सूचना/Information ☆ ✒️ प्रा. सुनंदा पाटील – अभिनंदन – ✒️ ☆ सम्पादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ☆

सूचना/Information 

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

✒️ प्रा. सुनंदा पाटील ✒️

🌺 अ  भि  नं  द  न  🌺

आपल्या समूहातील ज्येष्ठ लेखिका सुश्री सुनंदा पाटील यांना मुंबईस्थित ‘सर्वद फाउंडेशन‘ या प्रसिद्ध संस्थेतर्फे “ स्टार लेखिका “ हा सन्मानजनक पुरस्कार नुकताच प्राप्त झालेला आहे. सुनंदाताई या कवयित्री, कादंबरीकार, कथालेखिका आणि गझलकार म्हणून साहित्यक्षेत्रात परिचित आहेत. ‘गझलनंदा‘ या नावाने गेली ५० वर्षे त्या गझल-लेखन करत आहेत.

या पुरस्काराबद्दल सुनंदाताईंचे आपल्या सर्वांतर्फे हार्दिक अभिनंदन, आणि यापुढील अशाच उत्तम आणि यशस्वी साहित्यिक वाटचालीसाठी मनःपूर्वक शुभेच्छा.💐

आजच्या ‘ मनमंजुषा ‘ सदरात वाचूया त्यांचा एक छान लेख.

संपादक मंडळ

 ई-अभिव्यक्ती मराठी

≈संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /मंजुषा मुळे/ गौरी गाडेकर≈

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सूचना/Information ☆ संपादकीय निवेदन ☆ सुश्री संगीता कुलकर्णी – अभिनंदन ☆ सम्पादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ☆

सूचना/Information 

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

? सुश्री संगीता कुलकर्णी  – अभिनंदन ?

💐 संपादकीय निवेदन 💐

आपल्या समूहातील ज्येष्ठ कवयित्री व लेखिका सुश्री संगीता कुलकर्णी यांना नुकताच सर्वद फाउंडेशन, मुंबई यांच्यातर्फे “सर्वद स्टार उत्कृष्ट साहित्यिका” हा मानाचा पुरस्कार प्रदान करण्यात आला आहे.

सर्वद फाउंडेशन, मुंबई ही संस्था मराठी भाषा आणि मराठी संस्कृती-संवर्धन या ध्येयाने कार्यरत असून, या ध्येयाशी निगडीत अनेक कामे या संस्थेमार्फत केली जातात, ज्या अंतर्गत राज्यस्तरीय साहित्य संमेलनही आयोजित केले जाते. या संस्थेतर्फे संगीताताईंना हा मानाचा पुरस्कार मिळणे ही खरोखरच कौतुकास्पद गोष्ट आहे.

 तसेच “ठाण्याचे विचारदीप” या पुस्तकात त्यांचा साहित्य प्रवास उलगडणारा विशेष लेखही प्रकाशित केला गेला आहे ही सुद्धा अभिनंदनीय गोष्ट आहे.

ई अभिव्यक्ती समूहातर्फे संगीताताईंचे मनःपूर्वक अभिनंदन आणि साहित्य क्षेत्रातली त्यांची वाटचाल उत्तरोत्तर अशीच यशस्वी होत राहो या आपल्या सर्वांतर्फे त्यांना हार्दिक शुभेच्छा. ?

आजच्या ‘ मनमंजुषा ‘ सदरात वाचू या कवितेविषयीचे त्यांचे विचार.

संपादक मंडळ, ई-अभिव्यक्ती (मराठी)

≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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मराठी साहित्य – कवितेचा उत्सव ☆ अस्सा संसार सुखाचा बाई.. + संपादकीय निवेदन – राधिका भांडारकर – अभिनंदन ☆ सम्पादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ☆

सूचना/Information 

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

राधिका भांडारकर 

💐 अ भि नं द न 💐

साहित्य संवेदना प्रस्तुत ‘कवितेचे पान’ या साहित्यिक उपक्रमांतर्गत कवयित्री राधिका भांडारकर यांची अस्सा संसार सुखाचा बाई ही कविता सर्वोत्कृष्ट काव्यरचना म्हणून निवडण्यात आली आहे.

राधिका भांडारकर या आपल्या समुहातील ज्येष्ठ साहित्यिका आहेत. त्यांचे ई अभिव्यक्ती मराठी परिवारातर्फे मन:पूर्वक अभिनंदन!

आपली लेखणी अशीच साहित्याचे अर्थपूर्ण विश्व समृद्ध करत राहो, हीच सदिच्छा व शुभेच्छा ❄️❄️

💐 हार्दिक अभिनंदन! 💐

संपादक मंडळ

ई अभिव्यक्ती मराठी

पुरस्कार प्राप्त काव्य

? कवितेचा उत्सव ?

☆ अस्सा संसार सुखाचा बाई… ☆ सौ. राधिका भांडारकर

माझा डाव मजेत मी खेळेन

पिसून आलेले पत्ते नीट लावेन…

 

कशाला ढुंकावे शेजरच्या डावात

असेनाका तिथे एक्क्यांची खैरात..

 

दोघांनी पाळावे हेच सूत्र जीवनी

नाते प्रेमाचे जपावे असे मनोमनी..

 

तुझे माझे कोण्या कारणे करावे

तुझ्यात माझ्यात अहं भेद नसावे…

 

होतील ही मतभेद नि भांडणे

मनी असू द्यावे सुखाचे नांदणे..

 

बंधने कधी नसावीत लादलेली

असावीत ती स्वानंदे पेललेली..

 

स्वातंत्र्य अभिव्यक्ती सदा जपावी

सुखाची हीच गुरुकिल्ली मानावी..

 

‘मीच का?’ प्रश्न दोघात न यावा

संसार दोघांचा सावरून घ्यावा..

 

एकमेकांचा सन्मान हाच महत्त्वाचा

विरोधातही आदर व्हावा विचारांचा..

 

नाते इतके लवचिक असावे

प्रेमातले काटेही कधी न बोचावे…

 

नाही जिथे संशय उथळ आततायी

असा संसार होईल सुखाचा बाई..

©  राधिका भांडारकर

वाकड, पुणे

मो.९४२१५२३६६९

≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /मंजुषा मुळे/गौरी गाडेकर≈

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सूचना/Information ☆ संपादकीय निवेदन ☆ श्री विश्वास देशपांडे – अभिनंदन ☆ सम्पादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ☆

सूचना/Information 

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

? श्री विश्वास देशपांडे – अभिनंदन ?

💐 संपादकीय निवेदन 💐

आपल्या समूहातील ज्येष्ठ लेखक श्री. विश्वास देशपांडे यांनी लिहिलेल्या आनंदयात्री रवींद्रनाथ या पुस्तकाला नुकताच तितीक्षा इंटरनॅशनल, पुणे यांच्या तर्फे दिला जाणारा – – 

उत्कृष्ट ग्रंथ पुरस्कार” हा मानाचा पुरस्कार प्राप्त झाला आहे.

आपल्या सर्वांतर्फे श्री विश्वास देशपांडे यांचे मनःपूर्वक खूप अभिनंदन, आणि त्यांच्या यापुढील अशाच दैदीप्यमान साहित्यिक वाटचालीसाठी असंख्य हार्दिक शुभेच्छा.

आजच्या अंकातील ‘ पुस्तकावर बोलू काही ‘ या सदरात करून घेऊ.. या पुरस्कारप्राप्त पुस्तकाचा थोडक्यात परिचय.

संपादक मंडळ

ई-अभिव्यक्ती (मराठी)

≈संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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सूचना/Information ☆ संपादकीय निवेदन ☆ प्रकाशन संबंधी महत्वपूर्ण सूचना 📖 ☆ सम्पादक मंडल ई-अभिव्यक्ति ☆

सूचना/Information 

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

📖 प्रकाशन संबंधी महत्वपूर्ण सूचना !! 📖

कुछ तकनीकी कारणों से बुधवार दि. ६/५/२६ से रविवार दि. १०/५/२६ तक ५ दिनों के लिए ई-अभिव्यक्ति का प्रकाशन बंद रहेगा। 

आप सभी का इसी प्रकार स्नेह, प्रतिसाद और सहयोग अपेक्षित है।

 

– संपादक मंडल 

ई-अभिव्यक्ति 

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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सूचनाएँ/Information ☆ चंद्रभान ‘राही’ के उपन्यास ‘अंतिम समय का सच’ और पत्रिका ‘अमृत दर्पण’ का गरिमामयी लोकार्पण ☆ साभार – श्री रमेश श्रीवास्तव☆

 ☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

🌹 चंद्रभान ‘राही’ के उपन्यास ‘अंतिम समय का सच’ और पत्रिका ‘अमृत दर्पण’ का गरिमामयी लोकार्पण ☆ साभार – श्री रमेश श्रीवास्तव🌹

भोपाल । न्यू भूमिका साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था के तत्वावधान में विगत दिनों एक भव्य साहित्यिक समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार चंद्रभान ‘राही’ द्वारा रचित उपन्यास और त्रैमासिक पत्रिका ‘अमृत दर्पण’ का लोकार्पण एवं सारगर्भित साहित्य चर्चा संपन्न हुई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री अश्विनी दुबे ने की। मुख्य अतिथि के रूप में हैदराबाद से पधारे डॉ. सुरेश मिश्रा उपस्थित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीमती संध्या सिलावट ने शिरकत की।

समारोह का शुभारंभ माँ सरस्वती की वंदना से हुआ, जिसके पश्चात अतिथियों का स्वागत संस्था की उपाध्यक्ष अनीता जी द्वारा किया गया। कार्यक्रम के विभिन्न चरणों में वक्ताओं ने रचनाकर्म और समकालीन साहित्य पर अपने विचार साझा किए:

लेखकीय वक्तव्य: उपन्यासकार चंद्रभान ‘राही’ ने अपने रचनाकर्म से जुड़ी स्मृतियों को साझा करते हुए बताया कि उनका यह नवीन उपन्यास मनुष्य के जीवन के अंतिम सोपान (वृद्धावस्था) के मनोवैज्ञानिक द्वंद्व और संघर्षों पर केंद्रित है।

प्रख्यात समीक्षक इक़बाल मसूद ने पुस्तक की विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत की। उन्होंने उपन्यास की शिल्पगत विशेषताओं और इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए इसे समाज का आईना बताया।

अतिथि उद्बोधन: विशिष्ट अतिथि संध्या सिलावट ने उपन्यास के कलेवर और कथानक की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। वहीं, मुख्य अतिथि डॉ. सुरेश मिश्रा ने ‘अमृत दर्पण’ पत्रिका के अखिल भारतीय स्वरूप की सराहना करते हुए कहा कि यह पत्रिका देश भर के रचनाकारों को एक मंच प्रदान कर रही है। उन्होंने उपन्यास को एक उत्कृष्ट और पठनीय कृति करार दिया।

अपने अध्यक्षीय भाषण में अश्विनी दुबे ने कहा, “वही पत्रिका दीर्घजीवी और सफल होती है जो शासकीय अनुदान पर निर्भर न होकर स्वावलंबन के साथ साहित्य की सभी विधाओं को निष्पक्ष स्थान देती है।” उन्होंने राही जी के उपन्यास को मानवीय संवेदनाओं का जीवंत दस्तावेज़ बताया।

समारोह का कुशल संचालन डॉ. आज़म ने किया। कार्यक्रम के अंत में संस्था के अध्यक्ष श्री रमेश जी ने सभी पधारे हुए अतिथियों एवं साहित्यकारों के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर नगर के प्रबुद्ध साहित्यकार और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से सुदर्शन सोनी, सुरेश पटवा, अरुण अर्णव खरे, श्री धमीनिया, मंजू राही, चरणजीत सिंह कुकरेजा, अनिता तिवारी, शोभा जोशी, कमल प्रसाद कमल, महेश सोनी, अज़ीम आज़ाद और अशोक निर्मल शामिल थे। यह आयोजन अपनी बौद्धिक चर्चा और साहित्यिक शुचिता के कारण लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

श्री रमेश श्रीवास्तव
अध्यक्ष, न्यू भूमिका साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था, भोपाल।

समाचार साभार – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘ विनम्र’

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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सूचनाएँ/Information ☆ हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स, लंदन में ग्रहण किया वातायन शिखर सम्मान ☆ साभार – डॉ. जवाहर कर्नावट ☆

 ☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

🌹 हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स, लंदन में ग्रहण किया वातायन शिखर सम्मान🌹 साभार – डॉ जवाहर कर्णावट 🌹

यू.के. में पिछले 25 वर्षों से भाषा एवं साहित्य के क्षेत्र में कार्यरत सुप्रसिद्ध संस्था वातायन  द्वारा हाउस आफ लॉर्ड्स, लंदन में आयोजित समारोह में वातायन शिखर सम्मान ब्रिटिश संसद के लार्ड उदय नागाराजु ने मुझे प्रदान किया ।इसके साथ ही वर्ष 2025 का वातायन शिखर सम्मान  सुश्री सुलेखा चोफरा तथा साहित्य सम्मान ब्रिटेन की लेखिका डाॅ.अचला शर्मा तथ शैल अग्रवाल जी को प्रदान किया गया ।प्रारंभ में वातायन की संयोजक एवं सुप्रसिद्ध लेखिका दिव्या माथुर ने लॉर्ड नागराजु तथा भारतीय दूतावास की प्रथम सचिव डॉक्टर सलोनी सहाय का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन यूके हिंदी समिति के संस्थापक श्री पद्मेश गुप्त ने किया ।इस अवसर पर आईसेक्ट प्रकाशन द्वारा प्रकाशित डॉ. अरुण अजीतसरिया द्वारा लिखित पुस्तक ‘प्रवासी साहित्यकार :दिव्या माथुर’ तथा रबींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के प्रवासी भारतीय साहित्य शोध केंद्र द्वारा डॉ. वंदना मुकेश के संपादन में प्रकाशित ‘ब्रिटेन की चयनित रचनाएं ‘ पुस्तक का लोकार्पण भी हुआ। कार्यक्रम  में   लार्ड उदय नागराजु  को विश्व रंग की पुस्तिका, श्री पद्मेश गुप्त को ‘विश्व में हिंदी’ पुस्तक तथा लंदन की लेखिका शिखा वार्ष्णेय जी को ‘विदेश में हिंदी पत्रकारिता’ पुस्तक भेंट की  । आभार  प्रदर्शन वातायन की अध्यक्ष श्रीमती मीरा गौतम ने किया। कार्यक्रम में  श्री विजय आनंद (कॉन्फ्लुएंस पत्रिका) बीबीसी के प्रस्तोता श्री नरेश कौशिक, पॉडकास्टर  और  सिने  इन्क यूके के निदेशक श्री परवेज आलम सहित ब्रिटेन के अनेक साहित्यकार उपस्थित रहे।

साभार – डॉ जवाहर कर्णावट

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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सूचना/Information ☆ संपादकीय निवेदन ☆ प्रकाशन संबंधी महत्वपूर्ण सूचना 📖 ☆ सम्पादक मंडल ई-अभिव्यक्ति ☆

सूचना/Information 

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

📖 प्रकाशन संबंधी महत्वपूर्ण सूचना !! 📖

कुछ अपरिहार्य कारणों से शनिवार दि. २५/४/२६ से गुरुवार दि. ३०/४/२६ तक ६ दिनों के लिए ई-अभिव्यक्ति का प्रकाशन बंद रहेगा। 

इसके अलावा, हर महीने के पाक्षिक अवकाश 28 तारीख को ई-अभिव्यक्ति का प्रकाशन नियमित रूप से होगा। 

आप सभी का इसी प्रकार स्नेह, प्रतिसाद और सहयोग अपेक्षित है।

 

– संपादक मंडल 

ई-अभिव्यक्ति 

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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सूचना/Information ☆ संपादकीय निवेदन ☆ दि. २५/४/२६ ते दि. ३०/४/२६ प्रकाशन बंद – सूचना 📖 ☆ सम्पादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ☆

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(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

💐 संपादकीय निवेदन 💐

📖  दि. २५/४/२६ ते दि. ३०/४/२६ प्रकाशन बंद – सूचना 📖

कृपया सर्व सदस्यांनी नोंद घ्यावी – – – 

काही अपरिहार्य कारणामुळे शनिवार दि. २५/४/२६ ते गुरुवार दि. ३०/४/२६.. असे ६ दिवस ई-अभिव्यक्ति दैनिकाचे प्रकाशन बंद रहाणार आहे. शुक्रवार दि. १/५/२६ पासून प्रकाशन पुन्हा नियमित सुरू होईल.

– संपादक मंडळ

ई – अभिव्यक्ती, मराठी विभाग

≈संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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सूचनाएँ/Information ☆ – महाकवि अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध जयंती पर अंतर्राष्ट्रीय विमर्श संपन्न – ☆  साभार – आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ ☆

 ☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

🌹– महाकवि अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध जयंती पर अंतर्राष्ट्रीय विमर्श संपन्न – ☆ साभार – आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ –🌹

भारत-ऑस्ट्रेलिया साहित्य सेतु थिएटर ऑन डिमांड के तत्वावधान में १५ अप्रैल २०२६ को हिंदी साहित्य के शलाका पुरुष साहित्य रत्न, महाकवि अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध जयंती के मांगलिक अवसर पर चतुर्थ अंतर्राष्ट्रीय साहित्य विमर्श एवं कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया।

इस सारस्वत अनुष्ठान का संयोजन हरिऔध जी की प्रपौत्री तनया अपर्णा वत्स ने किया। इस अनुष्ठान का श्री गणेश सरस्वती वंदना पश्चात्  हरिऔध जी की ९४ वर्षीया प्रपौत्री आशा वत्स जी द्वारा आशीर्वचन व अतिथि स्वागत से हुआ। इस अंतर्राष्ट्रीय काव्य सम्मेलन में ४० कवियों ने हिस्सा लिया।

भारत के मध्य प्रदेश की संस्कारधानी ऐतिहासिक नगरी जबलपुर से जुड़े मुख्य अतिथि आचार्य इंजी. संजीव वर्मा “सलिल” जी । ५०० से अधिक ने छंदों का आविष्कार कर हिंदी पिंगल को समृद्ध करने वाले सलिल जी ने “हरिऔध” के उपनाम को उनके नाम का पर्याय बताते हुए कहा कि अयोध्या के सिंह तथा औध अर्थात अवध के हरि श्री राम एक ही हैं। साहित्य की सम सामयिक उपादेयता व प्रासंगिकता के निकष पर हरिऔध साहित्य को खरा बताते हुए आचार्य सलिल जी ने रचनाधर्मियों से आग्रह किया कि वे भाषिक शुद्धता पर लोकोपयोगी कथ्य को वरीयता देते हुए वह लिखें जो भावी पीढ़ी के लिए उपयोगी हो। विद्वान वक्ता ने हिंदी को विश्ववाणी बनाने के लिए हर विषय-विधा और विज्ञान की तकनीकी जानकारियों युक्त पुस्तकों और हिंदी में शिक्षण को हरिऔध जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताते हुए मध्य प्रदेश की तरह अन्यत्र भी इंजीनियरिंग-मेडिकल व अन्य विज्ञान विषय हिंदी में पढ़ाए जाने पर बल दिया।

आयोजन के अध्यक्ष श्रेष्ठ-ज्येष्ठ हिंदी साहित्यकार भगवान सिंह जी ने हिंदी को वर्तमान रूप में लाने के लिए हरिऔध जी के प्रयासों को सराहते हुए आम जन में प्रचलित भाषा का प्रयोग करने, लोकोक्तियों व मुहावरों का प्रयोग करने, भाषा में नए शब्द-प्रयोग करने को भाषिक विकास हेतु आवश्यक बताया।

उपाध्यक्ष की आसंदी से संबोधित करते हुए साहित्य भूषण डॉ. रामसनेही लाल शर्मा “यायावर” ने हरिऔध जी को मुक्तक (चौपदे) विधा का उन्नायक बताया।

मुख्य वक्ता विवेक अग्रवाल जी ने हरिऔध कालीन हिंदी की अब तक की विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए सटीक शब्द चयन को हरिऔध जी की विशेषता बताया।

विशिष्ट अतिथि रामकिशोर उपाध्याय ने हरिऔध जी की कविताओं को मुर्दे में प्राण फूँकनेवाला बताया।

विशिष्ट अतिथि हिमांशु राय एच. रावल ने अनुष्ठान को पूर्वज पूजन निरूपित करते हुए अन्य साहित्यकारों पर भी ऐसे आयोजन किए जाने का आह्वान किया तथा कहा-

 माँ के चश्मे से जब जहाँ देखा।

कोई न हिंदू न मुसलमां देखा।”

सारस्वत अतिथि डॉ. संगीता भारद्वाज “मैत्री” भोपाल ने वत्स परिवार द्वारा अपने पूर्वजों की अनमोल साहित्यिक विरासत को संँभालने व आगे बढ़ाने की सराहना की। उन्होंने अनेकता में एकता पर दोहे प्रस्तुत किए-

“नव किरणें नवचेतना, खुशियाँ आईं आज।

नया साल स्वागत करे,सफल सभी हों काज।।”

डॉ. नीलिमा रंजन भोपाल ने खुद की रचना पढ़ने का लोभ संवर्त करते हुए हरिऔध जी की “हिंदी भाषा” शीर्षक लंबी रचना के चयनित अंश का पाठ कर शब्द सुमन अर्पित किए।

कार्यक्रम का सुचारु संचालन अपर्णा वत्स जी ने तथा वक्ता परिचय  सुप्रसिद्ध पटकथा लेखक पवन सेठी जी मुंबई ने दिया। अपर्णा वत्स ने धरती तथा भारत का वंदन किया-

मेरी पावन धरा को प्रणाम।

धरती के कण-कण को प्रणाम।।

नमन देश के सपूतों को प्रणाम।

भारत के गौरव को प्रणाम।।”

चिंतक-विचारक पवन सेठी जी  गर्भित रहा।

आदरणीय पवन सेठी जी ने कहा कि “प्रिय प्रवास” में हरिऔध जी ने राधा और श्रीकृष्ण की अनूठी रूपछटा दिखाई है। उन्होंने “ज्योति कलश” रचना का पाठ किया।विनय विक्रम जी ने “मन भ्रमर की मंजरी तुम/तार सप्तक गा रहा हूँ” प्रस्तुत कर सराहना पाई।

सुभाष जी, मेलबॉर्न ने कहा कि आज एक योद्धा का जन्मदिन है। अवसर है, कि हम चिंतन करें, विचार करें कि हम हिंदी में लिखें। आपने कहा- “इंग्लिश आई शहर में होकर आज सवार। गाँव में सोती रही हिंदी पैर पसार।।”

डॉ. अलका अग्रवाल के अनुसार प्रिय प्रवास में प्रकृति की सुंदरता का सुंदर वर्णन किया गया है। उन्होंने हरिऔध जी की पंक्तियाँ

 “नहीं बदलने देंगे हम

हरियाली को पतझड़ में “

प्रस्तुत की।

आदरणीय कुसुम जी ने कहा-

देवनागरी लिपि है जिसकी।

उस हिंदी का है अभिनंदन।।

कवि प्रदीप श्रीवास्तव भोपाल ने कहा- “हिंदी माथे की बिंदी, हम अपना फर्ज निभाते हैं /हिंदी में है नहीं त्रासदी, सब सुखांत कथाओं में।

श्री सुरेश पटवा जी भोपाल ने कहा “प्रिय प्रवास” सिर्फ काव्य नहीं, एक अनुभूति है, विरह का एक भाव जिस पर हरिऔध जी ने महाकाव्य लिख दिया, जो हिंदी जगत के लिए बहुत बड़ी देन है।

श्री गोकुल सोनी भोपाल ने  देशभक्ति परक सुंदर कविता प्रस्तुत की-

वक्त आ गया निकलो घर से, लेकर आज तिरंगा।

जय जय हिंदुस्तान, जय जय देश महान।।”

कवि बी के श्रीवास्तव भोपाल ने कहा कि जो पूर्णता से कार्य करे वही श्रेष्ठ है।

हरिऔध जी का हर सृजन हर रचना सर्वश्रेष्ठ है।

कवि मनोज गुप्ता जी भोपाल ने अमावस की काली रात पर  कहा- “मैंने तुमको तम से प्रति क्षण दूर रखा।”

कवयित्री सरला वर्मा जी भोपाल की पंक्तियाँ थीं-

जो चक्षु चर्म न देख सके, वह कर्म तुम्हें दिखलाते हैं।

स्वर्णिम जीवन के अक्षर तो, पुण्यों से रोपे जाते हैं।।”

सोनम झा जी ने रचना पढ़ी-

एक तिनका बहुत है तेरे लिए।।”

सुमन जैन जी ने अनेकता में एकता पर अपनी कविता प्रस्तुत की-

“मैं तो मन की स्याही हूँ,

जो माँ शारदे की कलम में घुसकर ,

उसकी पोथी में फैल जाती है।।

कवि पुरुषोत्तम तिवारी “सत्यार्थी” भोपाल ने पढ़ा-

देह में है प्राण जब तक,

द्वंद से लड़ता रहूँगा।

मैं अंधेरों का विरोधी,

सूर्य नित गढ़ता रहूँगा।

आयोजन की श्रीवृद्धि करते हुए कालजयी कवि श्री कुँवर बेचैन जी के पुत्र तथा पुत्र वधू भावना कुँवर ने सहभागिता की। भावना कुँवर जी की निम्न पंक्तियाँ सराही गईं-

अपने दिल से प्यार का पैगाम ही भेजा गया।

और वह बस नफरतों के बीज ही बोता गया।।

कवि प्रगीत कुँवर जी ने स्वरबद्ध अपनी पंक्तियाँ प्रस्तुत कीं-

न जाने क्या हुआ चेहरे में हर दिन ।

बदलते ही रहा शीशे में हर दिन।।

चुभाया तीर जो बातों का उसने ।

वही चुभता रहा सीने में हर दिन।।”

कवयित्री नीलम भटनागर जी ने कहा कि हरिऔध जी का प्रिय प्रवास पढ़कर और पढ़ाकर ही हम हिंदी में स्थान बना पाए हैं।

हिंदी हमारी पहचान है।

हमारी आन बान शान है।।”

इस भव्य कार्यक्रम का समापन करते हुए आशा वत्स जी की बड़ी पुत्री श्रीमती अंगिरा वत्स जी ने इस कार्यक्रम से जुड़े सभी विद्वत जनों वरिष्ठ, कनिष्ठ साहित्यकारों का हृदय से आभार ज्ञापित किया तथा हरिऔध जी की पाँचवी पीढ़ी में ईशानी वत्स के हरिऔध-साहित्य से लगाव व जुड़ाव का उल्लेख किया।

०००

 साभार – आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’, जबलपुर 

≈संस्थापक संपादक श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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