(Captain Pravin Raghuvanshi—an ex Naval Officer, possesses a multifaceted personality. He served as a Senior Advisor in prestigious Supercomputer organisation C-DAC, Pune. He was involved in various Artificial Intelligence and High-Performance Computing projects of national and international repute. He has got a long experience in the field of ‘Natural Language Processing’, especially, in the domain of Machine Translation. He has taken the mantle of translating the timeless beauties of Indian literature upon himself so that it reaches across the globe. He has also undertaken translation work for Shri Narendra Modi, the Hon’ble Prime Minister of India, which was highly appreciated by him. He is also a member of ‘Bombay Film Writer Association’.
We present Capt. Pravin Raghuvanshi ji’s amazing poem “~ Hard Work…~”. We extend our heartiest thanks to the learned author Captain Pravin Raghuvanshi Ji (who is very well conversant with Hindi, Sanskrit, English and Urdu languages) and his artwork.)
हिंदी-प्राध्यापक(सेवानिवृत्त) महारानी लक्ष्मीबाई शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भोपाल (म.प्र).
नई दुनिया, दैनिक भास्कर, वीणा, हंस, धर्मयुग, कादम्बिनी आदि पत्र-पत्रिकाओं में कविता और लघुकथाएँ प्रकाशित। पुस्तकः कविता के ज़रिए, मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के सौजन्य से प्रकाशित।
आज प्रस्तुत है आपका एक भावप्रवण कविता – रौशनी के बल पर…!
☆ ॥ कविता॥ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस विशेष – रौशनी के बल पर…!☆ डॉ. रामेश्वरम तिवारी ☆
(आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी संस्कारधानी जबलपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। आपको आपकी बुआ श्री महीयसी महादेवी वर्मा जी से साहित्यिक विधा विरासत में प्राप्त हुई है । आपके द्वारा रचित साहित्य में प्रमुख हैं पुस्तकें- कलम के देव, लोकतंत्र का मकबरा, मीत मेरे, भूकंप के साथ जीना सीखें, समय्जयी साहित्यकार भगवत प्रसाद मिश्रा ‘नियाज़’, काल है संक्रांति का, सड़क पर आदि। संपादन -८ पुस्तकें ६ पत्रिकाएँ अनेक संकलन। आप प्रत्येक सप्ताह रविवार को “साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह” के अंतर्गत आपकी रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपकी – ग़ज़लिका।)
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “अक्षर जगत…“।)
अभी अभी # ९३७ ⇒ आलेख – अक्षर जगत श्री प्रदीप शर्मा
“अ” से ही शुरू होती अक्षरों की दुनिया ! अम्बर, अवनि, अग्नि, अखिलेश, अमर, अटल, असीम, अनंत, अक्षत, अनिमेष।
शब्द पहले अक्षर था, शब्द ब्रह्म, और जिसका क्षरण न हो वह कहलाया अक्षर।
ब्रह्म की तरह शब्द सब तरफ व्याप्त है, क्योंकि शब्द अपने आप में अक्षरों का समूह है, अक्षर भी सभी ओर व्याप्त है, लेकिन ब्रह्म की तरह दृष्टिगोचर भी नहीं होता।।
ब्रह्म ने अपने आप को व्यक्त किया ! पहले श्रुति, स्मृति और तत्पश्चात पुराण। वेदों की रचना ईश्वर ने की होगी, लेकिन हमारे अक्षर का तो कोई अतीत ही नहीं। एक ॐ से सृष्टि का निर्माण हो जाता है। शब्दातीत अक्षर तो फिर सनातन ही हुआ।
वाणी में वाक्, शब्द अवाक !
अक्षर में बीज, बीजाक्षर मंत्र।
बगुलामुखी, त्रिपुरा-सुंदरी, सौन्दर्य-लहरी, कुंडलिनी माँ जगदम्बे। कहीं भैरव तंत्र तो कहीं जन जन का गायत्री-मंत्र। और सभी मंत्रों में श्रेष्ठ सद्गुरु का गुरु-मंत्र।।
कितनी संस्कृति, कितनी भाषाएँ, कितने ग्रंथ ! अक्षर ही अक्षर। सौरमंडल में व्याप्त शब्द और गुरुवाणी का सबद। हमने-आपने बोला, वह शब्द, और एक नन्हे अबोध बालक में, परोक्ष रूप से विराजमान परम पिता, लीला रूप धारण कर, कोरे कागद पर छोटी छोटी उँगलियों में कलम पकड़े, मुश्किल से अक्षर- ज्ञान प्राप्त करता हुआ, जगत को यह संदेश देता हुआ, कि ज्ञान की परिणति अज्ञान ही है।
आज वही अक्षर कागज़ कलम का मोहताज नहीं ! एक नया संसार आज हमारी मुट्ठी में है। यह गूगल की अक्षरों की दुनिया है। शब्दों का भंडार है उसके पास ! पर प्रज्ञा नहीं, वाक् नहीं ! यहाँ श्रुति, स्मृति नहीं, सिर्फ मेमोरी है। कोई किसी का गुरु नहीं, कोई किसी का शिष्य नहीं ! कोई रिसर्च नहीं, केवल गूगल सर्च और गूगल गुरु को दक्षिणा, डेटा रिचार्ज।।
विज्ञान की अन्य विधाओं में भारतीय ज्योतिष शास्त्र का अपना विशेष स्थान है। हम अक्सर शुभ कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त, शुभ विवाह के लिए सर्वोत्तम कुंडली मिलान आदि करते हैं। साथ ही हम इसकी स्वीकार्यता सुहृदय पाठकों के विवेक पर छोड़ते हैं। हमें प्रसन्नता है कि ज्योतिषाचार्य पं अनिल पाण्डेय जी ने ई-अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों के विशेष अनुरोध पर साप्ताहिक राशिफल प्रत्येक शनिवार को साझा करना स्वीकार किया है। इसके लिए हम सभी आपके हृदयतल से आभारी हैं। साथ ही हम अपने पाठकों से भी जानना चाहेंगे कि इस स्तम्भ के बारे में उनकी क्या राय है ?
☆ ज्योतिष साहित्य ☆ साप्ताहिक राशिफल (9 मार्च से 15 मार्च 2026) ☆ ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय ☆
जय श्री राम। आजकल मैं पंडित अनिल पाण्डेय हर सप्ताह आपके पास साप्ताहिक राशिफल के अलावा श्री हनुमान चालीसा के दो चौपाइयों को लेकर आता हूं जो आपकी विभिन्न परेशानियों में मंत्र काम करेगीं।
आज की पहली चौपाई है:-
कंचन बरन बिराज सुबेसा, कानन कुंडल कुंचित केसा॥
हनुमान चालीसा की इह चौपाई के संपुट पाठ करने से आर्थिक समृद्धि, अच्छा खानपान, अच्छा संस्कार और अच्छा पहनावा प्राप्त होगा।
इस सप्ताह राहु, मंगल और बक्री बुध कुंभ में, तथा शुक्र और शनि मीन राशि में गोचर करेंगे। सूर्य प्रारंभ में कुंभ राशि में रहेगा तथा 14 तारीख के 3:30 रात से मीन राशि में प्रवेश करेगा। प्रारंभ वक्री गुरु मिथुन राशि में रहेगा तथा 11 मार्च के 4:36 शाम से मिथुन राशि में ही मार्गी हो जायेगा। आईये अब हम राशिवार राशिफल की चर्चा करते हैं।
मेष राशि
इस सप्ताह आपके पास धन आने का योग है। भाई बहनों के साथ संबंध नरम-गरम रहेंगे। धन आने की मात्रा भी कम रहेगी। आपका आपके माता-पिता जी का तथा आपके जीवनसाथी का स्वास्थ्य पहले जैसा ही रहेगा। छात्रों की पढ़ाई अच्छी चलेगी। संतान का आपके सहयोग प्राप्त होगा। व्यापारियों के लिए यह सप्ताह ठीक है। इस सप्ताह आपको कचहरी के कार्य में सफलता प्राप्त हो सकती है परंतु उसके लिए आपको बहुत सतर्क होना पड़ेगा। शत्रुओं से आपको सावधान रहना चाहिए। इस सप्ताह आपके लिए 14 और 15 मार्च कार्यों को करने के लिए शुभ है। 9, 10 और 11 तारीख को अगर कोई दुर्घटना होती है तो उसे आप साफ-साफ बच जाएंगे। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।
वृष राशि
इस सप्ताह आपके पास धन आने का अच्छा योग है। अगर आप नौकरीपेशा है तो इस सप्ताह आपको थोड़ा सावधान रहना चाहिए और अपनी वाणी पर कंट्रोल करना चाहिए। अगर आप व्यापारी हैं तो आपके लिए यह सप्ताह ठीक है। जनप्रतिनिधियों के लिए भी यह सप्ताह अच्छा है। आप की प्रतिष्ठा बढ़ सकती है। संतान से आपको इस सप्ताह सहयोग प्राप्त नहीं हो पाएगा। इस सप्ताह आपके लिए 14 और 15 तारीख कार्यों को करने हेतु सफलता दायक हैं। सप्ताह के बाकी दिनों में आपको सतर्क रहना चाहिए। अगर आप अविवाहित हैं तो इस सप्ताह 9, 10 और 11 को आपके पास विवाह के उत्तम प्रस्ताव प्राप्त हो सकते हैं। इस सप्ताह के सभी दिनों में आपको सतर्क रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन तांबे के पात्र में जल अच्छत और लाल पुष्प लेकर भगवान सूर्य को जल अर्पण करें। सप्ताह का शुभ दिन शनिवार है।
मिथुन राशि
अगर आप नौकरी करते हैं तो यह सप्ताह आपके लिए काफी अच्छा हो सकता है। व्यापारियों के लिए भी यह सप्ताह अच्छा है। जनप्रतिनिधियों के लिए यह सप्ताह थोड़ा कम ठीक रहेगा। भाग्य से आपको मदद कम मिलेगी। आपको अपने परिश्रम पर ज्यादा यकीन करना पड़ेगा। इस सप्ताह आपके लिए 12 और 13 तारीख सफलता प्राप्त करने के लिए उचित है। सप्ताह के बाकी दिनों में आपको सावधान रहकर कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन काले कुत्ते को रोटी खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है।
कर्क राशि
इस सप्ताह भाग्य आपका पूर्ण रूप से साथ देगा। आपके जो भी कार्य भाग्य की वजह से रुके हुए हैं उनको करने का प्रयास करें। इस सप्ताह आपके खर्चे में वृद्धि हो सकती है। मकान खरीद सकते हैं या बच्चे की शादी वगैरह में पैसा खर्च कर सकते हैं। भाई बहनों के साथ आपके संबंध ठीक नहीं रह पाएंगे। मामूली पैसे आने का योग है। दुर्घटनाओं से इस सप्ताह आपको सतर्क रहना चाहिए। इस सप्ताह आपके लिए 14 और 15 तारीख सफलता हेतु उपयोगी है। 12 और 13 तारीख को आपको सजग रहकर कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन लाल मसूर की दाल का दान करें और मंगलवार को हनुमान जी के मंदिर में जाकर हनुमान जी की पूजा करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।
सिंह राशि
इस सप्ताह आपके प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। जन प्रतिनिधियों के लिए यह सप्ताह काफी अच्छा रहेगा। व्यापारियों के लिए भी यह सप्ताह उत्तम है। नौकरीपेशा लोगों के लिए यह सप्ताह सावधान रहने का है। भाग्य से इस सप्ताह आपको कोई विशेष लाभ नहीं हो पाएगा। आप अपने परिश्रम पर विश्वासकरें। कम धन आने की उम्मीद है। इस सप्ताह आपके लिए 9, 10 और 11 तारीख ठीक है। 14 और 15 तारीख को आपको सावधान रहकर कार्यों को अंजाम देना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गाय को हरा चारा खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है।
कन्या राशि
अविवाहित जातकों के लिए यह सप्ताह उत्तम है। प्रेम के नए-नए संबंध भी बढ़ सकते हैं। विवाह के नए-नए संबंध आएंगे। आपका प्रेम संबंध में भी वृद्धि होगी। शत्रुओं को आप इस सप्ताह आसानी से पराजित कर सकते हैं। इस सप्ताह आपको प्रतिष्ठा प्राप्त होगी। जनप्रतिनिधियों के लिए यह सप्ताह उत्तम रहेगा। कर्मचारियों के लिए यह सप्ताह ठीक है। व्यापारियों के लिए यह सप्ताह सावधान रहने का है। इस सप्ताह आपके लिए 12 और 13 तारीख कार्यों को करने के लिए लाभदायक है। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक-ठाक है। 9, 10 और 11 तारीख को आपको अपने भाई बहनों और अपने पराक्रम के प्रति सावधान रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन राम रक्षा स्त्रोत का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है।
तुला राशि
इस सप्ताह आपका आपके जीवनसाथी का और माता-पिता जी का स्वास्थ्य पहले जैसा ही ठीक रहेगा। शत्रु शांत रहेंगे। प्रयास करने पर समाप्त भी हो सकते हैं। छात्रों की पढ़ाई में बाधा पड़ सकती है। आपको अपने संतान का बहुत कम सहयोग प्राप्त होगा। 10 और 11 तारीख को आपको धन के प्रति सतर्क रहना चाहिए। 14 और 15 तारीख विभिन्न प्रकार के कार्यों हेतु अनुकूल हैं। 14 और 15 तारीख को आपके अधिकांश कार्य सफल हो सकते हैं। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक हैं। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन शनिवार है।
वृश्चिक राशि
इस सप्ताह आपके संतान को लाभ होगा। संतान का आपको अच्छा सहयोग प्राप्त होगा। इस सप्ताह अगर आप कोई परीक्षा देंगे तो उसमें सफलता प्राप्त करेंगे। दुर्घटनाओं से आपको इस सप्ताह सतर्क रहना चाहिए। जनप्रतिनिधियों के लिए सप्ताह अनुकूल नहीं है। व्यापारियों के लिए सप्ताह ठीक है। इस सप्ताह आपके लिए 9, 10 और 11 तारीख कार्यों के संपन्न करने के लिए शुभ है। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक हैं। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गायत्री मंत्र का जाप करें। सप्ताह का शुभ दिन मंगलवार है।
धनु राशि
इस सप्ताह आपको भाग्य से मदद मिलेगी। आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। जनप्रतिनिधियों के लिए यह सप्ताह उत्तम रहेगा। व्यापारियों के लिए सप्ताह ठीक है। कर्मचारियों को इस सप्ताह सावधान रहना चाहिए। उन्हें अपनी जिव्हा को कंट्रोल में करना चाहिए। शत्रुओं को आप इस सप्ताह पराजित कर सकते हैं। इस सप्ताह आपके लिए 12 और 13 तारीख कार्यों को करने के लिए परिणाम दायक हैं। 9, 10 और 11 तारीख को अगर आप प्रयास करेंगे तो कचहरी के कार्यों में आपको सफलता प्राप्त हो सकती है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन रुद्राष्टक का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है।
मकर राशि
इस सप्ताह आपका आपके जीवनसाथी का और आपके माताजी पिताजी का स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। भाइयों से आपके संबंध अच्छे रहेंगे। आपके पराक्रम में वृद्धि होगी। पेट संबंधी रोगों के प्रति सतर्क रहें। छात्रों को सावधान रहना चाहिए। व्यापारियों और नौकरी पेशा लोगों के लिए सप्ताह ठीक है। इस सप्ताह आपके लिए 14 और 15 मार्च लाभदायक है। 12 और 13 मार्च को आपको किसी भी कार्य को बड़ी सतर्कता पूर्वक करना चाहिए। अगर आप सतर्कता से कार्य नहीं करेंगे तो कार्य संपन्न नहीं हो पाएंगे। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन शिव पंचाक्षर स्त्रोत का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन शनिवार है।
कुंभ राशि
इस सप्ताह आपके पास धन आने का अच्छा योग है। व्यापारियों के लिए यह सप्ताह अच्छा रहेगा। नौकरी करने वालों के लिए भी यह सप्ताह ठीक है। इस सप्ताह आप अपने स्वास्थ्य के प्रति थोड़ा सतर्क रहें। आपके जीवनसाथी का तथा माता और पिताजी का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। जनप्रतिनिधियों को अपने प्रतिष्ठा के प्रति इस सप्ताह सावधान रहना चाहिए। दुर्घटनाओं के लिए भी आप को सतर्क रहना चाहिए। इस सप्ताह आपके लिए 9 10 और 11 तारीख विभिन्न प्रकार के राजकीय कार्यों के लिए उपयुक्त हैं। 14 और 15 तारीख को आपको सचेत रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन भगवान शिव का दूध और जल से अभिषेक करें। सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है।
मीन राशि
अगर आप अविवाहित हैं तो यह सप्ताह आपके लिए ठीक है। आपको विवाह के नए-नए प्रस्ताव प्राप्त होंगे। आपका, तथा आपके माता और पिताजी का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। जीवनसाथी के स्वास्थ्य में थोड़ी समस्या आ सकती है। कचहरी के कार्यों में अगर आप सावधानी से कार्य करेंगे तो सफलता मिल सकती है। भाई बहनों के प्रति आपका संबंध पहले जैसा ही रहेगा। उसमें कोई गिरावट या उछाल नहीं आएगा। इस सप्ताह आपके लिए 12 और 13 तारीख कार्यों को करने के प्रति उपयुक्त हैं। 9, 10 और 11 तारीख को आपको भाग्य के भरोसे कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन शिव पंचाक्षर मंत्र का जाप करें। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है।
आईये अब हम श्रीहनुमान चालीसा के आज की दूसरी और तीसरी चौपाई के बारे में चर्चा करते हैं।
आज की दूसरी और तीसरी चौपाई है:-
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे, काँधे मूँज जनेउ साजे।
शंकर सुवन केसरी नंदन, तेज प्रताप महा जग बंदन।
हनुमान चालीसा की ये चौपाइयां विजय दिलाती है। इनके संपुट पाठ से व्यक्ति के ओज और कांति में वृद्धि होती है।
“ध्यान दें कि यह सामान्य भविष्यवाणी है। अगर आप व्यक्तिगत और सटीक भविष्वाणी जानना चाहते हैं तो आपको मुझसे दूरभाष पर या व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाना चाहिए। मां शारदा से प्रार्थना है या आप सदैव स्वस्थ सुखी और संपन्न रहें। जय मां शारदा।
आपल्या ई-अभिव्यक्ती साहित्य मंचातर्फे आपण गेली चार वर्षे अतिशय देखणा असा दिवाळी विशेषांक प्रकाशित करतो आहोत. हे देखणेपण अंकाच्या मुखपृष्ठापासूनच वाचकांचे लक्ष वेधून घेते. या अंकांचे फार सुंदर आणि देखणे मुखपृष्ठ आपल्याला तयार करून देणाऱ्या चित्रकार सुश्री डॉ. भारती माटेयांचे आपल्या सर्वांतर्फे खास अभिनंदन करण्यासाठी आजचे हे खास संपादकीय…
नुकताच डॉ. भारतीताई यांना “The Art Avenue International Brooklyn Galleria Excellence Award 2026 in the category of Paintings! “ हा आंतरराष्ट्रीय पुरस्कार देऊन गौरवण्यात आलेलं आहे.
या संस्थेविषयी आणि पुरस्काराविषयी अगदी थोडक्यात सांगायचे तर – –
Art Avenue is the leading International Art Competition & Exhibition in INDIA I UK & INTERNATIONAL ARTIST’S International Brooklyn Award by Art Avenue is an independent Art Center of Excellence that offers a platform for everyone to create, collaborate and reflect upon social issues & others through the arts.
या निमित्ताने डॉ. भारती माटे यांच्या इथपर्यंतच्या यशस्वी वाटचालीबद्दल थोडेसे जाणून घेऊ या.
डॉ.भारती माटे – –स्टेट बँकेत ३३ वर्ष नोकरी आणि बँकेत असतानाच छंद म्हणून जोपासायला सुरुवात केलेल्या चित्रांचं पुढे व्यवसायात रूपांतर करण्यात त्यांनी सुयश मिळवलेले आहे.. आत्तापर्यंत तीन आर्ट रिसर्च प्रोजेक्ट केले – – –
पहिला प्रोजेक्ट :
मध्यप्रदेशातील भीमबेटक्याच्या गुफांमधील, सात कालखंडातील काढलेल्या चित्रशैली आणि चित्रांचा प्रवास. साधारणपणे ४००००-१००००० वर्षांपूर्वीची शिलाचित्रे, आणि त्याचे विशेष म्हणजे रंगीत चित्रे, (pigmented Rock art) ह्यावर संशोधनात्मक लेखन व चित्र निर्मिती.
दुसरा प्रोजेक्ट :
सिंधू संस्कृतीतील कलाविष्कार – – त्यांनी साधारणपणे दहा ते बारा वर्षे ह्या प्रोजेक्टवर काम केलं. त्याच्यातून आठ ते दहा एकल चित्र प्रदर्शने, 15 ते 20 ग्रुप शो, आणि हा प्रोजेक्ट लोकाभिमुख करण्याच्या दृष्टिकोनातून भेटपत्रे, चित्रे, चित्र प्रदर्शने, डायरी, कॅलेंडर अशा माध्यमातून लोकांपर्यंत पोहोचवण्याचा प्रयत्न केला.
प्रोजेक्ट तिसरा :
ड्रायफ्रेस्कोज् ऑफ रंगावली ऑन कॅनव्हास.. .. .. त्यांनी जमिनीवर असणारी रांगोळी ड्रायफ्रेस्को पद्धतीने कॅनव्हासवर आणली. जमिनीवर असलेल्या रांगोळीला उभं करण्यात त्यांना यश प्राप्त करता आलं आहे . आपल्या दिवाळी अंकांची मुखपृष्ठे त्यांनी याच पद्धतीने चितारलेली आहेत. विशेष म्हणजे याच कलाविष्काराबद्दल Irvine, USA या अमेरिकन विद्यापीठाने त्यांना पी.एच.डी. प्रदान केलेली आहे.
.. .. .. आजपर्यंत त्यांना दोन इंटरनॅशनल, तीन नॅशनल आणि पाच स्टेट अवॉर्ड्स मिळाली आहेत. त्याच्यात भर म्हणून आता नुकताच आर्ट अवेन्यू ब्रुकलीन इंटरनॅशनल कॉम्पिटिशन फॉर पेंटिंग अँड फोटोग्राफीमध्ये 2026 चे ‘एक्सलन्स अवॉर्ड 2026′ त्यांना मिळालेले आहे.
नुकत्याच मिळालेल्या या सुप्रतिष्ठित पुरस्काराबद्दलत्या सांगतात..
.. ..” या सदर प्रदर्शनात मी व माझे सहचित्रकार सुनील बलकवडे आम्ही दोघांनी वैयक्तिक सहभाग घेतला होता. पंतप्रधान श्री नरेंद्र मोदीजींच्या 75 व्या वाढदिवसानिमित्त केलेल्या ‘वसुधैव कुटुंबकम्‘, या विषयावरील सात चित्रांच्या मालिकेला हे बक्षीस मिळालं.
.. .. .. भारतामध्ये साधारणपणे साडेसहाशे लोककला आहेत..रांगोळी ही त्यापैकीच एक.त्यातल्या अनेक कला आता संपत चाललेल्या आहेत.अशा वेळेला तिला काय करून जपता येईल अशा प्रयत्नांमधून हीफ्रेस्को चित्रशैलीजन्माला आली, त्याच्यावर आम्ही साधारणपणे दहा ते बारा वर्षे काम केलं आणि आता हे कॅनव्हास आपण जगभर कुठेही पाठवू शकतो इतकी सिद्धता आता प्राप्त झालेली आहे. आपण स्वतःचएक प्रोजेक्ट घेऊन ‘रांगोळी’ ही संपत असणारी कला कशी सांभाळून ठेवू शकू ? या विचारातून या प्रोजेक्टला सुरुवात झाली.
.. .. .. भारतीय चित्रकलेत रांगोळीचा चेहरा हा मुळातच प्रतीकात्मक आहे आणि प्रतिकात्मक रांगोळी मधील रेषा ही त्यांची चैतन्य केंद्रे आहेत.
.. .. .. भारतीय कला विश्वात आपल्याकडे मुळामध्ये वेद आणि उपनिषदिक वाड्गमय हे अपौरुषेय आहे, परम आध्यात्मिक वैभव आहे .. इतके की त्यातील शब्द, श्लोक, सुभाषिते असतील, मंत्र जप असतील, बिजाक्षर असतील किंवा काही चांगली वाक्यं असतील, तर अशा सगळ्या ‘ स्क्रिपचर्स ‘ माध्यमातून ती आपल्यापर्यन्त पोचतात, कारण ही स्क्रिपचर्स म्हणजे थॉट फॉर्मस् आहेत, आणि हे थॉट फॉर्मस् आपल्याला चित्रांमध्ये परिवर्तित करता येतात हे जेव्हा मला कळलं, तेव्हा काम करताना खूप मजा यायला लागली, आणि त्यामुळे या चित्रमालिकेमध्ये सुद्धा आपण वेदांनी उदघोषित केलेल्या वाक्यातून प्रेरणा घेऊन ‘वसुधैव कुटुंबकम्‘, चा विचारप्रत्येक वैयक्तिक चित्रातून मांडण्याचा प्रयत्न आम्ही केलेला आहे . नमुन्यादाखल सदर मालिकेतील एक चित्र सोबत जोडले आहे…ज्याचे शीर्षक आहे..
‘Save Nature, A Sacred Duty’.
(कृपया enlarge करून पहावे).
या पुरस्कारप्राप्त चित्राबद्दल मी इतकेच सांगेन की –
“Our series of seven paintings on Vasudhaiva Kutumbakam—born from the sacred light of Prime Minister Narendra Modiji’s 75th birthday—has touched souls across oceans.
This isn’t mere award—it’s affirmation that art bridges hearts, just as Modiji’s vision, unites Bharat with the world… From Pune’s studios to Brooklyn’s galleries!! “
– भारती माटे.
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इतका व्यापक आणि अत्यंत मोलाचा विचार आपल्या कलेच्या माध्यमातून जगभरात पोहोचवण्याचा भारतीताईंचा हा यशस्वी प्रयत्न खरोखरच अपवादात्मक आणि अत्यंत गौरवास्पद आहे.
– – आपल्या सर्वांतर्फे सुश्री डॉ.भारती माटे यांचे अतिशय मनःपूर्वक अभिनंदन आणि या आगळ्या वेगळ्या वाटेवरचा त्यांचा यापुढील प्रवासही असाच यशस्वीपणे सातत्याने चालू रहावा यासाठी त्यांना असंख्य हार्दिक शुभेच्छा.
संपादक मंडळ
ई अभिव्यक्ती मराठी
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≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ.उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈
या शुभेच्छा देताना ‘यंत्रदास’ आम्हाला सुरक्षिततेच्या काही सूचनाही आवर्जून देतो. सणाच्या रंगांचा बेरंग होऊ नये म्हणून या सूचनांचे पालन करावे आणि सणाचा आनंद लुटावा अशी त्याची आग्रहाची विनंती आहे.
‘श्री सुरक्षितताबोध’ या ग्रंथाच्या ‘बालक्रीडनसुरक्षिततानाम’ अध्याय ५. श्लोक १२ ते १४ मधे यंत्रदास सांगतोय.
*
आहा. बाळके खेळतीं रंग होळी
जळीं लोळतीं (लावुनी भांग गोळी?)
फुगे फोडितीं. फेकितीं रंग नाना
सिनेमानटासारखे छंद नाना ll१२ll
*
किती रंग ते. काय त्यांची झळाळीं!
तेलातले रंग. ख्याती निराळी
निळे. तांबडे. पांढरे वा रुपेरी
जरा लागता… त्याहुनी मिर्चि बsरी! ll१३ll
*
मना! ऐशिं होळी न केव्हाच खेळीं
(रहावे सुखे खाउनी फक्त पोळी!)
असे रंग ते भंगवीतीं शरीरा
तसा लागतो रे करावा खरारा ll१४ll
*
टीप:-
खरारा: घोड्याचे अंग स्वच्छ करण्याच्या क्रियेला ‘खरारा करणे’ म्हणतात. त्यासाठी वापरल्या जाणा-या बोथट दातेरी. काटेरी पत्र्यालाही ‘खरारा’ म्हणतात.
यंत्रदास: ‘यंत्रदास’ या टोपण नावाने १९९३ साली ‘ श्रीसुरक्षिततोध ‘ नावाचा. ‘सुरक्षितता’ (Safety ) या विषयावर मी लिहिलेला ग्रंथ पुण्याच्या ‘टेल्को’ – आताची ‘टाटा मोटर्स’ या कंपनीने प्रकाशित केला होता. ‘ सुरक्षिततेविषयी सामाजिक जाणिवा प्रगल्भ करणारा उत्कृष्ट ग्रंथ’ म्हणून महाराष्ट्र शासनाने विशेष पुरस्कार देऊन या ग्रंथास सन्मानिले आहे.
☆ स्त्री कालची आणि आजची… ☆ कविराज विजय यशवंत सातपुते ☆
रामायण आणि महाभारत ही आपली महाकाव्ये. या दोन पौराणिक कथानकातून स्त्री ची विविध रूपे समोर आली. अहिल्या, द्रौपदी, सीता, तारा, मंदोदरी या
लेखक स्त्रिया महान पतिव्रता म्हणून जनमानसात रूजल्या गेल्या. यांचे केवळ स्मरण केल्याने महापातकांचा नाश होतो असे संस्कार या काळात केले गेले.
संत वाङमय, पंत वाड़मय आणि शाहिरी फड यातून वर्णिलेली स्त्री लोकसाहित्याचा विशेष भाग ठरली. जनमानसात खोलवर रूजलेली ही स्त्री, समस्त नारीशक्ती समाजाशी संवाद साधत गेली. माया, ममता आणि करूणा या भावनांच्या मुशीतून घडलेली ही स्त्री त्याग, समर्पण आणि विश्वास या त्रिसूत्रीतून स्वतःला, कुटुंबाला, समाजाला घडवीत गेली.
पौराणिक काळातील स्त्री पातिव्रत्य, हे अस्त्र समजून स्वसंरक्षण करीत गेली. सत्यवती, माद्री, कुंती गांधारी, सुनिती, सुरूची, आदिती, छाया, अनुसया, लक्ष्मी, सरस्वती, पार्वती, यशोदा, देवकी, रूक्मिणी सुभद्रा या, सर्व स्त्रियांनी उत्पत्ती, स्थितीआणि लय यांचा समतोल राखण्यासाठी वेळीवेळी सत्व परीक्षा दिली. पुरुष प्रधान संस्कृती चा संघर्ष त्या काळापासून आज तागायत ही स्त्री करीत आहे.
कालची स्त्री जेव्हा जेव्हा बंड पुकारून जागृत झाली तेव्हा तेव्हा ती समाजासाठी आदर्श ठरली. पण हे आदर्श पण टिकवायला तिला स्वतःला अतोनात कष्ट सहन करावे लागले. संत मीराबाई, संत जनाबाई, संत सखू, संत कान्होपात्रा, संत मुक्ताबाई यांचा जीवन प्रवास अत्यंत कष्टमय होता. यांच्या शब्द सुमनांची वैजयंती माळा विठ्ठलाच्या गळ्यात पडली पण त्यासाठी समाजकंटकाची वासनांध नजर, कर्मठ रूढी परंपरांची तीक्ष्ण धारधार सुई काळजात आरपार टोचून घ्यावी लागली.
ऐतिहासिक कालखंडात स्त्री ने पौराणिक काळातील शस्त्र विद्येचा अभ्यास करून न्यायासाठी, संघर्षासाठी रणांगणात उतरली. छत्रपती शिवाजी महाराज यांची जन्मदात्री एकमेव ठरली. यानंतर अशी स्त्री जन्मली नाही असे खेदाने म्हणावे लागेल. कारण आजतागायत प्रति शिवाजी जन्माला आलेला नाही. शिवाजी महाराजांनंतर शिवशाहीतील दोन स्त्रीयांनी वर्षानुवर्षे तुरूंग वास भोगला. महाराणी येसूबाई, आणि ताराबाई या दोन स्त्रिया होत. एकीने स्वराज्यासाठी यवनी कैद स्विकारली तर ताराबाई सवती सुभ्यामुळे स्वराज्यातच कैदेत होत्या. महाराणी जोधाबाई, झाशीची राणी, राणी चन्नमा, चांदबिबी, मुमताज, रमाबाई, आनंदी बाई या स्त्रिया शेवटपर्यंत लढा देत गेल्या.
या सर्व इतिहासाचा मागोवा घेत सावित्री, रमाई, अहिल्याबाई, आनंदी जोशी, रमाबाई रानडे या स्त्रिया स्वतः साक्षर झाल्या. मुलगी शिकली प्रगती झाली हे ब्रीदवाक्य इतिहासात कोरले गेले ते यांनी केलेल्या समाज कायामुळे. आज प्रत्येक क्षेत्रात महिला अत्यंत विश्वासाने मोठ मोठ्या पदांवर कार्यरत आहेत. कला, उद्यम आणि संस्कृती या क्षेत्रात महिला आघाडीवर आहेत. पण चार भिंतीच्या आत आजची स्त्री अजूनही असुरक्षित आहे. कौटुंबिक हिंसाचाराला बळी पडणार्या स्त्रिया त्यांच्या वेदना आजही कुठेतरी धुमसत आहेत.
कालची स्त्री आणि आजची स्त्री रूपे आणि स्वरूप बदलले आहे. पण त्याग, समर्पण, अवहेलना स्री ला आजही चुकलेली नाही. आजची स्त्री समाजात अर्थार्जनासाठी बाहेर पडताना आजही सर्व कौटुंबिक जबाबदाऱ्या पार पाडून पुरूषी अहंकाराचा सामना करीत कुटुंबाला सावरीत आहे. सत्ता, पैसा आणि वासना यांचा उपभोग घेण्यासाठी आजही स्त्री वापरली जाते, विकली जाते, रूढी परंपरांच्या नावाखाली नागवली जाते.
विभक्त कुटुंबाची वाढत जाणारी संख्या सासू सून संघर्ष, माहेरचे अती लाड, इगो प्राॅब्लेम, पैशाची गुर्मी यात अजूनही स्त्री प्रमुख पात्र म्हणून खेळवली जाते.
अनाथ आश्रम, वृद्धाश्रम, पाळणाघर या समस्येला सामोरे जाणारी स्त्री समाजाकडून आजही दोषी ठरवली जाते. माता, भगिनी, पत्नी, सखी या रूपात समोर येणारी स्री आजही पुरूषी अत्याचाराला बळी पडत आहेत.
काळ बदललाय, माणूस बदललाय, जमाना बदललाय. . .असः नेहमी ऐकतो आपण. कोणी घडवले हे बदल? माणसानच आपली विचारसरणी बदलली आणि दोष बदलत्या काळाला आणि स्त्री ला पुरूष वर्ग परस्पर देऊन मोकळा झाला. आपण समाजात रहातो. . . समाजाचे देणे लागतो. . . ही संकल्पना प्रत्येकाने सोइस्कर अर्थ लावून बदलून घेतली. स्वतःची जीवनसंहिता ठरवताना प्रत्येकाने माणसापेक्षा पैशाला अधिक महत्त्व दिले अन तिथेच नात्यात परकेपणा आला.
चार पायाच्या प्राण्यांना
हौसेने पाळतात माणसं
दोन पायाच्या आप्तांना
मोलानं सांभाळतात माणसं .
हे आजचं वास्तव आहे. विभक्त कुटुंब पद्धतीतून जन्माला आलेली ही विचार सरणी. आज ”हम दो हमारा एक” चा नारा लावणारे सुशिक्षित पाळीव, मुक्या प्राण्यांवर अतोनात भूतदया दाखवतात. अन जन्मदात्या आईवडिलांना मात्र वृद्धाश्रमाचा रस्ता दाखवतात. मी मी म्हणणारे सुशिक्षित पतीपत्नी दिवसरात्र घराबाहेर रहातात. नवी पिढी सोशल मिडिया नेटवर्किंग मधून स्वतःचे भविष्य साकारताना दिसते. एकविसाव्या शतकातील घर संवाद साधताना कमी पण वाद घालताना जास्त दिसतात. वाद वाढले की माणस माणसांना टाळायला लागतात. अशी नात्यातली अंतरेच नात्यात विसंवाद आणि दरी निर्माण करतात.
नवीन पिढीला आता संस्कारापेक्षा व्यवहार जास्त महत्वाचा वाटतो. पैसा असेल तर माणूस ताठ मानेने जगू शकतो हा अनुभव त्याला आपल्या माणसात दुरावा निर्माण करायला भाग पाडतो. जुन्या पिढीतील नातवंडे सांभाळणारी जुनी पिढी, त्यांचे विचार, नव्या पिढीला नकोसे वाटतात. ”पैसा फेको तमाशा देखो ” हे ब्रीद वाक्य घेऊन नवीन पिढी माणुसकी पेक्षा मतलबी पणाला प्राधान्य देताना दिसते.
वृद्धापकाळी हवा असलेला मायेचा ओलावा, समदुःखी, समवयस्क व्यक्ती कडून मिळाल्यावर एकटा जीव वृद्धाश्रमात आपोआप रुळतो. स्वतःच दुःख विसरायला शिकतो. प्रत्येक व्यक्ती आपला राग आपल्या व्यक्ती वर किंवा पगारी नोकरावर काढू शकते. .वृद्धाश्रमात या दोन्ही गोष्टी शक्य नसल्याने माणूस नव्याने जगायला शिकतो. स्वतःच्या विश्वात रममाण होण्यासाठी स्वतःच्या भावनांना आवर घालतो आणि हा नवा घरोबा स्विकारतो.
नवीन पिढीला घडविण्यात आजची स्त्री कुठेतरी कमी पडत आहे का? याचा विचार करण्याची गरज आता निर्माण झाली आहे.
आपण कुणाचा आदर्श घ्यायचा? कुणाचा आदर्श समोर ठेवायचा? आपली जबाबदारी, आपली कर्तव्ये हे सारे जर आपण आपल्या आर्थिक परिस्थितीशी निगडीत केले तर हा गुंता सोडवायला अतिशय कठीण जाईल.
आपण आणि आपली जबाबदारी यात जोपर्यंत ”आई बाबा ‘, यांचा समावेश होत नाही तोपर्यंत ही पळवाट आडवाटेन या समाजव्यवस्थेला, कुटुंब व्यवस्थाला दुर्बल करीत रहाणार यात शंका नाही.
मी माणसाचा आहे, घरातील बाई माणूस माझ्या कुटुंबाचा घटक आहे त्याच मन जपणे ही माझी जबाबदारी आद्यर्तव्य आहे हे जोपर्यंत पुरुष प्रधान संस्कृती मान्य करीत नाही तोपर्यंत ही पळवाट अशीच निघत रहाणार. आपण घडायचं की आपण बिघडायचं स्री ला आधार द्यायचा की भार व्हायचं हे आता ज्याचं त्यानचं ठरवायचं.
कालची स्त्री आणि आजची स्त्री हा विचार करताना मन मात्र खालील काव्यपंक्तीवर स्थिर होते.
थोर महात्मे होऊन गेले, चरीत्र त्यांचे पहा जरा
आपण त्यांच्या समान व्हावे हाची सापडे बोध खरा
या नररत्नांना जन्मणारी ही माऊली आज समाजात सुरक्षित आहे का? हा प्रश्न ऐरणीवर आला आहे.
या देशाच्या सर्वोच्च पदी राष्ट्रपती पदावर राहण्याचा मान एका स्त्री ला मिळूनही आजची स्त्री उपभोग्य वस्तू समजली जाते हे आपले दुर्दैव आहे. विश्वबंधुतेचा आणि समानतेच्या नारा देऊन आपण ही नारीशक्ती आद्य ईश्वराचे रूप मानून स्त्रीला संघटीत आणि सुरक्षित करण्याची जबाबदारी आपल्यावर आली आहे. तरच आपण अभिमानाने म्हणू शकू.