हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ आलेख # १८१ – देश-परदेश – गधे पंजीरी खाए ☆ श्री राकेश कुमार ☆

श्री राकेश कुमार

(श्री राकेश कुमार जी भारतीय स्टेट बैंक से 37 वर्ष सेवा के उपरांत वरिष्ठ अधिकारी के पद पर मुंबई से 2016 में सेवानिवृत। बैंक की सेवा में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान के विभिन्न शहरों और वहाँ  की संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिला। उनके आत्मकथ्य स्वरुप – “संभवतः मेरी रचनाएँ मेरी स्मृतियों और अनुभवों का लेखा जोखा है।” ज प्रस्तुत है आलेख की शृंखला – “देश -परदेश ” की अगली कड़ी।)

☆ आलेख # १८१ ☆ देश-परदेश – गधे पंजीरी खाए ☆ श्री राकेश कुमार ☆

वर्षों से ये कहावत सुनते आ रहे थे। आज घर के पास वाले उद्यान में नगर निगम द्वारा कुत्तों पर जल से छिड़काव करते हुए देखा, तो गधे पंजीरी खाए वाली कहावत याद आ गई।

इतनी भीषण गर्मी में यदि कुत्तों पर पानी से वर्षा की गई है, तो उसमें कुछ बुराई भी नहीं है। हमारे उद्यान के फुरसतिया साथियों ने तो नगर निगम के बुराईयों के पिटारे खोल दिए। घरों में पानी की सप्लाई बहुत कम है, और यहां कुत्ते पानी में अठखेलियां कर रहे हैं।

एक साथी ने तो झुग्गी झोपड़ी वालों के लिए वकालत कर दी। जितने मुंह उतनी बातें, कोई कहने लगा ये सब उच्चतम न्यायालय के कारण हो रहा है, उन्होंने कुत्तों को कुछ अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। इंसानों को छोड़ जानवरों पर न्यायायलय दया दिखा रहा है।

एक बैंकर मित्र बोले हमारा पेंशन का मामला वर्षों से न्यायालय के विचाराधीन है, उस पर उच्चतम न्यायालय ने आंखें मूंद रखी है, और यहां कुत्तों, कबूतरों पर नित नए निर्णय आ रहे हैं।

हम उद्यान के सभी साथियों ने नगर निगम के जल वाहन चालक को घेर लिया, और उसको पूछा इन कुत्तों पर क्यों पानी व्यर्थ कर रहे हो उसने स्पष्ट किया वो तो उद्यान की घास पर जल छिड़काव कर रहा हैं, कुत्ते तो बिन बुलाए बाराती हैं, और बारात में नृत्य कर आनंद ले रहे हैं। आप बुजर्ग लोग क्यों परेशान हो रहे हो, उद्यान का आनंद लो, ओर प्रभु का नाम भजो।

बात, तो उस वाहन चालक की एकदम सही है। हम बुजर्ग हमेशा खामखां ही परेशान रहते हैं।

© श्री राकेश कुमार

संपर्क – B 508 शिवज्ञान एनक्लेव, निर्माण नगर AB ब्लॉक, जयपुर-302 019 (राजस्थान)

मोबाईल 9920832096

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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मराठी साहित्य – कवितेचा उत्सव ☆ श्री अशोक भांबुरे जी यांची कविता अभिव्यक्ती #३३१ ☆ सुखाच्या सरी… ☆ श्री अशोक श्रीपाद भांबुरे ☆

श्री अशोक श्रीपाद भांबुरे

? अशोक भांबुरे जी यांची कविता अभिव्यक्ती # ३३१ ?

☆ सुखाच्या सरी… ☆ श्री अशोक श्रीपाद भांबुरे ☆

सुखाच्या सरी झेलता येत होत्या

मला चांदण्या माळता येत होत्या

 *

सुखाशीन माहेर होते तिचेही

घरी सोंगट्या खेळता येत होत्या

 *

झग्यासारखी वेशभूषा फिराया

घरी पैठण्या नेसता येत होत्या

 *

धुरा वाहिलेली गुरूंनींच माझी

कथा त्यामुळे वाचता येत होत्या

 *

सदाचार माझ्या सभोवार कायम

म्हणूनच शिव्या टाळता येत होत्या

 *

नसो ओढ ही शिक्षणाची तरीही

इथे बघ मुली छेटता येत होत्या

 *

घराभोवताली असे फक्त लादी

बिया ना कुठे लावता येत होत्या

 © अशोक श्रीपाद भांबुरे

धनकवडी, पुणे ४११ ०४३.

ashokbhambure123@gmail.com

मो. ८१८००४२५०६, ९८२२८८२०२८

≈संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ लेखनी सुमित्र की # २८८ – महा-प्रस्थान के क्षण – २ ☆ स्व. डॉ. राजकुमार तिवारी “सुमित्र” ☆

स्व. डॉ. राजकुमार तिवारी “सुमित्र”

(संस्कारधानी  जबलपुर के हमारी वरिष्ठतम पीढ़ी के साहित्यकार गुरुवर डॉ. राजकुमार “सुमित्र” जी  को सादर चरण स्पर्श । वे सदैव हमारी उंगलियां थामकर अपने अनुभव की विरासत हमसे समय-समय पर साझा करते रहते थे। इस पीढ़ी ने अपना सारा जीवन साहित्य सेवा में अर्पित कर दिया।  वे निश्चित ही हमारे आदर्श हैं और प्रेरणास्रोत हैं। आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता –  महा-प्रस्थान के क्षण – २।)

✍ साप्ताहिक स्तम्भ – लेखनी सुमित्र की # २८९ ☆

☆ – महा-प्रस्थान के क्षण – २ ☆ स्व. डॉ. राजकुमार तिवारी “सुमित्र” ✍

बूढ़े पिता सा

देखता आकाश

दृश्य यह कितना करुण है।

ज्वाल के सम्मुख लिए जल

और भी जन है,

जिनके टूटते मन हैं।

ठीक ऐसी ही दशा में…

भू, हवा, पर्वत, किरन, वन औ सुमन हैं।

त्यक्त वस्त्रों सी पड़ी

निस्पंद ये

परछाइयाँ,

मानो किसी का शापमय आदेश हो!

लग रहा-

जैसे कि खण्डित मूर्तियों का देश हो !

पाषाण जैसे प्राण भी तो

कर रहे हैं

आँसुओं में संतरण,

क्योंकि निष्प्रभ हो गई है

सभ्यता की व्याकरण।

आह! मेरे प्रश्न बालक, खो गये,

पगवाट में, वनवाट में,

और उनके उत्तरोंका ध्रुव

कि वह तो गया है

शान्ति वन के घाट में।

 

स्व डॉ. राजकुमार “सुमित्र” 

साभार : डॉ भावना शुक्ल 

112 सर्राफा वार्ड, सिटी कोतवाली के पीछे चुन्नीलाल का बाड़ा, जबलपुर, मध्य प्रदेश

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ अभिनव गीत # २८६ – “ऐसे आर्तनाद के क्षण बस…” ☆ श्री राघवेंद्र तिवारी ☆

श्री राघवेंद्र तिवारी

(प्रतिष्ठित कवि, रेखाचित्रकार, लेखक, सम्पादक श्रद्धेय श्री राघवेंद्र तिवारी जी  हिन्दी, दूर शिक्षा, पत्रकारिता व जनसंचार,  मानवाधिकार तथा बौद्धिक सम्पदा अधिकार एवं शोध जैसे विषयों में शिक्षित एवं दीक्षित। 1970 से सतत लेखन। आपके द्वारा सृजित ‘शिक्षा का नया विकल्प : दूर शिक्षा’ (1997), ‘भारत में जनसंचार और सम्प्रेषण के मूल सिद्धांत’ (2009), ‘स्थापित होता है शब्द हर बार’ (कविता संग्रह, 2011), ‘​जहाँ दरक कर गिरा समय भी​’​ ( 2014​)​ कृतियाँ प्रकाशित एवं चर्चित हो चुकी हैं। ​आपके द्वारा स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के लिए ‘कविता की अनुभूतिपरक जटिलता’ शीर्षक से एक श्रव्य कैसेट भी तैयार कराया जा चुका है। आज प्रस्तुत है आपका एक अभिनव गीत ऐसे आर्तनाद के क्षण बस...”।)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ # २८६ ☆।। अभिनव गीत ।। ☆

☆ “ऐसे आर्तनाद के क्षण बस...” ☆ श्री राघवेंद्र तिवारी 

जिसकी बेटी व्याह योग्य हो

हम वह बाप रहे

हालातों के कोपभवन का

कठिन विलाप रहे

 

नीचा सिर करके निकाल दी

जीवन की आशा

शायद कोई क्रुद्ध हो गया

गति का दुर्वासा

 

ऐसी विकट परिस्थितियों का

दारुण ताप रहे

 

कतरब्योत में लगे रहे

या फिर उधेड सींते

याद नही कर पाते यह दिन

कैसे क्पा बीते

 

बे मौसम की बारिश का

जैसे अनुताप रहे

 

सूत कातते रहे मगर

ना बुन पाये कपड़ा

जिन्हें बनाया अपना

अब उन से भी है झगडा

 

ऐसी भिन्न परिस्थितियों में

हम चुपचाप रहे

 

हारे थके व्यथा अपनी यह

हम कहते किससे

जिससे कहते उसके भी

अनगिनत मौन किस्से

 

ऐसे आर्तनाद के क्षण बस

आत्म प्रलाप रहे

©  श्री राघवेन्द्र तिवारी

04-07-2025

संपर्क​ ​: ई.एम. – 33, इंडस टाउन, राष्ट्रीय राजमार्ग-12, भोपाल- 462047​, ​मोब : 09424482812​

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ संजय उवाच # ३४० – सबसे बड़ा रुपैया ☆ श्री संजय भारद्वाज ☆

श्री संजय भारद्वाज

(“साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच “ के  लेखक  श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है। साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।श्री संजय जी के ही शब्दों में ” ‘संजय उवाच’ विभिन्न विषयों पर चिंतनात्मक (दार्शनिक शब्द बहुत ऊँचा हो जाएगा) टिप्पणियाँ  हैं। ईश्वर की अनुकम्पा से आपको  पाठकों का  आशातीत  प्रतिसाद मिला है।”

हम  प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाते रहेंगे। आज प्रस्तुत है  इस शृंखला की अगली कड़ी। ऐसे ही साप्ताहिक स्तंभों  के माध्यम से  हम आप तक उत्कृष्ट साहित्य पहुंचाने का प्रयास करते रहेंगे।)

☆  संजय उवाच # ३४० सबसे बड़ा रुपैया… ?

समाचारपत्र में संबंध विच्छेद के एक मुकदमे का निर्णय छपा है। उच्च शिक्षित युगल में विवाह के लगभग दो वर्षों के भीतर ही संबंध विच्छेद हो गया। समाज में निरंतर बदलते मूल्य और अपने तक सीमित रहने की वृत्ति के चलते आजकल दो वर्ष भी दांपत्य के लिए उल्लेखनीय अवधि मानी जा सकती है। तथापि इस मामले में चौंकाने वाला तथ्य संबंध-विच्छेद का कारण था। समाचार में बताया गया कि कि पति हर व्यय में पत्नी से पचास प्रतिशत की अपेक्षा रखता था। यह अपेक्षा सुबह के नाश्ते से लेकर रात के भोजन तक हर छोटे-बड़े व्यवहार में थी। समाचार कह रहा था कि विवाह से पूर्व उसके द्वारा दिये गए उपहारों की आधी कीमत भी उसे चाहिए थी। उधर दूसरे पक्ष का कहना था कि पत्नी की आमदनी, पति की तुलना में कम है, अतः यह विभाजन तर्कसंगत नहीं है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के समय में मनुष्य की संवेदनाओं के आर्टिफिशियल होने की पराकाष्ठा है यह। भौतिक जगत में भौतिकता का चरम बिंदु है यह। समाचारपत्र में छपे कुछ पंक्तियों के समाचार के आधार पर इस घटना में किसी को दोषी या निर्दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता। इस तरह की विवेचना इस लघु आलेख का उद्देश्य भी नहीं है। माननीय न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत तथ्यों के आधार पर गुण-दोष के धरातल पर निर्णय दिया होगा। दोषी जो भी रहा हो, यहाँ संबंधों में बढ़ती असुरक्षा और संदेह विचारणीय हैं।

नीतिसूत्र कहता है कि शक्ति का केंद्रीकरण निरंकुशता को जन्म देता है। निरंकुशता अविवेक को जनती है। अविवेक बहुधा आत्ममोह का कारण बनता है। आत्ममोह अपने अलावा दूसरा कुछ नहीं देख पाता। इस स्वानुभूत दृष्टिहीनता की परिधि में संबंध, संवेदना, सामाजिकता, सामंजस्य, साहचर्य सभी आ जाते हैं।

मनुष्यजीवन के सारे व्यवहार के केंद्र में पैसे का आ जाना मनुष्यता का अवमूल्यन है या अधिमूल्यन, इस पर भिन्न-भिन्न मत हो सकते हैं। कुछ लोग इसका नामकरण ‘नई मनुष्यता’ भी कर सकते हैं। सारे बौद्धिक विलास के परे ‘ना बीवी ना बच्चा, ना बाप बड़ा ना मैया, द होल थिंग इज़ दैट कि भैया सबसे बड़ा रुपैया’ का यूँ साकार होना हर विचारवान के मन में गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

प्रकृति में अंतिम कुछ भी नहीं है। पैसे को सर्वोच्च समझने की वृत्ति भी अंतिम नहीं रहेगी। मनुष्य को मिले बौद्धिकता के वरदान के चलते उससे वांछित है कि वह जीवन में मूल्यों के बीच भी सामंजस्य और संतुलन रखना सीखे। यह घटना इस बात का ज्वलंत उदाहरण है कि यंत्रमानव बनाने वाले मानव में धीरे-धीरे यंत्र अपने को स्थापित करता जा रहा है। क्या निकट भविष्य में माता- पिता, सगे-संबंधी, मित्र- आत्मीय, पति-पत्नी सभी आर्थिक आधार पर आँके जाने लगेंगे? ऐसी स्थिति में शब्दकोश से इन शब्दों के विलुप्त होने में समय नहीं लगेगा।

कुछ लोगों को यह विचार अतिरेक लग सकता है। कुछ लोग इस घटना को अपवाद के रूप में देख सकते हैं। तथापि अपवाद जब निरंतर घटने लगे तो मान लीजिए कि वह परंपरा होने के मार्ग पर अग्रसर है। ऐसे समय में परंपरा, अपवाद कहलाने लगती है।

उपरोक्त घटना के अपवाद को परंपरा बनने से रोकना है तो विचार को व्यवहार में उतारना होगा। घर, परिवार, समाज हर स्थान पर संबंधों की अनुभूति, महत्व और अनिवार्यता को रेखांकित करना होगा, अपने-अपने स्तर पर संबंधों को सच्चाई से जीना होगा। अन्यथा की स्थिति में संभव है कि भविष्य में व्यय में पचास प्रतिशत की भागीदारी ना कर सकने वालों को अमनुष्य करार दिया जाने लगे।

अनुरोध है कि हर मनुष्य विचार करे।

 

© संजय भारद्वाज 

(15:51 बजे, 13 जून 2026)

अध्यक्ष– हिंदी आंदोलन परिवार ☆ सदस्य– हिंदी अध्ययन मंडल, पुणे विश्वविद्यालय, एस.एन.डी.टी. महिला विश्वविद्यालय, न्यू आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस कॉलेज (स्वायत्त) अहमदनगर ☆ संपादक– हम लोग ☆ पूर्व सदस्य– महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ☆ ट्रस्टी- जाणीव, ए होम फॉर सीनियर सिटिजन्स ☆ 

मोबाइल– 9890122603

संजयउवाच@डाटामेल.भारत

writersanjay@gmail.com

☆ आपदां अपहर्तारं ☆

🕉️ १७ मई से ज्येष्ठ अधिकमास आरंभ हुआ है। इसी दिन से नारायण साधना आरंभ होगी।  इसका मंत्र है – ॐ नारायणाय नम:। 🕉️

💥 इसके साथ मौन साधना एवं आत्म परिष्कार भी चलेंगे। अपनी हर निर्बलता पर विजय पाने का साधन है आत्म परिष्कार। इसका नियमित अभ्यास रखे💥

अनुरोध है कि आप स्वयं तो यह प्रयास करें ही साथ ही, इच्छुक मित्रों /परिवार के सदस्यों को भी प्रेरित करने का प्रयास कर सकते हैं। समय समय पर निर्देशित मंत्र की इच्छानुसार आप जितनी भी माला जप  करना चाहें अपनी सुविधानुसार कर सकते हैं ।यह जप /साधना अपने अपने घरों में अपनी सुविधानुसार की जा सकती है।ऐसा कर हम निश्चित ही सम्पूर्ण मानवता के साथ भूमंडल में सकारात्मक ऊर्जा के संचरण में सहभागी होंगे। इस सन्दर्भ में विस्तृत जानकारी के लिए आप श्री संजय भारद्वाज जी से संपर्क कर सकते हैं। 

संस्थापक संपादक – हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिंदी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ प्रतुल साहित्य # २८ – हास्य-व्यंग्य – “पान की दुकान पर मोदी – मेलोनी चर्चा” ☆ श्री प्रतुल श्रीवास्तव ☆

श्री प्रतुल श्रीवास्तव 

वरिष्ठ पत्रकार, लेखक श्री प्रतुल श्रीवास्तव, भाषा विज्ञान एवं बुन्देली लोक साहित्य के मूर्धन्य विद्वान, शिक्षाविद् स्व.डॉ.पूरनचंद श्रीवास्तव के यशस्वी पुत्र हैं। हिंदी साहित्य एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रतुल श्रीवास्तव का नाम जाना पहचाना है। इन्होंने दैनिक हितवाद, ज्ञानयुग प्रभात, नवभारत, देशबंधु, स्वतंत्रमत, हरिभूमि एवं पीपुल्स समाचार पत्रों के संपादकीय विभाग में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया। साहित्यिक पत्रिका “अनुमेहा” के प्रधान संपादक के रूप में इन्होंने उसे हिंदी साहित्य जगत में विशिष्ट पहचान दी। आपके सैकड़ों लेख एवं व्यंग्य देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। आपके द्वारा रचित अनेक देवी स्तुतियाँ एवं प्रेम गीत भी चर्चित हैं। नागपुर, भोपाल एवं जबलपुर आकाशवाणी ने विभिन्न विषयों पर आपकी दर्जनों वार्ताओं का प्रसारण किया। प्रतुल जी ने भगवान रजनीश ‘ओशो’ एवं महर्षि महेश योगी सहित अनेक विभूतियों एवं समस्याओं पर डाक्यूमेंट्री फिल्मों का निर्माण भी किया। आपकी सहज-सरल चुटीली शैली पाठकों को उनकी रचनाएं एक ही बैठक में पढ़ने के लिए बाध्य करती हैं।

प्रकाशित पुस्तकें –ο यादों का मायाजाल ο अलसेट (हास्य-व्यंग्य) ο आखिरी कोना (हास्य-व्यंग्य) ο तिरछी नज़र (हास्य-व्यंग्य) ο मौन

आज प्रस्तुत है आपका एक विचारणीय व्यंग्य  पान की दुकान पर मोदी – मेलोनी चर्चा

साप्ताहिक स्तम्भ ☆ प्रतुल साहित्य # २८

☆ व्यंग्य ☆ “पान की दुकान पर मोदी – मेलोनी चर्चा” ☆ श्री प्रतुल श्रीवास्तव

मैं रात्रि का भोजन करने के बाद पान खाने के मूड में टहलता हुआ झब्बूलाल की दुकान की ओर बढ़ रहा था। कुछ आगे बढ़ा तो झब्बू की दुकान का रेडियो साफ सुनाई देने लगा, “झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में। ” मैंने सोचा कि आखिर बरेली की धरती में ऐसा क्या है कि वहां महिलाओं के सिर्फ झूमके ही गिरते हैं बेंदा, हार, करधन, पायल आदि गिरने की जानकारी कभी नहीं आई ! मुझे देखते ही झब्बू ने नमस्कार किया और मेरा पान तैयार करते हुए बोला – भाई साहब आपसे बहुत जरूरी काम है। मैंने कहा भाई जी अचानक क्या काम आ गया ? झब्बू बोला, आप मुझे और मेरे लगाए पान की क्वालिटी जानते ही हैं, मैंने कभी भी पान की गुणवत्ता और स्वाद से समझौता नहीं किया, सदा अपने ग्राहकों का हित सोचा, सबके साथ हमेशा मधुर व्यवहार किया। झब्बू जैसे ही सांस लेने रुका, मैंने बिना विलंब कहा, भाई मैं वर्षों से तुम्हें जानता हूं तुम मुझे यह सब क्यों बता रहे हो? मेरी बात को अनसुना करते हुए झब्बू ने बात आगे बढ़ाई बोला – भाई साहब आप वरिष्ठ पत्रकार हैं, साहित्यकार हैं, अनेक संस्थाओं से जुड़े हैं, बड़े – बड़े नेताओं से आपकी जान – पहचान है। मैंने कहा बस भाई बस। आखिर तुम्हें मुझसे ऐसा कौन सा काम आ गया है जिससे तुम मेरी इतनी तारीफ कर रहे हो !

 झब्बू लाल का दिया पान मैं अपने मुंह के हवाले करने ही वाला था कि उसकी बात सुनकर मेरा मुंह खुला रह गया। झब्बू ने कहा, भाई साहब मेरी इच्छा है कि जब भी अपने प्रधानमंत्री मोदी जी का जबलपुर आगमन हो तो वे मेरी दुकान पर आकर पान खाएं। इसके लिए मुझे आपकी मदद चाहिए। मेरे खुले मुंह के सामने हाथ में पान देखकर झब्बू बोला भैया क्या हुआ, मुंह खोले हो पान को तो अंदर भेजो। मैंने झटके से पान को मुंह में एक ओर खोंसते हुआ कहा, भाई कैसी असंभव सी बात कह रहे हो ! झब्बू ने तर्क रखा – जब मोदी जी कोलकाता में दुकान से खरीद कर झालमुड़ी खा सकते हैं तो मेरा पान क्यों नहीं खा सकते। मैंने कहा, प्यारे भाई जब उन्होंने झालमुड़ी खाई तब वहां चुनाव थे। यहां क्या है जो मोदी जी आकर तुम्हारा पान खायेंगे ? इससे उनको क्या फायदा ? झब्बू हंस कर बोला – भाई साहब पूरी दुनिया जानती है कि मोदी जी अपने फायदे के लिए कभी कुछ नहीं करते वो सिर्फ देश का फायदा सोचते हैं। मैंने कहा चलो ठीक है – अब यह बताओ कि यदि मोदी जी तुम्हारी दुकान पर आकर पान खा लें तो देश को क्या फायदा होगा ? झब्बू बोला भैया पान के शौकीन बढ़ेंगे तो पान का व्यापार बढ़ेगा, पान विक्रेता सम्पन्न होंगे। पान से जुड़ी सामग्री का उत्पादन बढ़ेगा, इससे जुड़ा रोजगार बढ़ेगा। मैं इस पर कोई टिप्पणी करता इससे पहले ही झब्बू बोला, भाई साहब मेरी समझ से तो यदि मोदी जी ने इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी को मेलोडी चॉकलेट की जगह औषधीय गुणों से भरपूर मुख को शुद्ध और होंठों को लाल करने वाला अपने देश का पान खिलाया होता तो बात ही कुछ और होती। वो गाना है न “खई के पान बनारस वाला खुल जाए बंद अकाल का ताला”। मैं मेलोनी जी की अकल या बुद्धिमानी पर प्रश्न चिन्ह नहीं लगा रहा लेकिन बुद्धि तो जितनी बढ़े उतना ही अच्छा। मैं झब्बू की बात पर हँसा उसने फौरन बात सम्हाली और बोला, भाई साहब मेलोनी को पान खिलाना व्यापारिक दृष्टिकोण से भी अपने देश के लिए अधिक लाभ दायक होता। जरा सोचें कि यदि पूरी दुनिया पान खाने लगे तो पान और उससे संबंधित सामग्री का हमें कितना निर्यात और उत्पादन करना पड़ेगा। मैंने कहा झब्बू वह सब ठीक है लेकिन देखते नहीं कि हमारे देश के ऑफिसों – अस्पतालों सहित कितनी महत्वपूर्ण इमारतों के कोने, सीढ़ियां, सड़कें, बगीचे पान की पीक से गंदे और बदबूदार हो गए हैं। क्या तुम चाहते हो कि सारी दुनिया की हालत ऐसी हो जाए ? मेरी बात सुनकर झब्बू बेशर्मी से हंसते हुए बोला भैया जब पूरी दुनिया ही पान की पीक से भर जाएगी तब हमारे पीकों वाले देश पर कौन उंगली उठाएगा ? झब्बू से बच कर निकलने का एक ही उपाय था उसकी हां में हां मिलना। मैंने कहा प्यारे भाई मैं प्रयास करूंगा कि मोदी जी आपकी दुकान पर पान खाने आयें और अबकी बार इटली जाने के पहले पानों की कुछ पुड़ियां मेलोनी जी के लिए भी ले जाएं। मैं आगे बढ़ने लगा तो झब्बू ने रिश्वत रूपी एक मीठा पान मुझे भेंट करते हुए कहा कि ये मेरी भाभी जी को खिलाइए।

© श्री प्रतुल श्रीवास्तव 

संपर्क – 473, टीचर्स कालोनी, दीक्षितपुरा, जबलपुर – पिन – 482002 मो. 9425153629

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २६८ ☆ # “बेटियां…” # ☆ श्री श्याम खापर्डे ☆

श्री श्याम खापर्डे

(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता बेटियां…”।

☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २६८ ☆

☆ # “बेटियां…” # ☆ श्री श्याम खापर्डे ☆

हमारा एक मित्र सुबह मॉर्निंग वॉक में मिला

मिलते ही  करने लगा

आजकल नहीं मिलने का गिला

यार दिन भर क्या करते हो ?

क्या यहां पर नहीं रहते हो ?

 

मैंने कहा मित्र

मैं अपनी पत्नी के संग बच्चों के पास चला जाता हूं

कुछ दिन वहां रहता हूं

इसलिए रोज नहीं आता हूं

उसने पूछा,

बच्चे कहां पर रहते है?

मैंने कहा,

एक बेटा और तीन बेटियां हैं

सभी विवाहित है

वे देश के तीन कोने में है

और हम यहां इस कोने में है

 

उसने लंबी सांस भरी

और बोला,

एक बात करूं खरी खरी

तुम बहुत भाग्यशाली हो

जो बच्चों के साथ समय बिताते हो

खुशी खुशी रिटायरमेंट के दिन बिताते हो

 भाई,

हमारे साथ तो प्रश्न चिन्ह है

परिस्थितियों बहुत भिन्न है

एक ही बेटा और बेटी है

दोनों अपने परिवार में व्यस्त है

अपने परिवार संग मस्त है

हम जब भी बहु बेटे के पास जाते हैं

कुछ दिन मुश्किल से रह पाते हैं

हमारी पत्नी और बहू में

रोज होती जंग है

पारिवारिक शांति होती भंग है

वैसे ही वृद्धावस्था में बीमारियों की समस्याएं क्या कम है

बेटे का उदास चेहरा देखकर

लगता है कि अपराधी हम है

मन मारकर घर वापस आ जाते हैं

दोबारा नहीं जा पाते है

आप ही बताओ यार

कहां जाए ?

कहां मान सम्मान और प्यार पायें ?

क्या सब कुछ हमारे लिए छलावा है ?

रिश्तो में प्यार बस एक दिखावा है ?

 

मैंने कहा नहीं मित्र

तुम्हें प्यार, सम्मान, अपनापन

इज्जत, प्रतिष्ठा, आदर और मान

एक ही जगह मिल सकता है

तुम्हारे जीवन में खुशियों का फूल खिल सकता है

तुम्हें खुशी प्रसन्नता मन से सत्कार

दिल से तुम्हें प्रेम का व्यवहार

तुम्हें मनपसंद व्यंजन

मनपसंद सुकून भरी रातें

मन में ताजगी भर दें

ऐसी ममतामयी बातें

एक ही जगह मिल सकती है

जो तुम्हें अपना समझती है

वह है तुम्हारी बेटी

उसका परिवार

जो करती है तुमसे मन से प्यार

बाकी सब रिश्ते पानी के बुलबुले है

जो स्वार्थ में अपने तुमको जीवन भर छले है

 

आजकल बेटिंया

जीते जी  बेटे का फर्ज निभा रही है

और

मरने के बाद भी अंतिम संस्कार का भार

खुद के कंधे पर उठा रही है

 

मित्र वह लोग धन्य है

जिनकी बेटियां है

वह बुढ़ापे का सहारा ही नहीं

घी, शक्कर में लिपटी

रोटियां है

यह आज की

कटु सच्चाई है

जो स्वार्थी संसार ने

हमें दिखाई है/

© श्याम खापर्डे 

फ्लेट न – 402, मैत्री अपार्टमेंट, फेज – बी, रिसाली, दुर्ग ( छत्तीसगढ़) मो  9425592588

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  ≈

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हिन्दी साहित्य – आलेख ☆ अभिव्यक्ति # -१११ – पांडव और पांच गाँव … ☆ श्री राजेन्द्र तिवारी ☆

श्री राजेन्द्र तिवारी

(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी जबलपुर से श्री राजेंद्र तिवारी जी का स्वागत। इंडियन एयरफोर्स में अपनी सेवाएं देने के पश्चात मध्य प्रदेश पुलिस में विभिन्न स्थानों पर थाना प्रभारी के पद पर रहते हुए समाज कल्याण तथा देशभक्ति जनसेवा के कार्य को चरितार्थ किया। कादम्बरी साहित्य सम्मान सहित कई विशेष सम्मान एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित, आकाशवाणी और दूरदर्शन द्वारा वार्ताएं प्रसारित। हॉकी में स्पेन के विरुद्ध भारत का प्रतिनिधित्व तथा कई सम्मानित टूर्नामेंट में भाग लिया। सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय रहा। हम आपकी रचनाएँ समय समय पर अपने पाठकों के साथ साझा करते रहेंगे। आज प्रस्तुत है आपका एक भावप्रवण कविता पांडव और पांच गाँव…।)

☆ अभिव्यक्ति # १११ ☆

☆  आलेख – पांडव और पांच गाँव☆ श्री राजेन्द्र तिवारी ☆

युद्ध का शंखनाद हो चुका था, दोनों पक्ष, युद्ध की तैयारियां कर रहे थे, तभी भगवान कृष्ण ने, पांडवों से कहा, कि मैं एक बार शांति के लिए, अंतिम प्रयास करना चाहता हूं, ताकि युद्ध ना हो, और उनकी सहमति से वे कौरव राजसभा में पहुंचे. वहां पर सम्राट धृतराष्ट्र द्रोणाचार्य, भीष्म पितामह, सभी लोग उपस्थित थे. भगवान कृष्ण ने सभा में महाराज धृतराष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा, कि पांडवों ने 12 वर्ष का वनवास काट लिया है, और एक वर्ष का अज्ञातवास भी व्यतीत कर लिया है, अब उन्हें उनका राज्य लौटा दिया जाए, युवराज दुर्योधन ने तत्काल खड़े होकर कहा, मैं पांडवों को राज्य नहीं दूंगा, भगवान कृष्ण ने कहा, अगर आधा राज्य ना सही, तो उन्हें केवल पांच गांव ही दे दिए जाएं, वह उन पांच ग्रामों में ही अपना गुजारा कर लेंगे, भगवान कृष्ण ने जो पांच गांव मांगे थे वह पांच गांव हैं,

1, गजप्रस्थ – गाजी खान ने उसका नाम बदलकर गाजियाबाद रख दिया था.

2, तिलप्रस्थ – जिसका नाम मुगलों ने फरीदाबाद रख दिया था.

3, इंद्रप्रस्थ – जिसका नाम दिल्ली किया गया.

4, सोनप्रस्थ – जिसका नाम सोनीपत हो गया था.

4, पानप्रस्थ – जिसे बाद में बदलकर पानीपत कर दिया गया था.

परंतु दुर्योधन ने कहा, मैं सुई की नोक के बराबर भी भूमि पांडवों को नहीं दूंगा, अहंकार बहुत कष्टदायक होता है, सब कुछ नष्ट कर देता है, और यहीं से महाभारत युद्ध की नींव रखी गई, और युद्ध में दुर्योधन दुशासन, सभी कौरव, मारे गए, भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य इन सभी का देहावसान हुआ.

 युद्ध विनाशकारी होता है, दोनों पक्षों की हानि होती है.

 शांति बनाए रखनी चाहिए.

© श्री राजेन्द्र तिवारी  

संपर्क – 70, रामेश्वरम कॉलोनी, विजय नगर, जबलपुर

मो  9425391435

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/ ≈

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ज्योतिष साहित्य ☆ साप्ताहिक राशिफल (15 जून से 21 जून 2026) ☆ ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय ☆

ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय

विज्ञान की अन्य विधाओं में भारतीय ज्योतिष शास्त्र का अपना विशेष स्थान है। हम अक्सर शुभ कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त, शुभ विवाह के लिए सर्वोत्तम कुंडली मिलान आदि करते हैं। साथ ही हम इसकी स्वीकार्यता सुहृदय पाठकों के विवेक पर छोड़ते हैं। हमें प्रसन्नता है कि ज्योतिषाचार्य पं अनिल पाण्डेय जी ने ई-अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों के विशेष अनुरोध पर साप्ताहिक राशिफल प्रत्येक शनिवार को साझा करना स्वीकार किया है। इसके लिए हम सभी आपके हृदयतल से आभारी हैं। साथ ही हम अपने पाठकों से भी जानना चाहेंगे कि इस स्तम्भ के बारे में उनकी क्या राय है ? 

☆ ज्योतिष साहित्य ☆ साप्ताहिक राशिफल (15 जून से 21 जून 2026) ☆ ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय ☆

 जय श्री राम। वर्तमान में गुरु कर्क राशि में विचरण कर रहे हैं। अर्थात उच्च के हैं। उच्च का गुरु कई लोगों को बहुत अच्छा फल देगा और कुछ राशियों के लिए यह भी अच्छा नहीं रहेगा। परंतु अगर हम श्री हनुमान जी की आराधना करें तो हमारे सभी प्रकार के कष्ट दूर होंगे तथा कोई भी ग्रह हमें दुख या तकलीफ नहीं दे सकता है। आज की हनुमान चालीसा की चौपाई है :-

संकट तें हनुमान छुड़ावै |

मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ||

इस चौपाई के संपुट पाठ करने से जातक सभी प्रकार के संकटों से मुक्त रहता है।

नाशे रोग हरे सब पीरा” नाम की पुस्तक में श्रीहनुमान चालीसा की चौपाइयों से संबंधित सभी उपायों का विस्तृत विवरण दिया हुआ है। इस पुस्तक को आप हमारे यहां से प्राप्त कर सकते हैं।

आइये अब मैं पंडित अनिल पाण्डेय आपको इस सप्ताह अर्थात 15 जून से 21 जून 2026 तक के सप्ताह के, ग्रहों के विचरण की जानकारी दे रहा हूं।

इस सप्ताह बुध मिथुन राशि में, गुरु और शुक्र कर्क राशि में शनि मीन राशि में और राहु कुंभ राशि में गोचर करेंगे। सूर्य प्रारंभ में वृष राशि में रहेगा तथा 15 जून के 8:01 रात से मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। इसी प्रकार मंगल प्रारंभ में मेष राशि में रहेगा तथा 20 तारीख के 10:48 रात से वृष राशि में प्रवेश कर जाएंगे।

आईये अब राशिवार राशिफल की चर्चा करते हैं।

मेष राशि

इस सप्ताह आपके प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। भाई बहनों के साथ संबंध ठीक रहेंगे। आपके पराक्रम में वृद्धि होगी। अच्छे कामों में धन का व्यय होना स्वाभाविक है। भाग्य से आपको मदद मिल सकती है। आपके जीवनसाथी को रक्त संबंधी कोई बीमारी जैसे ब्लड प्रेशर डायबिटीज आदि हो सकती है। इस सप्ताह आपको अपने संतान से मदद मिल सकती है। कचहरी के कार्यों में आपको सावधान रहना चाहिए। इस सप्ताह आपके लिए 17, 18 और 19 तारीख कार्यों को करने के लिए अनुकूल है। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक-ठाक हैं। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन चावल का दान दें एवं शुक्रवार को मंदिर में जाकर सफेद वस्त्रो का दान करें। सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है।

वृष राशि

इस सप्ताह आपके पास धन आने का अच्छा योग है। व्यापार में वृद्धि होगी। कचहरी के कार्यों में सफलता का योग है। आपके पराक्रम में भी वृद्धि होगी। प्रतिष्ठा पहले जैसी ही रहेगी। भाग्य से इस सप्ताह आपको कम मदद मिलेगी। आपको अपने कर्मों पर विश्वास करना पड़ेगा। आपका और आपके जीवनसाथी का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। शत्रुओं को पराजित करने में आपको इस सप्ताह थोड़ी ज्यादा मेहनत लगेगी। मगर आपके प्रयासों के बाद शत्रु समाप्त हो सकते हैं। इस सप्ताह आपके लिए 19 तारीख की दोपहर के बाद से लेकर 20 और 21 तारीख किसी भी कार्य में सफलता प्रदान करने वाले हैं। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक-ठाक हैं। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन शिव पंचाक्षर मंत्र का जाप करें। सप्ताह का शुभ दिन शनिवार है।

मिथुन राशि

इस सप्ताह आपका आत्मविश्वास अत्यंत उच्च कोटि का रहेगा। आपका व्यापार उत्तम चलेगा। धन आने की अच्छी संभावना है। भाई बहनों के साथ संबंध ठीक रहेंगे। भाग्य से इस सप्ताह आपको मदद नहीं मिलेगी। कर्मचारी एवं अधिकारियों के लिए यह सप्ताह सामान्य है। उनको अपने नीचे कार्य करने वाले लोगों से थोड़ा सावधान रहना चाहिए। इस सप्ताह आपके लिए 15, 16 और 17 तारीख उपयोगी है। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक-ठाक है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन रुद्राष्टक का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।

कर्क राशि

इस सप्ताह आपकी कुंडली के गोचर में बहुत सुंदर गज केसरी योग बन रहा है। जिसके कारण आपको कई कार्यो में सफलता प्राप्त होगी। कचहरी के कार्यों में भी आपको धन खर्च करने के बाद सफलता मिल सकती है। अधिकारी एवं कर्मचारियों के लिए यह सप्ताह अच्छा रहेगा। उनको अपने कार्यालय में प्रतिष्ठा प्राप्त होगी। भाग्य के स्थान पर आपको इस सप्ताह अपने परिश्रम पर विश्वास करना चाहिए इस सप्ताह आपको अपने संतान से अच्छा सहयोग प्राप्त हो सकता है इस सप्ताह आपके लिए 17, 18 और 19 तारीख विभिन्न प्रकार से लाभदायक है। 15, 16 और 17 तारीख की दोपहर तक का समय आपको सतर्क रहकर कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें तथा शनिवार को दक्षिण मुखी हनुमान जी के मंदिर में जाकर कम से कम तीन बार हनुमान चालीसा का वाचन करें। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है।

सिंह राशि

इस वर्ष आपके घर में कोई शुभ कार्य होगा जिसमें कि आपका काफी धन व्यय होगा। इस सप्ताह धन आने का भी अच्छा योगहै। व्यापारियों का व्यापार अच्छा चलेगा। व्यापार में धन लाभ भी है। भाग्य से भी आपको इस सप्ताह मदद मिलेगी। इस सप्ताह आपको शेयर आदि में धन लगाना चाहिए। दुर्घटनाओं से इस सप्ताह आपको सावधान रहना चाहिए। आपको अपने संतान से इस सप्ताह अच्छा सहयोग प्राप्त होगा। आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। आपके पेट में पीड़ा हो सकती है। इस सप्ताह आपके लिए 20 और 21 तारीख विभिन्न प्रकार के मामले में फल दायक हैं। 17, 18 और 19 तारीख को आपको सजग रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।

कन्या राशि

इस सप्ताह आपके पास धन आने का उत्तम योग है। अधिकारी एवं कर्मचारियों का समय अपने कार्यालय में बहुत अच्छा रहेगा। उनको कार्यालय में प्रतिष्ठा प्राप्त होगी। अगर प्रमोशन का समय है तो प्रमोशन भी प्राप्त हो सकता है। व्यापार अच्छा चलेगा। प्रतिष्ठा प्राप्त होगी। आपको अपने संतान से सामान्य सहयोग प्राप्त होगा। भाई बहनों के साथ संबंध थोड़े खट्टे और मीठे रहेंगे। आपका और आपके जीवनसाथी का स्वास्थ्य पहले जैसा ही रहेगा। इस सप्ताह आपके लिए 15, 16 और 17 तारीख विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए ठीक है। 20 और 21 तारीख को आपको सजग रहकर अपने कार्यों को निपटाना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन शिव पंचाक्षर स्त्रोत का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।

तुला राशि

इस सप्ताह आपके राज्य भाव में गजकेसरी योग बन रहा है। इस योग के कारण आपको अपने कार्यालय में अच्छी प्रतिष्ठा प्राप्त हो सकती है। भाग्य से आपको इस सप्ताह लाभ होगा। व्यापार में भी आपको लाभ होगा। आपके संतान को इस सप्ताह थोड़ा कष्ट हो सकता है। उसका सहयोग पर्याप्त मात्रा में आपको प्राप्त नहीं हो पाएगा। आपके जीवनसाथी का स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। धन आने का योग है। इस सप्ताह आपके लिए 17, 18 और 19 तारीख लाभदायक हैं। सप्ताह के बाकी दिन सामान्य है अर्थात ना बहुत ज्यादा अच्छे हैं और ना बहुत ज्यादा बुरे। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गाय को हरा चारा खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है।

वृश्चिक राशि

इस सप्ताह भाग्य आपका साथ देगा। इस सप्ताह आपको अपने दुश्मनों को पराजित करने पर पूरा ध्यान देना चाहिए। आपके थोड़े से प्रयास से ही आपकी दुश्मन परास्त हो सकते हैं। इस सप्ताह आपका और आपके जीवनसाथी का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। आपको अपने संतान से मामूली मदद मिल सकती है। कचहरी के कार्यों में सावधान रहें। जरा सी असावधानी से भी कार्य खराब हो सकता है। इस सप्ताह आपके लिए 19, 20 और 21 तारीख फलदायक है। 15, 16 और 17 तारीख को कार्यों को करने के पहले आपको पूरी सावधानी बरतना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन भगवान शिव का दूध और जल से अभिषेक करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।

धनु राशि

यह सप्ताह आपके जीवनसाथी के लिए उत्तम है। उनकी मानसिक दशा अत्यंत अच्छी रहेगी। उनके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। आपका व्यापार बहुत अच्छा चलेगा। धन आने का सामान्य योग है। कचहरी के कार्यों में सावधानी बरते। आपको अपने संतान से सहायता मिल सकती है। छात्रों की पढ़ाई ठीक चलेगी। भाई बहनों के साथ संबंध खराब हो सकते हैं। इस सप्ताह आपके लिए 15, 16 और 17 तारीख की दोपहर तक का समय कार्यों को करने के लिए उपयुक्त है। 17 तारीख की दोपहर के बाद से लेकर 18 और 19 तारीख को आपको सचेत रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन कुत्ते को तंदूर की रोटी खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन सोमवार है।

मकर राशि

इस सप्ताह आपके सप्तम भाव में गजकेसरी योग बन रहा है जिसके कारण आपको प्रेम संबंधों में लाभ होगा। आपकी पारिवारिक स्थिति भी अच्छी रहेगी। जीवनसाथी से आपके संबंध बहुत अच्छे रहेंगे। व्यापार आपका ठीक चलेगा। अगर आप अविवाहित हैं तो विवाह के नए-नए प्रस्ताव आ सकते हैं। नए-नए प्रेम संबंध बन सकते हैं। पुराने प्रेम संबंध प्रगाढ़ हो सकते हैं। भाई बहनों के साथ संबंध सामान्य रहेंगे। आपके दुश्मन इस सप्ताह शांत रहेंगे और अगर आप ज्यादा प्रयास करेंगे तो वह समाप्त भी हो सकते हैं। आपको अपने क्षेत्र में इस सप्ताह प्रतिष्ठा मिल सकती है। इस सप्ताह आपके लिए 17 तारीख की दोपहर के बाद से लेकर 18 और 19 तारीख की दोपहर तक का समय कार्यों को करने के लिए उचित है। सप्ताह के बाकी दिनों में आपको सावधान रहकर अपने कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन कल उड़द की दाल का दान करें और शनिवार को शनि मंदिर में जाकर शनि देव का पूजन करें। सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है।

कुंभ राशि

इस सप्ताह आपका अपने भाई बहनों के साथ अच्छा संबंध रहेगा। यह सप्ताह आपके संतान के लिए भी उत्तम है। आपके व्यापार में भी वृद्धि होगी। धन आने का योग है। गलत और सही दोनों रास्तों से धन आएगा। इस सप्ताह आपको अपने शत्रुओं से थोड़ा सावधान रहना चाहिए। विशेष रूप से स्त्री शत्रुओं से। भाग्य से इस सप्ताह आपको विशेष लाभ नहीं मिल पाएगा। इस सप्ताह आपके लिए 19 तारीख की दोपहर के बाद से लेकर 20 और 21 तारीख लाभप्रद हैं। 17 तारीख की दोपहर से लेकर 18 और 19 तारीख की दोपहर तक का समय आपके लिए सचेत रहने का है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन काले कुत्ते को तंदूर की रोटी खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन शनिवार है।

मीन राशि

इस सप्ताह आपके पास धन आएगा। आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। आपका व्यापार ठीक रहेगा। आपके संतान को भी लाभ होगा। संतान से आपको अच्छा सहयोग प्राप्त हो सकता है। छात्रों की पढ़ाई उत्तम चलेगी और उनको विभिन्न प्रकार की परीक्षाओं में सफलता भी प्राप्त होगी। भाग्य साथ देगा। आपके कई कार्य भाग्य के सहारे हो सकते हैं। आपका स्वास्थ्य ठीक रहेगा मगर गरदन या कमर में दर्द की शिकायत हो सकती है। इस सप्ताह आपके लिए 15 16 और 17 तारीख प्रभावशाली है। 19, 20 और 21 तारीख को आपको सतर्क रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गायत्री मंत्र का जाप करें। सप्ताह का शुभ दिन मंगलवार है।

ध्यान दें कि यह सामान्य भविष्यवाणी है। अगर आप व्यक्तिगत और सटीक भविष्वाणी जानना चाहते हैं तो आपको मुझसे दूरभाष पर या व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाना चाहिए। मां शारदा से प्रार्थना है या आप सदैव स्वस्थ सुखी और संपन्न रहें। जय मां शारदा।

 राशि चिन्ह साभार – List Of Zodiac Signs In Marathi | बारा राशी नावे व चिन्हे (lovequotesking.com)

निवेदक:-

ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय

(प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ और वास्तु शास्त्री)

सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता, मध्यप्रदेश विद्युत् मंडल 

संपर्क – साकेत धाम कॉलोनी, मकरोनिया, सागर- 470004 मध्यप्रदेश 

मो – 8959594400

ईमेल – 

यूट्यूब चैनल >> आसरा ज्योतिष 

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – कथा कहानी ☆ लघुकथा – “राजनीति के कान” ☆ श्री कमलेश भारतीय ☆

श्री कमलेश भारतीय 

(जन्म – 17 जनवरी, 1952 ( होशियारपुर, पंजाब)  शिक्षा-  एम ए हिंदी , बी एड , प्रभाकर (स्वर्ण पदक)। प्रकाशन – अब तक ग्यारह पुस्तकें प्रकाशित । कथा संग्रह – 6 और लघुकथा संग्रह- 4 । यादों की धरोहर हिंदी के विशिष्ट रचनाकारों के इंटरव्यूज का संकलन। कथा संग्रह -एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मिला पुरस्कार । हरियाणा साहित्य अकादमी से श्रेष्ठ पत्रकारिता पुरस्कार। पंजाब भाषा विभाग से  कथा संग्रह-महक से ऊपर को वर्ष की सर्वोत्तम कथा कृति का पुरस्कार । हरियाणा ग्रंथ अकादमी के तीन वर्ष तक उपाध्यक्ष । दैनिक ट्रिब्यून से प्रिंसिपल रिपोर्टर के रूप में सेवानिवृत। सम्प्रति- स्वतंत्र लेखन व पत्रकारिता)

☆ लघुकथा – “राजनीति के कान” ☆ श्री कमलेश भारतीय ☆

– मंत्री जी, बड़ा कहर ढाया है ,,,आपने।

– किस मामले में भाई?

– अपने इलाके के एक मास्टर की ट्रांस्फर करके।

– अरे , वह मास्टर? वह तो विरोधी पार्टी के लिए भागदौड़,,,

– क्या कहते हैं हुजूर?

– उस पर यही इल्जाम है।

– ज़रा चल कर कार तक पहुंचने का कष्ट करेंगे?

– क्यों?

– अपनी आंखों से उस मास्टर को देख लीजिए। जो चल कर आप तक तो पहुंच नहीं पाया। बदकिस्मती से उसकी दोनों टांगें बेकार हैं। और भागदौड़ करना उसके बस की बात कहां? जो अपने लिए भागदौड़ नहीं कर सकता, वह किसी के विरोध में क्या भागदौड़ करेगा?

– अच्छा भाई। तुम तो जानते हो कि राजनीति के कान बहुत कच्चे होते हैं और आंखें तो होती ही नहीं। खैर। आपने कहा है तो मैं इस गलती को दुरुस्त करवा दूंगा।

खिसियाए हुए मंत्री जी ने कहा जरूर लेकिन आंखों में कहीं पछतावा नहीं था।

© श्री कमलेश भारतीय

पूर्व उपाध्यक्ष हरियाणा ग्रंथ अकादमी

संपर्क :   1034-बी, अर्बन एस्टेट-।।, हिसार-125005 (हरियाणा) मो. 94160-47075

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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