हिंदी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ प्रतुल साहित्य # २८ – हास्य-व्यंग्य – “पान की दुकान पर मोदी – मेलोनी चर्चा” ☆ श्री प्रतुल श्रीवास्तव ☆

श्री प्रतुल श्रीवास्तव 

वरिष्ठ पत्रकार, लेखक श्री प्रतुल श्रीवास्तव, भाषा विज्ञान एवं बुन्देली लोक साहित्य के मूर्धन्य विद्वान, शिक्षाविद् स्व.डॉ.पूरनचंद श्रीवास्तव के यशस्वी पुत्र हैं। हिंदी साहित्य एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रतुल श्रीवास्तव का नाम जाना पहचाना है। इन्होंने दैनिक हितवाद, ज्ञानयुग प्रभात, नवभारत, देशबंधु, स्वतंत्रमत, हरिभूमि एवं पीपुल्स समाचार पत्रों के संपादकीय विभाग में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया। साहित्यिक पत्रिका “अनुमेहा” के प्रधान संपादक के रूप में इन्होंने उसे हिंदी साहित्य जगत में विशिष्ट पहचान दी। आपके सैकड़ों लेख एवं व्यंग्य देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। आपके द्वारा रचित अनेक देवी स्तुतियाँ एवं प्रेम गीत भी चर्चित हैं। नागपुर, भोपाल एवं जबलपुर आकाशवाणी ने विभिन्न विषयों पर आपकी दर्जनों वार्ताओं का प्रसारण किया। प्रतुल जी ने भगवान रजनीश ‘ओशो’ एवं महर्षि महेश योगी सहित अनेक विभूतियों एवं समस्याओं पर डाक्यूमेंट्री फिल्मों का निर्माण भी किया। आपकी सहज-सरल चुटीली शैली पाठकों को उनकी रचनाएं एक ही बैठक में पढ़ने के लिए बाध्य करती हैं।

प्रकाशित पुस्तकें –ο यादों का मायाजाल ο अलसेट (हास्य-व्यंग्य) ο आखिरी कोना (हास्य-व्यंग्य) ο तिरछी नज़र (हास्य-व्यंग्य) ο मौन

आज प्रस्तुत है आपका एक विचारणीय व्यंग्य  पान की दुकान पर मोदी – मेलोनी चर्चा

साप्ताहिक स्तम्भ ☆ प्रतुल साहित्य # २८

☆ व्यंग्य ☆ “पान की दुकान पर मोदी – मेलोनी चर्चा” ☆ श्री प्रतुल श्रीवास्तव

मैं रात्रि का भोजन करने के बाद पान खाने के मूड में टहलता हुआ झब्बूलाल की दुकान की ओर बढ़ रहा था। कुछ आगे बढ़ा तो झब्बू की दुकान का रेडियो साफ सुनाई देने लगा, “झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में। ” मैंने सोचा कि आखिर बरेली की धरती में ऐसा क्या है कि वहां महिलाओं के सिर्फ झूमके ही गिरते हैं बेंदा, हार, करधन, पायल आदि गिरने की जानकारी कभी नहीं आई ! मुझे देखते ही झब्बू ने नमस्कार किया और मेरा पान तैयार करते हुए बोला – भाई साहब आपसे बहुत जरूरी काम है। मैंने कहा भाई जी अचानक क्या काम आ गया ? झब्बू बोला, आप मुझे और मेरे लगाए पान की क्वालिटी जानते ही हैं, मैंने कभी भी पान की गुणवत्ता और स्वाद से समझौता नहीं किया, सदा अपने ग्राहकों का हित सोचा, सबके साथ हमेशा मधुर व्यवहार किया। झब्बू जैसे ही सांस लेने रुका, मैंने बिना विलंब कहा, भाई मैं वर्षों से तुम्हें जानता हूं तुम मुझे यह सब क्यों बता रहे हो? मेरी बात को अनसुना करते हुए झब्बू ने बात आगे बढ़ाई बोला – भाई साहब आप वरिष्ठ पत्रकार हैं, साहित्यकार हैं, अनेक संस्थाओं से जुड़े हैं, बड़े – बड़े नेताओं से आपकी जान – पहचान है। मैंने कहा बस भाई बस। आखिर तुम्हें मुझसे ऐसा कौन सा काम आ गया है जिससे तुम मेरी इतनी तारीफ कर रहे हो !

 झब्बू लाल का दिया पान मैं अपने मुंह के हवाले करने ही वाला था कि उसकी बात सुनकर मेरा मुंह खुला रह गया। झब्बू ने कहा, भाई साहब मेरी इच्छा है कि जब भी अपने प्रधानमंत्री मोदी जी का जबलपुर आगमन हो तो वे मेरी दुकान पर आकर पान खाएं। इसके लिए मुझे आपकी मदद चाहिए। मेरे खुले मुंह के सामने हाथ में पान देखकर झब्बू बोला भैया क्या हुआ, मुंह खोले हो पान को तो अंदर भेजो। मैंने झटके से पान को मुंह में एक ओर खोंसते हुआ कहा, भाई कैसी असंभव सी बात कह रहे हो ! झब्बू ने तर्क रखा – जब मोदी जी कोलकाता में दुकान से खरीद कर झालमुड़ी खा सकते हैं तो मेरा पान क्यों नहीं खा सकते। मैंने कहा, प्यारे भाई जब उन्होंने झालमुड़ी खाई तब वहां चुनाव थे। यहां क्या है जो मोदी जी आकर तुम्हारा पान खायेंगे ? इससे उनको क्या फायदा ? झब्बू हंस कर बोला – भाई साहब पूरी दुनिया जानती है कि मोदी जी अपने फायदे के लिए कभी कुछ नहीं करते वो सिर्फ देश का फायदा सोचते हैं। मैंने कहा चलो ठीक है – अब यह बताओ कि यदि मोदी जी तुम्हारी दुकान पर आकर पान खा लें तो देश को क्या फायदा होगा ? झब्बू बोला भैया पान के शौकीन बढ़ेंगे तो पान का व्यापार बढ़ेगा, पान विक्रेता सम्पन्न होंगे। पान से जुड़ी सामग्री का उत्पादन बढ़ेगा, इससे जुड़ा रोजगार बढ़ेगा। मैं इस पर कोई टिप्पणी करता इससे पहले ही झब्बू बोला, भाई साहब मेरी समझ से तो यदि मोदी जी ने इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी को मेलोडी चॉकलेट की जगह औषधीय गुणों से भरपूर मुख को शुद्ध और होंठों को लाल करने वाला अपने देश का पान खिलाया होता तो बात ही कुछ और होती। वो गाना है न “खई के पान बनारस वाला खुल जाए बंद अकाल का ताला”। मैं मेलोनी जी की अकल या बुद्धिमानी पर प्रश्न चिन्ह नहीं लगा रहा लेकिन बुद्धि तो जितनी बढ़े उतना ही अच्छा। मैं झब्बू की बात पर हँसा उसने फौरन बात सम्हाली और बोला, भाई साहब मेलोनी को पान खिलाना व्यापारिक दृष्टिकोण से भी अपने देश के लिए अधिक लाभ दायक होता। जरा सोचें कि यदि पूरी दुनिया पान खाने लगे तो पान और उससे संबंधित सामग्री का हमें कितना निर्यात और उत्पादन करना पड़ेगा। मैंने कहा झब्बू वह सब ठीक है लेकिन देखते नहीं कि हमारे देश के ऑफिसों – अस्पतालों सहित कितनी महत्वपूर्ण इमारतों के कोने, सीढ़ियां, सड़कें, बगीचे पान की पीक से गंदे और बदबूदार हो गए हैं। क्या तुम चाहते हो कि सारी दुनिया की हालत ऐसी हो जाए ? मेरी बात सुनकर झब्बू बेशर्मी से हंसते हुए बोला भैया जब पूरी दुनिया ही पान की पीक से भर जाएगी तब हमारे पीकों वाले देश पर कौन उंगली उठाएगा ? झब्बू से बच कर निकलने का एक ही उपाय था उसकी हां में हां मिलना। मैंने कहा प्यारे भाई मैं प्रयास करूंगा कि मोदी जी आपकी दुकान पर पान खाने आयें और अबकी बार इटली जाने के पहले पानों की कुछ पुड़ियां मेलोनी जी के लिए भी ले जाएं। मैं आगे बढ़ने लगा तो झब्बू ने रिश्वत रूपी एक मीठा पान मुझे भेंट करते हुए कहा कि ये मेरी भाभी जी को खिलाइए।

© श्री प्रतुल श्रीवास्तव 

संपर्क – 473, टीचर्स कालोनी, दीक्षितपुरा, जबलपुर – पिन – 482002 मो. 9425153629

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २६८ ☆ # “बेटियां…” # ☆ श्री श्याम खापर्डे ☆

श्री श्याम खापर्डे

(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता बेटियां…”।

☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २६८ ☆

☆ # “बेटियां…” # ☆ श्री श्याम खापर्डे ☆

हमारा एक मित्र सुबह मॉर्निंग वॉक में मिला

मिलते ही  करने लगा

आजकल नहीं मिलने का गिला

यार दिन भर क्या करते हो ?

क्या यहां पर नहीं रहते हो ?

 

मैंने कहा मित्र

मैं अपनी पत्नी के संग बच्चों के पास चला जाता हूं

कुछ दिन वहां रहता हूं

इसलिए रोज नहीं आता हूं

उसने पूछा,

बच्चे कहां पर रहते है?

मैंने कहा,

एक बेटा और तीन बेटियां हैं

सभी विवाहित है

वे देश के तीन कोने में है

और हम यहां इस कोने में है

 

उसने लंबी सांस भरी

और बोला,

एक बात करूं खरी खरी

तुम बहुत भाग्यशाली हो

जो बच्चों के साथ समय बिताते हो

खुशी खुशी रिटायरमेंट के दिन बिताते हो

 भाई,

हमारे साथ तो प्रश्न चिन्ह है

परिस्थितियों बहुत भिन्न है

एक ही बेटा और बेटी है

दोनों अपने परिवार में व्यस्त है

अपने परिवार संग मस्त है

हम जब भी बहु बेटे के पास जाते हैं

कुछ दिन मुश्किल से रह पाते हैं

हमारी पत्नी और बहू में

रोज होती जंग है

पारिवारिक शांति होती भंग है

वैसे ही वृद्धावस्था में बीमारियों की समस्याएं क्या कम है

बेटे का उदास चेहरा देखकर

लगता है कि अपराधी हम है

मन मारकर घर वापस आ जाते हैं

दोबारा नहीं जा पाते है

आप ही बताओ यार

कहां जाए ?

कहां मान सम्मान और प्यार पायें ?

क्या सब कुछ हमारे लिए छलावा है ?

रिश्तो में प्यार बस एक दिखावा है ?

 

मैंने कहा नहीं मित्र

तुम्हें प्यार, सम्मान, अपनापन

इज्जत, प्रतिष्ठा, आदर और मान

एक ही जगह मिल सकता है

तुम्हारे जीवन में खुशियों का फूल खिल सकता है

तुम्हें खुशी प्रसन्नता मन से सत्कार

दिल से तुम्हें प्रेम का व्यवहार

तुम्हें मनपसंद व्यंजन

मनपसंद सुकून भरी रातें

मन में ताजगी भर दें

ऐसी ममतामयी बातें

एक ही जगह मिल सकती है

जो तुम्हें अपना समझती है

वह है तुम्हारी बेटी

उसका परिवार

जो करती है तुमसे मन से प्यार

बाकी सब रिश्ते पानी के बुलबुले है

जो स्वार्थ में अपने तुमको जीवन भर छले है

 

आजकल बेटिंया

जीते जी  बेटे का फर्ज निभा रही है

और

मरने के बाद भी अंतिम संस्कार का भार

खुद के कंधे पर उठा रही है

 

मित्र वह लोग धन्य है

जिनकी बेटियां है

वह बुढ़ापे का सहारा ही नहीं

घी, शक्कर में लिपटी

रोटियां है

यह आज की

कटु सच्चाई है

जो स्वार्थी संसार ने

हमें दिखाई है/

© श्याम खापर्डे 

फ्लेट न – 402, मैत्री अपार्टमेंट, फेज – बी, रिसाली, दुर्ग ( छत्तीसगढ़) मो  9425592588

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  ≈

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हिन्दी साहित्य – आलेख ☆ अभिव्यक्ति # -१११ – पांडव और पांच गाँव … ☆ श्री राजेन्द्र तिवारी ☆

श्री राजेन्द्र तिवारी

(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी जबलपुर से श्री राजेंद्र तिवारी जी का स्वागत। इंडियन एयरफोर्स में अपनी सेवाएं देने के पश्चात मध्य प्रदेश पुलिस में विभिन्न स्थानों पर थाना प्रभारी के पद पर रहते हुए समाज कल्याण तथा देशभक्ति जनसेवा के कार्य को चरितार्थ किया। कादम्बरी साहित्य सम्मान सहित कई विशेष सम्मान एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित, आकाशवाणी और दूरदर्शन द्वारा वार्ताएं प्रसारित। हॉकी में स्पेन के विरुद्ध भारत का प्रतिनिधित्व तथा कई सम्मानित टूर्नामेंट में भाग लिया। सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय रहा। हम आपकी रचनाएँ समय समय पर अपने पाठकों के साथ साझा करते रहेंगे। आज प्रस्तुत है आपका एक भावप्रवण कविता पांडव और पांच गाँव…।)

☆ अभिव्यक्ति # १११ ☆

☆  आलेख – पांडव और पांच गाँव☆ श्री राजेन्द्र तिवारी ☆

युद्ध का शंखनाद हो चुका था, दोनों पक्ष, युद्ध की तैयारियां कर रहे थे, तभी भगवान कृष्ण ने, पांडवों से कहा, कि मैं एक बार शांति के लिए, अंतिम प्रयास करना चाहता हूं, ताकि युद्ध ना हो, और उनकी सहमति से वे कौरव राजसभा में पहुंचे. वहां पर सम्राट धृतराष्ट्र द्रोणाचार्य, भीष्म पितामह, सभी लोग उपस्थित थे. भगवान कृष्ण ने सभा में महाराज धृतराष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा, कि पांडवों ने 12 वर्ष का वनवास काट लिया है, और एक वर्ष का अज्ञातवास भी व्यतीत कर लिया है, अब उन्हें उनका राज्य लौटा दिया जाए, युवराज दुर्योधन ने तत्काल खड़े होकर कहा, मैं पांडवों को राज्य नहीं दूंगा, भगवान कृष्ण ने कहा, अगर आधा राज्य ना सही, तो उन्हें केवल पांच गांव ही दे दिए जाएं, वह उन पांच ग्रामों में ही अपना गुजारा कर लेंगे, भगवान कृष्ण ने जो पांच गांव मांगे थे वह पांच गांव हैं,

1, गजप्रस्थ – गाजी खान ने उसका नाम बदलकर गाजियाबाद रख दिया था.

2, तिलप्रस्थ – जिसका नाम मुगलों ने फरीदाबाद रख दिया था.

3, इंद्रप्रस्थ – जिसका नाम दिल्ली किया गया.

4, सोनप्रस्थ – जिसका नाम सोनीपत हो गया था.

4, पानप्रस्थ – जिसे बाद में बदलकर पानीपत कर दिया गया था.

परंतु दुर्योधन ने कहा, मैं सुई की नोक के बराबर भी भूमि पांडवों को नहीं दूंगा, अहंकार बहुत कष्टदायक होता है, सब कुछ नष्ट कर देता है, और यहीं से महाभारत युद्ध की नींव रखी गई, और युद्ध में दुर्योधन दुशासन, सभी कौरव, मारे गए, भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य इन सभी का देहावसान हुआ.

 युद्ध विनाशकारी होता है, दोनों पक्षों की हानि होती है.

 शांति बनाए रखनी चाहिए.

© श्री राजेन्द्र तिवारी  

संपर्क – 70, रामेश्वरम कॉलोनी, विजय नगर, जबलपुर

मो  9425391435

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/ ≈

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ज्योतिष साहित्य ☆ साप्ताहिक राशिफल (15 जून से 21 जून 2026) ☆ ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय ☆

ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय

विज्ञान की अन्य विधाओं में भारतीय ज्योतिष शास्त्र का अपना विशेष स्थान है। हम अक्सर शुभ कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त, शुभ विवाह के लिए सर्वोत्तम कुंडली मिलान आदि करते हैं। साथ ही हम इसकी स्वीकार्यता सुहृदय पाठकों के विवेक पर छोड़ते हैं। हमें प्रसन्नता है कि ज्योतिषाचार्य पं अनिल पाण्डेय जी ने ई-अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों के विशेष अनुरोध पर साप्ताहिक राशिफल प्रत्येक शनिवार को साझा करना स्वीकार किया है। इसके लिए हम सभी आपके हृदयतल से आभारी हैं। साथ ही हम अपने पाठकों से भी जानना चाहेंगे कि इस स्तम्भ के बारे में उनकी क्या राय है ? 

☆ ज्योतिष साहित्य ☆ साप्ताहिक राशिफल (15 जून से 21 जून 2026) ☆ ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय ☆

 जय श्री राम। वर्तमान में गुरु कर्क राशि में विचरण कर रहे हैं। अर्थात उच्च के हैं। उच्च का गुरु कई लोगों को बहुत अच्छा फल देगा और कुछ राशियों के लिए यह भी अच्छा नहीं रहेगा। परंतु अगर हम श्री हनुमान जी की आराधना करें तो हमारे सभी प्रकार के कष्ट दूर होंगे तथा कोई भी ग्रह हमें दुख या तकलीफ नहीं दे सकता है। आज की हनुमान चालीसा की चौपाई है :-

संकट तें हनुमान छुड़ावै |

मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ||

इस चौपाई के संपुट पाठ करने से जातक सभी प्रकार के संकटों से मुक्त रहता है।

नाशे रोग हरे सब पीरा” नाम की पुस्तक में श्रीहनुमान चालीसा की चौपाइयों से संबंधित सभी उपायों का विस्तृत विवरण दिया हुआ है। इस पुस्तक को आप हमारे यहां से प्राप्त कर सकते हैं।

आइये अब मैं पंडित अनिल पाण्डेय आपको इस सप्ताह अर्थात 15 जून से 21 जून 2026 तक के सप्ताह के, ग्रहों के विचरण की जानकारी दे रहा हूं।

इस सप्ताह बुध मिथुन राशि में, गुरु और शुक्र कर्क राशि में शनि मीन राशि में और राहु कुंभ राशि में गोचर करेंगे। सूर्य प्रारंभ में वृष राशि में रहेगा तथा 15 जून के 8:01 रात से मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। इसी प्रकार मंगल प्रारंभ में मेष राशि में रहेगा तथा 20 तारीख के 10:48 रात से वृष राशि में प्रवेश कर जाएंगे।

आईये अब राशिवार राशिफल की चर्चा करते हैं।

मेष राशि

इस सप्ताह आपके प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। भाई बहनों के साथ संबंध ठीक रहेंगे। आपके पराक्रम में वृद्धि होगी। अच्छे कामों में धन का व्यय होना स्वाभाविक है। भाग्य से आपको मदद मिल सकती है। आपके जीवनसाथी को रक्त संबंधी कोई बीमारी जैसे ब्लड प्रेशर डायबिटीज आदि हो सकती है। इस सप्ताह आपको अपने संतान से मदद मिल सकती है। कचहरी के कार्यों में आपको सावधान रहना चाहिए। इस सप्ताह आपके लिए 17, 18 और 19 तारीख कार्यों को करने के लिए अनुकूल है। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक-ठाक हैं। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन चावल का दान दें एवं शुक्रवार को मंदिर में जाकर सफेद वस्त्रो का दान करें। सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है।

वृष राशि

इस सप्ताह आपके पास धन आने का अच्छा योग है। व्यापार में वृद्धि होगी। कचहरी के कार्यों में सफलता का योग है। आपके पराक्रम में भी वृद्धि होगी। प्रतिष्ठा पहले जैसी ही रहेगी। भाग्य से इस सप्ताह आपको कम मदद मिलेगी। आपको अपने कर्मों पर विश्वास करना पड़ेगा। आपका और आपके जीवनसाथी का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। शत्रुओं को पराजित करने में आपको इस सप्ताह थोड़ी ज्यादा मेहनत लगेगी। मगर आपके प्रयासों के बाद शत्रु समाप्त हो सकते हैं। इस सप्ताह आपके लिए 19 तारीख की दोपहर के बाद से लेकर 20 और 21 तारीख किसी भी कार्य में सफलता प्रदान करने वाले हैं। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक-ठाक हैं। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन शिव पंचाक्षर मंत्र का जाप करें। सप्ताह का शुभ दिन शनिवार है।

मिथुन राशि

इस सप्ताह आपका आत्मविश्वास अत्यंत उच्च कोटि का रहेगा। आपका व्यापार उत्तम चलेगा। धन आने की अच्छी संभावना है। भाई बहनों के साथ संबंध ठीक रहेंगे। भाग्य से इस सप्ताह आपको मदद नहीं मिलेगी। कर्मचारी एवं अधिकारियों के लिए यह सप्ताह सामान्य है। उनको अपने नीचे कार्य करने वाले लोगों से थोड़ा सावधान रहना चाहिए। इस सप्ताह आपके लिए 15, 16 और 17 तारीख उपयोगी है। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक-ठाक है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन रुद्राष्टक का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।

कर्क राशि

इस सप्ताह आपकी कुंडली के गोचर में बहुत सुंदर गज केसरी योग बन रहा है। जिसके कारण आपको कई कार्यो में सफलता प्राप्त होगी। कचहरी के कार्यों में भी आपको धन खर्च करने के बाद सफलता मिल सकती है। अधिकारी एवं कर्मचारियों के लिए यह सप्ताह अच्छा रहेगा। उनको अपने कार्यालय में प्रतिष्ठा प्राप्त होगी। भाग्य के स्थान पर आपको इस सप्ताह अपने परिश्रम पर विश्वास करना चाहिए इस सप्ताह आपको अपने संतान से अच्छा सहयोग प्राप्त हो सकता है इस सप्ताह आपके लिए 17, 18 और 19 तारीख विभिन्न प्रकार से लाभदायक है। 15, 16 और 17 तारीख की दोपहर तक का समय आपको सतर्क रहकर कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें तथा शनिवार को दक्षिण मुखी हनुमान जी के मंदिर में जाकर कम से कम तीन बार हनुमान चालीसा का वाचन करें। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है।

सिंह राशि

इस वर्ष आपके घर में कोई शुभ कार्य होगा जिसमें कि आपका काफी धन व्यय होगा। इस सप्ताह धन आने का भी अच्छा योगहै। व्यापारियों का व्यापार अच्छा चलेगा। व्यापार में धन लाभ भी है। भाग्य से भी आपको इस सप्ताह मदद मिलेगी। इस सप्ताह आपको शेयर आदि में धन लगाना चाहिए। दुर्घटनाओं से इस सप्ताह आपको सावधान रहना चाहिए। आपको अपने संतान से इस सप्ताह अच्छा सहयोग प्राप्त होगा। आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। आपके पेट में पीड़ा हो सकती है। इस सप्ताह आपके लिए 20 और 21 तारीख विभिन्न प्रकार के मामले में फल दायक हैं। 17, 18 और 19 तारीख को आपको सजग रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।

कन्या राशि

इस सप्ताह आपके पास धन आने का उत्तम योग है। अधिकारी एवं कर्मचारियों का समय अपने कार्यालय में बहुत अच्छा रहेगा। उनको कार्यालय में प्रतिष्ठा प्राप्त होगी। अगर प्रमोशन का समय है तो प्रमोशन भी प्राप्त हो सकता है। व्यापार अच्छा चलेगा। प्रतिष्ठा प्राप्त होगी। आपको अपने संतान से सामान्य सहयोग प्राप्त होगा। भाई बहनों के साथ संबंध थोड़े खट्टे और मीठे रहेंगे। आपका और आपके जीवनसाथी का स्वास्थ्य पहले जैसा ही रहेगा। इस सप्ताह आपके लिए 15, 16 और 17 तारीख विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए ठीक है। 20 और 21 तारीख को आपको सजग रहकर अपने कार्यों को निपटाना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन शिव पंचाक्षर स्त्रोत का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।

तुला राशि

इस सप्ताह आपके राज्य भाव में गजकेसरी योग बन रहा है। इस योग के कारण आपको अपने कार्यालय में अच्छी प्रतिष्ठा प्राप्त हो सकती है। भाग्य से आपको इस सप्ताह लाभ होगा। व्यापार में भी आपको लाभ होगा। आपके संतान को इस सप्ताह थोड़ा कष्ट हो सकता है। उसका सहयोग पर्याप्त मात्रा में आपको प्राप्त नहीं हो पाएगा। आपके जीवनसाथी का स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। धन आने का योग है। इस सप्ताह आपके लिए 17, 18 और 19 तारीख लाभदायक हैं। सप्ताह के बाकी दिन सामान्य है अर्थात ना बहुत ज्यादा अच्छे हैं और ना बहुत ज्यादा बुरे। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गाय को हरा चारा खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है।

वृश्चिक राशि

इस सप्ताह भाग्य आपका साथ देगा। इस सप्ताह आपको अपने दुश्मनों को पराजित करने पर पूरा ध्यान देना चाहिए। आपके थोड़े से प्रयास से ही आपकी दुश्मन परास्त हो सकते हैं। इस सप्ताह आपका और आपके जीवनसाथी का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। आपको अपने संतान से मामूली मदद मिल सकती है। कचहरी के कार्यों में सावधान रहें। जरा सी असावधानी से भी कार्य खराब हो सकता है। इस सप्ताह आपके लिए 19, 20 और 21 तारीख फलदायक है। 15, 16 और 17 तारीख को कार्यों को करने के पहले आपको पूरी सावधानी बरतना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन भगवान शिव का दूध और जल से अभिषेक करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।

धनु राशि

यह सप्ताह आपके जीवनसाथी के लिए उत्तम है। उनकी मानसिक दशा अत्यंत अच्छी रहेगी। उनके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। आपका व्यापार बहुत अच्छा चलेगा। धन आने का सामान्य योग है। कचहरी के कार्यों में सावधानी बरते। आपको अपने संतान से सहायता मिल सकती है। छात्रों की पढ़ाई ठीक चलेगी। भाई बहनों के साथ संबंध खराब हो सकते हैं। इस सप्ताह आपके लिए 15, 16 और 17 तारीख की दोपहर तक का समय कार्यों को करने के लिए उपयुक्त है। 17 तारीख की दोपहर के बाद से लेकर 18 और 19 तारीख को आपको सचेत रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन कुत्ते को तंदूर की रोटी खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन सोमवार है।

मकर राशि

इस सप्ताह आपके सप्तम भाव में गजकेसरी योग बन रहा है जिसके कारण आपको प्रेम संबंधों में लाभ होगा। आपकी पारिवारिक स्थिति भी अच्छी रहेगी। जीवनसाथी से आपके संबंध बहुत अच्छे रहेंगे। व्यापार आपका ठीक चलेगा। अगर आप अविवाहित हैं तो विवाह के नए-नए प्रस्ताव आ सकते हैं। नए-नए प्रेम संबंध बन सकते हैं। पुराने प्रेम संबंध प्रगाढ़ हो सकते हैं। भाई बहनों के साथ संबंध सामान्य रहेंगे। आपके दुश्मन इस सप्ताह शांत रहेंगे और अगर आप ज्यादा प्रयास करेंगे तो वह समाप्त भी हो सकते हैं। आपको अपने क्षेत्र में इस सप्ताह प्रतिष्ठा मिल सकती है। इस सप्ताह आपके लिए 17 तारीख की दोपहर के बाद से लेकर 18 और 19 तारीख की दोपहर तक का समय कार्यों को करने के लिए उचित है। सप्ताह के बाकी दिनों में आपको सावधान रहकर अपने कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन कल उड़द की दाल का दान करें और शनिवार को शनि मंदिर में जाकर शनि देव का पूजन करें। सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है।

कुंभ राशि

इस सप्ताह आपका अपने भाई बहनों के साथ अच्छा संबंध रहेगा। यह सप्ताह आपके संतान के लिए भी उत्तम है। आपके व्यापार में भी वृद्धि होगी। धन आने का योग है। गलत और सही दोनों रास्तों से धन आएगा। इस सप्ताह आपको अपने शत्रुओं से थोड़ा सावधान रहना चाहिए। विशेष रूप से स्त्री शत्रुओं से। भाग्य से इस सप्ताह आपको विशेष लाभ नहीं मिल पाएगा। इस सप्ताह आपके लिए 19 तारीख की दोपहर के बाद से लेकर 20 और 21 तारीख लाभप्रद हैं। 17 तारीख की दोपहर से लेकर 18 और 19 तारीख की दोपहर तक का समय आपके लिए सचेत रहने का है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन काले कुत्ते को तंदूर की रोटी खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन शनिवार है।

मीन राशि

इस सप्ताह आपके पास धन आएगा। आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। आपका व्यापार ठीक रहेगा। आपके संतान को भी लाभ होगा। संतान से आपको अच्छा सहयोग प्राप्त हो सकता है। छात्रों की पढ़ाई उत्तम चलेगी और उनको विभिन्न प्रकार की परीक्षाओं में सफलता भी प्राप्त होगी। भाग्य साथ देगा। आपके कई कार्य भाग्य के सहारे हो सकते हैं। आपका स्वास्थ्य ठीक रहेगा मगर गरदन या कमर में दर्द की शिकायत हो सकती है। इस सप्ताह आपके लिए 15 16 और 17 तारीख प्रभावशाली है। 19, 20 और 21 तारीख को आपको सतर्क रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गायत्री मंत्र का जाप करें। सप्ताह का शुभ दिन मंगलवार है।

ध्यान दें कि यह सामान्य भविष्यवाणी है। अगर आप व्यक्तिगत और सटीक भविष्वाणी जानना चाहते हैं तो आपको मुझसे दूरभाष पर या व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाना चाहिए। मां शारदा से प्रार्थना है या आप सदैव स्वस्थ सुखी और संपन्न रहें। जय मां शारदा।

 राशि चिन्ह साभार – List Of Zodiac Signs In Marathi | बारा राशी नावे व चिन्हे (lovequotesking.com)

निवेदक:-

ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय

(प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ और वास्तु शास्त्री)

सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता, मध्यप्रदेश विद्युत् मंडल 

संपर्क – साकेत धाम कॉलोनी, मकरोनिया, सागर- 470004 मध्यप्रदेश 

मो – 8959594400

ईमेल – 

यूट्यूब चैनल >> आसरा ज्योतिष 

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – कथा कहानी ☆ लघुकथा – “राजनीति के कान” ☆ श्री कमलेश भारतीय ☆

श्री कमलेश भारतीय 

(जन्म – 17 जनवरी, 1952 ( होशियारपुर, पंजाब)  शिक्षा-  एम ए हिंदी , बी एड , प्रभाकर (स्वर्ण पदक)। प्रकाशन – अब तक ग्यारह पुस्तकें प्रकाशित । कथा संग्रह – 6 और लघुकथा संग्रह- 4 । यादों की धरोहर हिंदी के विशिष्ट रचनाकारों के इंटरव्यूज का संकलन। कथा संग्रह -एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मिला पुरस्कार । हरियाणा साहित्य अकादमी से श्रेष्ठ पत्रकारिता पुरस्कार। पंजाब भाषा विभाग से  कथा संग्रह-महक से ऊपर को वर्ष की सर्वोत्तम कथा कृति का पुरस्कार । हरियाणा ग्रंथ अकादमी के तीन वर्ष तक उपाध्यक्ष । दैनिक ट्रिब्यून से प्रिंसिपल रिपोर्टर के रूप में सेवानिवृत। सम्प्रति- स्वतंत्र लेखन व पत्रकारिता)

☆ लघुकथा – “राजनीति के कान” ☆ श्री कमलेश भारतीय ☆

– मंत्री जी, बड़ा कहर ढाया है ,,,आपने।

– किस मामले में भाई?

– अपने इलाके के एक मास्टर की ट्रांस्फर करके।

– अरे , वह मास्टर? वह तो विरोधी पार्टी के लिए भागदौड़,,,

– क्या कहते हैं हुजूर?

– उस पर यही इल्जाम है।

– ज़रा चल कर कार तक पहुंचने का कष्ट करेंगे?

– क्यों?

– अपनी आंखों से उस मास्टर को देख लीजिए। जो चल कर आप तक तो पहुंच नहीं पाया। बदकिस्मती से उसकी दोनों टांगें बेकार हैं। और भागदौड़ करना उसके बस की बात कहां? जो अपने लिए भागदौड़ नहीं कर सकता, वह किसी के विरोध में क्या भागदौड़ करेगा?

– अच्छा भाई। तुम तो जानते हो कि राजनीति के कान बहुत कच्चे होते हैं और आंखें तो होती ही नहीं। खैर। आपने कहा है तो मैं इस गलती को दुरुस्त करवा दूंगा।

खिसियाए हुए मंत्री जी ने कहा जरूर लेकिन आंखों में कहीं पछतावा नहीं था।

© श्री कमलेश भारतीय

पूर्व उपाध्यक्ष हरियाणा ग्रंथ अकादमी

संपर्क :   1034-बी, अर्बन एस्टेट-।।, हिसार-125005 (हरियाणा) मो. 94160-47075

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिंदी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ श्रेयस साहित्य # ५५ – लघुकथा – संशय ☆ श्री राजेश कुमार सिंह ‘श्रेयस’ ☆

श्री राजेश कुमार सिंह ‘श्रेयस’

☆ साप्ताहिक स्तम्भ – श्रेयस साहित्य # ५५ ☆

☆ लघुकथा ☆ ~ संशय ~ ☆ श्री राजेश कुमार सिंह ‘श्रेयस’ ☆ 

महेंद्र को उम्मीद थी कि, वे एक दिन उसके घर जरूर आयेंगें । वह पलक पावड़े बिछाए उनका बराबर इंतजार करता रहता था । अपने मन में वह तमाम ख्वाहिशों को बुनता और सोचता कि अगर वे उनके घर आये तो वह अपनी टूटी चारपाई पर एक फटा ही सही लेकिन सुन्दर साफ बढ़िया सा चादर बिछायेगा। छोटी सी कटोरी में गइया के थोड़े से दूध में जमी मीठी दही खिलायेगा।

कई बार उसे ऐसा लगता था कि वे आज उसके घर की तरफ आ रहे हैं, बस चंद पलों में आ ही जायेगे, ये सब सोच कर उसका मन बाँसो उछलने लगता था ।

वह स्वयं तो रोज उनके घर जाता, उनको नमस्ते कर हालचाल भी पूछता, उनके हर दुख सुख में अपने सामर्थ्य के हिसाब से खड़ा रहताl

पिछले दिनों जब उनके घर में उनका लड़का करोना से बीमार था, तब उनके अपने लोग दूर से झाँक कर चले गए थे, लेकिन महेन्द्र इन बातों से बेफिक्र न सिर्फ उनके घर गया था, बल्कि उनका हाल चाल पूछते हुए बोला था कि बाबूजी, भईया ठीक हो जायेगे, मैंने भईया के लिए हनुमान जी से मन्नत मांगी है ।

भला हो कोरोना का, शायद वह भी उसके प्रेम और समर्पण को समझ गया था, यही कारण था कि चौदह दिन बीतने के बाद उसका नन्हका भी पहले की तरह स्वस्थ होकर किलकारी भर रहा था।

लेकिन महेन्द्र को एक बात समझ में आ रही थी कि वे उसके घर तो नही आते है लेकिन उनके मन में मेरे बाबू के प्रति ममता और प्यार तो जरूर है।

आखिर वे मेरे घर क्यों नही आते है, इस बात का उसे उत्तर नहीं मिल रहा था ।

एक जब उसने थोड़ा दिमाग लगाया, तो उसे हल्का हल्का समझ में आया कि इसमे तो पद और कद का मामला है, जिसके बढ़ने और घटने का संकट या संशय है । बस..बस.. बस यही बात है कि वह नही आते है ।

चलो उनके इस संशय – संकोच पर भी आंच न आये । वे भले ही न आएं, लेकिन उनकी यशकीर्ति और ऊंचाइया छुए, अंततः वह ऐसा सोच कर खुश हो गया थाl

♥♥♥♥

© श्री राजेश कुमार सिंह “श्रेयस”

लखनऊ, उप्र, (भारत )

दिनांक 22-02-2025

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ यात्रा संस्मरण – सगरमाथा से समुन्दर – पग-पग नर्मदा यात्रा – भाग – ३६ ☆ श्री सुरेश पटवा ☆

श्री सुरेश पटवा

(श्री सुरेश पटवा जी  भारतीय स्टेट बैंक से  सहायक महाप्रबंधक पद से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और स्वतंत्र लेखन में व्यस्त हैं। आपकी प्रिय विधा साहित्य, दर्शन, इतिहास, पर्यटन आदि हैं। आपकी पुस्तकों  स्त्री-पुरुष “गुलामी की कहानी, पंचमढ़ी की कहानी, नर्मदा : सौंदर्य, समृद्धि और वैराग्य की  (नर्मदा घाटी का इतिहास) एवं  तलवार की धार को सारे विश्व में पाठकों से अपार स्नेह व  प्रतिसाद मिला है। अब आप प्रत्येक शनिवार आत्मसात कर सकते हैं यात्रा संस्मरण – सगरमाथा से समुन्दर)

? यात्रा संस्मरण – सगरमाथा से समुन्दर – पग-पग नर्मदा यात्रा – भाग- ३६ ☆ श्री सुरेश पटवा ?

7.पग-पग नर्मदा यात्रा

बिजना घाट से भड़पुरा: 16 अक्टूबर 2018

सुबह जल्दी ही अगली यात्रा पर निकल लिए। पहले नदी के कछार में से ही चलते रहे। मुरकटिया घाट से नर्मदा का पहले बाई फिर दाई ओर मुडना देखा, उन दीर्घ चट्टानों को देखा जिन्हे नर्मदा मानो अपने साथ बहा कर लाई हो और फिर किनारे लगा दिया।हमें यहाँ नर्मदा का एक स्वरूप और दिखा बीच नदी पर स्थित गुफाओं का निर्माण मानो नर्मदा ने चट्टानो पर अपनी लहरिया छैनी हथौडी चलाकर गुफायें बना डाली हैं। आगे चले दुर्गम तो नहीं पर कठिन मार्ग कहीं नर्मदा के तीरे-तीरे तो कहीं बीहड डांगर पार करते हम बढते रहे।

अचानक रास्ते में एक नाला आ गया। किसानों से पूछा तो उन्होंने ऊपर से नाला पार करने को बताया। हम सीधी चढ़ाई चढ़ने लगे। रास्ता बिलकुल भी नहीं था खेतों में कँटीली झड़ियाँ थीं। एक कोने से हरी घास में से रास्ता टटोला तो मिल गया। नाला पार करके डाँगर के उतार-चढ़ाव से लोग भारी थकने लगे। नाले की ठंडाई में थोड़े समय आराम किया। आगे जाकर एक महाराज मिल गए।

उनसे चार पुरुषार्थ की चर्चा चल पड़ी। हिंदू धर्म में चार पुरुषार्थ की बड़ी महिमा गाई जाती है, धर्म अर्थ काम मोक्ष। कोई भी मनुष्य जब कोई काम करता है तो इनमे से किसी एक या एकाधिक पुरुषार्थ की प्रेरणा से कर्म करता है। एक साधु से जब हमने इस बारे में बात की तो उन्होंने कहा कि वे तो सब छोड़ चुके हैं। हरि ओम्।

हमने पूछा कि आदमी प्रकृतिजन्य चीज़ों जैसे भोजन करना, साँस लेना और निस्तार करना छोड़ सकता है क्या?

वे बोले प्रकृतिजन्य चीज़ें कभी छूटती हैं क्या? ये तो ज़िंदगी के साथ ही छूटेंगीं, बच्चा।

हमने कहा कि चार पुरुषार्थ में अर्थ, धर्म और मोक्ष मानव निर्मित अवधारणा या सिद्धांत हैं जबकि काम प्रकृतिजन्य है, उसकी माया जीव-जंतु पेड़-पौधों सब में दिखती है। उसे अनंग याने  बिना अंग का भी कहा गया है। वह पकड़ में ही नहीं आता तो कैसे छूट सकता है। वे बग़लें झाँकने लगे, कुछ सोचते रहे। फिर बोले सब भगवान की माया है। माया ही तो नहीं छूटती, बड़ी हठीली होती है।

हम अर्थ पर आ गए। पूछा अर्थ छूटता है क्या? वे सचेत हो चुके थे, वे मौन सोचते रहे। फिर पूछा हमारा अर्थ से क्या आशय है।

हमने कहा धन जिससे हम ख़रीदारी करते हैं। धन कमाया जाय या दान में मिले उसकी प्रकृति खरदीने की होती है। जहाँ ख़रीद-बेंच आई तो व्यापार शुरू और व्यापार आया तो लालच तो आना ही है। लालच आया तो चैन गया। धन सारा सुख और आराम दिला सकता है। जैसे आपके आश्रम को चलायमान रखने के लिए धन की ज़रूरत होती है।

वे बोले बिना अर्थ के तो कुछ सम्भव ही नहीं है। काम और अर्थ का निपटारा करके हम धर्म और मोक्ष पर आए कि धर्म और मोक्ष कहीं परिभाषित नहीं हैं। धर्म वह है जिसे जीव धारण करता है अतः सबके धर्म अलग-अलग हुए फिर वे अलग धर्म सामूहिक रूप से सब लोगों पर एक से कैसे लागू हो सकते हैं, वे चुप रहे।

मोक्ष गूँगे का गुड बताया जाता है जिसे जीते जी मिला वह बता नहीं सकता कि मोक्ष की क्या प्रकृति है। जैसे महावीर या बुद्ध ने अपने मोक्ष को कभी नहीं बताया। मोक्ष कैसे मिलेगा, यह बताया है। उनके शिष्यों ने बताया कि उन्हें मोक्ष प्राप्त हो गया। जिसे मरने पर मोक्ष मिला वह मोक्ष की प्रकृति बताने हेतु मरने के बाद वापस आ नहीं सकता।

हम अपरिभाषित मूल्यों के दिखावे में जीने वाले समाज हैं। कहते कुछ हैं, मानते कुछ हैं, करते कुछ हैं। इसी को आडंबर या पाखण्ड कहते हैं। पश्चिमी सभ्यता के लोग काम और अर्थ को खुलकर जीते हैं। धर्म और मोक्ष से उन्हें कुछ मतलब नहीं है। इसलिए उन्हें कुछ छुपाना नहीं पड़ता है। हमारा समाज भी अब काम और अर्थ को जी भरकर जी रहा है। उपभोग से अर्थ व्यवस्था का विकास होता है, रोज़गार पैदा होते हैं।

साधु जी मुस्कराए और गले लगाकर पीछा छुड़ाया। चिलम को ब्रह्मान्ध्र तक खींच काम की प्राकृतिक महिमा और मानव जनित धर्म, अर्थ और मोक्ष की अंतरधारा में विलीन हो गए। हम आगे की यात्रा पर निकल गए।

फिर नशा धर्म का या नशे का धर्म निभाते साधु मिले। आँखों के लाल डोरे उनके अफ़ीमची और गाँजे की चिलम खींचने की कहानी कह रहे थे। उन्होंने तुलसी जी की चौपाई सुनाई।

जड़-चेतन गुण-दोष मय विश्व कीन्ह करतार

संत हंस गुण पय लहहिं छोड़ वारि विकार।

साधुओं से रुद्र शिव शंकर चर्चा और तत्व ज्ञान की मीमांसा पश्चात औघड़ बाबा के साथ गाँजा चिलम सुट्टा खींचा और आशीर्वाद का आदान प्रदान हुआ। शाम को पाँच बजे भड़पुरा पहुँच गए।

क्रमशः…

© श्री सुरेश पटवा 

भोपाल, मध्य प्रदेश

संस्थापक सम्पादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ सविता साहित्य # ६ – !!पिता!! ☆ सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु” ☆

सुश्री सविता खण्डेलवाल ‘भानु’

(लेखन-प्रकाशन – गत 2022 से छंद लेखन, एकल प्रकाशन– कलम के नवांकुर, अनुग्रह नवप्रस्तारित छंद पर लेखन (मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड), साझा संकलन – तकरीबन 10, द्वादश ज्योतिर्लिंग (लंदन बुक आफ रिकार्ड), अनेकता में एकता (एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड), छंदावली – (मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड), महाकाल साहित्य सम्मान से सम्मानित। आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता !!पिता!!)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ सविता साहित्य # ६ ☆

☆ !!पिता!! ☆ सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु” ☆

लेखनी बोलती अपना मन खोलती, क्या लिखूंँ पिता पर यही सोचती ।।

*

जिनकी क्षमताएंँ ऊंँची हो आकाश से,  मन में सपने सजाते तुम्हारे लिए ।

देखना चाहते खुद से उत्तम तुम्हें , करते हैं सब समर्पित तुम्हारे लिए ।‌‌।

शब्द भी श्रेष्ठ से सदा खोजती,  क्या लिखूंँ पिता पर यही सोचती ।

लेखनी बोलती अपना मन खोलती, क्या लिखूंँ पिता पर यही सोचती ।।

*

मन में गहराई रखकर वे पाताल सी,  दर्द दुनियाँ के तुमसे छुपाते सदा ।

असीमित प्रेम करते हैं संतान से, रौब बातों में अपनी दिखाते सदा ।।

रौब से झांँकता उनका डर टोहती, क्या लिखूंँ पिता पर यही सोचती ।।

लेखनी बोलती अपना मन खोलती, क्या लिखूंँ पिता पर यही सोचती ।।

*

उनका साया हिमालय सा दे हौसला,  वो कहें धैर्य खोना न चलते रहो ।

हर कदम पर खड़ा हूंँ मैं परछाई सा, पीछे देखो नहीं आगे बढ़ते रहो ।।

पिता तुल्य पाया न रिश्ता कोई, जग के रिश्तों को जब-जब भी मैं तोलती ।

लेखनी बोलती अपना मन खोलती,  क्या लिखूंँ पिता पर यही सोचती ।।

लेखनी बोलती अपना मन खोलती, क्या लिखूंँ पिता पर यही सोचती ।।

© सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु”

झालरापाटन राजस्थान

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ कविता # ३४ – कविता – सलामी… ☆ प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर ☆

डॉ.राजेश ठाकुर

( प्रो डॉ राजेश ठाकुर जी का  मंतव्य उनके ही शब्दों में –पाखण्ड, अंध विश्वास, कुरीति, विद्रूपता, विसंगति, विडंबना, अराजकता, भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जन-समुदाय को जागृत करना ही मेरी लेखनी का मूल प्रयोजन है…l” अब आप प्रत्येक शनिवार डॉ राजेश ठाकुर जी की रचनाएँ आत्मसात कर सकते हैं. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण रचना “सलामी“.)  

? साप्ताहिक स्तम्भ ☆ कविता # ३३ ?

? कविता – सलामी… ☆ प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर  ? ?

?

=1=

चापलूसों द्वारा ये गुलामी देखिये

डूबते सूरज को उफ़ सलामी देखिये

=2=

जनता हलाकान है कोहराम हर तरफ़

चुनी हुई सरकार की नाकामी देखिये

=3=

अच्छे दिनों की बात उनके भाषणों में है

परिणाम इसका आप दूरगामी देखिए

=4=

कल के फटीचर जो आज कुर्सी पा गये

अब हुए करोड़ों के आसामी देखिये

=5=

हो गये हरामी सभी नामी गिरामी

आगामी साजिशों पे उनकी हामी देखिए

=6=

त्राहिमाम पानी पे मचा है देश में

पी रहा शरबत कोई बादामी देखिये

=7=

‘राजेश’ नुक्ताचीनी बेवज़ह की छोड़िये

खूबियाँ औरों में, ख़ुद में ख़ामी देखिए

© प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर

शासकीय कॉलेज़ केवलारी

संपर्क — ग्राम -धतूरा, पोस्ट – जामगाँव, तहसील -नैनपुर, जिला -मण्डला (म.प्र.) मोबा. 9424316071

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ “श्री हंस” साहित्य # २०७ ☆ मुक्तक – ।। चार दिन की जिंदगानी बनाएं बेमिसाल कहानी ।। ☆ श्री एस के कपूर “श्री हंस” ☆

श्री एस के कपूर “श्री हंस”

 

☆ “श्री हंस” साहित्य # २०७ ☆

☆ मुक्तक ।। चार दिन की जिंदगानी बनाएं बेमिसाल कहानी ।। ☆ श्री एस के कपूर “श्री हंस” ☆

=1=

इस दुनिया के रैन -बसेरे में चार दिन रहना है।

जीत लो बस दिल सबका  ही यही कहना है।।

तेरे कर्म तेरे मीठे बोल बस यही साथ जाएंगे।

मिले सबका संग-साथ यही जीवन का गहना है।।

=2=

बहुत कम समय मिलता बस साथ बिताने को।

मत गवां देना   इसे बस  तुम रूठने मनाने को।।

शिकवा शिकायत में ही यह वक्त न निकल जाए।

बस तैयार रहना हमेशा  हर रिश्ता निभाने  को।।

=3=

नजर के फेर में तुम नजारों को मत गवां देना।

खो कर  यकीन तुम सहारों को मत गवां देना।।

उठो ऊपर कितना भी जुड़े रहना जमीन के साथ।

भगा कर तेज नाव  किनारों को मत गवां देना।।

=4=

जीवन प्रतिध्वनि सा लौटकरआती आवाज वही है।

अच्छा बुरा झूठ सच करना हमेशा अच्छी बात नहीं है।।

जैसा दोगे वैसा पाओगे   यही नियम है सृष्टि का।

सुखी सफल जीवन का   बस एक  जवाब यही है।।

© एस के कपूर “श्री हंस”

बरेली ईमेल – Skkapoor5067@ gmail.com, मोब  – 9897071046, 8218685464

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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