(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “संकेत…”।)
(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी जबलपुर से श्री राजेंद्र तिवारी जी का स्वागत। इंडियन एयरफोर्स में अपनी सेवाएं देने के पश्चात मध्य प्रदेश पुलिस में विभिन्न स्थानों पर थाना प्रभारी के पद पर रहते हुए समाज कल्याण तथा देशभक्ति जनसेवा के कार्य को चरितार्थ किया। कादम्बरी साहित्य सम्मान सहित कई विशेष सम्मान एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित, आकाशवाणी और दूरदर्शन द्वारा वार्ताएं प्रसारित। हॉकी में स्पेन के विरुद्ध भारत का प्रतिनिधित्व तथा कई सम्मानित टूर्नामेंट में भाग लिया। सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय रहा। हम आपकी रचनाएँ समय समय पर अपने पाठकों के साथ साझा करते रहेंगे। आज प्रस्तुत है आपका एक भावप्रवण कविता ‘इंद्रधनुष…‘।)
(वरिष्ठतम साहित्यकार आदरणीय डॉ कुन्दन सिंह परिहार जी का साहित्य विशेषकर व्यंग्य एवं लघुकथाएं ई-अभिव्यक्ति के माध्यम से काफी पढ़ी एवं सराही जाती रही हैं। हम प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – “परिहार जी का साहित्यिक संसार” शीर्षक के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाते रहते हैं। डॉ कुंदन सिंह परिहार जी की रचनाओं के पात्र हमें हमारे आसपास ही दिख जाते हैं। कुछ पात्र तो अक्सर हमारे आसपास या गली मोहल्ले में ही नज़र आ जाते हैं। उन पात्रों की वाक्पटुता और उनके हावभाव को डॉ परिहार जी उन्हीं की बोलचाल की भाषा का प्रयोग करते हुए अपना साहित्यिक संसार रच डालते हैं।आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय व्यंग्य – ‘वीआईपी और भगवान ‘। इस अतिसुन्दर रचना के लिए डॉ परिहार जी की लेखनी को सादर नमन।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – परिहार जी का साहित्यिक संसार # ३४१ ☆
☆ व्यंग्य ☆ वीआईपी और भगवान ☆ डॉ कुंदन सिंह परिहार ☆
मंदिर में गहमागहमी थी। वीआईपी के आने की सूचना आ चुकी थी। सभी पुजारी उत्तेजना की स्थिति में थे। भारी चढ़ावे की उम्मीद थी। वीआईपी गेट पर विशिष्ट अतिथि का इंतज़ार हो रहा था। कुछ दूरी पर ‘जनता लाइन’ लगी थी, जिसमें सैकड़ों लोग कई घंटे से भगवान के दर्शन के लिए लाइन में लगे थे।
जल्दी ही वीआईपी का काफ़िला मंदिर में दाखिल हुआ। चार गाड़ियां मंदिर के प्रांगण में आ लगीं। आगे वाली में वीआईपी विराजमान थे, दूसरी गाड़ी में चमचे और भक्त, तीसरी में अंगरक्षक, और चौथी में कुछ फालतू सामान के साथ दो तीन सेवक और कैमरामैन।
प्रमुख पुजारी और अन्य पुजारियों ने तिलक लगाकर विशिष्ट जी और उनके काफ़िले का स्वागत किया। गद्गद् स्वर में बोले ‘आइए, पधारिए।’
वीआईपी ने कार से बाहर निकल कर ‘जनता लाइन’ पर हिकारत की नज़र डाली, फिर वे वीआईपी द्वार के सामने रखी पत्थर की बेंच पर पसर गये। बुदबुदाये— ‘बहुत थक गया। बहुत खराब रास्ता है।’
फिर वे प्रमुख पुजारी को संबोधित करके बोले, ‘हम भगवान के दर्शन करने के लिये आये हैं। आप जाकर भगवान को हमारे आने की इत्तिला दें और हमारी तरफ से उनसे प्रार्थना करें कि यहां दरवाजे तक आकर हमें दर्शन दें।’
सुनकर प्रमुख पुजारी सन्न रह गये। हकला कर बोले, ‘क्या कह रहे हैं? भगवान यहां आकर आपको दर्शन देंगे? कैसी बातें करते हैं?’
वीआईपी भवें चढ़ाकर बोले, ‘ठीक ही तो कह रहा हूं। भगवान हमेशा भक्त की पुकार पर आते रहे हैं। पचीसों उदाहरण हैं। तो फिर मेरी पुकार पर क्यों नहीं आएंगे? आप भीतर जाकर उन्हें इत्तिला तो कीजिए।’
प्रमुख पुजारी जी हैरत की स्थिति में भीतर प्रभु के सामने पहुंचे, हाथ जोड़कर बोले, ‘प्रभु, धृष्टता के लिए क्षमा करें। वह मंत्री प्रीतम लाल आया है। कहता है भगवान दुआरे तक जाकर उसे दर्शन दें।’
सुनकर प्रभु की त्योरियां चढ़ गयीं। बोले, ‘कैसा अशिष्ट है यह! यहां रोज हजारों भक्त आकर मेरे दर्शन करते हैं, और यह आदमी मुझे दर्शन देने के लिए बाहर बुला रहा है? ऐसा प्रस्ताव मुझ तक लाने का तुम्हें साहस कैसे हुआ?’
पुजारी जी हाथ जोड़कर दीन भाव से बोले, ‘क्षमा करें, प्रभु। यह आदमी बड़ा दुष्ट है। आप नहीं जाएंगे तो यह मेरी नौकरी खा जाएगा। फिर मैं आपकी सेवा के योग्य नहीं रहूंगा। कृपा करके दुआरे तक चले चलिए।’
भगवान ने थोड़ी देर तक सोचा, फिर वे अपने सिंहासन से उठकर धीरे-धीरे वीआईपी द्वार तक पहुंचे। वीआईपी महोदय ने उन्हें देखकर ‘प्रभु की जय हो’ का नारा लगाया और फिर उनके चरणों में लोट गये । लेटे-लेटे कनखियों से कैमरा वालों की तरफ देख रहे थे।
प्रभु को प्रणाम करने के बाद वीआईपी जी उठ कर हाथ जोड़कर बोले, ‘मेरा जनम सफल हुआ, प्रभु। मैं एक सोने के मुकुट की तुच्छ भेंट आपके लिए लाया हूं। उसे स्वीकार करने की कृपा कीजिएगा।’
प्रभु उनकी बात का कोई जवाब न देकर खिन्न भाव से मुड़कर भीतर चले गये। वीआईपी महोदय ‘जनता’ की ओर मुड़कर ऊंचे स्वर में बोले, ‘देखा? प्रभु हमें इतना चाहते हैं कि हमारी पुकार पर दौड़े चले आये। ऐसी कृपा भला कितने लोगों को मिलती है?’
इस प्रकार प्रभु के दर्शन पाकर और लाइन में लगी जनता को दर्शन देकर वीआईपी महोदय अपने लाव-लश्कर के साथ प्रस्थान कर गये।
(ई-अभिव्यक्ति में मॉरीशस के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ साहित्यकार श्री रामदेव धुरंधर जी का हार्दिक स्वागत। आपकी रचनाओं में गिरमिटया बन कर गए भारतीय श्रमिकों की बदलती पीढ़ी और उनकी पीड़ा का जीवंत चित्रण होता हैं। आपकी कुछ चर्चित रचनाएँ – उपन्यास – चेहरों का आदमी, छोटी मछली बड़ी मछली, पूछो इस माटी से, बनते बिगड़ते रिश्ते, पथरीला सोना। कहानी संग्रह – विष-मंथन, जन्म की एक भूल, व्यंग्य संग्रह – कलजुगी धरम, चेहरों के झमेले, पापी स्वर्ग, बंदे आगे भी देख, लघुकथा संग्रह – चेहरे मेरे तुम्हारे, यात्रा साथ-साथ, एक धरती एक आकाश, आते-जाते लोग। आपको हिंदी सेवा के लिए सातवें विश्व हिंदी सम्मेलन सूरीनाम (2003) में सम्मानित किया गया। इसके अलावा आपको विश्व भाषा हिंदी सम्मान (विश्व हिंदी सचिवालय, 2013), साहित्य शिरोमणि सम्मान (मॉरिशस भारत अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 2015), हिंदी विदेश प्रसार सम्मान (उ.प. हिंदी संस्थान लखनऊ, 2015), श्रीलाल शुक्ल इफको साहित्य सम्मान (जनवरी 2017) सहित कई सम्मान व पुरस्कार मिले हैं। हम श्री रामदेव जी के चुनिन्दा साहित्य को ई अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों से समय समय पर साझा करने का प्रयास करेंगे।
आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय गद्य क्षणिका “– कहानीकार की अंतश्चेतना…” ।)
~ मॉरिशस से ~
☆ कथा कहानी ☆ गद्य क्षणिका # ११२ — कहानीकार की अंतश्चेतना —☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆
कहानियाँ पढ़ने के अंतर्गत प्रायः ऐसा मान लिया जाता है उन कहानियों में कहानीकार के जीवन की छाप होती हो। इसी से मिलती जुलती एक छोटी सी कहानी मेरी ओर से। कहानीकार ने अपने कहानी संग्रह की अंतिम कहानी लिखी। पर उसकी अंतश्चेतना खुशी से दीप्त न हो पायी। उसकी सोच में आ रहा था इस संग्रह की सारी कहानियाँ पाठकों के यहाँ दुख ले कर जाने वाली हैं। सचमुच, सभी कहानियों में निराशा थी, उत्पीड़न थे, आँसू थे। स्वयं लेखक ने जिस लड़की को चाह कर प्रेम से घर बसाया था उसने उसे भी दुख की कलम से कुरेदा था। उसने अपनी अंतश्चेतना में एक अजीब सा उद्वेलन महसूस किया और बैठ कर पत्नी से प्रेमपूर्वक बातें करने लगा। यह उसका एक प्रायश्चित था। थोड़ी देर पहले कहानी संग्रह की अंतिम कहानी लिखने के लिए बैठते वक्त उसने अपनी पत्नी से लड़ कर उसे बहुत रुलाया था
(“साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच “ के लेखक श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही गंभीर लेखन। शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है। साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।श्री संजय जी के ही शब्दों में ” ‘संजय उवाच’ विभिन्न विषयों पर चिंतनात्मक (दार्शनिक शब्द बहुत ऊँचा हो जाएगा) टिप्पणियाँ हैं। ईश्वर की अनुकम्पा से आपको पाठकों का आशातीत प्रतिसाद मिला है।”
हम प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाते रहेंगे। आज प्रस्तुत है इस शृंखला की अगली कड़ी। ऐसे ही साप्ताहिक स्तंभों के माध्यम से हम आप तक उत्कृष्ट साहित्य पहुंचाने का प्रयास करते रहेंगे।)
☆ संजय उवाच # ३४५ ☆ इनबिल्ट…
अपने दैनिक पूजा-पाठ में या जब कभी मंदिर जाते हो, सामान्यतः याचक बनकर ईश्वर के आगे खड़ा होते हो। कभी धन, कभी स्वास्थ्य, कभी परिवार में सुख-शांति, कभी बच्चों की प्रगति तो कभी…, कभी की सूची लंबी है, बहुत लंबी।
लेकिन कभी विचार किया कि दाता ने सारा कुछ, सब कुछ पहले ही दे रखा है। ‘जो पिंड में, सोई बिरमांड में।’ उससे अलग क्या मांग लोगे? स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि ब्रह्मांड की सारी शक्तियाँ पहले से हमारे भीतर हैं। अपनी आँखों को अपने ही हाथों से ढककर हम ‘अंधकार, अंधकार’ चिल्लाते हैं। कितना गहन पर कितना सरल वक्तव्य है। ‘एवरीथिंग इज इनबिल्ट।’…तुम रोज़ मांगते हो, वह रोज़ मुस्कराता है।
एक भोला भंडारी भगवान से रोज़ लॉटरी खुलवाने की गुहार लगाता था। एक दिन भगवान ने स्वप्न में दर्शन देकर कहा, ‘बावरे! पहले लॉटरी का टिकट तो खरीद।’
तुम्हारा कर्म, तुम्हारा परिश्रम, तुम्हारा टिकट है। ये लॉटरी नहीं जो किसी को लगे, किसी को न लगे। इसमें परिणाम मिलना निश्चित है। हाँ, परिणाम कभी जल्दी, कभी कुछ देर से आ सकता है।
उपदेशक से समस्या का समाधान पाने के लिए उसके पीछे या उसके बताए मार्ग पर चलना होता है। उपदेशक के पास समस्या का सर्वसाधारण हल है। राजा और रंक के लिए, कुटिल और संत के लिए, बुद्धिमान और नादान के लिए, मरियल और पहलवान के लिए एक ही हल है।
समुपदेशक की स्थिति भिन्न है। समुपदेशक तुम्हारी आंतरिक प्रेरणा को जाग्रत करता है। यह प्रेरणा बताती है कि अपनी समस्या का हल तलाशने का सामर्थ्य तुम्हारे भीतर है। तुम्हें अपने तरीके से अपना प्रमेय हल करना है। प्रमेय भले एक हो, हल करने का तरीका प्रत्येक की अपनी दैहिक, पारिवारिक, सामाजिक, आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता है।
समुपदेशक तुम्हारे इनबिल्ट को एक्टिवेट करने में सहायता करता है। ईश्वर से मत कहो कि मुझे फलां दे। कहो कि हे प्रभो, फलां हासिल करने की मेरी शक्ति को जाग्रत करने में सहायक हो। जिसने ईश्वर को समुपदेशक बना लिया, उसने भीतर के ब्रह्म को जगा लिया….और ब्रह्मांड में ब्रह्म से बड़ा क्या है?
अध्यक्ष– हिंदी आंदोलन परिवार ☆ सदस्य– हिंदी अध्ययन मंडल, पुणे विश्वविद्यालय, एस.एन.डी.टी. महिला विश्वविद्यालय, न्यू आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस कॉलेज (स्वायत्त) अहमदनगर ☆ संपादक– हम लोग ☆ पूर्व सदस्य– महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ☆ ट्रस्टी- जाणीव, ए होम फॉर सीनियर सिटिजन्स ☆
मोबाइल– 9890122603
संजयउवाच@डाटामेल.भारत
writersanjay@gmail.com
☆ आपदां अपहर्तारं ☆
नारायण साधना संपन्न हो चुकी। नई साधना की सूचना यथासमय देंगे।
अनुरोध है कि आप स्वयं तो यह प्रयास करें ही साथ ही, इच्छुक मित्रों /परिवार के सदस्यों को भी प्रेरित करने का प्रयास कर सकते हैं। समय समय पर निर्देशित मंत्र की इच्छानुसार आप जितनी भी माला जप करना चाहें अपनी सुविधानुसार कर सकते हैं ।यह जप /साधना अपने अपने घरों में अपनी सुविधानुसार की जा सकती है।ऐसा कर हम निश्चित ही सम्पूर्ण मानवता के साथ भूमंडल में सकारात्मक ऊर्जा के संचरण में सहभागी होंगे। इस सन्दर्भ में विस्तृत जानकारी के लिए आप श्री संजय भारद्वाज जी से संपर्क कर सकते हैं।
≈ संस्थापक संपादक – हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈
(‘उरतृप्त’ उपनाम से व्यंग्य जगत में प्रसिद्ध डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा अपनी भावनाओं और विचारों को अत्यंत ईमानदारी और गहराई से अभिव्यक्त करते हैं। उनकी बहुमुखी प्रतिभा का प्रमाण उनके लेखन के विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान से मिलता है। वे न केवल एक प्रसिद्ध व्यंग्यकार हैं, बल्कि एक कवि और बाल साहित्य लेखक भी हैं। उनके व्यंग्य लेखन ने उन्हें एक विशेष पहचान दिलाई है। उनका व्यंग्य ‘शिक्षक की मौत’ साहित्य आजतक चैनल पर अत्यधिक वायरल हुआ, जिसे लगभग दस लाख से अधिक बार पढ़ा और देखा गया, जो हिंदी व्यंग्य के इतिहास में एक अभूतपूर्व कीर्तिमान है। उनका व्यंग्य-संग्रह ‘एक तिनका इक्यावन आँखें’ भी काफी प्रसिद्ध है, जिसमें उनकी कालजयी रचना ‘किताबों की अंतिम यात्रा’ शामिल है। इसके अतिरिक्त ‘म्यान एक, तलवार अनेक’, ‘गपोड़ी अड्डा’, ‘सब रंग में मेरे रंग’ भी उनके प्रसिद्ध व्यंग्य संग्रह हैं। ‘इधर-उधर के बीच में’ तीसरी दुनिया को लेकर लिखा गया अपनी तरह का पहला और अनोखा व्यंग्य उपन्यास है। साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान को तेलंगाना हिंदी अकादमी, तेलंगाना सरकार द्वारा श्रेष्ठ नवयुवा रचनाकार सम्मान, 2021 (मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के हाथों) से सम्मानित किया गया है। राजस्थान बाल साहित्य अकादमी के द्वारा उनकी बाल साहित्य पुस्तक ‘नन्हों का सृजन आसमान’ के लिए उन्हें सम्मानित किया गया है। इनके अलावा, उन्हें व्यंग्य यात्रा रवींद्रनाथ त्यागी सोपान सम्मान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों साहित्य सृजन सम्मान भी प्राप्त हो चुका है। डॉ. उरतृप्त ने तेलंगाना सरकार के लिए प्राथमिक स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर कुल 55 पुस्तकों को लिखने, संपादन करने और समन्वय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बिहार, छत्तीसगढ़, तेलंगाना की विश्वविद्यालयी पाठ्य पुस्तकों में उनके योगदान को रेखांकित किया गया है। कई पाठ्यक्रमों में उनकी व्यंग्य रचनाओं को स्थान दिया गया है। उनका यह सम्मान दर्शाता है कि युवा पाठक गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी लेखन की पहचान कर सकते हैं।)
जीवन के कुछ अनमोल क्षण
तेलंगाना सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री श्री के. चंद्रशेखर राव के करकमलों से ‘श्रेष्ठ नवयुवा रचनाकार सम्मान’ से सम्मानित।
मुंबई में संपन्न साहित्य सुमन सम्मान के दौरान ऑस्कर, ग्रैमी, ज्ञानपीठ, साहित्य अकादमी, दादा साहब फाल्के, पद्म भूषण जैसे अनेकों सम्मानों से विभूषित, साहित्य और सिनेमा की दुनिया के प्रकाशस्तंभ, परम पूज्यनीय गुलज़ार साहब (संपूरण सिंह कालरा) के करकमलों से सम्मानित।
ज्ञानपीठ सम्मान से अलंकृत प्रसिद्ध साहित्यकार श्री विनोद कुमार शुक्ल जी से भेंट करते हुए।
बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट, अभिनेता आमिर खान से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
विश्व कथा रंगमंच द्वारा सम्मानित होने के अवसर पर दमदार अभिनेता विक्की कौशल से भेंट करते हुए।
आप डॉ सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ जी के स्तम्भ – चुभते तीर में उनकी अप्रतिम व्यंग्य रचनाओं को आत्मसात कर सकेंगे। इस कड़ी में आज प्रस्तुत है आपका विचारणीय व्यंग्य – सरकारी फ़ाइल की अमरता।)
☆ चुभते तीर # ११४ – व्यंग्य – सरकारी फ़ाइल की अमरता ☆ डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’☆
(तेलंगाना साहित्य अकादमी से सम्मानित नवयुवा व्यंग्यकार
सरकारी दफ़्तर में फ़ाइलें कभी मरती नहीं हैं, वे बस मोक्ष प्राप्त कर लेती हैं। एक बार जब कोई कागज़ ‘फ़ाइल’ का रूप धारण कर लेता है, तो वह इंसानी उम्र से परे हो जाता है। उसे एक मेज से दूसरी मेज तक की यात्रा करने में उतने ही साल लगते हैं, जितने एक आम इंसान को मोक्ष पाने में लगते हैं। क्लर्क उस फ़ाइल को इस तरह सहलाता है मानो वह उसकी पैतृक संपत्ति हो। जब आप पूछेंगे कि काम कब होगा, तो जवाब मिलेगा, “फ़ाइल अभी विचाराधीन है।” ‘विचाराधीन’ वह आध्यात्मिक अवस्था है जहाँ कागज़ पर धूल की परतें जमती हैं और वह चाय के दागों से सुशोभित होता है। चूहे उस फ़ाइल के कुछ हिस्सों को खाकर अपनी साक्षरता बढ़ाते हैं, लेकिन मजाल है कि कोई अफ़सर उस पर दस्तखत कर दे। दस्तखत हो जाना तो फाइल की मृत्यु के समान है, और कोई भी संवेदनशील अफ़सर किसी फाइल की हत्या का पाप अपने सिर नहीं लेना चाहता। इसलिए, डिजिटल इंडिया के इस दौर में भी फाइलें अलमारियों में बंद होकर अमरता का आनंद ले रही हैं।
(टीप: यह आवश्यक नहीं है कि संपादक मंडल व्यंग्य /आलेख में व्यक्त विचारों/राय से सहमत हो।)
(आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी संस्कारधानी जबलपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। आपको आपकी बुआ श्री महीयसी महादेवी वर्मा जी से साहित्यिक विधा विरासत में प्राप्त हुई है । आपके द्वारा रचित साहित्य में प्रमुख हैं पुस्तकें- कलम के देव, लोकतंत्र का मकबरा, मीत मेरे, भूकंप के साथ जीना सीखें, समय्जयी साहित्यकार भगवत प्रसाद मिश्रा ‘नियाज़’, काल है संक्रांति का, सड़क पर आदि। संपादन -८ पुस्तकें ६ पत्रिकाएँ अनेक संकलन। आप प्रत्येक सप्ताह रविवार को “साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह” के अंतर्गत आपकी रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे। आज प्रस्तुत है – “गीत – किसका पूजन करूँ?”।)
विज्ञान की अन्य विधाओं में भारतीय ज्योतिष शास्त्र का अपना विशेष स्थान है। हम अक्सर शुभ कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त, शुभ विवाह के लिए सर्वोत्तम कुंडली मिलान आदि करते हैं। साथ ही हम इसकी स्वीकार्यता सुहृदय पाठकों के विवेक पर छोड़ते हैं। हमें प्रसन्नता है कि ज्योतिषाचार्य पं अनिल पाण्डेय जी ने ई-अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों के विशेष अनुरोध पर साप्ताहिक राशिफल प्रत्येक शनिवार को साझा करना स्वीकार किया है। इसके लिए हम सभी आपके हृदयतल से आभारी हैं। साथ ही हम अपने पाठकों से भी जानना चाहेंगे कि इस स्तम्भ के बारे में उनकी क्या राय है ?
☆ ज्योतिष साहित्य ☆ साप्ताहिक राशिफल (20 जुलाई से 26 जुलाई 2026) ☆ ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय ☆
जय श्री राम। वर्तमान युग के जागृत देवता हमारे श्री हनुमान जी के बारे में कहा जाता है कि उनका प्रताप चारों युग अर्थात सतयुग त्रेतायुग द्वापरयुग और कलयुग में फैला हुआ है। श्री हनुमान जी के प्रताप से हर तरफ उजाला हो रहा है। उनकी कीर्ति समस्त ब्रह्मांड में फैली हुई है। उनको स्मरण करने का सबसे अच्छा उपाय श्री हनुमान चालीसा का पाठ होता है। आज की श्री हनुमान चालीसा की चौपाई है:-
चारों जुग परताप तुम्हारा |
है परसिद्ध जगत उजियारा ||
इस चौपाई के संपुट पाठ करने से जातक के सभी मनोरथ सिद्ध होंगे और उसकी कीर्ति हर तरफ फैलेगी।
“नासे रोग हरे सब पीरा” नाम की पुस्तक में श्रीहनुमान चालीसा की चौपाइयों से संबंधित सभी उपायों का विस्तृत विवरण दिया हुआ है। इस पुस्तक को आप हमारे यहां से प्राप्त कर सकते हैं।
आइये अब मैं पंडित अनिल पाण्डेय आपको इस सप्ताह अर्थात 13 जुलाई से 19 जुलाई 2026 तक के सप्ताह के, ग्रहों के विचरण की जानकारी दे रहा हूं।
इस सप्ताह सूर्य और गुरु कर्क राशि में, मंगल वृष राशि में, शनि मीन राशि में, शुक्र सिंह राशि में और राहु कुंभ राशि में गोचर करेंगे। प्रारंभ में मिथुन राशि में वक्री रहेगा तथा 24 तारीख के 1:36 बजे दिन से मिथुन राशि में मार्गी हो जाएगा। आईये अब हम राशिवार राशिफल की चर्चा करते हैं।
मेष राशि
इस सप्ताह आपके सामाजिक प्रतिष्ठा में काफी वृद्धि होगी। जनप्रतिनिधियों के लिए सप्ताह बहुत अच्छा रहेगा। कर्मचारी और अधिकारियों को इस सप्ताह थोड़ा सावधान रहकर अपने कार्यों का निष्पादन करना चाहिए। कचहरी के कार्यों में आपको सावधान रहना चाहिए, जिससे आपको कोई नुकसान ना हो सके। इस सप्ताह आपको अपने संतान से सहयोग कम मिलेगा। भाग्य से आपको थोड़ा बहुत लाभ होगा। दुर्घटनाओं से आपको इस सप्ताह डरने की आवश्यकता नहीं है। इस सप्ताह आपके लिए 21 तारीख के दोपहर के बाद से लेकर 22 और 23 तारीख विभिन्न कार्यों में सफलता दायक हैं। सप्ताह के बाकी दिनों में आपको सावधान रहकर के अपने कार्यों को संपन्न करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन लाल मसूर की दाल का दान करें और मंगलवार को हनुमान जी के मंदिर में जाकर हनुमान चालीसा का तीन बार पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है।
वृष राशि
इस सप्ताह आपका अपने भाई बहनों से बहुत अच्छा संबंध रहेगा। भाई बहनों से आपको अच्छा सहयोग भी प्राप्त होगा। इस सप्ताह आपके प्रतिष्ठा में थोड़ी वृद्धि होने की संभावना है। दुर्घटनाओं से इस सप्ताह आपको डरने की आवश्यकता नहीं है। शत्रुओं से आपको सावधान रहना चाहिए। अधिकारी एवं कर्मचारियों को अपनी वाणी पर नियंत्रण रखना चाहिए। इस सप्ताह आपके लिए 24 और 25 तारीख सफलता प्राप्त करने के लिए उपयोगी हैं। 21 की दोपहर के बाद से लेकर 22, 23 और 26 तारीख को आपको सावधान रहकर अपने कार्यों को पूर्ण करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन चावल का दान करें और शुक्रवार को मंदिर में जाकर पुजारी जी को सफेद वस्त्रो का दान दें। सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है।
मिथुन राशि
इस सप्ताह आपके पास धन आने का अच्छा योग है। आपकी कुंडली के गोचर में इस सप्ताह धन भाव में सूर्य और गुरु एक साथ विराजमान हैं। इस प्रकार आपको अपनी विद्या और राज्य की मदद से धन प्राप्त होगा। भाई बहनों के साथ संबंध थोड़े कम अच्छे रहेंगे। भाग्य से आपको ज्यादा मदद नहीं मिलेगी। कचहरी के मामलों में आपको सावधान रहना चाहिए। इस सप्ताह में आप शत्रुओं को आसानी से पराजित कर सकते हैं। इस सप्ताह आपके लिए 20-21 और 26 तारीख विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए मददगार हैं। शत्रु को पराजित करने में 24 और 25 तारीख विशेष रूप से मददगार है। सप्ताह के बाकी दिन ठीक-ठाक हैं। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन काले कुत्ते को तंदूर की रोटी खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।
कर्क राशि
इस सप्ताह आप आत्मविश्वास से भरपूर रहेंगे। आपके अंदर अच्छे-अच्छे विचार आएंगे। आपको संतान से सहयोग प्राप्त होगा। शत्रुओं को आप थोड़े प्रयास से ही पराजित कर सकते हैं। भाग्य से आपको मामूली मदद प्राप्त हो सकती है। कर्मचारी और अधिकारियों के लिए यह सप्ताह सामान्य है, अर्थात जैसा चल रहा था वैसा ही रहेगा। भाई बहनों के साथ संबंध थोड़े खराब हो सकते हैं। इस सप्ताह आपके लिए 21-22 और 23 तारीख विभिन्न प्रकार से लाभदायक है। 24 और 25 तारीख को छात्रों के लिए परीक्षा देना बहुत अच्छा रहेगा। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक-ठाक हैं। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन काले उड़द की दाल का दान करें और शनिवार को शनि मंदिर में जाकर शनि देव का पूजन करें। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।
सिंह राशि
यह सप्ताह विवाहित जातकों के लिए उत्तम है। उनके विवाह के अच्छे प्रस्ताव आएंगे। प्रेम संबंधों में वृद्धि होगी। नए-नए प्रेम संबंध बन सकते हैं। कचहरी के कार्यों में प्रयास करने पर सफलता मिल सकती है। व्यापार ठीक चलेगा। व्यापारियों को धन लाभ भी होगा। कर्मचारी और अधिकारियों को इस सप्ताह थोड़ा सतर्क रहकर कार्य करना चाहिए। जनता में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी। संतान से आपको मदद प्राप्त होगी। इस सप्ताह आपके लिए 24और 25 तारीख प्रतिष्ठा वृद्धि के लिए मददगार है। सप्ताह के बाकी दिन भी कार्यों के करने के लिए ठीक-ठाक हैं। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें और शनिवार को दक्षिण मुखी हनुमान जी के मंदिर में जाकर कम से कम तीन बार हनुमान चालीसा का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।
कन्या राशि
इस सप्ताह आपके पास धन आने का अच्छा योग है। आपके थोड़े से प्रयासों से ही आपके पास अच्छी मात्रा में धन आ सकता है। व्यापारियों का व्यापार उत्तम चलेगा। उनको धन लाभ होगा। इस सप्ताह आपको अपने संतान से मदद नहीं मिल पाएगी। छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं में अच्छे मार्क मिलने की उम्मीद कम है। शत्रु शांत रहेंगे परंतु समाप्त नहीं होंगे। भाग्य के स्थान पर इस सप्ताह आपको कर्म पर विश्वास करना चाहिए। इस सप्ताह आपके लिए 20-21 और 26 तारीख फलदायक है। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक-ठाक हैं। 24 और 25 तारीख को आपका अपने भाइयों के साथ अच्छा संबंध बनेगा। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन रुद्राष्टक का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।
तुला राशि
अधिकारी एवं कर्मचारियों के लिए यह सप्ताह काफी अच्छा रहेगा। आपको अपने कार्यालय में उचित सम्मान मिलेगा। नौकरी के लिए अगर आप परीक्षा दे रहे हैं तो उसे प्रतियोगिता में आप सफल हो सकते हैं। इस सप्ताह आपको भाग्य से मदद मिल सकती है। धन आने का सामान्य योग है। भाई बहनों के साथ संबंध पहले जैसे ही रहेंगे। दुर्घटनाओं से आपको इस सप्ताह सावधान रहना चाहिए। आपके शत्रु शांत रहेंगे परंतु समाप्त नहीं होंगे। इस सप्ताह आपके लिए 21 की दोपहर के बाद से लेकर 22 और 23 तारीख कार्यों को संपन्न करने में फलदायक है। 20 और 21 की दोपहर तक का समय कार्यों को करने के लिए कम उचित है। 24 और 25 तारीख को धन प्राप्त हो सकता है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।
वृश्चिक राशि
इस सप्ताह भाग्य आपका भरपूर साथ देगा। भाग्य के कारण आपक कई कार्य निपटा सकते हैं। आपके जो कार्य भाग्य के कारण रुक रहे हो उनको करने का प्रयास करें। सफल होंगे। इस सप्ताह आपको अपने संतान से बहुत कम सहयोग प्राप्त होगा। कर्मचारी एवं अधिकारियों को इस सप्ताह सावधान रहना चाहिए। इस सप्ताह आपके लिए 24 और 25 तारीख कार्यों को करने हेतु लाभप्रद है। 21, 22 और 23 तारीख को आपको सावधान रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन शिव पंचाक्षरी मंत्र का जाप करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।
धनु राशि
इस सप्ताह आपका और आपके जीवनसाथी का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। आप अपने शत्रुओं को कम प्रयास में ही पराजित कर सकते हैं। कर्मचारी और अधिकारियों के लिए यह सप्ताह सामान्य है अर्थात जैसे पहले से चल रहा था वैसा ही रहेगा। जनप्रतिनिधियों के लिए भी यह सप्ताह सामान्य रहेगा। व्यापारियों के लिए यह सप्ताह ठीक-ठाक रहेगा। भाई और बहनों के साथ आपके संबंधों में थोड़ा सा तनाव आ सकता है। भाग्य से इस सप्ताह आपको मदद बहुत कम मिलेगी। इस सप्ताह आपके लिए 20, 21 और 26 तारीख विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए परिणाम मूलक है। 24 और 25 तारीख को आपको कचहरी के कार्यों के प्रति बहुत सतर्क रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन शिव पंचाक्षरी स्त्रोत का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।
मकर राशि
यह सप्ताह आपके जीवनसाथी के लिए बहुत अच्छा रहेगा। उनको अपने हर कार्य में सफलता प्राप्त होगी। अविवाहित जातकों के लिए विवाह के प्रस्ताव आ सकते हैं। इस सप्ताह आपको अपने संतान से विशेष सहयोग प्राप्त नहीं हो पाएगा। मामूली धन आने का योग है। इस सप्ताह आपके लिए 21, 22 और 23 तारीख विभिन्न कार्यों को करने हेतु अनुकूल है। 24 और 25 तारीख को आपको धन की प्राप्ति हो सकती है। 26 तारीख को आपको सावधान रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन भगवान शिव का दूध और जल से अभिषेक करें। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।
कुंभ राशि
यह सप्ताह अविवाहित जातकों के लिए अच्छा है। उनके विवाह के नए-नए प्रस्ताव आएंगे। परंतु इन प्रस्ताव को फाइनल करने मैं सावधानी बरतना चाहिए। अधिकारी एवं कर्मचारियों के लिए यह सप्ताह ठीक-ठाक है। इस सप्ताह आपको अपने प्रतिष्ठा के प्रति सतर्क रहना चाहिए। इस सप्ताह आपके लिए 24 और 25 तारीख विभिन्न प्रकार के कार्यों हेतु ठीक-ठाक है। 20 और 21 तारीख को आपको सजग रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गायत्री मंत्र का जाप करें। सप्ताह का शुभ दिन शनिवार है।
मीन राशि
यह सप्ताह आपके संतान के लिए उत्तम रहेगा। छात्रों की पढ़ाई अच्छी चलेगी। प्रतियोगी परीक्षाओं में उनको सफलता प्राप्त हो सकती है। धन आने का योग है। इस सप्ताह आपका और आपके जीवनसाथी का स्वास्थ्य पहले जैसा ही रहेगा। 24 और 25 तारीख को भाग्य आपका विशेष रूप से साथ दे सकता है। इस सप्ताह आपके लिए 20 और 26 तारीख विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए उपयुक्त है। 21 तारीख को दोपहर के बाद से लेकर 22 और 23 तारीख को आपको होशियारी से कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन राम रक्षा स्त्रोत का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।
ध्यान दें कि यह सामान्य भविष्यवाणी है। अगर आप व्यक्तिगत और सटीक भविष्वाणी जानना चाहते हैं तो आपको मुझसे दूरभाष पर या व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाना चाहिए। मां शारदा से प्रार्थना है या आप सदैव स्वस्थ सुखी और संपन्न रहें। जय मां शारदा।
☆ मनाचे श्लोक – एक सार्वकालिक ‘मनोपनिषद’… – श्लोक ७७ आणि ७८ ☆ श्री विश्वास देशपांडे ☆
श्लोक क्र. ७७ — –
करी काम नि:काम या राघवाचे ।
करी रूप स्वरूप सर्वा जिवांचे ।
करी छंद निर्द्वंद्व हे गूण गाता ।
हरिकीर्तनी वृत्तिविश्वास होता ।।७७।।
अर्थ : या राघवाच्या प्राप्तीची मनापासून कामना कर. सकल प्राणिमात्रांच्या ठायी असलेले त्याचे रूप स्वत:मध्येही पहा. त्याचे गुणगान करण्याचा छंद लागला की सारे भेद, द्वंद्व नाहिसे होतील.
विवेचन :परमेश्वर प्राप्तीची इच्छा असणाऱ्या साधकाने कसे वागावे ते समर्थ या श्लोकामध्ये आपल्याला सांगतात. आपण सामान्य प्रापंचिक माणसे आहोत. आपल्या मनात निरनिराळ्या इच्छा, वासना वेळोवेळी उद्भवत असतात. जोपर्यंत वासना आहेत, तोपर्यंत परमेश्वर प्राप्ती होणार नाही. आपण परमेश्वराची प्रार्थना, ध्यान करतो ते सुद्धा मनात काहीतरी इच्छा ठेवूनच. त्यामुळे एक वेळ आपल्या त्या कामना पूर्ण होतील पण ईश्वर मात्र आपल्यापासून दूरच राहील. म्हणून इतर सर्व वासनांचा त्याग करून मला अन्य काही नको. फक्त परमेश्वर हवा आहे अशा अनन्य भावनेतून जर आपण त्याचे गुणगान केले तर त्याचा एक परिणाम असा होईल की हळूहळू आपल्या इतर वासना नाहीशा व्हायला लागतील. देहबुद्धी कमी होईल.
त्या गोष्टीचे मात्र आपल्याला सतत ध्यान लागले पाहिजे. त्याचा छंद किंवा वेड लागले पाहिजे. असे झाले म्हणजे आपल्या अंतर्यामी असणारा ईश्वर हळूहळू या विश्वात सर्वत्र विद्यमान आहे याची जाणीव होईल. तो जसा माझ्यात आहे तसाच सर्व प्राणीमात्रात देखील आहे याची जाणीव दृढ होत जाईल. तो केवळ सजीवात नसून निर्जीवात किंवा सृष्टीच्या कणाकणात त्याचे अस्तित्व आहे हे जाणवेल. भक्त प्रल्हादाचे उदाहरण आपल्याला माहिती आहे. प्रल्हादाचा पिता हिरण्यकश्यपू देवांना आपला शत्रू समजत होता. पण अशा या असुराचा मुलगा प्रल्हाद मात्र विष्णूचा भक्त होता. जेव्हा हिरण्यकश्यपूने त्याला विचारले, ” कुठे आहे तुझा ईश्वर? ” तेव्हा त्याने सांगितले की तो या सर्व चराचरात भरून राहिला आहे. मग हिरण्यकश्यपूने विचारले की या निर्जीव अशा खांबात देखील तो आहे का? तेव्हा प्रल्हादाने होय उत्तर दिले. नंतर त्याच स्तंभातून परमेश्वराने नरसिंह रूप धारण करून दुराचारी अशा हिरण्यकश्यपूचा वध केला.
पैठणच्या ब्रह्मवृंदासमोर ज्ञानदेवांनी सर्वांभूती एकच ईश्वर आहे हे रेड्याच्या मुखातून वेद वदवून सिद्ध केले. संत एकनाथांनी तृषार्त अशा गाढवाला गंगेचे पाणी पाजून त्याचा आत्मा शांत केला आणि सर्वांचा आत्मा एकच आहे याचा प्रत्यय लोकांना आणून दिला. भगवंताच्या भक्तीने या सगळ्या संतांच्या मनातील द्वंद्व नाहीसे झाले होते.
त्याप्रमाणे हरिनामाचे गुणगान केले की आपल्याही जाणिवा हळूहळू सूक्ष्म व्हायला लागतात. मनातील द्वंद्व नाहीसे होते. या जगामध्ये विविध रंग आणि रूपात तोच नटलेला आहे याचा साक्षात्कार होतो. जसे वेगवेगळ्या भांड्यात भरून ठेवलेले पाणी त्या भांड्याच्या आकारात राहते. पण पाणी एकच असते. सोन्याचे दागिने विविध प्रकारचे आणि आकाराचे असतात. पण त्यातील सोने एकच असते. त्याप्रमाणेच या विश्वात परमेश्वरच सगळीकडे भरून राहिला आहे ही जाणीव दृढ होत जाते. संत ज्ञानेश्वर म्हणतात, ” हे विश्वची माझे घर, ऐसी मती जयाची स्थिर, किंबहुना चराचर आपणचि जाहला. ” अशी साधकाची अवस्था होते. म्हणून आपण निर्वासन होऊन फक्त एका परमेश्वराचीच वासना धरावी असे समर्थांचे सांगणे आहे.
स्वसंवाद ::
१. माझी आजची भक्ती किंवा प्रार्थना ही देवाला काहीतरी ‘मागण्यासाठी’ (सकाम) आहे, की मी केवळ त्याच्या ‘स्वरूपासाठी’ (निष्काम) त्याची आराधना करतोय?
२. संतांनी गाढवात किंवा खांबातही देव पाहिला; मी माझ्या दैनंदिन जीवनात माझ्या आजूबाजूच्या माणसांमध्ये, प्राण्यांमध्ये तोच ईश्वरी अंश पाहू शकतो का?
३. माझ्या मनातील ‘आपले-परके’, ‘चांगले-वाईट’ हे द्वंद्व किंवा भेद नष्ट व्हावेत म्हणून माझ्या ठायी रामनामाचा ‘वृत्तीविश्वास’ दृढ झाला आहे का?
४. ज्ञानेश्वर माऊलींनी म्हटल्याप्रमाणे “हे विश्वचि माझे घर” ही भावना माझ्या मनात रुजण्यासाठी मी माझ्या संकुचित विचारांचा ‘छेद’ (त्याग) करायला तयार आहे का?
– – – –
श्लोक क्र. ७८ – –
अहो ज्या नरा रामविश्वास नाही ।
तया पामरा बाधिजे सर्व काही ।
महाराज तो स्वामी कैवल्यदाता ।
वृथा वाहने देहेसंसारचिंता ।।७८।।
अर्थ :ज्या मनुष्याचा परमेश्वरावर विश्वास नाही, त्या माणसाला (पामराला) सर्व प्रकारची संकटे त्रास देतात. भगवंत महाराज म्हणजे राजांचा राजा आहे, या विश्वाचा स्वामी म्हणजे मालक आहे, तो कैवल्यदाता म्हणजे मोक्ष देणारा आहे. असा हा सर्वशक्तिमान परमेश्वर आपली काळजी वाहण्यास समर्थ असताना आपण उगाच देहाची आणि संसाराची चिंता करीत बसतो.
विवेचन :आधीच्या श्लोकात समर्थांनी श्रीरामावर निष्काम श्रद्धा ठेवून त्याचे नामस्मरण केल्यास मनातील द्वंद्व नाहीसे होते. सर्व जीवांच्या मध्ये तो एकच परमात्मा व्यापून राहिला आहे असा साक्षात्कार होतो असे सांगितले आहे. या श्लोकात ज्याचा रामावर विश्वास नाही अशा माणसाचा खरपूस समाचार समर्थ घेतात. अशा माणसाला ते पामर म्हणतात. पामर म्हणजे क्षुद्र, हीन. गरीब आणि पामर यात फरक करता येतो. गरीब माणूस आपल्या कर्तृत्वाने स्वतःची उन्नती करून घेऊ शकतो. पामर हा त्या दृष्टीने महामूर्ख म्हणावा लागेल. कारण आपले हित कशात आहे हे त्याला कळत नाही. ज्यांची परमेश्वरावर श्रद्धा नाही, अशा माणसांना समर्थ पामर म्हणतात. मग तो ऐहिक दृष्ट्या भलेही श्रीमंत असेल, पण पारमार्थिक दृष्ट्या अभागी आणि हीन दीन.
असा माणूस आर्थिक दृष्ट्या भलेही सधन असेल पण प्रपंचात येणाऱ्या संकटांनी तो खचून जातो. प्रपंचातील संकटांचे तडाखे भल्याभल्यांना सोसवत नाहीत. छोट्यामोठ्या गोष्टींनीही अशी माणसे विचलित होतात. समर्थांच्या शब्दात सांगायचे तर अशा माणसांना संसार आणि त्यातील अडचणी बाधक ठरतात. पण ज्यांची रामावर श्रद्धा आहे, अशा माणसांना प्रपंचातील संकटे विचलित करीत नाहीत. त्यांना संकटे येत नाहीत असे नाही. पण भगवंतावर सर्व भार टाकल्यामुळे त्यांना अशा गोष्टींचा त्रास होत नाही.
या श्लोकात भगवंताच्या गुणांचे वर्णन करताना समर्थ तीन विशेषणे वापरतात. तो ‘महा ‘राज आहे, स्वामी आहे आणि कैवल्यदाता आहे. महाराज म्हणजे महान राजा. राजांचा राजा. रामराज्य होऊन आज हजारो वर्षे लोटली तरी रामराज्याची कल्पना आजही लोकांना भावते. रामराज्य म्हणजे आदर्श राज्य होते. राम हा आदर्श राजा. दुसरी गोष्ट म्हणजे तो या चराचराचा स्वामी आहे. इंग्रजी शब्द वापरायचा तर तो ‘ सुप्रीम पॉवर ‘ आहे. या विश्वाचा निर्माता, पालनकर्ता आणि संहारकर्ता तोच आहे. तिसरी गोष्ट म्हणजे तो कैवल्यदाता आहे. कैवल्यदाता म्हणजे मुक्ती किंवा मोक्ष देणारा. ज्याने ज्याने रामनाम घेतला, तो तरून गेला. मग तो वाल्या कोळी असेल, भक्त प्रल्हाद असेल, रामनाम घेणारी शबरी असेल किंवा अहिल्या असेल. हनुमंत आणि बिभीषण हे रामाचे भक्त तर चिरंजीव झाले.
थोडक्यात सांगायचे झाले तर श्रीराम म्हणजे कल्पवृक्ष आहेत. कल्पवृक्ष हा इच्छिलेले देणारा असतो. त्याच्या सावलीत बसून आपण काय मागायचे हे आपल्यावर आहे. तो आपल्याला जन्म मृत्यूच्या फेऱ्यातून मुक्ती देणारा आहे. कैवल्य प्रदान करणारा आहे. असा हा भगवंत आपल्या पाठीशी असताना आपण देहाची आणि संसाराची व्यर्थ चिंता वाहत असतो. माझे कसे होईल, माझ्या मुलाबाळांचे, नातवंडांचे कसे होईल अशी चिंता आपण करीत बसतो. तर कोणाला या जगाचे कसे होईल अशा प्रकारची चिंता. अशा अनेक प्रकारच्या चिंतांनी सामान्य माणूस गोंधळून जातो.
समर्थ म्हणतात, ‘ मनी मानवा व्यर्थ चिंता वाहते, अकस्मात होणार होऊन जाते. ‘ प्रारब्धानुसार जे घडायचे असते, ते घडणारच असते. आपण मात्र व्यर्थ चिंता करीत बसतो. त्यापेक्षा आपण त्याच्यावर विश्वास ठेवून सर्व भार त्याच्यावर सोपवावा. याचा अर्थ मात्र असा नाही की आपल्या वाट्याला आलेले कर्म न करता स्वस्थ बसायचे. अर्जुनाला कर्तव्यप्रवण करण्यासाठीच तर भगवंताने गीता सांगितली ना! तेव्हा त्याच्यावर विश्वास ठेवून आपल्या वाट्याला आलेले निहित कर्म उत्तम प्रकारे करावे. तोच पुरुषार्थ आहे. इतर गोष्टी परमेश्वरावर सोपवाव्यात. तुकाराम महाराज म्हणतात, “घालू देवासीच भार, देव सुखाचा सागर. “मग देहाच्या आणि प्रपंच्याच्या चिंता आपल्याला सतावणार नाहीत.
स्वसंवाद ::
१. “माझे कसे होईल? माझ्या कुटुंबियांचे कसे होईल? ” या विचारसरणीत अडकून मी समर्थांनी म्हटल्याप्रमाणे प्रपंचाची ‘वृथा’ (व्यर्थ) चिंता करत बसलो आहे का?
२. संकटाच्या काळात मी एका ‘पामरा’सारखा विचलित होऊन खचून जातो, की भगवंतावर संपूर्ण भार टाकून खंबीरपणे परिस्थितीचा सामना करतो?
३. कल्पवृक्षाप्रमाणे असणाऱ्या श्रीरामाच्या चरणी आल्यावर मी त्याच्याकडे केवळ तात्पुरती ऐहिक सुखे मागत आहे, की चिरंतन शांती आणि मोक्षाची आस धरतो आहे?
४. तुकाराम महाराजांनी म्हटल्याप्रमाणे, “देव सुखाचा सागर” आहे यावर माझा पूर्ण विश्वास आहे का? मी माझे निहित कर्म करून उरलेला भार त्याच्यावर सोपवायला शिकलो आहे का?
(जन्म – 17 जनवरी, 1952 ( होशियारपुर, पंजाब) शिक्षा- एम ए हिंदी , बी एड , प्रभाकर (स्वर्ण पदक)। प्रकाशन – अब तक ग्यारह पुस्तकें प्रकाशित । कथा संग्रह – 6 और लघुकथा संग्रह- 4 । यादों की धरोहर हिंदी के विशिष्ट रचनाकारों के इंटरव्यूज का संकलन। कथा संग्रह -एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मिला पुरस्कार । हरियाणा साहित्य अकादमी से श्रेष्ठ पत्रकारिता पुरस्कार। पंजाब भाषा विभाग से कथा संग्रह-महक से ऊपर को वर्ष की सर्वोत्तम कथा कृति का पुरस्कार । हरियाणा ग्रंथ अकादमी के तीन वर्ष तक उपाध्यक्ष । दैनिक ट्रिब्यून से प्रिंसिपल रिपोर्टर के रूप में सेवानिवृत। सम्प्रति- स्वतंत्र लेखन व पत्रकारिता)
☆ लघुकथा – “बचपन”☆ श्री कमलेश भारतीय ☆
मेरे छोटे भाई के बेटे का जन्मदिन था । इसलिए ऑफिस से जल्दी छुट्टी लेकर आया । घर के अंदर खूब रौनक और, खुशी के माहौल । बाहर क्या देखता हूं हमारी कामवाली का छोटा सा बेटा बर्तन मांज रहा है और रोते रोते मां से कह रहा है – मुझे भी केक दिलवाओ। मुझे भी जन्मदिन मनाने है ।
मां बेबस । झांक रही अपने अंदर । मैं सोच रहा हूं कि जन्मदिन किसका मनाऊं ?