हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ आलेख # १९५ – देश-परदेश – विश्व जीव जन्तु दिवस :4 अक्टूबर ☆ श्री राकेश कुमार ☆

श्री राकेश कुमार

(श्री राकेश कुमार जी भारतीय स्टेट बैंक से 37 वर्ष सेवा के उपरांत वरिष्ठ अधिकारी के पद पर मुंबई से 2016 में सेवानिवृत। बैंक की सेवा में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान के विभिन्न शहरों और वहाँ  की संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिला। उनके आत्मकथ्य स्वरुप – “संभवतः मेरी रचनाएँ मेरी स्मृतियों और अनुभवों का लेखा जोखा है।” आज प्रस्तुत है आलेख की शृंखला – “देश -परदेश ” की अगली कड़ी।)

☆ आलेख # १९५ ☆ देश-परदेश – विश्व जीव जन्तु दिवस : 4 अक्टूबर ☆ श्री राकेश कुमार ☆

चींटी से लेकर हाथी सब में एक प्राण!

कहें कबीर दया करो सब जीव एक समान!!

कबीर ने भी जीव जंतुओं के प्रति दया भाव की वकालत की है। सभी धर्म जीवों के प्रति और प्रकृति को प्यार करने की बात करते हैं।

कुर्बानी के नाम पर एक दिन में करोड़ों बकरों की जान लेना हो या बलि के नाम पर अन्य जीवों की जान लेना, कैसे उचित ठहराया जा सकता है। ये प्रथाएं बहुत प्राचीन हैं।

विदेशों में बड़े बड़े फार्म पशु पालन व्यवसायिक दृष्टि से किया जाता है, ताकि वहां के ठंडे मौसम में उनका उपयोग खाने में बहुतायत से हो सके। विदेशों में हिरण, कछुआ, बतख आदि को सड़क पार करते समय दोनों तरफ का यातायात स्वतः ही रुका रहता है। हमारे देश में तो लोग रात्रि के समय फुटपाथों पर सोये हुए लोगों को कार तले रौंद कर भी सज़ा के पात्र नहीं बनते हैं।

हमारे यहां भी मुर्गी पालन एक बहुत बड़ा उद्योग का रूप ले चुका है। अप्राकृतिक तौर से मुर्गी उत्पाद कर लोगों की जिह्वा को स्वाद दिया जा सके। हमारे देश के पशुधन विशेष रूप से बैल, ऊंट, घोड़ा आदि तो अब नगण्य हो चुका है। पुराने समय में कहावत प्रचलित थी कि – “पराये घर से ऊंट ढूंढना भी कठिन कार्य है” अब इसका नया रूप भी ऐसा ही कुछ कहता है, “राजस्थान में अब ऊंट ढूंढना कठिन कार्य है”

विज्ञान को इसके लिए पूरी तरह दोषी कहना सही नहीं होगा। हमारी पीढ़ी ने अपनी   जिम्मेवारी का निर्वहन नहीं किया। आज की जेन जी घर के बड़ों का सम्मान नहीं करती है, परन्तु कम से कम घरों में कुत्ते, बिल्ली पाल कर उनके संरक्षण में सहायक तो हो रही है।

अब शाम हो चली है, हमें भी अपने डॉगी को घुमाने भी तो ले जाना है।

© श्री राकेश कुमार

संपर्क – B 508 शिवज्ञान एनक्लेव, निर्माण नगर AB ब्लॉक, जयपुर-302 019 (राजस्थान)

मोबाईल 9920832096

≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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मराठी साहित्य – कवितेचा उत्सव ☆ श्री अशोक भांबुरे जी यांची कविता अभिव्यक्ती #३४३ ☆ साक्षर केली… ☆ श्री अशोक श्रीपाद भांबुरे ☆

श्री अशोक श्रीपाद भांबुरे

? अशोक भांबुरे जी यांची कविता अभिव्यक्ती # ३४३ ?

☆ साक्षर केली… ☆ श्री अशोक श्रीपाद भांबुरे ☆

☆

मेघाने या काल पालथी घागर केली

काळी माती त्याची हिरवी चादर केली

*

वाघावाणी वागायाची काल लेक ही

वाघीणीची या लोकांनी मांजर केली

*

घर सावरण्या मीही थोडा दिलाय टेकू

छिलून माझ्या देहाची मी पाचर केली

*

पीठ घ्यायला खिशात नव्हते पैसे माझ्या

पोरांसाठी मग कोंड्याची भाकर केली

*

सावित्रीने काल सोसल्या हाल अपेष्टा

नवी पिढी ही या मातेने साक्षर केली

*

वयोपरत्वे किती बदलला सूर तुझा रे

गाताना तू कटु शब्दांची साखर केली

*

तुझ्याकृपेने मला मिळाले वैभव देवा

एक विनवणी जगतासाठी सादर केली

☆

 © अशोक श्रीपाद भांबुरे

धनकवडी, पुणे ४११ ०४३.

ashokbhambure123@gmail.com

मो. ८१८००४२५०६, ९८२२८८२०२८

≈संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ लेखनी सुमित्र की # ३०३ – ठंडे ये ज्वालामुखी करो…३ ☆ स्व. डॉ. राजकुमार तिवारी “सुमित्र” ☆

स्व. डॉ. राजकुमार तिवारी “सुमित्र”

(संस्कारधानी  जबलपुर के हमारी वरिष्ठतम पीढ़ी के साहित्यकार गुरुवर डॉ. राजकुमार “सुमित्र” जी  को सादर चरण स्पर्श । वे सदैव हमारी उंगलियां थामकर अपने अनुभव की विरासत हमसे समय-समय पर साझा करते रहते थे। इस पीढ़ी ने अपना सारा जीवन साहित्य सेवा में अर्पित कर दिया।  वे निश्चित ही हमारे आदर्श हैं और प्रेरणास्रोत हैं। आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता – ठंडे ये ज्वालामुखी करो…३।)

✍ साप्ताहिक स्तम्भ – लेखनी सुमित्र की # ३०३ ☆

☆ –  ठंडे ये ज्वालामुखी करो…३ ☆ स्व. डॉ. राजकुमार तिवारी “सुमित्र” ✍

आहत लोग

कैसे खुश हो सकते हैं

उड़ाकर शान्ति कपोत को?

काश!

हम दिये की जोत होते

कपोत होते

तब हम अपने होंठ सी लेते

जी लेते।

मगर

हम जोत या कपोत नहीं

आदमी हैं।

और आज

आम आदमी दुखी है

इसलिये वो आदमी नहीं

ज्वालामुखी है।

आदमी पिस रहा है

ऐसा न हो कि

ज्वालामुखी के लावे में

सब कुछ हो जावे गुम

न शेष रहें हम, न तुम।

सुनो,

सुख का सूरज उगाओ

आदमी को सूरजमुखी करो,

समय रहते

ठंडे ये ज्वालामुखी करो।

क्रमशः…

स्व डॉ. राजकुमार “सुमित्र” 

साभार : डॉ भावना शुक्ल 

112 सर्राफा वार्ड, सिटी कोतवाली के पीछे चुन्नीलाल का बाड़ा, जबलपुर, मध्य प्रदेश

≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ अभिनव गीत # ३०० – “खुला रखो दरवाजा सबको…” ☆ श्री राघवेंद्र तिवारी ☆

श्री राघवेंद्र तिवारी

(प्रतिष्ठित कवि, रेखाचित्रकार, लेखक, सम्पादक श्रद्धेय श्री राघवेंद्र तिवारी जी  हिन्दी, दूर शिक्षा, पत्रकारिता व जनसंचार,  मानवाधिकार तथा बौद्धिक सम्पदा अधिकार एवं शोध जैसे विषयों में शिक्षित एवं दीक्षित। 1970 से सतत लेखन। आपके द्वारा सृजित ‘शिक्षा का नया विकल्प : दूर शिक्षा’ (1997), ‘भारत में जनसंचार और सम्प्रेषण के मूल सिद्धांत’ (2009), ‘स्थापित होता है शब्द हर बार’ (कविता संग्रह, 2011), ‘​जहाँ दरक कर गिरा समय भी​’​  2014​)​ कृतियाँ प्रकाशित एवं चर्चित हो चुकी हैं। ​आपके द्वारा स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के लिए ‘कविता की अनुभूतिपरक जटिलता’ शीर्षक से एक श्रव्य कैसेट भी तैयार कराया जा चुका है। आज प्रस्तुत है आपका एक अभिनव गीत “खुला रखो दरवाजा सबको...”।)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ # ३०० ☆।। अभिनव गीत ।। ☆

☆ “खुला रखो दरवाजा सबको...” ☆ श्री राघवेंद्र तिवारी ☆

☆

 दिल से बहुत अमीर रहे थे

मगर गरीब पिता ।

विरलों को हो पाते ऐसे

कभी नसीब पिता ॥

 *

उनकी नजरों में सब शुभ था

कहीं अभाव नहीं ।

उनके घावों का हो पाता

किन्तु भराव नही ।

 *

महगाई भी उनका जीवन

छलनी करती थी ।

अगर सम्हल जाने के होते

कभी करीब पिता ॥

 *

लोगों से उनका जुड़ाव

जैसे कि अलौकिक था।

“खुला रखो दरवाजा सबको”

कहना मौखिक था ।

 *

लोग कहा करते वह कोई

महापुरुष जैसे ।

लोगों को जोड़े रहने की

रहे जरीब पिता  ॥

 *

अपनी तकलीफों को उनने

कष्ट  नहीं माना ।

लोगों का सहयोग सदा

करने का ही ठाना ।

 *

उनके इसी समर्पण की

करते सराहना सब ।

जो न समझते कहते थे

हैं बहुत अजीब पिता ॥

☆

©  श्री राघवेन्द्र तिवारी

04-09-2026

संपर्क​ ​: ई.एम. – 33, इंडस टाउन, राष्ट्रीय राजमार्ग-12, भोपाल- 462047​, ​मोब : 09424482812​

≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ संजय उवाच # ३५५ – श्राद्ध पक्ष के निमित्त ☆ श्री संजय भारद्वाज ☆

श्री संजय भारद्वाज

(“साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच “ के  लेखक  श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है। साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।श्री संजय जी के ही शब्दों में ” ‘संजय उवाच’ विभिन्न विषयों पर चिंतनात्मक (दार्शनिक शब्द बहुत ऊँचा हो जाएगा) टिप्पणियाँ  हैं। ईश्वर की अनुकम्पा से आपको  पाठकों का  आशातीत  प्रतिसाद मिला है।”

हम  प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाते रहेंगे। आज प्रस्तुत है  इस शृंखला की अगली कड़ी। ऐसे ही साप्ताहिक स्तंभों  के माध्यम से  हम आप तक उत्कृष्ट साहित्य पहुंचाने का प्रयास करते रहेंगे।)

☆  संजय उवाच # ३५५ ☆

☆ श्राद्ध पक्ष के निमित्त… ?☆ श्री संजय भारद्वाज ☆

पितरों के लिए श्रद्धा से किए गए मुक्ति कर्म को श्राद्ध कहते हैं। भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या तक श्राद्धपक्ष चलता है। इसका भावपक्ष अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और कर्तव्य का निर्वहन है। व्यवहार पक्ष देखें तो पितरों को  खीर, पूड़ी व मिष्ठान का भोग इसे तृप्तिपर्व का रूप देता है। जगत के रंगमंच के पार्श्व में जा चुकी आत्माओं की तृप्ति के लिए स्थूल के माध्यम से सूक्ष्म को भोज देना लोकातीत एकात्मता है। ऐसी सदाशय व उत्तुंग अलौकिकता भारतीय दर्शन में ही संभव है। यूँ भी सनातन परंपरा में प्रेत से  प्रिय का अतिरेक अभिप्रेरित है। पूर्वजों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने की ऐसी परंपरा वाला श्राद्धपक्ष संभवत: विश्व का एकमात्र अनुष्ठान है।

इस अनुष्ठान के निमित्त प्राय: हम संबंधित तिथि को संबंधित दिवंगत का श्राद्ध कर इति कर लेते हैं। अधिकांशत: सभी अपने घर में पूर्वजों के फोटो लगाते हैं। नियमित रूप से दीया-बाती भी करते हैं।

दैहिक रूप से अपने माता-पिता या पूर्वजों का अंश होने के नाते उनके प्रति श्रद्धावनत होना सहज है। यह भी स्वाभाविक है कि व्यक्ति अपने दिवंगत परिजन के प्रति आदर व्यक्त करते हुए उनके गुणों का स्मरण करे। प्रश्न है कि क्या हम दिवंगत के गुणों में से किसी एक या दो को आत्मसात कर पाते हैं?

बहुधा सुनने को मिलता है कि मेरी माँ परिश्रमी थी पर मैं बहुत आलसी हूँ।…क्या शेष जीवन यही कहकर बीतेगा या दिवंगत के परिश्रम को अपनाकर उन्हें चैतन्य रखने में अपनी भूमिका निभाई जाएगी?… मेरे पिता समय का पालन करते थे, वह पंक्चुअल थे।…इधर सवारी किसी को दिये समय से आधे घंटे बाद घर से निकलती है। विदेह स्वरूप में पिता की स्मृति को जीवंत रखने के लिए क्या किया? कहा गया है,

यद्यष्टाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो: जनः।

स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते।।

अर्थात श्रेष्ठ मनुष्य जो-जो आचरण करता है, दूसरे मनुष्य वैसा ही आचरण करते हैं। वह जो कुछ प्रमाण देता है, दूसरे मनुष्य उसी का अनुसरण करते हैं। भावार्थ है कि अपने पूर्वजों के गुणों को अपनाना, उनके श्रेष्ठ आचरण का अनुसरण करना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

विधि विधान और लोकाचार से पूर्वजों का श्राद्ध करते हुए अपने पूर्वजों के गुणों को आत्मसात करने का संकल्प भी अवश्य लें। पूर्वजों की आत्मा को इससे सच्चा आनंद प्राप्त होगा।

© संजय भारद्वाज 

अध्यक्ष– हिंदी आंदोलन परिवार ☆ सदस्य– हिंदी अध्ययन मंडल, पुणे विश्वविद्यालय, एस.एन.डी.टी. महिला विश्वविद्यालय, न्यू आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस कॉलेज (स्वायत्त) अहमदनगर ☆ संपादक– हम लोग ☆ पूर्व सदस्य– महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ☆ ट्रस्टी- जाणीव, ए होम फॉर सीनियर सिटिजन्स ☆ 

मोबाइल– 9890122603

संजयउवाच@डाटामेल.भारत

writersanjay@gmail.com

☆ आपदां अपहर्तारं ☆

🕉️ श्रीगणेश साधना कल संपन्न हुई। अगली साधना की जानकारी आपको शीघ्र ही दी जावेगी।🕉️

💥 💥

💥 साधक को इस मंत्र की कम से कम एक माला (108 जप) का संकल्प लेना होगा। इस मंत्र के मालाजप के साथ ही कम से कम एक पाठ अथर्वशीर्ष का भी करना है। जिन्हें अथर्वशीर्ष बहुत कठिन लगे, वे इसे सुनें अवश्य।🕉️

💥 हमारा प्रयास है कि महत्वपूर्ण स्तोत्रों का अधिकाधिक प्रसार हो।

≈≈हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – व्यंग्य ☆ शेष कुशल # ६९ ☆ व्यंग्य – “बहाने गढ़ने का ऑस्कर गोज़ टू दी हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी…” ☆ श्री शांतिलाल जैन ☆

श्री शांतिलाल जैन

(आदरणीय अग्रज एवं वरिष्ठ व्यंग्यकार श्री शांतिलाल जैन जी विगत दो  दशक से भी अधिक समय से व्यंग्य विधा के सशक्त हस्ताक्षर हैं। आपकी पुस्तक  ‘न जाना इस देश’ को साहित्य अकादमी के राजेंद्र अनुरागी पुरस्कार से नवाजा गया है। इसके अतिरिक्त आप कई ख्यातिनाम पुरस्कारों से अलंकृत किए गए हैं। इनमें हरिकृष्ण तेलंग स्मृति सम्मान एवं डॉ ज्ञान चतुर्वेदी पुरस्कार प्रमुख हैं। श्री शांतिलाल जैन जी के  स्थायी स्तम्भ – शेष कुशल  में आज प्रस्तुत है उनका एक अप्रतिम और विचारणीय व्यंग्य  “बहाने गढ़ने का ऑस्कर गोज़ टू दी हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी…” ।)

☆ शेष कुशल # ६९ ☆

☆ व्यंग्य – “बहाने गढ़ने का ऑस्कर गोज़ टू दी हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी…” – शांतिलाल जैन ☆

‘जब धन खोता है, तो कुछ नहीं खोता; जब स्वास्थ्य खोता है, तो कुछ खोता है; जब चरित्र…’

इन दिनों चरित्र का तो!!! जाने भी दो यारों……आज हम अपनी बात स्वास्थ्य तक ही सीमित रखते हैं.  बीमार होते हैं आप, भर्ती होते हैं आप, तब तक इंश्योरेंस प्रीमियम का धन तो खो ही चुके होते हैं,  अस्पताल के बिल में भी…. डबल लॉस.  सैंक्शन का मेल! अब आएगा. अब आएगा. आँखें पथरा जाती हैं मेल नहीं आता.  बार बार चेक करते हैं. क्वेरी आती है सेंक्शन नहीं आता. फेसलेस प्रोसेस है श्रीमान्. एजेंट फेस दिखा नहीं रहा, कंपनी का फेस दिख नहीं रहा, शर्म दिखे तो किसकी आँखों में दिखे!!  दादू का ही केस लीजिए.

“कैशलेस हो जाएगा ?” – मैंने काउंटर पर पूछा.

“भर्ती के समय तो नहीं हो पाएगा लेकिन हम सुनिश्चित करेंगे कि डिस्चार्ज होते होते मरीज कैशलेस हो जाए.”

सत्तर की उम्र में हैं दादू. पंद्रह सालों में दस बारह लाख प्रीमियम तो भर ही चुके हैं. बीमार पड़े,  भर्ती हुए तो पता लगा कि जो बीमारी उनको हुई है उसे छोड़कर दुनिया की सारी बीमारियाँ कवर्ड हैं. अमेज़न के जंगलों में नेटिव्स को होनेवाली बीमारियाँ भी कवर्ड हैं, नहीं हैं तो बस वही बीमारी कवर्ड नहीं है जो दादू को हुई है.  बीमारियों के कवरेज का खेल वीडियो गेम के नामुमकिन लेवल्स को पार करने जैसा है. बीमारी कवर में निकल भी आए तो ‘वेटिंग पीरियड’ में निकल आती है. कवर हासिल करने के चक्कर में मरीज़ अनकवर होने लगता है.

दादू एक सभ्य नागरिक है. भारतवर्ष में जीवित रहने के तमाम टैक्स में से एक टैक्स बीमा कंपनियों को भी चुकाता है. सरकार हो या बीमा कंपनी, आप अपने भरे गए टैक्स का हिसाब मांग नहीं पाते. बरस-दर-बरस प्रीमियम डबल होती जाती है, दादू तब भी भरता हैं. बीमा कम्पनियाँ क्लेम रिजेक्ट करके अपना धरम निभाती हैं दादू प्रीमियम भरकर अपना धरम निभाता है. दादू झक्की भी है. ज़िद पाल बैठा है, कम से कम एक बार तो क्लेम ले कर रहेगा. फ़ानी दुनियाँ से फ़ना होने से पहले ‘पैसा वसूल’ की ज़िद में दादू ने निमोनिया जैसी बीमारी लगा ली. ‘प्री-एग्जिस्टिंग डिजीज’ पर क्लेम रिजेक्ट हो गया. बहुत पहले उसे एक बार ज़ोर की छींक आई  थी. बीमा कराते समय उसने बताया नहीं. ‘नॉन-डिस्क्लोजर ऑफ मटेरियल फैक्ट्स’. दादू फिर हार गया.

बहाने गढ़ने के ऑस्कर अवार्ड नहीं मिला करते श्रीमान् वरना क्लेम रिजेक्ट करने में भारत की बीमा कम्पनियों को किसी का बाप भी हरा नहीं सकता. दादू का एक क्लेम तो बस इसीलिए रिजेक्ट हो गया कि उसकी बीमारी उसकी उम्र से जुड़ी थी. जेरियाट्रिक डिसीज. उम्र सापेक्ष. इस उमर में आपको ये बीमारी तो होना ही थी – इसका क्लेम कैसा!!! इन दिनों अस्पताल एआई तकनीक से इलाज़ करते हैं,  कंपनी सुपर एआई से रिजेक्शन का बहाना खोज लाती है. दादू डाल-डाल, बीमा कंपनी पात-पात. क्लेम का ऊँट किसी भी करवट बैठे, बैठता इंश्योरेंस कम्पनी के बाड़े में ही है. अस्पताल से डिस्चार्ज के समय आपको सब मिलता है – खीज़, चिढ़, फ्रस्टेशन, गुस्सा, खुद के कपड़े फाड़ लेने का मानस; नहीं मिलता तो बस बीमे का क्लेम नहीं मिलता.

बहरहाल, फिल्म इतनी निराशावादी भी नहीं है. क्लेम कभी-कभी मिलते भी हैं. मुझे मिला है एक बार. एक माइनर ऑपरेशन कराना पड़ा था. बिल बना एक लाख चौबीस हज़ार पाँच सौ तेइस रुपए का. सत्तर हज़ार डिडक्टिबल के कट गए, पचास हज़ार ‘को-पे’ के. चार हज़ार दौ सौ ‘नॉन-मेडिकल आईटम्स’ के. तीन सौ रुपए क्लेम के मिले.  बीमा लोकपाल में मैंने कम्प्लेंट करके पूछा – ये तेइस रुपए और किस बात के कट गए?  रिप्लाई आया – ‘बीमा कंपनी ने तेईस रुपए लोअर हंड्रेड्स में राउंड-ऑफ करने में काटे हैं. सब नियमानुसार हुआ है.’

खुश हुए अपन. रिप्लाई तो मिला. खाते से निकालकर सौ सौ के तीन नोट धरोहर की तरह संभालकर रखे हैं. जो कभी अपन की बीमार होकर आईसीयू में मरने की नौबत आई तो उत्तराधिकार में देने के लिए धन इतना ही बचेगा. बचाकर तो अपन ने चरित्र भी रखा है, पर उसका तो इस बार!!! जाने भी दो यारों……      

-x-x-x-

(टीप: यह आवश्यक नहीं है कि संपादक मंडल व्यंग्य /आलेख में व्यक्त विचारों/राय से सहमत हो।)

© शांतिलाल जैन 

बी-8/12, महानंदा नगर, उज्जैन (म.प्र.) – 456010

9425019837 (M)

≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २८२ ☆ # “शुभ अशुभ…” # ☆ श्री श्याम खापर्डे ☆

श्री श्याम खापर्डे

(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “शुभ अशुभ…”।) 

☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २८२ ☆

☆ # “शुभ अशुभ…” # ☆ श्री श्याम खापर्डे ☆

☆

शुभ अशुभ के फेर में

फँसा हर इंसान है

दुविधा में उलझे हुए

उसके प्राण है

इस भ्रमजाल से

मुक्ति पाना मुश्किल है

जन्म से आज तक

वह कर रहा इसका गुणगान है

 

सामाजिक मान्यताओं में

वह जकड़ा हुआ है

सदियों की परंपराओं को

वह पकड़ा हुआ है

वह चाह कर भी

इससे छुटकारा नहीं पा सकता

वह चाह कर भी

भ्रमजाल से बाहर नहीं आ सकता

 

उसकी विद्वता

यहां पर निष्क्रिय हो जाती है

उसकी सोच

इस उधेड़बुन में खो जाती है

यह अंधविश्वास है

वह अच्छे से जानता है

फिर भी वह

इस परंपरा को ही मानता है

जब कार्य उसके अनुरूप होते हैं

वह शुभ है

जब कार्य उसके अनुरूप नहीं होते

वह अशुभ है

 

वह जब अपने

विवेक से सोचता है

सत्य को अपने

जीवन में खोजता है

तब उसे

एक महान विचारक का

कथन याद आता है –

कि

जब तक

सांस चल रही है

सब शुभ है

जो बीत गया

वह कल था

आने वाला कल

एक वरदान है

जब सांस रुक जाती है

तब सब अशुभ है

अपनों के लिए भी

और दुनिया के लिए भी /

☆

© श्याम खापर्डे 

फ्लेट न – 402, मैत्री अपार्टमेंट, फेज – बी, रिसाली, दुर्ग ( छत्तीसगढ़) मो  9425592588

≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  ≈

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हिन्दी साहित्य – आलेख ☆ अभिव्यक्ति # -१२६ – शिवालय… ☆ श्री राजेन्द्र तिवारी ☆

श्री राजेन्द्र तिवारी

(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी जबलपुर से श्री राजेंद्र तिवारी जी का स्वागत। इंडियन एयरफोर्स में अपनी सेवाएं देने के पश्चात मध्य प्रदेश पुलिस में विभिन्न स्थानों पर थाना प्रभारी के पद पर रहते हुए समाज कल्याण तथा देशभक्ति जनसेवा के कार्य को चरितार्थ किया। कादम्बरी साहित्य सम्मान सहित कई विशेष सम्मान एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित, आकाशवाणी और दूरदर्शन द्वारा वार्ताएं प्रसारित। हॉकी में स्पेन के विरुद्ध भारत का प्रतिनिधित्व तथा कई सम्मानित टूर्नामेंट में भाग लिया। सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय रहा। हम आपकी रचनाएँ समय समय पर अपने पाठकों के साथ साझा करते रहेंगे। आज प्रस्तुत है आपका एक विचारणीय आलेख ‘शिवालय…‘।)

☆ अभिव्यक्ति # १२६ ☆

 ☆ शिवालय… ☆ श्री राजेन्द्र तिवारी ☆

महादेव की गृहस्थी के दर्शन करते समय विचार करें, कि कितने विरोधाभासी जीव बड़ी शांति से इस परिवार में रह रहे हैं। सबकी प्रकृति अलग-अलग है। फिर भी सब शांति से रहते हैं। माँ पार्वती का वाहन शेर है और शिवजी का नंदी है। वृषभ शेर का भोजन है। लेकिन यहाँ कोई बैर नहीं है। कार्तिकेयजी का वाहन मोर है। शिवजी के गले में सर्पों की माला है। मोर और सर्प भी जन्म जात शत्रु हैं। लेकिन यहाँ ये प्रेम पूर्वक एक साथ रहते हैं। गणेशजी का वाहन चूहा है और चूहा भी सर्प का भोजन है। इस परिवार में सब शांति, सद्भाव और निडर जीवन जीते हैं। वैचारिक भिन्नता के कारण सम्भव है कि हमारे घर में भी किसी से न बने। कारण घर में मतभेद हो जाएं। पर तब भी हमारे मनभेद नहीं होने चाहिए। हम सबसे प्रेमपूर्ण व्यवहार करना सीखें। अवश्य ही हमारा घर भी शिवालय बन सकता है।

☆

© श्री राजेन्द्र तिवारी  

संपर्क – 70, रामेश्वरम कॉलोनी, विजय नगर, जबलपुर

मो  9425391435

≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/ ≈

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ज्योतिष साहित्य ☆ साप्ताहिक राशिफल (5 अक्टूबर से 11 अक्टूबर 2026) ☆ ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय ☆

ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय

विज्ञान की अन्य विधाओं में भारतीय ज्योतिष शास्त्र का अपना विशेष स्थान है। हम अक्सर शुभ कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त, शुभ विवाह के लिए सर्वोत्तम कुंडली मिलान आदि करते हैं। साथ ही हम इसकी स्वीकार्यता सुहृदय पाठकों के विवेक पर छोड़ते हैं। हमें प्रसन्नता है कि ज्योतिषाचार्य पं अनिल पाण्डेय जी ने ई-अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों के विशेष अनुरोध पर साप्ताहिक राशिफल प्रत्येक शनिवार को साझा करना स्वीकार किया है। इसके लिए हम सभी आपके हृदयतल से आभारी हैं। साथ ही हम अपने पाठकों से भी जानना चाहेंगे कि इस स्तम्भ के बारे में उनकी क्या राय है ? 

☆ ज्योतिष साहित्य ☆ साप्ताहिक राशिफल (5 अक्टूबर से 11 अक्टूबर 2026) ☆ ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय ☆

जय श्री राम। गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस की अंतिम चौपाई में अपने आप को हरि का भक्त कहा है और अंतिम मांग की है कि श्री हनुमान जी उनके हृदय में निवास करें। इस प्रकार गोस्वामी तुलसीदास जी हनुमान जी पर दबाव डालकर मांग कर रहे हैं की वे हमेशा तुलसीदास जी के हृदय में निवास करें। इस सप्ताह की श्री हनुमान चालीसा की चौपाई है-

तुलसीदास सदा हरि चेरा |

कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ||

इस चौपाई के संपुट पाठ निरंतर करने से प्रभु श्री राम और हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है।

“नाशे रोग हरे सब पीरा” नाम की पुस्तक में श्रीहनुमान चालीसा की चौपाइयों से संबंधित सभी उपायों का विस्तृत विवरण दिया हुआ है। इस पुस्तक को आप हमारे यहां से प्राप्त कर सकते हैं।

अब मैं पंडित अनिल पाण्डेय आपको इस सप्ताह अर्थात 5 अक्टूबर से 11 अक्टूबर 2026 तक के सप्ताह के साप्ताहिक राशिफल के बारे में बताऊंगा। मगर इस राशिफल के पहले इस सप्ताह के ग्रहों के गोचर पर नजर डाल लें।

इस सप्ताह सूर्य कन्या राशि में, मंगल और गुरु कर्क राशि में, बुध और वक्री शुक्र तुला राशि में, वक्री शनि मीन राशि में और राहु कुंभ राशि में गोचर करेंगे।

आइए अब राशि वार राशिफल की चर्चा करते हैं।

मेष राशि

व्यापारियों के लिए यह सप्ताह काफी अच्छा रहेगा। उनके व्यापार में वृद्धि होगी। अविवाहित जातकों के लिए भी यह सप्ताह ठीक-ठाक रहेगा। विवाह के प्रस्ताव आएंगे। नए प्रेम संबंध बन सकते हैं। आपके शत्रु इस सप्ताह शांत रहेंगे। इस सप्ताह आपको अपने संतान से थोड़ा सहयोग मिल सकता है। आपका स्वास्थ्य इस सप्ताह ठीक-ठाक रह सकता है। जीवनसाथी का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। इस सप्ताह आपके लिए 5 और 6 अक्टूबर विभिन्न कार्यों को करने हेतु उचित है। पांच और छः तारीख को आपके प्रतिष्ठा में वृद्धि भी संभव है। कर्मचारी और अधिकारियों के लिए भी यह सप्ताह पहले से ठीक रहेगा। 9,और 10 तारीख को आपको कार्यों को करने में सतर्कता बरतनी चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन सफेद चावल का दान दें तथा शुक्रवार को मंदिर में जाकर पुजारी जी को सफेद वस्त्रों का दान करें। सप्ताह का शुभ दिन मंगलवार है।

वृष राशि

इस सप्ताह आपका और आपके जीवनसाथी का स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। व्यापारियों के लिए यह सप्ताह ठीक है। परिवार में आपके संबंध अपने भाइयों बहनों से ठीक-ठाक रहेंगे। इस सप्ताह आपको अपने संतान से भी अच्छा सहयोग प्राप्त होगा। कर्मचारी और अधिकारियों के लिए भी यह सप्ताह ठीक है। इस सप्ताह आपको अपने कर्म पर विश्वास करना चाहिए। आपको थोड़ी बहुत मदद भाग्य से भी मिल सकती है। इस सप्ताह आपके लिए सात और 8 तारीख कार्यों को करने के लिए उपयुक्त है। 11 तारीख को आपको सावधान रहकर कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप पर प्रतिदिन राम रक्षा स्त्रोत का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।

मिथुन राशि

इस सप्ताह आपका,आपके जीवनसाथी का और आपके माता-पिता जी का स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। अर्थात जैसा चल रहा है वैसा ही रहेगा। इस सप्ताह आपको अपने आप पर पूरा विश्वास करके कार्यों को करना चाहिए। आपके कर्म ही आपकी मदद करेंगे। इस सप्ताह आपको अपने कार्यों को संपन्न करने के लिए भाग्य का सहारा नहीं लेना चाहिए। इस सप्ताह आपको अपने संतान से मदद प्राप्त होगी। भाई बहनों के साथ संबंध ठीक-ठाक रहेंगे। इस सप्ताह आपके लिए 9 और 10 तारीख कार्यों को करने के लिए लाभप्रद हैं। 9 और 10 तारीख को आपको धन की प्राप्ति भी हो सकती है। सप्ताह के बाकी दिन ठीक-ठाक हैं। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन काले कुत्ते को तंदूर की रोटी खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है।

कर्क राशि

यह सप्ताह आपके लिए मिश्रित फलादेश लेकर आ रहा है। सामान्य तौर पर इस सप्ताह आपका स्वास्थ्य ठीक रहेगा, परंतु सप्ताह के कुछ दिनों में आपको खून संबंधी रोग जैसे डायबिटीज ब्लड प्रेशर आदि से सावधान रहना चाहिए। जनप्रतिनिधियों के लिए यह सप्ताह काफी अच्छा रहेगा। व्यापारियों के लिए भी यह सप्ताह ठीक है। अधिकारी और कर्मचारियों के लिए सप्ताह सामान्य रहेगा। भाई बहनों के साथ आपके संबंध सामान्य रहेंगे, अर्थात जैसे पहले थे वैसे ही रहेंगे। इस सप्ताह आपके लिए 5 और 6 तथा 11 अक्टूबर विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए परिणाम दायक हैं। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक-ठाक हैं। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन काले उड़द की दाल का दान करें और शनिवार को शनि मंदिर में जाकर शनि देव का पूजन करें। सप्ताह का शुभ दिन सोमवार है।

सिंह राशि

इस सप्ताह आपको कचहरी के कार्यों में सफलता मिल सकती है। इस सफलता के लिए आपको बड़ी चतुराई के साथ कार्य करना पड़ेगा। धन आने की भी अच्छी उम्मीद है। भाई बहनों के साथ संबंध थोड़े खट्टे और थोड़े मीठे रहेंगे। इस सप्ताह आपको भाग्य के स्थान पर अपने कर्मों पर विश्वास करना चाहिए। आपको जो भी सफलता मिलेगी अपके परिश्रम और लगन के कारण ही मिलेगी। इस सप्ताह आपके लिए सात और आठ तारीख विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए मददगार है। 5 और 6 तारीख को आपको सावधान रहकर के अपने कार्यों को निपटाना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गाय को हरा चारा खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है।

कन्या राशि

इस सप्ताह आपको धन प्राप्त होने की उम्मीद है। आपका आत्मविश्वास इस सप्ताह थोड़ा ऊंचा रहेगा। आपको अपने संतान से सहयोग प्राप्त हो सकता है। परंतु संतान से बहुत ज्यादा सहयोग की उम्मीद ना करें। ‌आपके माताजी और पिताजी का स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। आपका भी स्वास्थ्य ठीक रहेगा। इस सप्ताह आपके लिए 9 और 10 तारीख विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए उत्तम है। 7 और 8 तारीख को आपको सावधानी से अपने कार्यों को अंजाम देना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन सफेद चावल का दान करें और शुक्रवार को मंदिर में जाकर पुजारी जी को सफेद वस्त्रो का दान दें। सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है।

तुला राशि

अगर आप अविवाहित हैं तो यह सप्ताह आपके लिए अच्छा हो सकता है। विवाह के प्रस्ताव आ सकते हैं। प्रेम संबंध बढ़ सकते हैं। पुराने प्रेम संबंधों में वृद्धि हो सकती है। कर्मचारी और अधिकारियों के लिए यह सप्ताह पहले जैसा ही रहेगा। धन आने की उम्मीद है। कचहरी के कार्यों में कोई रिस्क नहीं लेना चाहिए। इस सप्ताह आपको अपने संतान से कोई सहयोग नहीं मिलेगा। आपके शत्रु शांत रहेंगे परंतु समाप्त नहीं होंगे। इस सप्ताह आपके लिए 5, 6 और 11 अक्टूबर लाभदायक है। 9 और 10 तारीख को आपको सावधान रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करना चाहिए। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।

वृश्चिक राशि

इस सप्ताह आपके पास धन आने की उम्मीद है। आपको अपने संतान से भी इस सप्ताह सहयोग मिल सकता है। भाग्य से भी आपको इस सप्ताह मदद मिलेगी। आपका और आपके जीवन साथी का स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। कचहरी के कार्यों में धन व्यय हो सकता है। परंतु अत्यधिक प्रयास करने पर सफलता भी मिल सकती है। इस सप्ताह आपके लिए 7 और 8 अगस्त विभिन्न प्रकार के कार्यों में फल दायक हैं। 11 तारीख को आपको सावधान रहकर के अपने कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन भगवान सूर्य को तांबे के पात्र में जल और लाल पुष्प डालकर जल अर्पण करें। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है।

धनु राशि

इस सप्ताह आपको धन प्राप्त होने की उम्मीद है। कर्मचारी और अधिकारियों के लिए यह सप्ताह ठीक-ठाक रहेगा। भाग्य से भी आपको थोड़ी बहुत मदद मिलेगी। लंबी यात्रा का योग बन सकता है। आपका और आपके जीवनसाथी का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। माताजी और पिताजी का स्वास्थ्य पहले जैसा ही रहेगा। भाई बहनों के साथ संबंध खट्टे मीठे रहेंगे। इस सप्ताह आपके लिए 9 और 10 परिणाम दायक है। 5 और 6 तारीख को आपको सावधानी पूर्वक कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन काली उड़द की दाल का दान करें और शनिवार को शनि मंदिर में जाकर शनि देव का पूजन करें। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है। ‌

मकर राशि

कर्मचारी और अधिकारियों के लिए यह सप्ताह अच्छा रहेगा। व्यापारियों को भी इस सप्ताह धन लाभ हो सकता है। भाग्य से भी आपको सामान्य मदद मिलेगी। आपका और आपके जीवनसाथी का स्वास्थ्य ठीक-ठाक रहेगा। गलत रास्ते से धन आ सकता है। भाई बहनों के साथ संबंध ठीक-ठाक रहेगा। इस सप्ताह आपके लिए 5, 6 और 11 तारीख विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए उपयोगी है। 7 और 8 तारीख को आपको सावधान रह करके कार्यों को निपटाना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन रुद्राष्टक का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन शनिवार है।

कुंभ राशि

इस सप्ताह भाग्य से आपको मदद मिलेगी। आप अपने शत्रुओं को थोड़े से प्रयास के उपरांत आसानी से समाप्त कर सकते हैं। कचहरी के कार्यों में सफलता मिल सकती है। दुर्घटनाओं से थोड़ा सा सावधान रहने की आवश्यकता है। परंतु इस सप्ताह कोई मेजर दुर्घटना नहीं हो सकती। जनप्रतिनिधियों के लिए यह सप्ताह ठीक-ठाक रहेगा। 7 और 8 तारीख विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए उचित रहेगा। सप्ताह के बाकी दिनों में आपको सावधान रहकर कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन शिव पंचाक्षर स्त्रोत का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।

मीन राशि

इस सप्ताह आपके माता-पिता जी का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। आपका और आपके जीवनसाथी का स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, अर्थात जैसा पहले था वैसा ही रहेगा। इस सप्ताह आपको अपने संतान से उचित मात्रा में सहयोग प्राप्त होगा। अल्प मात्रा में धन प्राप्त होने की उम्मीद है। इस सप्ताह आपके लिए 9 और 10 तारीख विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए उपयुक्त है। सात और आठ तारीख को आपको सचेत रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए आप प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें और शनिवार को दक्षिण मुखी हनुमान जी के मंदिर में जाकर आपको कम से कम तीन बार हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। सप्ताह का शुभ दिन मंगलवार है।

ध्यान दें कि यह सामान्य भविष्यवाणी है। अगर आप व्यक्तिगत और सटीक भविष्वाणी जानना चाहते हैं तो आपको मुझसे दूरभाष पर या व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाना चाहिए। मां शारदा से प्रार्थना है या आप सदैव स्वस्थ सुखी और संपन्न रहें। जय मां शारदा।

 राशि चिन्ह साभार – List Of Zodiac Signs In Marathi | बारा राशी नावे व चिन्हे (lovequotesking.com)

निवेदक:-

ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय

(प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ और वास्तु शास्त्री)

सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता, मध्यप्रदेश विद्युत् मंडल 

संपर्क – साकेत धाम कॉलोनी, मकरोनिया, सागर- 470004 मध्यप्रदेश 

मो – 8959594400

ईमेल – 

यूट्यूब चैनल >> आसरा ज्योतिष 

≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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मराठी साहित्य – इंद्रधनुष्य ☆ “समिधाच सख्या या!!” – सत्यभामाबाई टिळक ! – लेख क्र. १७ ☆ प्रा.भारती जोगी ☆

प्रा.भारती जोगी

? इंद्रधनुष्य ?

☆ “समिधाच सख्या या!!” – सत्यभामाबाई टिळक ! – लेख क्र. १७ ☆ प्रा.भारती जोगी ☆

एक रात्र! केसरी वाडा शांत!! सगळे निद्राधीन… अशा वेळी राजद्रोहाच्या शिक्षेत मंडालेच्या तुरुंगात लोकमान्यांना ६ वर्षांचा कारावास झाल्याची बातमी सांगायला काकासाहेब खाडिलकर पोहोचले. पण खूप रात्र झाल्यामुळे रात्रभर घराबाहेर ओट्यावरच बसून राहिले. सत्यभामाबाईंनी सकाळी दरवाजा उघडला, आणि त्यांना पाहताच काकासाहेबांचा अश्रूंचा बांध फुटला. त्यावेळी अत्यंत धीरोदात्तपणे उच्चारलेले शब्द होते… ” तिकडे शिक्षा झाली हे सांगण्यासाठीच तुम्ही येथे आलात ना? मग असे बायकांसारखे रडत काय बसलात? शिक्षा काही चोरी, लबाडी सारख्या गुन्ह्यासाठी झालेली नाही. लोकांच्या कल्याणासाठी झटण्याच्या गुन्ह्यासाठी झाली आहे. हात-पाय गाळून बसण्यात काय अर्थ आहे? उठा… रडू नका. कामाला लागा. “

हे शब्द होते, आपल्या पतीच्या कार्याशी एकरूप झालेल्या… स्वातंत्र्य लढ्यात झोकून दिलेल्या एका झंझावाती वादळाच्या जीवनातील झुळुकेचे! पती धगधगती ‘मशाल ‘तर पत्नी ‘नंदादीप ‘! शांतपणे, अखंड तेवणारा!!

पतीच्या राष्ट्रभक्तीच्या धगधगत्या अग्नी कुंडात आपलं संपूर्ण जीवन हसत-हसत समर्पित करणारी ही समिधा म्हणजे… लोकमान्य टिळकांची पत्नी… सत्यभामाबाई! पूर्वाश्रमीच्या ‘तापीबाई ‘! कोकणच्या मुक्त हवेत, नारळी, पोफळी च्या सहवासात वाढलेली एक सुदृढ अंगापिडाची बाला! त्या काळानुसार बालविवाह होऊन टिळकांच्या घरात सून म्हणून पुण्यात आलेली. स्वभावाने अतिशय नम्र, अबोल, संस्कारी! अलौकिक अशा साधेपणाची मूर्ती!

लग्न करून आल्यावर लक्षात आले की, आपली लग्न गाठ ही एका राष्ट्रभक्ती ने उसळलेल्या झंझावाताशी झालीये. सत्यभामेनं ठरवूनच टाकलं त्या झंझावाताच्या वेगाशी, जोमाशी एकरूप होत, त्यातच विलीन व्हायचं, एका विधायक रूपात!!

आणि मग… सत्यभामाबाई टिळकांच्या मागे सावली सारख्या उभ्या राहिल्या. त्यांच्या शांत, मूक त्यागामुळे आणि समर्थ अशा साथीमुळेच टिळक कोणत्याही कौटुंबिक चिंतेशिवाय स्वातंत्र्य चळवळीत सर्वस्व देऊ शकले.

लोकमान्य टिळक नेहमी म्हणत,

” माझे संसाराकडे दुर्लक्ष असले तरी मुलांचे संगोपन आणि त्यांच्यावर सुयोग्य संस्कार करण्यास सत्यभामा समर्थ आहे. “

आणि खरंच सत्यभामाबाईंनी…

” आदर्श स्त्री जीवन हे मातृशक्तीतून प्रकटते “… हे आपल्या ६ अपत्यांचं सुयोग्य संगोपन करून सिद्ध च केले.

पुण्यातील केसरी वाडा सत्यभामाबाईंच्या शांत, मूक, मौन संघर्षाचा साक्षीदार आहे. वाड्यातलं ‘माजघर ‘ त्यांच्या संपूर्ण आयुष्याचं केंद्रस्थान आणि आश्रय स्थान होतं जणू काही!

त्या माजघराच्या परिघात राहूनच त्यांनी… राजकीय चर्चा, बैठका, क्रांतिकारकांची ये-जा, पै पाहुणे, केसरी वृत्तपत्राचे कर्मचारी… या सगळ्यांचं आदरातिथ्य, , जेवणाची सोय अगदी विनातक्रार करून ‘अन्नपूर्णा’ च सिद्ध केले.

माजघरातल्या क्रांतीची मूक नायिका होती ती!

त्याच माजघरात राहून… ब्रिटिश पोलिसांच्या अनेक धाडी, घरावर आलेली जप्ती, पतीला वारंवार होणाऱ्या तुरुंगवासाच्या शिक्षा… हे सगळं अत्यंत नि:शब्दपणे आणि धीरोदात्तपणे सहन केलं, पेललं ही आणि झेललं ही! मनातलं वादळ चेहऱ्यावर किंवा शब्दांतून व्यक्त नाही होऊ दिलं.

स्वतः अंधारात राहून लोकमान्यांना प्रकाश देत राहिल्या. त्यांच्या भव्य कार्या मागे शांतपणे, स्थिर राहून एखाद्या दीपस्तंभा सारखा आधार झाल्या त्या!!

टिळकांच्या आयुष्यातील ” ताई महाराज खटला “… हा अत्यंत वादग्रस्त आणि मानसिक त्रासाचा होता. या परिस्थितीत घराची अब्रू, पतीची पत सत्यभामाबाईंनी ढळू दिली नाही. मोठ्या संयमाने तोंड दिले. त्यावेळी टिळकांनी सत्यभामाबाईंना जे पत्र लिहिले होते ते त्या दोघांतील… मूक आणि घट्ट मानसिक नात्याचा पुरावा आहे.

सत्यभामाबाईंचं करारी आणि ठाम रूप ही दिसलं ते त्यांच्या त्याच माजघराच्या सीमेवर उभं राहिलेलं! घरात महत्त्वाचे दस्तऐवज आणि कागदपत्रे आहेत असे कळल्यावर, तपासाला आलेल्या इंग्रज अधिका-याला त्यांनी रणरागिणी च्या आवेशात सुनावले, ” घरातील स्त्रियांच्या खाजगी भागात प्रवेश करता येणार नाही. “… या तेजस्विनी च्या तेजापुढे ब्रिटिश अधिकारी ही नमला… मागे हटला!!

या तेजस्विनी चं त्यागमयी रूप ही दिसलं ते केसरी च्या सुरुवातीच्या खडतर, कठीण आणि आर्थिक अडचणीच्या काळात! त्यावेळी आर्थिक अडचण दूर व्हावी म्हणून स्वतः चे लग्नातील दागिने आणि कौटुंबिक चीजवस्तू हसतमुखाने गहाण ठेवल्या. हा आर्थिक त्याग खूपच मोठा म्हणावा असाच आहे!

एक महान राष्ट्र नेता घडण्यामागे केवळ वैचारिक संघर्ष पुरेसा नसतो तर तितकीच खंबीर साथ देणा-या धैर्याच्या मूर्ती ची गरज असते.

या धैर्यशील समिधेने आपल्या घराचा उंबरठा कधी ओलांडलाच नाही. बडेजावाची हौस नव्हतीच. दोन साधी पातळे, हातात दोन काळ्या बांगड्या, गळ्यात मंगळसूत्र! स्वतः ताक, दूध, फळे यावरच जास्तीत जास्त रहात. उपासच असत. मात्र माधुकरी मागणा-यांना ही अन्नपूर्णा भरभरून, भरपूर देई.

टिळकांना मंडालेच्या तुरुंगात ठेवलं आणि पहिल्यांदाच या धीरोदात्त, शांतपणे जळणा-या समईतल्या शुभ्र कळेचा जणू धीरच खचला. आपला पती काही आता परत येत नाही अशी त्यांच्या मनाची समजूत झाली. त्यांची जगण्याची आसक्तीच सुटली. औषध घेणे ही टाळू लागल्या. या सगळ्याचा परिणाम व्हायचा तोच झाला.

७ जून १९१२… या दिवशी सत्यभामा नावाची एक समिधा राष्ट्रभक्ती च्या धगधगत्या होमकुंडात समर्पित झाली… एक तेजस्वी प्राणज्योत मंडालेच्या दिशेने निघून गेली…

सत्यभामाबाई निवर्तल्यानंतर… एका परिचिताने त्यांचं एक रेखाचित्र बनवलं. त्यांच्या पुतण्याला ते खूप आवडलं, तो ते घेऊन लोकमान्यांकडे गेला… ते रेखा चित्र बघून टिळकांनी म्हंटलं,

” ती अशी नव्हतीच! … ती कशी होती हे फक्त मलाच ठाऊक आहे. “

असं म्हणतांना त्यांचे ओठ थरथरले, डोळ्यातलं पाणी उपरण्यानं टिपलं आणि शांत झाले.

… हेच तर ना ते पती-पत्नीतलं एकरूपत्व! परस्पर ऐक्य! आणि त्या बळावर होणारं पतीचं लोकोत्तर, लोकमान्य कार्य! हीच ती क्रांतीकारकांची ताकद!!

हीच ती समिधा जिचं समर्पित होणं बाळ गंगाधर टिळकांना थेट “लोकमान्य ” या उपाधीस पात्र ठरण्यास पूरक ठरलं!!!!!!

– लेख क्र. १७.

© प्रा.भारती जोगी

पुणे.

 फोन नंबर..९४२३९४१०२४.

≈संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ.उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ.मंजुषा मुळे/सौ.गौरी गाडेकर≈

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