(सुप्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार सुश्री नरेन्द्र कौर छाबड़ा जी पिछले 40 वर्षों से अधिक समय से लेखन में सक्रिय। 5 कहानी संग्रह, 1 लेख संग्रह, 2 लघुकथा संग्रह, 1 पंजाबी कथा संग्रह 1 तमिल में अनुवादित कथा संग्रह,मराठी में अनुवादित लघुकथा संग्रह, मराठी में अनुवादित कहानी संग्रह, कुल 12 पुस्तकें प्रकाशित। पहली पुस्तक मेरी प्रतिनिधि कहानियाँ को केंद्रीय निदेशालय का हिंदीतर भाषी पुरस्कार। एक और गांधारी तथा प्रतिबिंब कहानी संग्रह को महाराष्ट्र हिन्दी साहित्य अकादमी का मुंशी प्रेमचंद पुरस्कार 2008 तथा २०१७। प्रासंगिक प्रसंग पुस्तक को महाराष्ट्र अकादमी का काका कालेलकर पुरस्कार 2013 । लेखन में अनेकानेक पुरस्कार। आकाशवाणी से पिछले 45 वर्षों से रचनाओं का प्रसारण। लेखन के साथ चित्रकारी, समाजसेवा में भी सक्रिय । महाराष्ट्र बोर्ड की 10वीं कक्षा की हिन्दी लोकभारती पुस्तक में 2 लघुकथाएं शामिल 2018)
आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय लघुकथा अपना काम करती रहो।
लघुकथा – अपना काम करती रहोसुश्री नरेंद्र कौर छाबड़ा
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आज उसे आईसीयू से निकाल कर प्राइवेट रूम में शिफ्ट कर दिया गया था. पति के साथ ही दोनों बच्चे भी वहां उसका इंतजार कर रहे थे . कमरे में अपने परिवार को देख उसके मन में गहरे संतोष के भाव उभर आए . कुछ देर बाद बच्चे घर चले गए तो वह पति से धीरे से बोली – “ कल मैंने एक कविता लिखी…..”
पति हैरानी से बोले- “ आईसीयू में तुमने कविता कैसे लिख ली…?”
“ आपने ही तो मुझसे कहा था बीमारी को अपना काम करने दो तुम अपना काम करती रहो . बहुत चिंतन मनन चल रहा था. मैंने नर्स से कहा तो उसने अपने मोबाइल में मेरी कविता रिकॉर्ड कर ली. फिर मेरे मोबाइल में भेज दी . देखिए मेरे मोबाइल में होगी ….”
पति ने बड़ी उत्सुकता से जेब में से पत्नी का मोबाइल निकाला. कविता का ऑडियो साफ नजर आ रहा था .
“ चलो ,सुनते हैं…..” कह कर उसने ऑडियो ऑन किया. बहुत संवेदनशील कविता थी. अंत में पति के प्रति कृतज्ञता भी जाहिर की गई थी . पति ने उसके हाथ पकड़ कर चूम लिये .
“मुझे तुम पर गर्व है ….तुम्हारी हिम्मत पर…. तुम्हारी योग्यता पर… कला पर….”
“ और मुझे आपके सहयोग , प्रेरणा पर..” पत्नी भी हौले से मुस्कुरा दी. बेशक चेहरे पर दर्द भी साफ नजर आ रहा था.
“ चलो अब तुम बिल्कुल ठीक हो गई हो. केवल चार कीमो लेनी होंगी …” पति के कहते ही वह फौरन कह उठी – “ अब मुझे किसी बीमारी का डर नहीं. जिसे आना है आए…. मैं तो अपना काम करती रहूंगी . आपने कहा था ना ….” फिर दोनों ही मुस्कुरा दिए . पत्नी की आंखों में गजब का आत्मविश्वास, दृढ़ता नजर आने लगी थी.
(आज प्रस्तुत है गुरुवर स्व प्रोफ. श्री चित्र भूषण श्रीवास्तव जी द्वारा रचित – “कविता – आजाद देश की पहचान…” । हमारे प्रबुद्ध पाठकगण स्वप्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ जी काव्य रचनाओं को प्रत्येक शनिवार आत्मसात कर सकेंगे.।)
डॉ. रीटा अरोड़ा जी का ई-अभिव्यक्ति में हार्दिक स्वागत. सेवानिवृत्त एसोसिएट प्रोफेसर। समाचार पत्रों एवं पत्र-पत्रिकाओं में आपके लेख एवं कविताएं निरंतर प्रकाशित होती रही हैं। आपका लेख-संग्रह ‘बांस का विवेक’हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों संस्करणों में केडीपी (KDP) पर ‘अकीरा अराता’ (AKIRA ARATA) उपनाम से प्रकाशित है। आप जनवादी लेखक संघ, हरियाणा की सक्रिय सदस्य हैं।
☆ आलेख ☆जब ‘मैं सही हूं’ बन जाए रिश्तों का दुश्मन… ☆ डॉ. रीटा अरोड़ा ☆
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अलग परवरिश और बढ़ता अहंकार, क्यों टूट रहे हैं आज के रिश्ते
आज के समय में महानगरों में रहने वाले युवाओं और नवविवाहित जोड़ों के बीच रिश्तों में बढ़ती खटास एक गंभीर सामाजिक चिंता बनती जा रही है। आए दिन छोटी-छोटी बातों पर झगड़े, मनमुटाव, फिर दूरी और अंततः तलाक जैसे मामलों में बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि समस्या कहीं गहरी है। सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?
सबसे बड़ा कारण है कि आज के युवा यह समझने में असफल हो रहे हैं कि पति-पत्नी दोनों अलग-अलग परिवारों और संस्कृतियों में पले-बढ़े होते हैं। उनकी सोच, आदतें, जीवनशैली और अपेक्षाएं अलग होना स्वाभाविक है। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब दोनों में से कोई भी एक-दूसरे को समझने और स्वीकार करने की बजाय यह साबित करने में लग जाता है कि “मैं सही हूं” और “तुम गलत हो”।
पहले के समय में संयुक्त परिवारों का चलन अधिक था। माता-पिता और बुजुर्ग घर में मौजूद रहते थे और वे रिश्तों को संभालने, समझाने और संतुलन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। वे अनुभव के आधार पर छोटी-छोटी बातों को बढ़ने नहीं देते थे और समय रहते समाधान निकाल लेते थे। लेकिन आज के समय में अधिकांश युवा अपने माता-पिता से दूर, महानगरों में अकेले रह रहे हैं। ऐसे में जब कोई विवाद होता है, तो उसे सुलझाने वाला कोई नहीं होता, और छोटी बात भी बड़ा रूप ले लेती है।
एक और बड़ी समस्या है अहम (ego) और हावी होने की प्रवृत्ति। आज के कई रिश्तों में यह देखने को मिलता है कि दोनों ही अपने-अपने तरीके से चीजों को चलाना चाहते हैं। कोई झुकना नहीं चाहता, कोई समझौता नहीं करना चाहता। हर दिन किसी न किसी बात पर बहस होना, एक-दूसरे को गलत साबित करने की कोशिश करना, धीरे-धीरे रिश्ते में कड़वाहट घोल देता है। नतीजा यह होता है कि घर में बातचीत कम होती जाती है, सन्नाटा बढ़ता है और अंततः रिश्ते टूटने की कगार पर पहुंच जाते हैं।
रिश्ते कोई प्रतिस्पर्धा (competition) नहीं होते, जहां जीत-हार तय करनी हो। यह एक साझेदारी (partnership) है, जहां दोनों को मिलकर चलना होता है। अगर हर दिन लड़ाई ही “जीवन का हिस्सा” बन जाए, तो वह रिश्ता टिक नहीं सकता।
आज जरूरत इस बात की है कि युवा यह समझें कि रिश्ते समझ और सहयोग से चलते हैं, न कि अहंकार और जिद से। एक-दूसरे की बात सुनना, उनकी भावनाओं को समझना और उनके नजरिए को स्वीकार करना बेहद जरूरी है। हर बात पर प्रतिक्रिया देने की बजाय कई बार चुप रहना और स्थिति को शांत होने देना भी एक समझदारी है।
इसके साथ ही, यह भी जरूरी है कि हम यह स्वीकार करें कि पुरुष और महिला दोनों अलग-अलग सोच रखते हैं। उनकी भावनाएं व्यक्त करने का तरीका अलग होता है। यही बात प्रसिद्ध पुस्तक “Men Are from Mars, Women Are from Venus” भी बताती है कि दोनों के बीच अंतर स्वाभाविक है। इसलिए यह अपेक्षा करना कि सामने वाला व्यक्ति बिल्कुल हमारे जैसा सोचने लगे, न तो सही है और न ही संभव।
समाधान बहुत कठिन नहीं है।
सबसे पहले, एक-दूसरे को बदलने की कोशिश बंद करनी होगी।
दूसरा, खुलकर बातचीत को बढ़ावा देना होगा।
तीसरा, छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज करना सीखना होगा। और
सबसे महत्वपूर्ण, रिश्ते को “जीतने” की जगह “बचाने” की सोच अपनानी होगी।
अंततः, यह समझना जरूरी है कि विवाह सिर्फ साथ रहने का नाम नहीं है, बल्कि एक-दूसरे को समझने, स्वीकार करने और सहयोग देने का वादा है। अगर आज के युवा इस सच्चाई को समय रहते समझ लें तो रिश्तों में बढ़ती दूरियों को रोका जा सकता है और एक खुशहाल जीवन की ओर बढ़ा जा सकता है।
(आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी संस्कारधानी जबलपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। आपको आपकी बुआ श्री महीयसी महादेवी वर्मा जी से साहित्यिक विधा विरासत में प्राप्त हुई है । आपके द्वारा रचित साहित्य में प्रमुख हैं पुस्तकें- कलम के देव, लोकतंत्र का मकबरा, मीत मेरे, भूकंप के साथ जीना सीखें, समय्जयी साहित्यकार भगवत प्रसाद मिश्रा ‘नियाज़’, काल है संक्रांति का, सड़क पर आदि। संपादन -८ पुस्तकें ६ पत्रिकाएँ अनेक संकलन। आप प्रत्येक सप्ताह रविवार को “साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह” के अंतर्गत आपकी रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे। आज प्रस्तुत है – कहमुकरी।)
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “दिहाड़ी श्रमिक…“।)
अभी अभी # ९८४ ⇒ आलेख – दिहाड़ी श्रमिक श्री प्रदीप शर्मा
(1 मई पर विशेष)
मज़दूर और श्रमिक में वही अंतर है जो एक आदिवासी और वनवासी में है, या कि जो अंतर एक विकलांग और दिव्यांग में है। मज़दूर के पसीने से कम्युनिज्म की बू आती है। वह कभी सीधे मुँह बात नहीं करता। हमेशा हल्ला ही बोला करता है। श्रमिक शब्द बड़ा शालीन और सुसंस्कृत लगता है।
जब तक मेरे शहर में कपड़ा मिलों का बोलबाला था, मज़दूर एकता ज़िंदाबाद थी। हमारी सरकार ने मज़दूर को श्रमिक बनाकर पदोन्नत किया, दैनिक को दिहाड़ी किया। 70 साल में जो नहीं हुआ, हमने कर दिखाया।।
मेरे पास के चौराहे पर प्रशासन ने दिहाड़ी श्रमिकों के लिए एक शेड बनाया है जो सुनसान पड़ा रहता है और दिहाड़ी श्रमिकों का जमावड़ा सड़क पर एक भीड़ का स्वरूप अख्तयार कर लेता है। श्रमिक का मेहनती, स्वस्थ और तंदुरुस्त होना ज़रूरी है। कारीगर तो अपने हुनर का पारंगत होता है, उसका सेहत से क्या लेना देना।
ये दिहाड़ी श्रमिक साईकल पर नहीं, मोटर साईकल पर आते हैं। कोई दोस्त इन्हें छोड़ जाता है। एंड्राइड फ़ोन होना आजकल सम्पन्नता की निशानी नहीं, समझदारी की निशानी है। आप जब किसी कारण इनकी सेवाएँ प्राप्त करना चाहेंगे, तो ये पहले आपको ऊपर से नीचे तक निहारेंगे। मानो आपकी औकात पता कर रहे हों।
जब उन्हें खात्री हो जाती है कि आप श्रमिक नहीं, श्रमिक की सेवाएँ लेने आए हो, तो सम्मान से पूछते हैं, बाबूजी ! काम क्या है। आप काम समझाएं, उसके पहले वे आपको समस्या बता देंगे। एक आदमी के बस का काम नहीं है, अथवा एक दिन में जितना होगा कर देंगे।।
वैसे सरकार की न्यूनतम दर एक दिन की 873 ₹ है, आपको जो देना हो, दे देना। हर काम के विशेषज्ञ होते हैं यहाँ। रंग रोगन अथवा सुतारी का काम ठेके पर भी किया जाता है।
आपकी तक़दीर अच्छी हो तो दिहाड़ी मजदूर भी अच्छा ही मिल जाता है।
श्रम की महत्ता कभी कम नहीं होने वाली। सुतारी, बिजली का काम, प्लम्बर और रंग-रोगन जैसा काम आजकल कामकाजी नौकरीपेशा इंसान के बस का नहीं। कुछ काम श्रम में नहीं शर्म में आते हैं।
जब कभी घर की सीवेज लाइन चोक हो जाती है, विशेषज्ञ को ढूंढा जाता है। जो मिलता है, मुँह फाड़ता है। यह काम सबके बस का नहीं। मरता क्या न करता, मुंहमांगे दाम पर समस्या का निदान करवाया जाता है। व्हाट ए रिलीफ ?
इधर काम निकला, उधर प्रलाप शुरू ! छोटे से काम के इतने पैसे ? श्रम की महत्ता तब समझ में आती है, जब हम अपना देश छोड़ विदेश जाते हैं। वहाँ श्रम को केवल सम्मान ही नहीं, उचित मानदेय भी है।
एक छुट्टी मजदूरी वाले का कोई भविष्य नहीं ! जब ये संगठित होते हैं तो शोषक नज़र आते हैं। शोषण के खिलाफ आवाज़ उठाना बग़ावत है, इसलिए समय रहते इन्हें कुचलना भी पड़ता है। इनके नेताओं के साथ समझौते भी करना पड़ते हैं। कभी ये सरकारें बनाते-गिराते थे, आजकल खुद ही गिरे हुए हैं।।
श्रम दिवस पर श्रम को सम्मान दीजिए, कल से जैसा चल रहा है, चलते रहने दीजिए। मज़दूर एकता ज़िंदाबाद..!!
विज्ञान की अन्य विधाओं में भारतीय ज्योतिष शास्त्र का अपना विशेष स्थान है। हम अक्सर शुभ कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त, शुभ विवाह के लिए सर्वोत्तम कुंडली मिलान आदि करते हैं। साथ ही हम इसकी स्वीकार्यता सुहृदय पाठकों के विवेक पर छोड़ते हैं। हमें प्रसन्नता है कि ज्योतिषाचार्य पं अनिल पाण्डेय जी ने ई-अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों के विशेष अनुरोध पर साप्ताहिक राशिफल प्रत्येक शनिवार को साझा करना स्वीकार किया है। इसके लिए हम सभी आपके हृदयतल से आभारी हैं। साथ ही हम अपने पाठकों से भी जानना चाहेंगे कि इस स्तम्भ के बारे में उनकी क्या राय है ?
☆ ज्योतिष साहित्य ☆ साप्ताहिक राशिफल (4 मई से 10 मई 2026) ☆ ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय ☆
जय श्री राम। श्री हनुमान चालीसा की चौपाइयों के लाभ से आप सभी पूर्णतया अवगत हो गए होंगे। आज की चौपाई है:-
दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
इस चौपाई के संपुट पाठ करने से श्री हनुमान जी की कृपा से बड़े से बड़े कष्ट और संकट से मुक्ति मिलती है। हर प्रकार की समस्याओं का अंत होता है।
आईये अब इस सप्ताह ग्रहों के विचरण के संबंध में बात करते हैं।
इस सप्ताह सूर्य और बुध मेष राशि में, मंगल और शनि मीन राशि में, गुरु मिथुन राशि में, शुक्र वृष राशि में और राहु कुंभ राशि में गोचर करेंगे।
आईये अब राशिवार राशिफल की चर्चा करते हैं।
मेष राशि
इस सप्ताह आपके लग्न में बुधादित्य योग बन रहा है। इस योग के कारण आपके व्यापार में उन्नति होगी। धन में वृद्धि होगी तथा कई जगहों पर सफलता प्राप्त होगी। कचहरी के कार्यों में आपको सावधानी पूर्वक कार्य कर सफलता प्राप्त करने का योग है। धन प्राप्त होने का योग है। भाई बहनों के साथ संबंध पहले जैसे ही रहेंगे। भाग्य से मदद मिल सकती है। आपको अपने संतान से सहयोग प्राप्त होगा। माता और पिताजी का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। इस सप्ताह आपके लिए 8 और 9 तारीख कार्यों में सफलता प्राप्त करने के लिए उत्तम है। 4 मई को आपको दुर्घटनाओं से सावधान रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन राम रक्षा स्त्रोत का पाठ करें।
वृष राशि
कचहरी के कार्यों में सफलता का योग है। इसमें धन भी व्यय होगा। इस सप्ताह धन प्राप्ति का भी योग है। अविवाहित जातकों के लिए यह सप्ताह अच्छा रहेगा। विवाह के नए-नए और अच्छे प्रस्ताव प्राप्त होंगे। प्रेम संबंधों में वृद्धि हो सकती है। इस सप्ताह आपको अपने संतान से कम सहयोग प्राप्त होगा। कर्मचारियों अधिकारियों के लिए सलाह है कि वे व्यर्थ का का वार्तालाप या बहस ना करें। आपको अपने पिताजी के स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहना चाहिए। भाग्य से आपको पहले जैसी मदद मिलती रहेगी। इस सप्ताह आपके लिए 10 मई सफलता दायक है। आपको चार पांच छह और सात मई को आपको सावधान रहकर कामों को निपटाना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है।
मिथुन राशि
इस सप्ताह धन प्राप्ति का अच्छा योग है। आपके लाभ भाव में बुधादित्य योग बन रहा है। इसके कारण आपके पास इस सप्ताह धन लाभ में वृद्धि होगी। व्यापारियों के लिए यह सप्ताह काफी अच्छा रहेगा। भाग्य से आपको पिछले सप्ताह की तरह से ही विशेष मदद नहीं मिलेगी। आपको अपने कर्मों पर विश्वास करना पड़ेगा। कचहरी के कार्यों में परिश्रम एवं सावधानी के उपरांत आप सफलता पा सकते हैं। इस सप्ताह आपके लिए 5, 6 और 7 तारीख लाभदायक है। 4 मई को आपको अपने शत्रुओं से सावधान रहकर उनको पराजित करने का प्रयास करना चाहिए। 8 और 9 तारीख को आपको सचेत रहकर कार्यों को निपटाना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन काले उड़द का दान करें तथा शनिवार को शनि मंदिर में जाकर शनि देव की का पूजन करें। सप्ताह को शुभ दिन बुधवार है।
कर्क राशि
अधिकारियों कर्मचारियों के लिए यह सप्ताह उत्तम रहेगा। उनको अपने कार्यालय में प्रतिष्ठा प्राप्त होगी। अधिकारियों के तरफ से उनको काफी सपोर्ट मिलेगा। धन प्राप्ति का भी योग है। भाग्य से भी आपको मदद मिलेगी। इस सप्ताह आपको अपने शत्रुओं से भी सावधान रहना चाहिए। कचहरी के कार्यों में रिस्क नहीं लेना चाहिए। इस सप्ताह आपको अपनी प्रतिष्ठा के प्रति सतर्क रहना चाहिए। इस सप्ताह आपके लिए 8 और 9 तारीख कार्यों को पूर्ण करने के लिए उपयोगी है। सप्ताह के बाकी दिनों में आपको सचेत रहकर कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन काले कुत्ते को रोटी खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है।
सिंह राशि
इस सप्ताह आपको अपने भाग्य से बहुत मदद मिलेगी। आपके जो भी काम रूके हुए हैं और भाग्य के कारण नहीं हो पा रहे हैं उनको इस सप्ताह करने का प्रयास करें। कार्यालय में आपको सफलता प्राप्त होगी। दुर्घटनाओं से आप बचेंगे। आपको अपने साथियों का अच्छा सहयोग प्राप्त हो सकता है। आपका या आपके जीवन साथी का स्वास्थ्य इस सप्ताह थोड़ा खराब हो सकता है। आपको अपने प्रतिष्ठा के प्रति सतर्क रहना चाहिए। इस सप्ताह आपके लिए 10 मई उत्तम है। 4, 8 और 9 तारीख को आपको सतर्क रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन भगवान शिव का दूध और जल से अभिषेक करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।
कन्या राशि
इस सप्ताह आपको भाग्य से मदद मिल सकती है। भाग्य के कारण आपका कोई भी कार्य इस सप्ताह नहीं रुकेगा। आपके जीवनसाथी का स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। कर्मचारी और अधिकारियों को इस सप्ताह अपने कार्यालय में सतर्क रहना चाहिए। शेयर आदि में धन लगाने के पहले पूरी जांच कर लेना चाहिए। आपके प्रतिष्ठा में इस सप्ताह वृद्धि हो सकती है। जनप्रतिनिधियों के लिए यह सप्ताह अच्छा रहेगा। इस सप्ताह आपके लिए 5, 6 और 7 तारीख कार्यों को पूर्ण करने के लिए परिणाम दायक हैं। 10 मई को आपको सतर्कता पूर्वक कोई भी कार्य करना चाहिए। अपने भाई बहनों के प्रति आपको 4 तारीख को सावधान रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन रुद्राष्टक का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।
तुला राशि
यह सप्ताह आपके जीवन साथी के लिए उत्तम रहेगा। अगर वह किसी व्यवसाय में है तो उसमें उनको बहुत उन्नति मिलेगी। आपका भी व्यवसाय अच्छा चलेगा। व्यापार के भाव में बुधादित्य योग बन रहा है। इससे इस सप्ताह आपके व्यापार में उन्नति होगी। इस सप्ताह आप अपने शत्रुओं को आसानी से पराजित कर सकते हैं। आपके संतान को कष्ट हो सकता है। भाग्य से आपको बहुत ज्यादा मदद नहीं मिलेगी। छात्रों की पढ़ाई में बाधा पड़ेगी। आपके लिए 8 और 9 तारीख कार्यों को संपन्न करने के लिए फलदायक हैं। 4 मई को आपको धन के मामले में होशियार रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन शिव पंचाक्षरी मंत्र का जाप करें। सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है।
वृश्चिक राशि
आपको अपने संतान से अच्छा सहयोग प्राप्त होगा। संतान की उन्नति होगी। छात्रों को परीक्षा में अच्छी सफलता प्राप्त होगी। अविवाहित जातकों के लिए यह सप्ताह बहुत अच्छा है। विवाह के अच्छे-अच्छे प्रस्ताव आएंगे। प्रेम संबंधों में भी प्रगति होगी। अगर आप ढंग से प्रयास करेंगे तो आपके शत्रु पराजित होंगे। कचहरी के कार्यों में किसी भी प्रकार का रिस्क इस सप्ताह ना लें। कार्यों को सफलतापूर्वक पूर्ण करने के लिए आपको चार और 10 मई का सहारा लेना चाहिए। इस सप्ताह आपको अपने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति 4 तारीख को सतर्क रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गाय को हरा चारा खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।
धनु राशि
इस सप्ताह आपके प्रतिष्ठा में पर्याप्त वृद्धि हो सकती है, मगर इसके लिए आपको थोड़ा बहुत प्रयास भी करना पड़ेगा। आपके संतान की उन्नति हो सकती है। संतान का आपको अच्छा समर्थन भी मिलेगा। छात्रों को परीक्षाओं में सफलताएं प्राप्त होगी। आपके शत्रु इस सप्ताह शांत रहेंगे। लंबी यात्रा का योग बन सकता है। इस सप्ताह आपके लिए 5, 6 और 7 तारीख कार्यों को पूर्ण करने के लिए उपयुक्त हैं। 4 मई को आपको कचहरी के कार्यों को सावधानी पूर्वक करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें तथा शनिवार को दक्षिण मुखी हनुमान जी के मंदिर में जाकर कम से कम तीन बार हनुमान चालीसा का वाचन करें। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है।
मकर राशि
इस सप्ताह आपके प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। आपके थोड़े से प्रयासों से जनता के बीच में आपको सम्मान प्राप्त हो सकता है। भाई बहनों के साथ संबंध ठीक रहेंगे। इस सप्ताह अगर आप प्रयास करेंगे तो आप अपने शत्रुओं को पराजित कर सकते हैं। आपके संतान को सफलताएं प्राप्त हो सकती हैं। आपको अपने संतान से अच्छा सहयोग प्राप्त हो सकता है। गलत रास्ते से धन आ सकता है। इस सप्ताह आपके लिए 8 और 9 तारीख कार्यों को पूर्ण करने हेतु प्रभावशाली हैं। 5, 6 और 7 तारीख को आपको सजग रह करके कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गायत्री मंत्र का जाप करें। सप्ताह का शुभ दिन शनिवार है।
कुंभ राशि
इस सप्ताह आपके पास धन आने का योग है। धन की मात्रा थोड़ी कम हो सकती है। गलत रास्ते से भी धन आ सकता है। भाई बहनों के साथ संबंध उत्तम रहेगा। आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। माता जी का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। आपके पिताजी को थोड़ी परेशानी हो सकती है। अधिकारी और कर्मचारियों को इस सप्ताह सावधान रहकर कार्यों को करना चाहिए। दुर्घटनाओं से बचने का आपको इस सप्ताह प्रयास करना चाहिए। भाग्य का आपको इस सप्ताह बिल्कुल भी सहारा नहीं लेना चाहिए। इसके स्थान पर आपको अपने परिश्रम पर विश्वास करना चाहिए। इस सप्ताह आपके लिए 10 मई लाभप्रद है। 8 और 9 मई को आपको सावधान रहकर के कार्यों को निपटाना चाहिए। 4 मई को आपको कार्यालय में सावधान रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको अपने वृद्ध पिताजी का विशेष रूप से ख्याल रखना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।
मीन राशि
इस सप्ताह आपका स्वास्थ्य ठीक रहेगा। आपके क्रोध की मात्रा में वृद्धि हो सकती है। इस सप्ताह आपके पास धन आने का अच्छा योग है। भाई बहनों के साथ संबंध ठीक रहेंगे। आपको अपने प्रतिष्ठा के प्रति सतर्क रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको अपने शत्रुओं के प्रति सावधान रहना चाहिए। भाग्य पर इस सप्ताह आपको भरोसा नहीं करना चाहिए। दुर्घटनाओं के प्रति आपको सावधान रहना चाहिए। इस सप्ताह आपके लिए 5, 6 और 7 तारीख कार्यों को करने के लिए अनुकूल हैं। 10 तारीख को आपको सावधान रहना चाहिए। 4 मई को आपको भाग्य से कुछ मदद मिल सकती है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन शिव पंचाक्षर स्त्रोत का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है।
ध्यान दें कि यह सामान्य भविष्यवाणी है। अगर आप व्यक्तिगत और सटीक भविष्वाणी जानना चाहते हैं तो आपको मुझसे दूरभाष पर या व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाना चाहिए। मां शारदा से प्रार्थना है या आप सदैव स्वस्थ सुखी और संपन्न रहें। जय मां शारदा।
☆ “पत्रिका (कुंडली) आणि प्रगती पुस्तक…” ☆ श्री कौस्तुभ परांजपे ☆
आपल्याला प्रगतीचा आधार समजवून घ्यायला याच दोन गोष्टी लागतात. दोन्ही ठिकाणी काही घरं (रकाने) आणि काही आकडे असतात. पत्रिकेवरच्या आकड्यांनुुसार निर्माण होणाऱ्या परिस्थितीवर विश्वास ठेवला नाही तरी, प्रगती पुस्तकावरच्या आकड्यांवर विश्वास ठेवावाच लागतो. आणि याच प्रगती पुस्तकावरच्या आकड्यांमुळे बर्याचदा (घरातली माझी) परिस्थिती बदललली होती. त्यामुळे आकडे आणि परिस्थिती माझ्या बाबतीत हातात हात घालून फिरत असली तरी मोठे आकडे आणि चांगली परिस्थिती अशी ती नव्हती, आणि नाही.
पत्रिका ही वेळ आणि काळ यावर, म्हणजे जन्मावर अवलंबून असते अस म्हंटल तर प्रगती पुस्तक हे केलेल्या कर्मावर अवलंबून असतं अस म्हणाव लागेल. पण या जन्मावर आणि कर्मावर अवलंबून असलेल्या गोष्टीबद्दल वर्मावर लागेल अस बरच काही ऐकाव लागलं आहे. पत्रिकेत कदाचित मागच्या जन्माच्या काही गोष्टींचा प्रभाव असेल. पण प्रगती पुस्तक फक्त वर्तमानाशी निगडीत असतं. आणि माझ वर्तमान मान वर करण्यासारखं कधीही नव्हत. आणि नाही.
पत्रिकेत भविष्याचा वेध असेलही. पण प्रगती पुस्तकावरून घरी काय परिस्थिती निर्माण होईल याचे लागलेले वेध लगेच लक्षात यायचे. आपली पत्रिका प्रत्येकाला समजेलच अस नाही. ती समजण्यासाठी अभ्यास करावा लागतो. पण प्रगती पुस्तकाच तस नाही. ती आमचा अभ्यास दाखवात होती. आणि इतरांना अभ्यास न करताही तो लक्षात यायचा.
प्रगती पुस्तक हे शाळेचच असत अस नाही. ते नंतर तुम्ही काय, कसं, किती कमवलं, किंवा जमवलं, आणि गमवलं याचही असत. फक्त शाळेतल्या प्रगती पुस्तकावर ते आकड्यांनी दाखवतात, तर आयुष्यात केलेल्या गोष्टी या बोलून दाखवतात. पण त्यावरुन निकाल लक्षात येतोच.
माझी पत्रिका आणि माझं प्रगती पुस्तक यावर मी बोलण्यापेक्षा इतरांनाच बोलण्यासाठी भरपूर वाव मिळाला. माझ्या पत्रिकेत भविष्यात काय आहे हे कोणी अभ्यास करून सांगण्यापेक्षा, माझं प्रगती पुस्तक पाहून माझं भविष्य अभ्यास न करताही सांगणारे बरेच भेटले.
पण माझ्या पत्रिकेत सांगितलेल्या काहि गोष्टी बर्याच अंशी तशाच घडल्या. काही गोष्टी अशा…
मी मोठा होईन… खरंच मी पाहता पाहता साठीला आलो.
मी स्वत:च्या पायावर ऊभा राहिल… खरंच आजही मी काठीच्या आधाराशिवाय माझ्या पायांवर ऊभा आहे.
आत्ता बरीच बडबड करत असला, कोणाच विशेष ऐकत नसला तरी पंचविशी नंतर परिस्थितीत अमुलाग्र बदल घडून यायची शक्यता… अठ्ठावीसाव्या वर्षी माझं लग्न झाल आणि… बडबडतर कमी झालीच, आणि ऐकालाही लागलो. आता कोणाच ऐकतो हा भाग निराळा… पण त्यामुळेच आता आईच बोलणंसुध्दा ऐकाव लागतं. काही वेळा तर मुलंही बोलतात… बोलणं ऐकणं आणि ऐकाव लागणं यातला असलेला वरवरचा फरक खोलपणाने समजला.
धनराशीचा एखादा आकडा किंवा रकाना पत्रिकेत असतो का याची कल्पना नाही. पण इतर सगळ्या राशींनी रकाने पूर्ण भरल्याने कोणत्याही राशीने या बाबतीत माझ्यावर तेवढा विश्वास दाखवलाच नाही. किंवा विनाकारण त्या धनराशीने माझ्या पत्रिकेत घुसखोरी केलेली नाही.
माझ्या पत्रिकेतल्या काही आकड्यांवरुन स्थैर्य आणि सकारात्मक व्रुत्ती आहे अस लिहिलं होत. ते स्थैर्य म्हणजे नक्की काय हे मला बर्याच विषयात बरीच वर्ष पस्तीस किंवा छत्तीस गुण मिळाल्यामुळे, आणि पुढे पगारातही कमीतकमी मिळणार्या वाढीमुळे समजलं. फक्त त्या पस्तीस आणि छत्तीस या आकड्यांमुळे एकाच वर्गात राहण्याच स्थैर्य मात्र टळलं होत. कदाचित या बाबतीत माझा गुरु आणि माझे गुरु प्रभावशाली होते. किंवा दोघांचा शनि कमजोर होता. याच बाबतीत आमचे छत्तीस गुण जुळले असतील, आणि मला परिक्षेत छत्तीस गुण मिळाल्याने गुरूंचा मान राहिला असेल. त्या स्थैर्याचा अर्थ वाढणार नाही, असा न घेता कमी होणार नाही असाच मी सकारात्मक घेतला.
माझ्या पत्रिकेत असणाऱ्या आणखीन दोन गोष्टी म्हणजे इतरांनी केलेल्या कामामुळे याला अपेक्षित यश मिळाल नाही तरी आशावाद, आणि धैर्य सोडणार नाही… खरच माझ्या भविष्या बाबतीत मी म्युच्युअल फंडा सारखाच आशावादी आहे. तर धैर्य दाखवतांना गडगडलेला शेअर बाजार मला तेेवढा विचलित करत नाही.
“होळी दहनावर भद्राचे सावट. भद्रा काळात होळी पेटविण्यासाठी भद्राचा पुच्छ काळ रात्री 12. 50 ते 1. 55 पर्यंत. या कालावधीत होळी पेटवावी. आमच्या सोसायटीच्या समूहावर हा मेसेज झळकला. तसेच दुसर्या दिवशी चंद्रग्रहण असल्याने होळी आज रात्रीच पेटवली जाईल. तरी सगळ्यांनी हजर राहून या आनंदोत्सवात सहभागी व्हावे. “
मी whats app बंद केला. आपली सगळी आन्हिकं आटोपून, तयारी करुन मी हास्पिटलला जाण्यास निघाले. सणवार असो कि शुभकार्य माझ्या पेशात याला जागाच नव्हती. रूग्णसेवा यालाच प्राथमिकता होती आणि आजाराला सणावाराशी काय घेणं देणं.
” आई, जाऊन येते गं ” ” निघालीस बाळ, सायंकाळी जरा लवकर येशील, आज होळी आहेना. पुरणाची पोळी, खीर, कटाची आमटी करणार आहे मी. तुझी ड्यूटी संपली कि मला फोन कर. म्हणजे मी पुरणपोळ्या करायला घेईन, तुला गरमगरम खायला वाढेल “. ” आई, कशाला एवढी धडपड करतेस. तू दुपारीच करुन ठेव पोळ्या, मी खाईन सायंकाळी “. ” अगं पुरणपोळी गरमच चांगली लागते. त्यावर तूपाची धार गरम असतांनाच बरी वाटते. तू निघण्यापूर्वी मला फोन कर. बस एवढंच कर. ” ” बरं बाई, निघण्यापूर्वी करीन तुला फोन, आता जाऊ मी “. ” अगं परत चूक. जाऊन येते म्हण “. ” होय, जाऊन येते मी “. हसत हसत आईचा निरोप घेऊन मी निघाले. पार्किंग शेडमधून गाडी काढली. तर चाकातील हवा कमी झालेली. बरं घराजवळच गॅरेज होतं, हवा भरली अन मी निघाले.
” नमस्कार डाॅक्टर, हॅलो डाॅक्टर ” अभिवादन स्विकारत मी माझ्या केबिनमध्ये शिरले. ” सिस्टर, काय पोझिशन? किती पेशंट आहेत? ” ” “डाॅक्टर पंधरा पेशंट आहेत ” “O K, पाठवा एक एक आत “.
” नमस्कार डाॅक्टर ” ” नमस्कार बसा ” एक बाई आपली दहा वर्षांची मुलगी घेऊन आली होती. बोला काय त्रास होतोय. डाॅक्टर माझी ही मुलगी दहा वर्षाचीच आहे. पण कालपासून हिची मासिक पाळी सुरु झालीय. खूप लवकर आहे ताई हे सगळं. मुलगी लहान आहे ताई माझी. बावरली आहे. पाळी अजून दोन वर्ष येणार नाही असं काही करता येईल काय? “
” नाही बाई, असं करू नका. तुमच्या मुलीची पाळी अकाली सुरू झाली ती आजकालची बदललेली जीवनपद्धतीमुळे. मुलांच्या हाती मोबाईल आहे. ज्या गोष्टी कुटुंबात बोलल्या जात नाहीत मुले त्या गोष्टी इंटरनेटवर शोधतात. लैंगिक भावना चाळवल्या जातात. आजची बदललेली खानपान व्यवस्था. चीज, पिझ्झा, बर्गर व इतर फास्ट फूड वजनवाढीस कारणीभूत ठरतात. आनुवांशिकता ही असू शकते. मनावरील ताणतणाव, प्लास्टीक आणि पेस्टीसाईडमधील रसायने, थंड व साखरयुक्त पेय असे अनेक घटक असतात यामागे. शरीरातील चरबीचे प्रमाण वाढले कि इंस्ट्रोजन संप्रेरक लवकर सक्रिय होते ज्यामुळे पाळी लवकर येते
तुम्ही आता असं करा. मुलीला पौष्टिक आहार (फळे व भाज्या) द्या. शारीरिक हालचाल, व्यायाम वाढवा. मानसिक ताण टाळण्यासाठी योग्य वातावरण ठेवा
मुलीला मैदानी खेळासाठी. प्रोत्साहन द्या.
यामुळे मुलीची समस्या बर्याच अंशी कमी होईल. मी काही औषधे देते. सगळं ठीक होईल. या तुम्ही आता.
Next मी बेल दाबत म्हटले. एक सत्तर वर्षाच्या आजीबाई आत आल्या. ” काय त्रास होतो आजी तुम्हांला ” ” पांढरी धुपणी अचानकच सुरु झालीय ” मी चेकअप केले. “आजी सोनोग्राफी करायला लागेल “.
एक पहिलटकरीण लेबरमध्ये होती. मधून मधून तिकडेही जावे लागत होते.
सगळं काम संपेपर्यंत रात्रीचे आठ वाजलेच होते. चला निघूया घरी, तत्पूर्वी आईला फोन करावा लागेल, नाहीतर नाराज होईल बिचारी.
घरात पाऊल ठेवलं तशी पुरणपोळीचा घमघमाट सर्वत्र भरलेला. ” वन्स, तुम्ही फ्रेश व्हा तोपर्यंत मी पानं घेतं सगळ्यांसाठी. ” काय गं सुनेत्रा हाॅस्पिटलचा सगळा पेशंटचा ताण तुझ्यावरच का? काही कामे तुझ्या सबआँर्डीनेटवरही सोपवत जा. अतिरिक्त स्टाफचीही मागणी कर “. ” होय दादा, मी सांगितलंय हाॅस्पिटला प्रशासनाला. शिवाय पेशंटचा माझ्यावरच विश्वास असल्याने मलाही नाही म्हणता येत नाही. ” माझा दादा सुशांत बोलत होता.
खेळीमेळीत जेवणे आटोपली. थोडी शतपावली करावी म्हणून मी खाली उतरले. सोसायटीच्या प्रांगणात दहनासाठी होळीची सगळी तयारी झाली होती. रांगोळी, पताका, विविध रंग आणि प्रसादाचीही सिद्धता होती.
” सुनेत्राताई, आज होलीका दहन तुमच्याच शुभहस्ते करायचंय बरं का. बरोबर रात्री 12. 50 ला पेटवूया होळी.
होळी दहनात कसे सर्व चिंता, द्वेष, मत्सर दूर सारून विविध रंगाच्या रंगात रंगणे आणि मनातील कटुता विसरुन पुन्हा नवऊर्जेने, गोडव्याने, बधुभाव जपत जीवनक्रमणा करणे किती गहन संदेश आहे यामागे. मी होलीका दहनाला चूड लावली. मनोभावे नमस्कार केला.
आज धुळवडची सगळीकडे सुट्टी. मी पण जरा निवांत होते कि हाॅस्पिटलच्या इमर्जन्सी मधून फोन आला. ” डाॅक्टर तुम्ही लवकर या ” नर्स शर्वरी बोलत होती. ” काय झालंय शर्वरी “. “डाँक्टर एक सतरा / अठरा वर्षाची पहिलटकरीण मुलगी आहे. तिचं बी पी शूट झालंय. ग्लानीतच आहे. बहुतेक सिझरच करावं लागेल ” ” ठीक आहे, येते मी, तुम्ही आँपरेशन थिएटर सुसज्ज ठेवा. “
” पेशंटसोबत कोण आहे. एक पन्नाशीच्या असपासची बाई समोर आली. तिच्यासोबत दोन/तीन माणसंही होती तुम्ही पेशंटची आई काय? ” नाही, मी आई नाही. ” बरं पेशंटच्या नवर्याला बोलवा, या फाॅर्मवर सही लागेल. ” ” नवरा नाही, आमच्या धंद्यात लेकराला फक्त माय असते. ” ” अरे बापरे, म्हणजे ही मुलगी रेड लाईट एरियातील होती. इतक्या लहान वयात अत्याचाराने ग्रस्त होती आणि त्यात हे लादलेलं मातृत्व. Horrible आहे सगळं ” ” मी करते सही म्हणत त्या बाईने आपला अंगठा फार्मवर उठवला.
पेशंटला अँनेस्थेशिया दिला, सलाईन, आँक्सिजन सुरू होतं. दीड तासाच्या अथक प्रयत्नातून सिझर व्यवस्थित होऊन बाळ व बाळंतीण दोघांनाही मी सुखरूप ठेवू शकले. शर्वरीने टाके घातले. पेशंट हळूहळू शुद्धीत येत होती. ” अं, पाणी, पाणी द्या मला. कुठे आहे मी, माझं बाळ कोठे आहे. ” ” हे बघ, शर्वरीने मऊसूत कपड्यात गुंडाळलेलं लालसर, बदामी रंगाचं ते नवजात बाळ तिच्यासमोर धरलं तशी ती मोठ्याने रडू लागली. ” अगं, मुलगा झाला आहे तुला. आनंद नाही झाला? का रडतेस? ” ” रडू नाहीतर काय करू डाॅक्टर. मी काय घडवू शकणार काय त्याला. या धद्यात पुढे तो दलालीच करेल. मुलगी असती तर पुन्हा ते नरकातलं जिणं ” ” नाही होणार आता असं. ” ” काय! खरंच तसं नाही होणार. डाॅक्टर माझ्या बाळाला चांगलं जीवन मिळेल? ” होय, मिळू शकतं? पण तुलाही हिंमत दाखवावी लागेल. पण मला सांग तू या धद्यात आली कशी? आली नाही मॅडम आणली गेली. तेही माझ्या बापानेच. एक नंबरचा दारूड्या. आई होती तोपर्यंत ती कष्ट करुन त्याच्या दारुला पुरे पडत होती. ती गेली, आणि याने दारूसाठी मला विकलं. ” इथे तुला खायला मिळेल. चांगले कपडे मिळतील, सांगत सोडून गेला मला इथे. पुन्हा आलाच नाही “
” बरं, मी उद्या पोलीस सबइन्सपेक्टरना इथे बोलावून घेईन. तुझ्या मनाविरूद्ध आता कोणीही तुला त्या नरकात ढकलणार नाही. शिवाय पोलीस संरक्षण राहिल. त्यांच्या मार्फतच तुला शासकिय वसतिगृहात प्रवेश मिळेल. तुझी व तुझ्या बाळाची योग्य काळजी घेतली जाईल. तुझी तब्येत बरी झाली कि तुला शिक्षण घ्यायचं असलं तर शिकू शकतेस. नंतर नोकरीसाठीही प्रयत्न केले जातील. ” ” मॅडम, खरंच असं होईल. तसं झालं तर जीवाचं रान करीन मी माझ्या बाळासाठी, त्याला शिकवीन, खूप मोठा करीन आणि एक जवाबदार नागरिक बनवीन “. ” होय, हे सगळं होईल. त्यामुळे आता रडायचं नाही. हस बघू. ” तशी जुई प्रसन्नपणे हसली, फुललेल्या जुईसारखी. ” आता पोटभर जेवयाच. बाळाला दूध हवं ना ” जुईने होकारार्थी मान हलविली.
आज धुळवडच्या दिवशी जुईच्या जीवनातील काळा रंग मिटवून सप्तरंग मी तिच्या आयुष्यात आणले होते.