सर शुभ कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त, शुभ विवाह के लिए सर्वोत्तम कुंडली मिलान आदि करते हैं। साथ ही हम इसकी स्वीकार्यता सुहृदय पाठकों के विवेक पर छोड़ते हैं। हमें प्रसन्नता है कि ज्योतिषाचार्य पं अनिल पाण्डेय जी ने ई-अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों के विशेष अनुरोध पर साप्ताहिक राशिफल प्रत्येक शनिवार को साझा करना स्वीकार किया है। इसके लिए हम सभी आपके हृदयतल से आभारी हैं। साथ ही हम अपने पाठकों से भी जानना चाहेंगे कि इस स्तम्भ के बारे में उनकी क्या राय है ?
☆ ज्योतिष साहित्य ☆ साप्ताहिक राशिफल (9 मार्च से 15 मार्च 2026) ☆ ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय ☆
जय श्री राम। आजकल मैं पंडित अनिल पाण्डेय हर सप्ताह आपके पास साप्ताहिक राशिफल के अलावा श्री हनुमान चालीसा के दो चौपाइयों को लेकर आता हूं जो आपकी विभिन्न परेशानियों में मंत्र काम करेगीं।
आज की पहली चौपाई है:-
कंचन बरन बिराज सुबेसा, कानन कुंडल कुंचित केसा॥
हनुमान चालीसा की इह चौपाई के संपुट पाठ करने से आर्थिक समृद्धि, अच्छा खानपान, अच्छा संस्कार और अच्छा पहनावा प्राप्त होगा।
इस सप्ताह राहु, मंगल और बक्री बुध कुंभ में, तथा शुक्र और शनि मीन राशि में गोचर करेंगे। सूर्य प्रारंभ में कुंभ राशि में रहेगा तथा 14 तारीख के 3:30 रात से मीन राशि में प्रवेश करेगा। प्रारंभ वक्री गुरु मिथुन राशि में रहेगा तथा 11 मार्च के 4:36 शाम से मिथुन राशि में ही मार्गी हो जायेगा। आईये अब हम राशिवार राशिफल की चर्चा करते हैं।
मेष राशि
इस सप्ताह आपके पास धन आने का योग है। भाई बहनों के साथ संबंध नरम-गरम रहेंगे। धन आने की मात्रा भी कम रहेगी। आपका आपके माता-पिता जी का तथा आपके जीवनसाथी का स्वास्थ्य पहले जैसा ही रहेगा। छात्रों की पढ़ाई अच्छी चलेगी। संतान का आपके सहयोग प्राप्त होगा। व्यापारियों के लिए यह सप्ताह ठीक है। इस सप्ताह आपको कचहरी के कार्य में सफलता प्राप्त हो सकती है परंतु उसके लिए आपको बहुत सतर्क होना पड़ेगा। शत्रुओं से आपको सावधान रहना चाहिए। इस सप्ताह आपके लिए 14 और 15 मार्च कार्यों को करने के लिए शुभ है। 9, 10 और 11 तारीख को अगर कोई दुर्घटना होती है तो उसे आप साफ-साफ बच जाएंगे। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।
वृष राशि
इस सप्ताह आपके पास धन आने का अच्छा योग है। अगर आप नौकरीपेशा है तो इस सप्ताह आपको थोड़ा सावधान रहना चाहिए और अपनी वाणी पर कंट्रोल करना चाहिए। अगर आप व्यापारी हैं तो आपके लिए यह सप्ताह ठीक है। जनप्रतिनिधियों के लिए भी यह सप्ताह अच्छा है। आप की प्रतिष्ठा बढ़ सकती है। संतान से आपको इस सप्ताह सहयोग प्राप्त नहीं हो पाएगा। इस सप्ताह आपके लिए 14 और 15 तारीख कार्यों को करने हेतु सफलता दायक हैं। सप्ताह के बाकी दिनों में आपको सतर्क रहना चाहिए। अगर आप अविवाहित हैं तो इस सप्ताह 9, 10 और 11 को आपके पास विवाह के उत्तम प्रस्ताव प्राप्त हो सकते हैं। इस सप्ताह के सभी दिनों में आपको सतर्क रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन तांबे के पात्र में जल अच्छत और लाल पुष्प लेकर भगवान सूर्य को जल अर्पण करें। सप्ताह का शुभ दिन शनिवार है।
मिथुन राशि
अगर आप नौकरी करते हैं तो यह सप्ताह आपके लिए काफी अच्छा हो सकता है। व्यापारियों के लिए भी यह सप्ताह अच्छा है। जनप्रतिनिधियों के लिए यह सप्ताह थोड़ा कम ठीक रहेगा। भाग्य से आपको मदद कम मिलेगी। आपको अपने परिश्रम पर ज्यादा यकीन करना पड़ेगा। इस सप्ताह आपके लिए 12 और 13 तारीख सफलता प्राप्त करने के लिए उचित है। सप्ताह के बाकी दिनों में आपको सावधान रहकर कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन काले कुत्ते को रोटी खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है।
कर्क राशि
इस सप्ताह भाग्य आपका पूर्ण रूप से साथ देगा। आपके जो भी कार्य भाग्य की वजह से रुके हुए हैं उनको करने का प्रयास करें। इस सप्ताह आपके खर्चे में वृद्धि हो सकती है। मकान खरीद सकते हैं या बच्चे की शादी वगैरह में पैसा खर्च कर सकते हैं। भाई बहनों के साथ आपके संबंध ठीक नहीं रह पाएंगे। मामूली पैसे आने का योग है। दुर्घटनाओं से इस सप्ताह आपको सतर्क रहना चाहिए। इस सप्ताह आपके लिए 14 और 15 तारीख सफलता हेतु उपयोगी है। 12 और 13 तारीख को आपको सजग रहकर कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन लाल मसूर की दाल का दान करें और मंगलवार को हनुमान जी के मंदिर में जाकर हनुमान जी की पूजा करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।
सिंह राशि
इस सप्ताह आपके प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। जन प्रतिनिधियों के लिए यह सप्ताह काफी अच्छा रहेगा। व्यापारियों के लिए भी यह सप्ताह उत्तम है। नौकरीपेशा लोगों के लिए यह सप्ताह सावधान रहने का है। भाग्य से इस सप्ताह आपको कोई विशेष लाभ नहीं हो पाएगा। आप अपने परिश्रम पर विश्वासकरें। कम धन आने की उम्मीद है। इस सप्ताह आपके लिए 9, 10 और 11 तारीख ठीक है। 14 और 15 तारीख को आपको सावधान रहकर कार्यों को अंजाम देना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गाय को हरा चारा खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है।
कन्या राशि
अविवाहित जातकों के लिए यह सप्ताह उत्तम है। प्रेम के नए-नए संबंध भी बढ़ सकते हैं। विवाह के नए-नए संबंध आएंगे। आपका प्रेम संबंध में भी वृद्धि होगी। शत्रुओं को आप इस सप्ताह आसानी से पराजित कर सकते हैं। इस सप्ताह आपको प्रतिष्ठा प्राप्त होगी। जनप्रतिनिधियों के लिए यह सप्ताह उत्तम रहेगा। कर्मचारियों के लिए यह सप्ताह ठीक है। व्यापारियों के लिए यह सप्ताह सावधान रहने का है। इस सप्ताह आपके लिए 12 और 13 तारीख कार्यों को करने के लिए लाभदायक है। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक-ठाक है। 9, 10 और 11 तारीख को आपको अपने भाई बहनों और अपने पराक्रम के प्रति सावधान रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन राम रक्षा स्त्रोत का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है।
तुला राशि
इस सप्ताह आपका आपके जीवनसाथी का और माता-पिता जी का स्वास्थ्य पहले जैसा ही ठीक रहेगा। शत्रु शांत रहेंगे। प्रयास करने पर समाप्त भी हो सकते हैं। छात्रों की पढ़ाई में बाधा पड़ सकती है। आपको अपने संतान का बहुत कम सहयोग प्राप्त होगा। 10 और 11 तारीख को आपको धन के प्रति सतर्क रहना चाहिए। 14 और 15 तारीख विभिन्न प्रकार के कार्यों हेतु अनुकूल हैं। 14 और 15 तारीख को आपके अधिकांश कार्य सफल हो सकते हैं। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक हैं। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन शनिवार है।
वृश्चिक राशि
इस सप्ताह आपके संतान को लाभ होगा। संतान का आपको अच्छा सहयोग प्राप्त होगा। इस सप्ताह अगर आप कोई परीक्षा देंगे तो उसमें सफलता प्राप्त करेंगे। दुर्घटनाओं से आपको इस सप्ताह सतर्क रहना चाहिए। जनप्रतिनिधियों के लिए सप्ताह अनुकूल नहीं है। व्यापारियों के लिए सप्ताह ठीक है। इस सप्ताह आपके लिए 9, 10 और 11 तारीख कार्यों के संपन्न करने के लिए शुभ है। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक हैं। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गायत्री मंत्र का जाप करें। सप्ताह का शुभ दिन मंगलवार है।
धनु राशि
इस सप्ताह आपको भाग्य से मदद मिलेगी। आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। जनप्रतिनिधियों के लिए यह सप्ताह उत्तम रहेगा। व्यापारियों के लिए सप्ताह ठीक है। कर्मचारियों को इस सप्ताह सावधान रहना चाहिए। उन्हें अपनी जिव्हा को कंट्रोल में करना चाहिए। शत्रुओं को आप इस सप्ताह पराजित कर सकते हैं। इस सप्ताह आपके लिए 12 और 13 तारीख कार्यों को करने के लिए परिणाम दायक हैं। 9, 10 और 11 तारीख को अगर आप प्रयास करेंगे तो कचहरी के कार्यों में आपको सफलता प्राप्त हो सकती है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन रुद्राष्टक का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है।
मकर राशि
इस सप्ताह आपका आपके जीवनसाथी का और आपके माताजी पिताजी का स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। भाइयों से आपके संबंध अच्छे रहेंगे। आपके पराक्रम में वृद्धि होगी। पेट संबंधी रोगों के प्रति सतर्क रहें। छात्रों को सावधान रहना चाहिए। व्यापारियों और नौकरी पेशा लोगों के लिए सप्ताह ठीक है। इस सप्ताह आपके लिए 14 और 15 मार्च लाभदायक है। 12 और 13 मार्च को आपको किसी भी कार्य को बड़ी सतर्कता पूर्वक करना चाहिए। अगर आप सतर्कता से कार्य नहीं करेंगे तो कार्य संपन्न नहीं हो पाएंगे। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन शिव पंचाक्षर स्त्रोत का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन शनिवार है।
कुंभ राशि
इस सप्ताह आपके पास धन आने का अच्छा योग है। व्यापारियों के लिए यह सप्ताह अच्छा रहेगा। नौकरी करने वालों के लिए भी यह सप्ताह ठीक है। इस सप्ताह आप अपने स्वास्थ्य के प्रति थोड़ा सतर्क रहें। आपके जीवनसाथी का तथा माता और पिताजी का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। जनप्रतिनिधियों को अपने प्रतिष्ठा के प्रति इस सप्ताह सावधान रहना चाहिए। दुर्घटनाओं के लिए भी आप को सतर्क रहना चाहिए। इस सप्ताह आपके लिए 9 10 और 11 तारीख विभिन्न प्रकार के राजकीय कार्यों के लिए उपयुक्त हैं। 14 और 15 तारीख को आपको सचेत रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन भगवान शिव का दूध और जल से अभिषेक करें। सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है।
मीन राशि
अगर आप अविवाहित हैं तो यह सप्ताह आपके लिए ठीक है। आपको विवाह के नए-नए प्रस्ताव प्राप्त होंगे। आपका, तथा आपके माता और पिताजी का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। जीवनसाथी के स्वास्थ्य में थोड़ी समस्या आ सकती है। कचहरी के कार्यों में अगर आप सावधानी से कार्य करेंगे तो सफलता मिल सकती है। भाई बहनों के प्रति आपका संबंध पहले जैसा ही रहेगा। उसमें कोई गिरावट या उछाल नहीं आएगा। इस सप्ताह आपके लिए 12 और 13 तारीख कार्यों को करने के प्रति उपयुक्त हैं। 9, 10 और 11 तारीख को आपको भाग्य के भरोसे कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन शिव पंचाक्षर मंत्र का जाप करें। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है।
आईये अब हम श्रीहनुमान चालीसा के आज की दूसरी और तीसरी चौपाई के बारे में चर्चा करते हैं।
आज की दूसरी और तीसरी चौपाई है:-
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे, काँधे मूँज जनेउ साजे।
शंकर सुवन केसरी नंदन, तेज प्रताप महा जग बंदन।
हनुमान चालीसा की ये चौपाइयां विजय दिलाती है। इनके संपुट पाठ से व्यक्ति के ओज और कांति में वृद्धि होती है।
“ध्यान दें कि यह सामान्य भविष्यवाणी है। अगर आप व्यक्तिगत और सटीक भविष्वाणी जानना चाहते हैं तो आपको मुझसे दूरभाष पर या व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाना चाहिए। मां शारदा से प्रार्थना है या आप सदैव स्वस्थ सुखी और संपन्न रहें। जय मां शारदा।
(जन्म – 17 जनवरी, 1952 ( होशियारपुर, पंजाब) शिक्षा- एम ए हिंदी , बी एड , प्रभाकर (स्वर्ण पदक)। प्रकाशन – अब तक ग्यारह पुस्तकें प्रकाशित । कथा संग्रह – 6 और लघुकथा संग्रह- 4 । यादों की धरोहर हिंदी के विशिष्ट रचनाकारों के इंटरव्यूज का संकलन। कथा संग्रह -एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मिला पुरस्कार । हरियाणा साहित्य अकादमी से श्रेष्ठ पत्रकारिता पुरस्कार। पंजाब भाषा विभाग से कथा संग्रह-महक से ऊपर को वर्ष की सर्वोत्तम कथा कृति का पुरस्कार । हरियाणा ग्रंथ अकादमी के तीन वर्ष तक उपाध्यक्ष । दैनिक ट्रिब्यून से प्रिंसिपल रिपोर्टर के रूप में सेवानिवृत। सम्प्रति- स्वतंत्र लेखन व पत्रकारिता)
☆ संस्मरण – “भगवान् का कितना अंश बचा डाॅक्टर में?”☆ श्री कमलेश भारतीय ☆
हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने रोहतक पीजीआई के दीक्षांत समारोह में कहा कि- “डाॅक्टर को जनता भगवान् मानती है। ऐसे में डाॅक्टर को अपने पेशे को समाजसेवा का माध्यम बना लेना चाहिए। सेवाभाव से किये हर कार्य से परिवार में समृद्धि आती है।” इस तरह महामना राज्यपाल ने डाॅक्टर के रूप में उन्हें भगवान् के बहुत करीब माना। पर आजकल आप जो स्थिति बड़े या छोटे अस्पतालों में देखते हैं, क्या वह डाॅक्टर को इसी रूप में, इसी छवि में प्रस्तुत करती है? मुझे याद है वह सन् 1999 का तेइस सितम्बर, जब मेरी बेटी के जीवन में भयंकर तूफान आया था और मैं उसे एम्बुलेंस में पीजीआई रोहतक में लेकर पहुंचा था। बेटी का छह घंटे लम्बा ऑपरेशन चला और वह ज़िंदगी की लड़ाई जीत गयी। डाॅक्टर एन के शर्मा ने पूछा कि क्या आपको विश्वास था कि बेटी का ऑपरेशन सफल होगा ? मैंने जवाब दिया कि डाॅक्टर शर्मा आप भी नहीं जानते, जब आप मेरी बेटी का ऑपरेशन कर रहे थे तब आपके नहीं वे हाथ भगवान् के हाथ थे, उस समय आप भगवान् के बिल्कुल करीब थे, जिससे मेरी बेटी को भगवान् ज़िंदगी लौटा गये। डाॅक्टर शर्मा की आंखों में भी खुशी के आंसू थे और मेरी आँखों में भी ! इसमें उन दिनों मंत्री और मेरे मित्र प्रो सम्पत सि़ह का भी योगदान रहा, जो पता चलते ही दूसरे दिन वे पीजीआई, रोहतक के डायरेक्टर के पास पहुंचे और मुझे भी बुला लिया ! इस तरह हम तीन माह के बाद पीजीआई से मुक्त हुए लेकिन सचमुच भगवान् के दर्शन हो गये।
आजकल क्या ऐसे भगवान् बच रहे हैं? प्राइवेट अस्पताल अब पांच सितारा होटल जैसे हो गये हैं और इनका सारा खर्च मरीज के परिजनों से ही वसूला जाता है। बड़े बड़े अस्पतालों की खबरें आती हैं कि लाखों लाखों रुपये का बिल बना दिया और परिजन परेशान हो रहे हैं घर तक बिकने की नौबत आ जाती है, बैंक बेलेंस खाली हो जाते हैं। एक घटना और याद आ रही है! बेटी डेंगू से पीड़ित थी और डाॅक्टर अजय चौधरी ने उसका इलाज करना शुरू किया और बड़े विश्वास से कहा, कि मैं इसे ठीक कर दूंगा और उपचार शुरू किया। एक दिन बेटी के प्लेटलेट्स चढ़ाये जा रहे थे कि मुझे अज्ञात नम्बर से फोन आया और कहा गया कि आप फलाने अस्पताल पहु़ंच जाइये ! हम तोशाम के निकट खानक के मज़दूर हैं और हमारे एक साथी की मृत्यु इलाज के दौरान हो गयी है, डाॅक्टर हमें शव ले जाने नहीं दे रहे। मैं चलने लगा तो पत्नी ने रोकने की कोशिश की कि आपकी बेटी ज़िंदगी से लड़ रही है और आप दूसरों के लिए भाग रहे हो ? मैंने कहा कि क्या पता उनकी दुआ मेरी बेटी को लग जाये और मैंं उस अस्पताल गया, जहां वे लोग मेरी राह देख रहे थे, डाॅक्टर के चैम्बर में उनके साथ गया और विनती की कि आप इनके साथी का पार्थिव शरीर दे दीजिए लेकिन डाॅक्टर का कहना था कि ये हमारे पैसे नहीं दे रहे, इस पर मजदूरों ने बताया कि हमारी यूनियन ने चंदा इकट्ठा किया है और वही हमारे पास है, इससे ज्यादा की हमारी हिम्मत नहीं। डाॅक्टर ने कहा कि मैं तो अपनी फीस छोड़ दूंगा लेकिन मेरे सहयोगी डाॅक्टर नहीं मानेंगे। मैंने कहा कि फिर ठीक है, मेरे सहयोगी पत्रकार मेरी बात मान जायेंगे और अभी आकर लाइव चला देंगे, फिर आपका क्या होगा, यह विचार कर लीजिए ! बस, वे सयाने और अनुभवी थे, उन्होंने बिना एक रुपया लिए उन्हें उनके साथी का शव सौंप दिया लेकिन ऐसी नौबत अनेक अस्पतालों में आती है और आये दिन ऐसी शर्मसार करने वाली खबरें भी पढ़ने को मिलती हैं ! कृपया भगवान् का रूप बने रहिये !
(श्री सुरेश पटवा जी भारतीय स्टेट बैंक से सहायक महाप्रबंधक पद से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और स्वतंत्र लेखन में व्यस्त हैं। आपकी प्रिय विधा साहित्य, दर्शन, इतिहास, पर्यटन आदि हैं। आपकी पुस्तकों स्त्री-पुरुष “, गुलामी की कहानी, पंचमढ़ी की कहानी, नर्मदा : सौंदर्य, समृद्धि और वैराग्य की (नर्मदा घाटी का इतिहास) एवं तलवार की धार को सारे विश्व में पाठकों से अपार स्नेह व प्रतिसाद मिला है। अब आप प्रत्येक शनिवार आत्मसात कर सकते हैं यात्रा संस्मरण – सगरमाथा से समुन्दर।)
यात्रा संस्मरण – सगरमाथा से समुन्दर – ज़िम कार्बेट-नैनीताल – भाग- २६ ☆ श्री सुरेश पटवा
29 जुलाई को पूर्वाह्न दस बजे हरिद्वार से नैनीताल की यात्रा आरम्भ की। अब हमारी दाहिनी तरफ़ गंगा का तेज बहाव और बाईं तरफ़ हिमालय तराई से जुड़ी पहाड़ियाँ और उनसे निकलती पहाड़ी नदियाँ और इन पर बने पुलों से गुज़रते मनमोहक दृश्य की क़तार साथ लिए बढ़ चले।
आधा घंटा चलने के बाद उत्तर प्रदेश का बिजनौर जनपद लग गया। एक बड़ी बस्ती निज़ामाबाद आई। जिसकी बसावट इतिहास की एक बड़ी घटना से जुड़ी है। पानीपत का तीसरा युद्ध अहमद शाह अब्दाली और मराठा सेनापति सदाशिव राव भाऊ के बीच 14 जनवरी 1761 को वर्तमान पानीपत के मैदान मे हुआ जो वर्तमान समय में हरियाणा में है, इस युद्ध में तोपची इब्राहीम ख़ाँ गार्दी ने मराठों का साथ दिया था। दोआब के अफगान रोहिला और अवध के नवाब शुजाउद्दौला ने अहमद शाह अब्दाली का साथ दिया। अवध के तराई इलाक़े पर एक अफ़ग़ान सरदार नजीबुल्लाह का क़ब्ज़ा था। उसने अहमद शाह अब्दाली को भारत पर आक्रमण कर दिल्ली पर क़ब्ज़ा करने बुलाया था। उसने ही नजीबाबाद बसाया था।
नवाब नजीब-उद-दौला, जिसे नजीब खान के नाम से भी जाना जाता है, एक प्रसिद्ध रोहिल्ला मुस्लिम योद्धा और मुगल साम्राज्य और दुर्रानी साम्राज्य दोनों का रणनीतिकार योद्धा था। नजीब-उद-दौला 18 वीं शताब्दी के रोहिलखंड में एक प्रसिद्ध रोहिल्ला आदिवासी प्रमुख था, जिन्होंने 1740 के दशक में बिजनौर जिले में नजीबाबाद बसाया और “नवाब नजीब-उद-दौला” की उपाधि धारण की। 1757 से 1770 तक वह देहरादून पर शासन करते हुए सहारनपुर का गवर्नर था। वह मुगल सम्राट आलमगीर द्वितीय के एक समर्पित सैनिक था; बाद में अपने करियर में उन्हें नवाब नजीब-उद-दौला के नाम से जाना जाने लगा। उस अवधि के कई स्थापत्य अवशेष नजीबाबाद में हैं, जिन्हें उन्होंने मुगल मंत्री के रूप में अपने करियर की ऊंचाई पर बनवाए थे। उन्होंने सफदरजंग को वजीर के रूप में उत्तराधिकारी बनाया।
नजीब-उ-दौला की मृत्यु के बाद, उनका पुत्र जबीता खान उनका उत्तराधिकारी बना। उनका कब्रिस्तान आज भी नजीबाबाद में है। नजीबाबाद में सुल्ताना डाकू या “द सुल्तान बैंडिट” का अड्डा था। जिसके खंडहर अभी भी नजीबाबाद में स्थित है। नजीबाबाद शहर को “हिमालय का प्रवेश द्वार” और “शहरों का शहर” के रूप में भी जाना जाता है।
उत्तर प्रदेश का पिछड़ापन उजागर होने लगा। दो घंटे चलने के बाद उत्तराखंड के ऊधमपुर ज़िले का इलाक़ा लगते ही साफ़ सफ़ाई और विकास के दर्शन हुए। एक ढ़ाबे पर खाना खाकर रामनगर की तरफ़ यात्रा शुरू की। अब मुरादाबाद जनपद लग गया।
मुरादाबाद उत्तर प्रदेश में एक ज़िला, आयुक्त और नगर निगम है। मुरादाबाद राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली से 167 किमी की दूरी पर और राज्य की राजधानी लखनऊ से 344 किमी उत्तर-पश्चिम में रामगंगा नदी के तट पर स्थित है। मुगल बादशाह शाहजहां के तहत कटेहर के सिपाहसालार रुस्तम खान ने बादशाह के सबसे छोटे बेटे राजकुमार मुराद बख्श के नाम पर बस्ती का मुरादाबाद नाम रखा था। इसकी स्थापना के तुरंत बाद, बादशाह ने संभल को भी कटेहरा के अधीन कर दिया। मुरादाबाद को बाद में 1740 में अली मोहम्मद खान द्वारा रोहिलखंड राज्य में मिला दिया गया था। पहले रोहिल्ला युद्ध में रोहिलों के पतन के बाद 1774 में अवध राज्य के नियंत्रण में आ गया था और फिर 1801 में नवाब द्वारा ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को सौंप दिया गया था। उन्नीसवीं शताब्दी की शुरुआत में, रोहिलखंड क्षेत्र को रामपुर की रियासत और दो जिलों – बरेली और मुरादाबाद में विभाजित किया गया। उत्तर प्रदेश के उसी मुरादाबाद ज़िला की एक बड़ी बस्ती काशीपुर से उत्तराखंड के नैनीताल ज़िले में प्रवेश किया।
अंग्रेज वन्य जन्तुओं की रक्षा करने के शौकीन थे। सन् 1935 में रामगंगा के इस अंचल को वन्य पशुओं के रक्षार्थ सुरक्षित किया गया। उस समय के गवर्नर मालकम हेली के नाम पर इस पार्क का नाम ‘हेली नेशनल पार्क’ रखा गया। स्वतंत्रता मिलने के बाद इस पार्क का नाम ‘रामगंगा नेशनल पार्क’ रख दिया गया। विश्व में जिम कार्बेट नाम एक प्रसिद्ध शिकारी के रूप में प्रसिद्ध हो गया था। जिम कार्बेट जहाँ अचूक निशानेबाज थे वहीं वन्य पशुओं के प्रिय साथी भी थे।
आज यह पार्क इतना समृद्ध है कि इसके अतिथि-गृह में 200 अतिथियों को एक साथ ठहराने की व्यवस्था है। यहाँ आज सुन्दर अतिथि गृह, केबिन और टेन्ट उपलब्ध है। खाने का उत्तम प्रबन्ध भी है। ढिकाला में हर प्रकार की सुविधा है तो मुख्य गेट के अतिथि-गृह में भी पर्याप्त व्यवस्था है।
रामनगर रेलवे स्टेशन से 12 कि॰मी॰ की दूरी पर ‘कार्बेट नेशनल पार्क’ का गेट है। रामनगर रेलवे स्टेशन से छोटी गाड़ियों, टैक्सियों और बसों से पार्क तक पहुँचा जा सकता है। बस सेवाएँ भी उपलब्ध हैं। दिल्ली से ढिकाला तक बस आ-जा सकती है। यहाँ पहुँचने के लिए रामनगर कालागढ़ मार्गों का भी प्रयोग किया जा सकता है। दिल्ली से ढिकाला 297 कि॰मी॰ है। दिल्ली से गाजियाबाद- हापुड़- मुरदाबाद- काशीपुर- रामनगर होते हुए ढिकाला तक का मार्ग है। मोटर की सड़क अत्यन्त सुन्दर है।
पहाड़ी हिमालय का तराई क्षेत्र फिर शुरू हो गया। रामनगर पहुँच कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान के गेट पर पहुँचे। जिप्सी की बुकिंग कर हल्की बूंदाबाँदी के बीच तीन घंटे पार्क भ्रमण किया। दोपहर के समय खुले क्षेत्र में हिरण, नीलगाय, मोर दिखे लेकिन राजा साहिब किसी गुफा में आरामतलबगीर थे।
फिर कॉर्बेट संग्रहालय देखा। उनके साहसिक जीवन और लेखन की यादों के साथ कुछ समय वहाँ गुज़ारा। अब हम एक बहुत ही शानदार इंसान जिम कार्बेट के इलाक़े में हैं। उनकी कहानी न सिर्फ़ रोचक बल्कि रोमांचक भी है।
एडवर्ड ज़िम कॉर्बेट (25 जुलाई 1875 – 19 अप्रैल 1955) एक ब्रिटिश शिकारी, वन्यप्रेमी, प्रकृतिवादी और लेखक थे, जिन्होंने भारत में कई आदमखोर बाघों और तेंदुओं का शिकार करके भोलेभाले ग्रामीणों को भययुक्त किया था। उन्होंने ब्रिटिश भारतीय सेना में कर्नल का पद धारण किया और उनको तात्कालिक आगरा और अवध के संयुक्त प्रांतों की सरकार द्वारा आदमखोर बाघों और तेंदुओं को मारने के लिए बुलाया जाता था।
जिम कॉर्बेट का जन्म कुमाऊं के नैनीताल शहर में ब्रिटिश परिवार में 25 जुलाई 1875 को हुआ था। वह क्रिस्टोफर विलियम कॉर्बेट और उनकी दूसरी पत्नी मैरी जेन की आठवीं संतान थे। मैरी जेन के पहले पति आगरा के डॉ चार्ल्स जेम्स डॉयल थे, जिनकी मृत्यु 1857 के संग्राम में इटावा में हो गई थी। मैरी जेन अपने तीन बच्चों के साथ नैनीताल भाग कर जान बचाने में कामयाब रहीं। क्रिस्टोफर कॉर्बेट सैन्य सेवा से निवृत्त होने के बाद नैनीताल शहर के पोस्टमास्टर नियुक्त होकर 1862 में नैनीताल चले गए थे। उनकी पहली पत्नी की मृत्यु हो चुकी थी। नैनीताल में उनकी मुलाक़ात मैरी जेन से हुई। दोनों ने शादी कर ली। उन दोनों के नौ बच्चे हुए, क्रिस्टोफर कॉर्बेट के रिश्तेदार के 1857 संग्राम में मारे गए, रिश्तेदारों के तीन बच्चे और मैरी जेन के तीन बच्चे इस प्रकार पंद्रह बच्चों के भीड़ भरे परिवार में ज़िम का उम्रदराज़ नम्बर ऊपर से चौदहवाँ था। परिवार नैनीताल में रहता था परंतु सर्दियों में तलहटी में चला जाता था, जहाँ उनके पास गाँव में “अरुंडेल” नामक एक झोपड़ी थी, जो अब कालाढुंगी के नाम से एक बड़ी बस्ती हो गई है।
1891 तक कुमांऊँ कमिश्नरी में कुमांऊँ, गढ़वाल और तराई के तीन जिले शामिल थे। उसके बाद कुमांऊँ को अल्मोड़ा व नैनीताल दो जिलों में बाँटा गया। ट्रैल, लैशिगंटन, बैटन, सर हेनरी रामसे आदि विभिन्न कमिश्नरों ने कुमांऊँ में समय-समय पर विभिन्न सुधार तथा रचनात्मक कार्य किए। जमीन का बंदोबस्त, लगान निर्धारण, न्याय व्यवस्था, शिक्षा का प्रसार, परिवहन के साधनों की उपलब्धता के कारण अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान कुमांऊँ की खूब उन्नति हुई। हेनरी रामसे के विषय में बद्रीदत्त पांडे लिखते हैं- ‘उनको कुमांऊँ का बच्चा-बच्चा जानता है। वे यहाँ के लोगों से हिल-मिल गए थे। घर-घर की बातें जानते थे। पहाड़ी बोली भी बोलते थे। किसानों के घर की मंडुवे की रोटी भी खा लेते थे।’ अंग्रेजों ने शासन व्यवस्था में पर्याप्त सुधार किए, वहीं अपने शासन को सुदृढ़ बनाने के लिए कठोरतम न्याय व्यवस्था स्थापित की, जो अब नैनीताल के उच्च न्यायालय के रूप में साकार है।
मैरी जेन यूरोपीय लोगों के बीच नैनीताल के सामाजिक जीवन में बहुत प्रभावशाली महिला थीं और वह एक तरह की रियल एस्टेट एजेंट बन गईं। क्रिस्टोफर विलियम 1878 में पोस्टमास्टर के पद से सेवानिवृत्त हुए। 21 अप्रैल 1881 को दिल का दौरा पड़ने के कुछ सप्ताह बाद उनकी मृत्यु हो गई। जिम तब छह वर्ष के थे और उनके सबसे बड़े भाई टॉम ने नैनीताल के पोस्टमास्टर के रूप में पदभार संभाला। बहुत कम उम्र से, जिम कालाढुंगी में अपने घर के आसपास के जंगलों और वन्य जीवन पर मोहित हो गया था। लगातार भ्रमण से उन्होंने अधिकांश जानवरों और पक्षियों को उनकी आवाज़ से पहचानना सीखा। समय के साथ वह एक अच्छा ट्रैकर और शिकारी बन गया। उन्होंने ओक ओपनिंग स्कूल में अध्ययन किया, जो नैनीताल में फिलेंडर स्मिथ कॉलेज, जिसे बाद में हैलेट वॉर स्कूल के रूप में जाना जाता है, और अब बिड़ला विद्या मंदिर, नैनीताल में विलय हो गया। उन्नीस साल की उम्र से पहले उन्होंने स्कूल छोड़ दिया और बंगाल और उत्तर पश्चिम रेलवे में नौकरी कर ली। शुरू में एक ईंधन निरीक्षक के रूप में काम किया, और बाद में बिहार के मोकामा घाट पर गंगा के पार माल के ट्रांस-शिपमेंट के लिए एक ठेकेदार के रूप में काम किया। जिम कॉर्बेट ने मोकामा घाट पर रेलवे कर्मचारियों के लिए एक स्कूल शुरू किया।
अपने जीवन के दौरान जिम कॉर्बेट ने कई आदमखोर तेंदुओं और बाघों का पता लगाया और उन्हें गोली मार कर इलाक़े के बाशिंदों को डर से निजात दिलाई। लगभग एक दर्जन अच्छी तरह से प्रलेखित आदमखोर थे। कॉर्बेट ने अपनी पुस्तकों में मानव हताहतों का ब्योरा प्रदान किया है, जिसमें रुद्रप्रयाग का आदमखोर तेंदुआ, चंपावत टाइगर और द टेंपल टाइगर और कुमाऊं के आदमखोर शामिल हैं। ब्रिटिश और भारतीय सरकारों के रिकॉर्ड के अनुसार इन आदमखोर ने 1,200 से अधिक पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को मार डाला था। इसलिए आदमखोरों को जीने का अधिकार नहीं था।
पहला नामित आदमखोर बाघ, चंपावत टाइगर अनुमानित 436 प्रलेखित मौतों के लिए जिम्मेदार था। 1910 में पनार तेंदुआ था, जिसने कथित तौर पर 400 लोगों को मार डाला था। 1926 में रुद्रप्रयाग का आदमखोर तेंदुआ था, जिसने आठ साल से अधिक समय तक बद्रीनाथ की यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों को आतंकित किया, और 126 से अधिक मौतों के लिए जिम्मेदार बताया गया। उसके द्वारा मारे गए अन्य उल्लेखनीय आदमखोरों में तल्ला-देस आदमखोर, मोहन आदमखोर, ठक आदमखोर, मुक्तेसर आदमखोर और चौगढ़ बाघिन थे।
खतरनाक शिकारी खेल का पीछा करते हुए कॉर्बेट अकेले और पैदल शिकार करना पसंद करते थे। वह अक्सर एक छोटा कुत्ता रॉबिन के साथ शिकार करते थे, जिसके बारे में उन्होंने कुमाऊं के आदमखोरों किताब में लिखा था।
कॉर्बेट ने 1920 के दशक के अंत में अपना पहला कैमरा खरीदा और अपने दोस्त फ्रेडरिक वाल्टर चैंपियन से प्रेरित होकर सिने फिल्म पर बाघों को रिकॉर्ड करना शुरू किया। हालाँकि उन्हें जंगल का घनिष्ठ ज्ञान था, लेकिन अच्छी तस्वीरें प्राप्त करना एक कठिन काम था, क्योंकि जानवर बेहद शर्मीले थे।
उन्होंने कुमाऊं हिल्स में भारत के पहले राष्ट्रीय उद्यान, हैली नेशनल पार्क की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसका नाम शुरुआत में लॉर्ड मैल्कम हैली के नाम पर रखा गया था। 323.75 किमी 2 (125.00 वर्ग मील) को कवर करने वाले हैली नेशनल पार्क के रूप में जाना जाने वाला एक आरक्षित क्षेत्र 1936 में बनाया गया था, जब सर मैल्कम हैली संयुक्त प्रांत के गवर्नर थे; और एशिया का पहला राष्ट्रीय उद्यान अस्तित्व में आया। 1954-55 में रिजर्व का नाम बदलकर रामगंगा नेशनल पार्क कर दिया गया और 1955-56 में इसका नाम बदलकर जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क कर दिया गया। इंडोचाइनीज टाइगर का नाम जिम कॉर्बेट के नाम पर 1968 में व्रातिस्लाव माज़क द्वारा रखा गया था, जो दक्षिण पूर्व एशिया में रहने वाले बाघ की नई उप-प्रजातियों का वर्णन करने वाले पहले व्यक्ति थे। 1968 में, बाघों की पांच शेष उप-प्रजातियों में से एक का नाम उनके नाम पर रखा गया था: पैंथेरा टाइग्रिस कॉर्बेटी, इंडोचाइनीज़ टाइगर, जिसे कॉर्बेट का बाघ भी कहा जाता है।